Sri Sevalal Granthalaya ಶ್ರೀಸೇವಾಲಾಲ ಗ್ರಂಥಾಲಯ

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Sri Sevalal Granthalaya ಶ್ರೀಸೇವಾಲಾಲ ಗ್ರಂಥಾಲಯ att. Shampurhalli tanda
tq, Chittapur district, Kalburgi
Karnataka
08976305533
09448732367

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13/08/2020

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26/07/2017

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दिनांक 2/07/2017 रोजी राष्ट्रीय बंजारा परिषद तर्फे लोधीवली येथे महाराष्ट्राचे माजी मुख्य मंत्री कै वसंतरावजी नाईक साहेब यांच्या १०४ वि जयंती निमित्य, मा श्री...

http://wp.me/p5uEWr-20eहोली मनाओ पर पानी बचाओहोली भारत में मनाया जानेवाले मह्त्वपूर्ण त्योहारों में से एक हैं। इसे रंगो ...
13/03/2017

http://wp.me/p5uEWr-20e
होली मनाओ पर पानी बचाओ

होली भारत में मनाया जानेवाले मह्त्वपूर्ण त्योहारों में से एक हैं। इसे रंगो के त्यौहार के रूप में जाना जाता हैं।इस दिन सभी लोग आपसी बैर भूलाकर ,आपस में गले मिलकर, गुलाल लगाकर बड़े जोर शोर से इस त्यौहार को मानाने की परम्परा रही हैं।होली वास्तव में आपसी भाईचारा और शांति का पैगाम देती हैं। इस दिन सभी अपने चेहरों पर गुलाल लगा लेते हैं। इसका अर्थ होता है हम सब एक सामान हैं। किसीकी कोई अलग पहचान नहीं है। सब एक सामान दिखते हैं ।क्या बड़े क्या बूढ़े सब एक ही रंग में दिखाई देते हैं।आपसी सौहार्द को बनाये रखने के लिए हमारे जीवन में त्योहारों का होना बहुत जरुरी हैं।

जहाँ चारो तरफ रंगो का त्यौहार मनाया जा रहा हैं वही महाराष्ट्र के कई भागो में तो पीने तक का पानी उपलब्ध नहीं हैं।स्कूल के बच्चे पानी के चक्कर में अपनी परीक्षा तक नहीं दे पाते।घर की महिलाएं 5 से 6 घंटे सिर्फ पानी भरने का ही काम करती हैं।पीने का पानी लाने के लिए महिलाओं को 3 से 4 किलोमीटर की दुरी भरी दोपहरी में नंघे पैरो से तय करनी पड़ती हैं।दूर दराज़ इलाको में अमूमन यही हाल हैं।कही-कही तो कुएँ सूख गए हैं। 600 फ़ीट नीचे भी पानी उपलब्ध नहीं हैं।जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। लोग जमीन में गड्डे खोद कर उसमे से पानी निकाल कर उसे कपडे से छान कर पानी पीते हैं। सोलापूर में तो 30 -40 दिनों में एक बार पानी आता हैं। और कही तो 90 दिनों में एक बार पानी आता हैं।फिर भी लोग बिना शिकायत के अपना जीवन-यापन कर रहे हैं।उन्हें अपने हालात से खुद ही लड़ना हैं।

ऐसे में मानवीय आधार पर क्या हमें पानी को व्यर्थ होने देना चाहिए? नहीं हमें जितना हो सके पानी के अनावश्यक उपयोग से परहेज करना चाहिए।हम खुशनसीब हैं की हम ऐसे इलाको में रहते हैं जहा 24 घंटे पानी मिलता हैं। इसका अर्थ ये कतई नहीं हैं की हर जगह इसी प्रकार की सुविधा मिलती हैं।लोग व्यर्थ में ही पानी का दुरूपयोग करते हैं।राज्य सरकारों ने भी तरह-तरह के कार्यक्रमों से लोगो में जागरूकता लाने का प्रयास काफी हद तक किया हैं लेकिन वह कारगर सिद्ध होता नहीं दिख रहा है।

आज के आधुनिक परम्परा के अनुसार जब तक होली में लाखों लीटर पानी बर्बाद न हो जाए तक शुकुन ही कहाँ मिलता हैं।जहाँ देखो वही लोग रंगो की पिचकारी भरे एक दूसरे के ऊपर रंग डालते पानी व्यर्थ करते नजर आते हैं। आजकल तो होली खेलने का तरीका ही बदल गया हैं।कोई आयल पेंट लगता हैं तो कोई अंडे फोड़कर होली मनाता हैं।कही तो नालो में डुबो कर इस त्यौहार को मनाया जाता हैं। ऐसे में कुछ बोलो तो कहते हैं..भाई एक दिन में कितना पानी बचा लोगे?हमारे त्यौहारों में ही आपको कमियां नजर आती है।बड़े आये पानी बचानेवाले। और कुछ नहीं तो आपको धर्म का दुश्मन तक बता देंगे।और धार्मिक भावनाएं आहत करने का इल्जाम सर मढ़ देंगे इसी तरह की सोच से आज ये हालात हो गए हैं की हमें पीना का पानी भी नहीं मिल पा रहा है।

आप को होली खेलने से कोई नहीं मना कर रहा ।आप खेले पर किसी की जरूरतों को ध्यान में रख कर।एक तरफ जहा एक इंसान एक बूँद पानी न मिलने के कारण अपने प्राण त्याग देता हैं वही दूसरी तरफ बड़े ऐशो आराम से पानी की बर्बादी कर रहा हैं।
पानी की बर्बादी कर मनुष्य प्रकृति के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ कर रहा हैं। जिसका नुक़सान समस्त मनावजाति को होनेवाला है।

-लेखक. मुंबई विश्वविद्यालय के गरवारे संस्थान द्वारा संचालित पत्रकारिता पाठ्यक्रम के विद्यार्थी हैं

सौजन्य: रविराज एस. पवार
Chief editor
www.GoarBanjara.com
Online banjara news portl.

        होली भारत में मनाया जानेवाले मह्त्वपूर्ण त्योहारों में से एक हैं। इसे रंगो के त्यौहार के रूप में जाना जाता हैं।इस दिन सभी लोग आपसी बैर भूलाकर ,आपस में गले मिलकर, गुलाल लगाकर बड़े जोर शोर से इस त्यौहार को मानाने की परम्परा रही हैं।होली वास्तव में आपसी भाईचारा और शांति का पैगाम देती हैं। इस दिन...

09/07/2016

जे सेवालाल.
*------:-चालू डोकरा-:------*
---------
गोरमाटी वातेम येक नानकीस साकी से गणगेतेन मारोजा छ भा दी मीनेट वेळ काडताणी जरूर वाचीवो.
कवी. *आमगोत रवी सूभीया पवार*
*08976305533*

येक वेळेर वात छ, जना डोकरा मोठीयार वेतो, डोकरा घरेम सूतोतो, अन वोवडी रानेम वोर खेतेसामून(वावर) तीन माणस दूसर गामेर जारेते. दोपेरेरो वेळ वेतो, आजू बाजूम भी कोयी कोनि वेते, अब तीनी वीचार कीदे खेतेम *चणा* लागरेच, आजू बाजूम भी कोयी छेनी, अनं अपणेन भूख भी लागरीच चालो *चणा* खामा, ये तीन मानसेम येक *बामण* वेतो, येक *पटलीया* वेतो, येक *नावी* वेतो, घणे हूशारेती चणा वकडन वतज बेस ताणी खायेन लागे.

डोकरा घरेम आरामेती सूतोवेरो तो, डोकरी भांडताणी डोकरान वूटाड नाकी, जो जरा खेते सामू देकन आजो बळद-गावडी धरसजाये खेतेम, डोकरा मूंडो धोलेन हाथेम येक लकडी लेलेताणी खेते सामू जायेन लागो, दूरेती डोकरान वोर खेतेम जो तीन माणस वेते वो दीखागे, चणा तो कम खारेते पन खेतेर लूकसान जादा कररेते, डोकरान तो रीस घण आयी, पन डोकरा चारी वडी देकोतो दूरे दूरे लगू वोन कोयीज कोनी दीखाये, अब डोकरा वीचार कीदो जर म सूदो जाताणी वूनून गाळी दीनो कतो वोतो तीन छ म वेगो येकलो ये तो मन मारनाकीये, तो पच डोकरा वीचार कीदो देको कसो?

डोकरा गो वूनूर कन अऩ येक माटीन केरोच भीया तू कूण भा? तो वू माटी को म येक बामण छू भा, तो डोकरा घणो खूस हूयो, माराज तूतो मार खेतेन पवीतर करनाको भा, पन माराज तू मन केवतो म तार घरेन येक बंडी(बैलगाडी) भरताणी चणा लीयातो तू अतरा कसट काकीदो, खो बापू खो तारोज खेत समजन खो. वोर वच डोकरा दूसरे माटीन पूचो, भीया तू कूण भा? तो वू को म वो तांडेरो पटलीया छू मार कन सारी तांडेवाळ पीसा-टका लच, अतरा सामळन डोकरा केरोच अरे पटलीया तूतो हमार सरीक सेतकरीरो दाता छी, मार कतरा मोटो नसीब छ भा पटलीया सोता मार खेतेम आतानी चणा खारोच, खो भा खो जर अजी चावतो घर भी लेजो तार छपचापर खाये, पच डोकरा वो तीसरे माटीकन जावच भीया तू कूण छी भा? तो वू माटी को म नावी(नाई) छू.

अब डोकरा बोलो... लोकूर लटा समरेवाळो नावी तार कू कायी हीमत हूयी मार खेतेम तार पगमेलेर, यी बामण तो चणा वकडो नसीबेर वात छ भा, अऩ वूतो हमार हर येक कामेम भगवाने सरको छ, हमार दख:सकेम हमेन आचो वाट वताळतो रच अऩ यी पटलीया तो गोर बरीबेरो सरकार छ, हमारो राजा छ भा वू, वू भी गोर गरीबेर दख:सकेम हमेन काम आवच, पन तू नावी सेर लटा समरेवाळो हनू केतोज वो नावीर लटा पकड लेन मारेन लालगो, नावीन डोकरा माररो जेन देखताणी बामण,पटलाया दोयी खूस वरेते, नावीन मार मारन डोकरा वोन पाडन खेतेर भार फेकनाको. अब डोकरा वो पटलीया सामू आयो कायी भा नामेरो पटलीया यी खेत कायी तार बाप मन दीनोच कायी? जर कोयी गोर गरीब अडचनेम तार कन चार पीसा कायी वधार लेलदे कतो तू तो वूनूरो मालक वेजायेची, मन येकाद रपीया दीनोची क तार दादा कमान मेलगोच क यी खेत, तार याडी बाप आताण ये खेतेम काम करच क? तार हीमत कू हूयी मार खेतेम आयेर बोल साळो, यी बामण तो सेरो भगवान छ, बोल तू मार खेतेम *चणा* कू कायी वकडो, वोन भी डोकरा मारेन लागगो पटलीयान डोकरा माररो जकोन देखतानी नावी, बामण घणे खूस वेगे, नावी मने मनेम बोलरो तो, साळो पटलीया मन डोकरा माररो जेन देखतानी घणो हसरोतो अब खो भेटा, डोकरा वो पटलीयान मार मारन लालो चटक करनाकोतो, वोवडी ती बामण केरोतो साळेन अजी मार सोतान घणो मोटो पटलीया छू करतोरच वू, तो डोकरा वोन अतरा मारो की वोम वूटन हूबरेर तागत कोनी र, अन. वोर भी टांग पकडन नावीर बाजूम फेकनाको.

*पडोपडो पटलीया वीचार कररोतो* आब तांडेम जाताणी यी बामण हमार दोयीर मजीयाक वरडच, तांडेवाळेर मूंडाग अब कू कायी मूंडो वताळा भा, दोयी भगवातेती हाथ जोडन वींती करेराग ये......भागवान येन भी मार खरायेस डोकरा हाथेती, डोकरा दीयेन मारदेर पच वो बामणे सामू जायेलागो, बामण माहाज अब थोडा तारो भी पूजा करदू चू भा, हम गोरमाटी रात दन खेतेम वेला भावटेती काम करतानी हमार पेट भराचा, अन तम चोटा बामण लोक, नानकीस नानकीस वातेन लबाडी मंतर भरताणी समाजेन लूटन खागे, अब खेतम भी आयेन हीमत कू हूयी तार, वो बामणेन भी मार मारन लालो चटक करनाको.

*म यी साकी लकेर कारण कायी भा कतो*...जर ये तीनी येक जूट रेवतो कायी यींदून वू येकलो डोकरार मारेर हमीत वेवाळ र क???? कोनी. ये तीनी सोबत कोनी रे जेर कारण येक दूसरेर मूंडाग डोकराती मारखाते र.
*तो से गणगोतेन म हाथ जोडन वींती करूचू, येक दूसरेर टीका टीपनी मत करा, यी संघ, वू संघ करते भेदभाव मत करा, जोभी संघेछ वो वूनूर वूनूर हसाबेती काम कररीच, जे भायीन जेर सोबत जूडन रेरछ वूनून रेदा, केनी पकडन होटो मत खेचा, केनी नानकीया केनी मोटो मत समजा,*
असो कोनसी भी वेळ आवगो तो से संघे येक जाग आमा येक मतरेती आचो वाट काडा, सोतार नामेर

प्रतिनीधी...रविराज एस. पवार 08976305533मगांळो मगांळो,ये चार परकारेर रछ. येक आगीया मगांळो,दूसरो लालगादींया,तीसरो साधा,चवत...
23/05/2016

प्रतिनीधी...
रविराज एस. पवार
08976305533

मगांळो मगांळो,ये चार परकारेर रछ. येक आगीया मगांळो,दूसरो लालगादींया,तीसरो साधा,चवतो खोतीया.ये चारी मगांळेरी माकी चार परकारेर रछ.आगीयारी माकी मोठी रछ वदूंर खील पण मोठी रछ.जना आगीया मगांळेरी माकी काटछ आन वोरी खील डीलेम भंजाडनाकछ वोम गरम रछ जेर पण रछ.लालगांदीया मगांळेर माकी आगीयाती बारकी रछ ये मगांळेन झूडेवाळो मणीकीया घणो बादूर चावछ,कारण वोरी माकी भारी काटछ.काटकाटन लालोचटकछ करनाकछ आन वोरी खीले पण डीलेन भजंछ.तीसरो मगांळो साधो साधा रछ येन कोयी झूडन लीयावछ.बायीमणकीया भी झूडन लीयावछ येरी माकी काटेनी नीसताछ वूंयी वूंयी करू करछ.चवतो मगांळो कतो खोतीया,येरी माकी घणीछ हलकी रछ,येरी माकी काटेनी फकस डीलेन चीटकछ आन मातेरे लटाम घूसछ. आगीया मगांळो खासकरन तो कवारे झाडेपर नी तो आंबावूर झाडेपर बेसछ वजीक वडेर झाडेपर ये झाड वूचे रछ आन वो सीडींकन जान बेटरछ.लालगांधीया मगांळो कूणसेही झाडेपर रछ.साधा मगांळो खास करन काटारे बोछकाम,काटारे झाडेपर बेसछ.बंबोळी खेर धबेडी,चीलाटी,बोर ये झाडेपर बेसछ.खोतीया यी जेदा करन लीबेंर झाडेर बूधांम जत जागा मळी वत घूसजावछ,सेभंळेर खोडेमपण घूसछ.जत खोड दकाय वत वू घूसछ.ये मगांळेवूर से आभीयास गोरमाटीकन वेतो.खासकरन येखांदी मणकीया सो टक्का वेडों (पागल) वेगो वीय वोन जे झाडेपर पाछ दस मघांणो बेटेछ वो झाडेहेट रोज लेजान बसारेतो वोरे गूंयी गूंयी,वूंयी वूंयी आवाजेती वू वेंडो सो टक्का आछो वेजावछ हानू तमारो वीग्यान कछ म कोनी केरो.आन रामदेवबाबार से डाकटर कछ भा. गोरमाटी वेरी आन वेरापरती साजंपरभाती पाणी लेयेन सेर सेछ जातेते,वेरीर आजूबाजू दीचारसे माकी पाणी पीयेसारू वूंयी,गूंयी करती फरू करछ पण वो काटेनी.ये परकारेरयेती रोजरोज वू आवाज सांभळेम आवतोतो करन गोरमाटीम कोयी वेडें वेतेतेछ कोनी कछ.मगांळेर तो आज बाटली तमेन मेडीकलेपर मळजाय लाग,तमेन कायी करेर छ ये वातेती भा.बाटलीमायीर मगांळेती ब्रेन घणो आछो रछ कछ.पण सोता मघांळो झूडन खायेपर कतराक न तरी आछो रेतो वीय भा.मगांळो खातूवणा हसेन जमेन आन बोलेनपण जमेनी.जर ठसको लागो तो मणकीया मर बी सकछ,करन सावधाऩती खाणू भा.मगांळो जादा खालदे आपलपोट्यावाघूं तो हागंणी लागजावछ,जेदाखान पछ चरकणू लागछ,छेरणू लागछ,हानू पेनार लोक कछ.कयीक जाग सूको मगांळो रछ.वोर थेरीमण समजरी कोनी छ.कयीकवणा मगांळो घरेर आडीयापर बेसजावछ,कयीकवना घेरम बेसजावछ,कयाकवणा माडंवाम आन पेसजावछ येन गोरमाटी सकंट समजछ,लगेछ वोन दबेटनाकछ,आन सावधानीती वाघछ.मगांळेर जेर घर रछ वोन आपणेमा मांढी कछ, माडींपण खावछ.मगांळो चूछचाछन खान हेट फेकानी वोन मेणं कछ,डोकरीदादी डबीम भरन मेलदछ.ये से वातेरो गोरमाटीकन थेरम छ आन ये वातेपर वो पेनाम संसोधन करमेलेछ.आपनेन बेसतानी वछार करन भार काडनू पडीये.वूंदाळेम तो मगांळो खूपछ खायेन मळछ आन मीटोदरक रछ येदाडेम वू.चादंळी रातेम मगांळो ठालो रछ कछ,का रछ,आन गोरमाटीन कूणकेनाको मन मालम छेछा भा,वात खर छ.म येकवना चादंळीम मार बापेन झूडेन लगाडोतो,ढेरमार बाप मन केरो ठालोछ रछ रे वेढों,म रेयेन लगगो,मार बाप झूडो पणन ठीकछ वू ठालो वेतो.म मार बापेन केलागो,तोन कूण केनाको ठालो भरो,माराप हसेन लगगो मोठो व केलाग पछ कळीये तोन आसी वातेरो गोरमाटीकन से संसोधन छ.ये वात छोडन आपण पीयछ.डी,डी.लीट,यलयल.डी,करते बेटेछा.कायी नानकीया हूसीयार लोक छा क आपण.

आरजूनीया सीतीया भूकीया.
9623203419
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मगांळो,ये चार परकारेर रछ. येक आगीया मगांळो,दूसरो लालगादींया,तीसरो साधा,चवतो खोतीया. Raviraj Pawar | 23 May, 2016 | Bharat Banjara Bhakti Sevamala Samiti, News | No Comments Share this on WhatsAppप्रतिनीधी… रविराज एस. पवार 08976305533 मगांळो मगांळो,ये चार परकारेर रछ. येक आगीया मगांळो,दूसरो लालगादींया...

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11/05/2016

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बंजारा समाज से UPSC के परीक्षा में उत्तीर्ण हुए विद्यार्थियों का हार्दिक अभिनन्दन Govind Rathod | 11 May, 2016 | Goar Banjara, Latest News, RajBanjara, whatsapp | No Comments Share this on WhatsApp बंजारा समाज से UPSC के परीक्षा में उत्तीर्ण हुए विद्यार्थियों का हार्दिक अभिनन्दन बी. संतोष नायक, क्र....

09/05/2016
08/04/2016

Jay sevalal

Bharat Banjara Bhakti Sevamala Samiti wish you & your family, best wishes for " World Banjara Day" 8th April " .Dear friends in 1981 world Gypsy , Roma Banjara conference held in Germany. Whole world's Roma Gypsy , Banjara participated in this conference. For rights ,peace & unity. Late Ramsingji Bhanavat & Late Ranjitsing Naik were participated as a Indian delegates. Whole world conference announce , to celebrate world Banjara Day , on 8th April every day unanimously. BBBSS wish you good luck on this occasion : »

Goar. Raviraj S. Pawar
B.B.B.S.S
(Trustee)
08976305533

Best wishes for " Bharat banjara bhakti sevamala samiti

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23/03/2016

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होळीर व सवार 24/03/2016 ती अपणो नवे सालेर भी तमून सेन हार्दिक शुभेच्छा. Raviraj S. Pawar Raviraj Pawar | 23 March, 2016 | Banjara, Bharat Banjara Bhakti Sevamala Samiti, Gor Banjara Sanghrsh Samiti, News, whatsapp | No Comments Share this on WhatsAppजय सेवालाल —————————- राम रमाह होळी.. लचमण काढो दा…

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01/03/2016

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15/4/2016 रामनवमी ये दन उमरी ,पोहरागड यत लोकाअर्पण वेवालो छ. Posted in Banjara by Raviraj Pawar Share this on WhatsAppप्रतिनीधी…. रविराज एस. पवार 08976305533 जय गोर, जय सेवालाल, जय हमुलाल.     आपणेन कलायेन आनंद वेरोच की गोर ” गोर बंजारा समाजेर पहीलो  धर्मपीठ”15/4/2016 रामनवमी ये दन उमरी ,पोहरागड यत…

भारत की सबसे सभ्य औरप्राचीन संस्कृती सिंधुसंस्कृती को माना गया है। इसीसंस्कृती से जुड़ी हुई गोर-बंजारा संस्कृती है और इस...
21/02/2016

भारत की सबसे सभ्य और
प्राचीन संस्कृती सिंधु
संस्कृती को माना गया है। इसी
संस्कृती से जुड़ी हुई गोर-
बंजारा संस्कृती है और इस गोर बंजारा
समाज का वास्तव पुरी दुनियाभर में है और
उन्हें अलग अलग प्रांत में अलग अलग नाम से जाना
जाता है। जैसे महाराष्ट्र में बंजारा , कर्नाटक में
लमाणी , आंध्र में लंबाडा पंजाब में
बाजीगर , उत्तर प्रदेश में नायक समाज और
बाहरी दुनिया में राणी नाम से
जाने जाते है। इस समाज के इ.स .पुर्व काल में बौद्ध
और महावीर के भी पहले
पीठागौर नाम के गौरधर्म के संस्थापक हुए
है। इसके बाद ग्यारवी शताब्दी
में दागुरु नामके द्वितीय धर्मगुरु होके गये
है। द्वितीय धर्मगुरु ने शिक्षा का महत्व
और मंत्र और समाज को दिया। वो मंत्र
गोरबोली में शिकच शिकावच शिके राज धडावच,
शिके जेरी साजपोळी ,
घीयानपोळी , इसका मतलब जो
समाज शिक्षा प्राप्त करके अपने समाज को
शिक्षीत करता है। वहीं
समाज राज वैभव प्राप्त कर सकता है इसका उदा.
पीठागौरने चंद्रगुप्त मौर्य , हर्षवर्धन जैसे
महान विराट राजा को जन्म दिया। उसी तरह
दागुरु के विचारों ने आला उदल , राजा गोपीचंद
जैसे महान योद्धा वो को निर्मीत किया।
इसी 12 वीं
शताब्दी से लेकर 17 वी
शताब्दी तक गौर बंजारा समान में बड़े बड़े
योद्धा होके गये। जैसे महाराणा प्रताप के
सेनापती जयमल फंतीहा और
राजा रतनसिंग के सर सेनापती और
राणी रुपमती के सगे भाई गोर
बंजारा गौरा बादल। 16 वी और 17
वी शताब्दी के गौर बंजारा समाज
के महान व्यापारी, उत्तर में
लकीशों बणजारा और दक्षिण में
जंगी, भंगी
( भुकीया ) और मध्यभारत के भगवानदारस
वडतीया थे। ये सभी
व्यापारी भारत के बड़े राजा -महाराजाओं को
रसद ( अनाज ) पहुंचाने का काम करते थे। लेकिन आम
जनता की फिकर इस गौर बंजारा समाज के
संत सेवाला महाराज को थी , इसलिए उन्होंने
आम जनता की सेवा और भलाई के लिए
अपने विचारों का संघटन निर्माण किया और उनका नेतृत्व
भी किया , उसी महान सतगुरु ,
समाजसुधारक , क्रांतीकारी ,
अर्थतज्ञ , आयुर्वेदाचारी और बहुजनों के
( कोर -गोर) के धर्मगुरु संत सेवालाल का जन्म 15
फरवरी 1739 को आंध्रप्रदेश के अनंतपुर
जिले के गुथ्थी तालुकास्थित गोलाल
डोडी गांव में हुआ। अभी वो
गांव सेवागड के नाम से जाना जाता है।
भौगोलीक और ऐतिहासिक
जानकारी होने के कारण गोर बंजारा समाज का
वास्तव्य प्रदेश की सीमाओं पे
ज्यादातर होता था इस स्थिथीयों का फायदा
उन्हें व्यापार में मिलता था और संघटन की
दृष्टी से भी लाभदायक था
इसी बात से उनके दुरदृष्टीका
अंदाज होता है।
सेवालाल के पिताजी रामजी नायक
के सुपुत्र भिमा नायक बहुत बड़े व्यापारी
थे। उन्हें लगभग भारतीय
सभी भाषाओं का ज्ञान था।
उनकी कुल संपत्ती में 4000
से 5000 तक गाय और बैलों का समावेश था। जिसका
उपयोग अनाज की यातायात के लिए किया जाता
था और वो 52 तांडों के ( गांव ) के नायक थे। उन्हें
नायकडा कहा जाता था ( 1 गांव का नायक और 52 गांव के
नायकडा ) एक गांव (तांडे की)
की आबादी लगभग 500 के
आसपास होती थी। हर तांडे
के लिये एक पुरुष और एक स्त्री गोर धर्म
प्रचारक के रुप में काम करते थे , उन्हें बावन्न (52 )
भेरु (पुरुष ) और 64 जोगंणी
( स्त्री ) कहते थे। इन 52 भेरु और 64
जोगणी का एक संघ होता था। और ये मुख्य
नायकडा के अंतर्गत कायम करते थे।
इसीलिए संत सेवालाल के दादाजी
को रामसंघ नायक कहते थे। (52 तांडो का संघप्रमुख )
भिमा नायक भी 52 तांडों के संघप्रमुख थे।
ऐतिहासिक दस्तावेज से पता चला है की,
भिमा नायक ने अंग्रेजों के साथ मुल्य 2 लाख रु . का
व्यापारी करार किया था। (अनाज पहुचाने का
करार ) इस बात से साफ पता चलाता है की ,
सेवालाल का जन्म वैभव सपन्न घर में हुआ था। इसके
अलावा उनके जन्म को लेकर काफी
सारी मिथ्या कहानियाँ सुनने में
आती है। सेवालाल की माँ का
नाम धरमणी था जो कि जयराम
बड़तीया (सुवर्ण कप्पा , कर्नाटक )
की सुपुत्री थी।
भिमा नायक के विवाह के उपरांत लगभग 12 साल तक
उन्हें कोई संतान नहीं थी बाद
में मरीया माँ के आराधना के बाद संत सेवालाल
का जन्म हुआ ऐसी अस्था है।
संघ के पारंपारिक निती के नुसार स्वरक्षा
और अनाज की रक्षा के लिए यौद्धाओं
की निर्मीती
की जाती थी।
उसी को ध्यान में रखते हुए सेवालाल ने 7
संघटनायकों का एक संघटन बनाया जिसमें खुद सेवालाल ,
उनके तीन भाई, हापा बदु , पुरा और
धर्मी , ढाका , रामसंग साथ भीया
थे। इसी संघटन को बाद में 6 संघ नायकों ने
अपनाया। इस तरह 13 लोगों का एक महासंघ बना? जो
700 तांडो का नेतृत्व करता था जिसमें मध्यभारत,
दक्षिणभारत का समावेश था। मध्यभारत के
व्यापारी भगवानदारस वडतीया
कुलसंपत्ती 2 लाख बैल ) और दक्षिभारत
के व्यापारी जंगी,
भंगी भुकीया
( कुलसंपत्ती 2 लाख बैल ) सेवालाल के संघ
में समाविष्ट हुए। 17 वी
शताब्दी की
राजकीय स्थिती के अनुसार
हम यह कह सकते है , की,
अंग्रेजी सत्ता का प्रभाव और ताकत दिन ब
दिन बढ़ता जा रहा था और भारतीय राजाओं
की व्यवस्था कमजोर होती जा
रही थी। अंग्रेजी
हुकूमत का गोर बंजारा व्यापारी पर राजाओं को
रसद पहुंचाने के खिलाफ दबाव बढ़ते जा रहा था। और
अंग्रेज प्रभावित इलाकों में गोर बंजारा
व्यापारीयों से कर वसुली का
फर्माण निकाले जा रहे थे जो की, गोर बंजारा
के व्यापारी नियमों के खिलाफ था।इस कर
वसुली के खिलाफ प्रस्ताव लेकर सेवालाल
अपने सभी संघ नायकों के साथ निजाम से
मिलने गये। अंग्रेजी हुकूमत के डर से
निजाम ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया इसके मद्देनजर
सेवालाल ने निजाम के विरुद्ध युद्ध का ऐलान किया। फिर
( बंजारा हिल ) हैद्राबाद में युद्ध हुआ और
परिणामस्वरुप निजाम ने सेवालाल की
सभी शर्ते मंजुर की और भारत
के अन्य राज्यों के करप्रणाली के लिए
दिल्ली के बादशाह गुलाम खान को मिलने
की सलाह दी। सेवालाल ने
निजाम की सलाह मान ली और
निजाम की ओर से दिये हुए सम्मान को
स्वीकार किया। सम्मान के तौर पर निजाम ने
ताम्रपत्र , तलवार और भेटवस्तू दी।
पोहरागढ मंदिर (महाराष्ट्र राज्य ) में आज
भी ये भेटवस्तुयाँ मौजूद है।
दिल्ली के बादशाह गुलाम खान ने इस
प्रस्ताव को नामंजुर किया , परिणाम स्वरुप सेवालाल ने
युद्ध का ऐलान कीया, गुलाम खान के
25000 सैनिकों का मुकाबला सेवालाल के 900 यौद्धाओं
ने किया। गुलाम खान की भारी
हार हुई इतिहासकारों ने इस युद्ध का जिक्र
कभी नहीं किया। गुलाम खान ने
करप्रणाली को माफ करने को मंजुर किया।
व्यापार दृष्टीकोन से सेवालाल
की ये बहुत बड़ी राजनैतिक
जीत थी। इस जीत
के चलते सेवालाल का नाम पुरे भारत वर्ष में प्रसिद्ध
हुआ। लाहोर के गौरबंजारा (ट्रेडर्स ) ने सेवालाल को
सम्मानित किया। जयपुर (राजस्थान ) के बंजारा
व्यापारी और बहुजन लोगों की
पुकार पर सेवालाल ने भुमिया नामक दहशतग्रस्त का
शिरच्छेद किया और राजस्थानवासियों को भुमिया से
मुक्ती दिलाई। आज भी
इसी निशानी के तौरपर जयपुर में
सवाई मानसिंग हॉस्पीटल में सेवालाल का
मंदीर है। दिल्लीस्थित रायसिना
हिल लकीशों बंजारा ने सेवालाल के स्वागत में
बनाई हुई छत्री नेहरु प्लॅनिटोरियम , नई
दिल्ली में मौजूद है। इसी
तरह मुंबई के पास सेवानामक गांव में जहापर
अभी जवाहरलाल नेहरु पोर्ट ट्रस्ट है
वहां पर 17 वीं शताब्दी में
सेवालाल पोर्ट हुआ करता था। वैसे ही
धरमतर ( सेवालाल के सहयोगी ) नाम का
पोर्ट रायगड जिल्हे में पेण के पास मौजुद है।
उसी तरह मुंबई स्थित भाऊचा धक्का ना
होते हुए वो सेवाभाया का धक्का है। इस जगह पर
पोर्तुगीज का जहाज फस गया था उसे
सेवालाल ने निकाला, फलस्वरुप उन्हें मोतीयों
की माला (इटालियन पर्ल्स) दिया गया,
इसी वजह से सेवालाल
मोतीवाळो के नाम से भी जाने जाते
है। रायगड जिल्हे में पेण के पास गागोदे नामक गांव में
सेवालाल का व्यापारी केंद्र था वहां पर आज
भी उनके नाम का मंदीर मौजूद
है। सेवालाल बहुत बड़े व्यापारी, यौद्धा ,
संगटक , अर्थतज्ञ तो थे ही लेकिन उसके
साथ वे बहुत बड़े समाजसुधारक थे। सेवालाल
की ताकत और ग्यान का पता
इसी बात से लगाया जा सकता है कि जो
भविष्यवाणीयां सेवालालने भारत
की सामाजिक और आर्थिक और नैसर्गित
स्थिती को लेकर कहीं
थी वो सब बाते आज 250 साल बाद सच
हो रही है।
“बंजारा समाज ने कभी शिख्श्त नही मानी” - http://m.goarbanjara.com/banjara-semaj-ne-kabhi-shikh-nahi-maani/?utm_source=WhatsApp&utm_medium=IM&utm_campaign=share button

“बंजारा समाज ने कभी शिख्श्त नही मानी” Posted in Banjara Community by Kailash Rathod Share this on WhatsAppभारत की सबसे सभ्य और प्राचीन संस्कृती सिंधु संस्कृती को माना गया है। इसी संस्कृती से जुड़ी हुई गोर- बंजारा संस्कृती है और इस गोर बंजारा समाज का  वास्तव पुरी दुनियाभर में है और उन्हें अलग अलग प्र…

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