17/01/2026
मजलिस के प्रदर्शन की अगर पिछले 2017 वाले इलेक्शन से तुलना की जाये तो एक बात सामने बिल्कुल साफ़ हो जाती है कि इस बार मजलिस ने लगभग हर जगह पिछली जीती हुयी सीटों के मुकाबले ज्यादा सीटें भी जीती हैं और बहुसंख्यक समुदाय के प्रत्याशियों को भी जीत मिली है मजलिस के टिकट पर खासतौर पर दलित समुदाय के प्रत्याशियों को..
मुंबई में 2 से बढ़कर 8 सीट हो गईं
ठाणे (मुंब्रा) में 2 से बढ़कर 5 सीट
मालेगाँव में 7 से बढ़कर 20
औरंगाबाद में 25 से बढ़कर 33
नागपुर में खाता खुला 6 सीटों से
नांदेड़ में पिछली बार एक सीट नहीं थी अब 15 हैं
अमरावती में 10 से बढ़कर 12 हो गई हैं
अहमदनगर में 2 सीटों के साथ खाता खुला
चंद्रपुर में 1 सीट के साथ खाता खुला
धूलिया में 4 से बढ़कर 10 सीट हो गईं
अकोला में 1 से बढ़कर 3 हो गईं
सोलापुर में एक सीट का नुकसान हुआ है जो पहले 9 थी अब 8 बची हैं..
मजलिस अपनी रफ्तार से बढ़ रही है,, सीटें भी जीत रही है, दूसरे समुदायों के वोट भी हासिल कर रही है और दूसरे समुदाय के लोग जीत कर भी आ रहे हैं...
इसके अलावा एक बात और बेहतर हुयी है कि समाजवादी पार्टी हर जगह अपनी सीटें हारी है पिछले इलेक्शन के मुकाबले,, ये जो समाजवादी पार्टी को वोट मिलता था उसमे 95% मुस्लिम समुदाय का ही वोट होता था,,
तो समाजवादी के कमजोर होने और कमजोर होकर महाराष्ट्र में खत्म होने का बड़ा फायदा मजलिस को ही मिलेगा..
समाजवादी पार्टी और मजलिस में एक बड़ा अन्तर यह है कि समाजवादी पार्टी के पास महाराष्ट्र में मुस्लिम वोटों के सिवा कोई दूसरा समुदाय नहीं था जबकि मजलिस को दलित समुदाय ने भी वोट किया है और उनके प्रत्याशी भी जीते हैं...
यानि कि जय मीम, जय भीम का नारा कुछ तो ज़मीन पर दिखाई दे रहा है...