17/11/2021
यहां माता कुंती ने की थी सूर्य देव की तपस्या
Kapal Mochan Teerath, Bilaspur, Yamunanagar तीर्थराज कपाल मोचन में पहुंचे काफी श्रद्धालु सूरजकुंड सरोवर के तट पर बनी दुदाधारी जी महाराज की समाध पर भी माथा टेकने एवं पूजा अर्चना करने जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां मांगी गई हर मन्नत पूर्ण होती है। इस पवित्र स्थान पर माता कुंती ने सूर्य देव की तपस्या की, जिसके कारण उन्हें पुत्र कर्ण की प्राप्ति हुई।
यह मान्यता है कि अकबर-ए-आजम के शासनकाल के समय तक इस स्थान पर आबादी नहीं थी, केवल जंगल ही था क्योंकि उस वक्त जनसंख्या कम थी। तीर्थ के समीप स्थित एक टीले पर झाडी के नीचे दूधाधारी बाबा केश्वदास जी तपस्या करते थे।
एक दिन अकबर साम्राज्य के परगना सढौरा के काजी फिमूदीन जोकि नि:संतान एवं वृद्घ थे, शिकार खेलते हुए पानी की तलाश में यहां आए तो उन्होंने तपस्यालीन महात्मा केशवदास तक पहुंचने का प्रयत्न किया, परन्तु जैसे ही वे उसके समीप पहुंचे तो अंधे हो गए लेकिन जब महात्मा जी ने तपस्या उपरांत आंखे खोली तो कहा कि तुम उनकी समाधि की परिधि के अन्दर आ गए हो, इसलिए कुछ पीछे हट कर अपनी बात कहो तब काजी जैसे ही पीछे हटे तो उन्हे पुन: दिखाई देने लगा और उन्होंने स्वयं को नि:संतान होने की बात कही व संतान की कामना की।
इस पर केशवदास जी ने उन्हे एक वर्ष बाद अपनी बेगम सहित आने को कहा। इसी अवधि में काजी के घर लडक़ा पैदा हुआ और एक वर्ष बाद काजी ने सपरिवार यहां आकर केशवदास जी को जमीन देकर भगवान श्रीराम जी मंदिर बनवाया, जिसके ऊपर रोजाना चिराग जलाया जाता था। काजी हर सांय चिराग देखकर ही खाना खाते थे। उन्हीं के वंशज के रूप मे सढौरा में आज भी काजी महौल्ला आबाद है। इस कारण हिन्दू व सिक्खों के अलावा मुस्लमान भी कपाल मोचन तीर्थ एवं मेला के प्रति श्रद्घा रखते है।
सूरजकुंड सरोवर के नजदीक हर वर्ष कपाल मोचन मेला के अवसर पर नागे बाबा धूना लगाकर तप करते हैं। इस मेले में भी दर्जनों बाबा धूने पर तप कर रहे हैं।