28/03/2025
भारत में नीले गमछे की शुरुआत भीम सेना के संस्थापक कहे जाने वाले नवाब सतपाल तंवर Nawab Satpal Tanwar द्वारा वर्ष 2009 में की गई थी। यह कहानी बड़ी दिलचस्प है। नीले गमछे की शुरुआत हरियाणा के गुड़गांव जिले के एकलव्य ग्राम खांडसा से हुई थी। उस समय नवाब सतपाल तंवर बहुजन समाज पार्टी के विधानसभा बादशाहपुर यूथ विंग अध्यक्ष थे। जिले में पहली बार विधानसभा बादशाहपुर के प्रत्येक चुनाव केंद्र पर सतपाल तंवर ने बहुजन समाज पार्टी के बूथ लगवाए थे। सभी बूथों पर सतपाल तंवर के समर्थक उनके कहने पर नीले गमछे गले में डालकर बैठे थे। यही वो दौर था जब भारत में पहली बार नीले गमछे का इस्तेमाल किया गया। जिसकी शुरुआत नवाब सतपाल तंवर के द्वारा की गई। जब बादशाहपुर विद्राधानसभा के सभी चुनाव केंद्रों का दौरा करने के बाद नवाब सतपाल तंवर गांव खांडसा बूथ पर पहुंचे तो बसपा का बूथ लगने से बौखलाए राजपूत समाज के कुछ लोगों ने उनके ऊपर हमला कर दिया। उसके बाद वर्ष 2010 में उन्होंने भीम सेना की भी स्थापना कर दी थी। तभी से नीला गमछा भीम सेना का प्रतीक चिन्ह बन गया । अब अनेकों संगठन और दलित समाज के लोग नीले गमछे का इस्तेमाल शान से करते हैं । सतपाल तंवर की शुरुआत के पूरे 16 बरस बाद अब बहन कुमारी मायावती Mayawati जी ने भी नीला गमछा अपना लिया है। यह संयोग है या प्रयोग। जो भीम सेना प्रतीक चिह्न दलित राजनीति का प्रतीक चिन्ह बन गया है।