12/12/2025
#सावधान_यात्रा
ये तस्वीर, जिसमे ज़मीन पर कागज बिखरे पड़े हैँ, साल 2021 की है।
GJU, हिसार में Ph.D के दाखिलों में जो धांधली चल रही थी उसका पर्दाफास करने के लिए एक RTI लगाई गयी थी, जिसमे 10 साल में हुए Ph.D दाखिलों का वर्ग व विषयानुसार विवरण माँगा गया था।
विश्वविद्यालय ने के तहत मांगी गयी जानकारी आधी अधूरी दी, फिर भी हम लोगों ने मिल जुलकर इसकी जांच की और विश्वाविद्यालय में Ph.D दाखिलों में बहुत बड़ी धांधली चल रही है, इसका उदाहरण, विश्वाविद्यालय का यानि विभाग में सत्र 2018-19 में के आधार पर 40 के करीब दाखिले हुए थे लेकिन हैरानी की बात ये थी जब प्रोस्पेक्टेस में देखा तो सीट के कॉलम में का नाम तक नहीं था।
यहाँ समान अवसर के सिद्धांत उल्लंघन हो रहा था, जो अभ्यार्थी GJU, हिसार में शिक्षकों के चहेते थे उनको तो बिना प्रोस्पेक्टेस में दिखाए भी ये पता होता था कि दाखिले के लिए सीट है, लेकिन जो लोग किसी शिक्षक को जानते नहीं थे, या उनके पास कोई अन्य सिफारिश ना हो तो वो लोग उन लोगों को ये पता ही नहीं चलता था कि सीट खाली है नहीं? ये सभी वर्गों के अभ्यार्थियों के घातक था।
जितना यह के लिए घातक था उतना ही सामान्य वर्ग के अभ्यार्थियों के लिए था। क्यूंकि GJU से बाहर के योग्य उम्मीदवार को भी दाखिला नहीं मिलता था, दाखिला तो मिलना दूर वो तो दाखिले के लिए आवेदन भी नहीं कर सकता था।
जब Ph. D दाखिलों के एकाधिकार के खिलाफ लड़ाई शुरू हुई तो उस समय के राजयपाल भण्डारू दत्तात्रेय का विश्वाविद्यालय में कार्यक्रम था उनको ज्ञापन देने कि योजना बनाई। उस ज्ञापन में Ph. D दाखिले, छात्रवृति, विश्वविद्यायल में शिक्षण व गैरशिक्षण पदों पर रोस्टर अनुसार भर्ती व डॉ अम्बेडकर चेयर समेत कई अन्य विषय थे। लेकिन कार्यक्रम से कुछ ही समय पहले हमारे साथियों की गिरफ्तारी हुई, विरोध के बाद हमारे साथियों को छोड़ा गया। गिरफ्तारी के विरोध में धरना हुआ, तीसरे दीन विश्वविद्यालय प्रशासन ने घटना पर खेड़ा जताया व मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया।
लेकिन हमारी पर कोई कार्यवाही ना होते देख दिसंबर 2021 में फिर से अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया गया। Ph. D दाखिलों की में पारदर्शिता की मांग को मुख्य रखा गया। कई दौर की वार्ता के जब बात नहीं बनी तो हमने भूख हड़ताल शुरू कर दी और इसके दबाव में 6 दिसंबर 2021 को शाम को प्रशासन से वार्ता सफल रही और लिखित में विश्वविद्यालय स्तर की हमारी मांग मानी गयी और जो राज्यस्तरीय मांग थी उनको सरकार को भेजा गया।
धरने के माध्यम से हम लोग Ph. D दाखिलों की ऐसी नीति बदलवाने में कामयाब रहे जिससे पारदर्शिता, मेरिट और समान अवसर के सिद्धांत को अवहेलना हो रही थी। और लम्बे संघर्ष के बाद जब 2021-22 सत्र के प्रोस्पेक्टस देखकर दिल को जो सकून मिला उसको शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता।
नीति में बदलाव के बाद प्रोस्पेक्टस में NET-JRF की सीटें दर्शाई गयी जिससे सभी योग्य उम्मीदवारों को आवेदन का मौका मिला और मेरिट के आधार पर दखिले हुए। जिसमे सभी वर्गों के उम्मीदवार लाभार्थी रहे। इससे पहले शिक्षक पर निर्भर करता था कि वो किस उम्मीदवार को Ph. D करवाएगा।
विश्वाविद्यालय में शोधार्थियों में विविधता और आरक्षित वर्ग SC DSC OBC को न्यायोचित प्रतिनिधित्व मिला।
आज फिर से वही समय आ गया है जब हमें जरूरत है कि जितने भी SC, DSC व OBC वर्ग के छात्र संगठन बने हुए हैँ वो आरक्षित वर्ग के हितों के लिए काम करें। अन्यथा हमारे लिए कोई और दूसरा रास्ता नहीं हैँ।
इस लड़ाई में साथी मनोज अठवाल, Sanju Baba Dasfi CH Surender Panwar Amrit Singh Dasfi Lakshika Saroha मुख्य भूमिका और संगठन के अन्य साथियों ने खूब सहयोग किया।