Vikasnagar City

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Formerly known as Chauhadpur,
In 1 965, Late Shri Mahavir Tyagi who was then the Union Cabinet Minister for Rehabilitation
and the Member of Parliament from the region, changed the name from Chauhadpur to
Vikasnagar.

21/04/2023

एकलव्य विद्यालय, कालसी

2011 की जनगणना के अनुसार देश की 8.6% जनजातीय आबादी में से मात्र 59% ही शिक्षित हैं, जो राष्ट्रीय साक्षरता दर 74% से काफी कम है। इस स्थिति में सुधार की दिशा में जनजाति कल्याण मंत्रालय के तत्वावधान में चलाए जा रहे 401 एकलव्य विद्यालय महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। इनमें से अपनी शैक्षिक दक्षता में उत्कृष्ट एकलव्य विद्यालय, कालसी, देहरादून ने न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलहदा पहचान कायम की है। जिसमें इस विद्यालय की नींव रखने वाले शिक्षकों के अथक प्रयास, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के सहयोग की अहम भूमिका है। लेकिन पिछले कुछ समय से गैर जरूरी प्रशासनिक हस्तक्षेप ने इस विद्यालय के संचालन में लगातार बाधा उत्पन्न की है।

चंद माह पूर्व भी निदेशक, जनजाति कल्याण, उत्तराखंड द्वारा एकलव्य विद्यालय, कालसी के संचालन में व्यवधान उत्पन्न किया गया था, तत्कालीन प्राचार्य एवं उप प्राचार्य ने लिखित तौर पर गैर जरूरी हस्तक्षेप न करने की शर्त पर अपना इस्तीफा वापस लिया था। किन्तु पुनः उक्त अधिकारी द्वारा विद्यालय के नव प्राचार्य की नियुक्ति हेतु मुख्यमंत्री, उत्तराखंड के साथ अपने तथाकथित संबंधों के दुरुपयोग एवं अन्य साथियों के साथ षड्यन्त्र के तहत इस प्रक्रिया को न केवल आयोजित किया, बल्कि अनुचित नियुक्ति को अंजाम दिया। जबकि एकलव्य विद्यालय संगठन समिति के संबंध में निदेशक, जनजाति कल्याण को कोई भी निर्णय लेने का अधिकार नहीं है।

अतः समस्त जनजातीय समुदाय की माँग को मद्देनजर रखते हुए एस एस टोलिया, निदेशक, जनजाति कल्याण को एकलव्य विद्यालय की कार्यान्वयन समिति (वर्किंग ग्रुप)से बाहर किया जाए; ताकि विद्यालय के प्रबंधन एवं प्रशासनिक कार्य दक्षता के साथ क्रियान्वित किए जा सकें।

श्रीमान असित गोपाल, आयुक्त द्वारा एकलव्य विद्यालय, कालसी के उत्कृष्ट प्रबंधन एवं प्रदर्शन को रेखांकित करते हुए; देशभर के विद्यालयों के लिए नजीर बताते हुए पूर्व में भी अनुचित हस्तक्षेप न करने के संबंध में पत्र लिखा जा चुका है। किन्तु एक अयोग्य व्यक्ति का निदेशक सरीखे महत्वपूर्ण पद पर बैठना, इसकी गरिमा एवं विधि के तहत कार्य करने के कर्तव्य को धूमिल कर रहा है। अनुचित हस्तक्षेप के चलते विद्यालय की सबसे वरिष्ठ एवं राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान से नवाज़ी गई शिक्षिका सुधा पैन्यूली ने पुनः इस्तीफा दे दिया है, अभिभावकों द्वारा उनके समर्थन में एवं विद्यालय को बचाने के लिए लगातार विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं।

भारत रुरल लाइव्लीहुड फाउंडेशन की ट्राइबल डेवलपमेंट रिपोर्ट 2022 के अनुसार कक्षा 8 से पहले ही 48.2% जनजातीय बच्चे स्कूल छोड़ देते है, जबकि कक्षा 10 तक यह आँकड़ा 62.2% पहुँच जाता है। ऐसे में एकलव्य विद्यालय, कालसी ने पिछले कई वर्षों से तकरीबन हर बार 100% विद्यार्थियों के 10वी एवं 12वी कक्षा में उत्तीर्ण होने के परीक्षा परिणाम दिए है।ऐसे उत्कृष्ट विद्यालय की व्यवस्था को सुनियोजित ढंग से अनुचित हस्तक्षेप द्वारा बर्बाद करने की कोशिशों से वर्तमान विद्यार्थी, पूर्व छात्र-छात्राएं, शिक्षक, अभिभावक आहत हैं एवं विरोध जाहिर कर रहे हैं। यदि इस संस्थान को नुकसान पहुंचाया गया, तो विद्यार्थियों के साथ-साथ यह जनजाति समुदाय एवं राष्ट्रीय शिक्षा व्यवस्था की भी हानि होगी।

धन्यवाद ।
EMRS ALUMNI ASSOCIATION

Pushkar Singh Dhami Friends of Tribals Society - National ETV Bharat Uttarakhand Uttarakhand News ModiNama Ministry of Tribal Affairs, Government of India Sudha Painuli Narendra Modi Lt Gen Gurmit Singh Satpal Maharaj Munna Singh Chauhan Ritu Khanduri Abhishek Maindola EMRS,Kharedi EMRS Alumni Zee News News24

Ministry of Education

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18/10/2022

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13/06/2022

मिलिए हमारे कलाकार IAS रणवीर सिंह चौहान जी से जो प्रतिभा के धनि है!
उत्तराखंड के हमारे जौनसार क्षेत्र से आते हैं ,मुझे लगता है जिस भी व्यक्ति में अपने कार्य क्षेत्र के अलावा कोई और हुनर या गुण हो और वो उसको डूब कर करता हो तो वो दिल से भी अच्छा ही होता है और ऐसे लोगों के हुनर को दुनिया के सामने लाना भी चाहिए ताकि आने वाली नस्लें भी कुछ सीखे, वैसे गर्मी की छुट्टियाँ हैं अपने बच्चों के हुनर पर भी नज़र रखें और उन्हें मोटिवेट भी करें 😊🙏

उत्तराखंड के इस गांव से लाये थे हनुमान जी संजीवनी , इस गांव के लोग आज भी नाराज है हनुमान जी से आप जानते हैं हनुमान ये सं...
31/05/2022

उत्तराखंड के इस गांव से लाये थे हनुमान जी संजीवनी , इस गांव के लोग आज भी नाराज है हनुमान जी से
आप जानते हैं हनुमान ये संजीवनी कहाँ से लाए थे?
ये तो आपने सुना होगा कि वे हिमालय से लाए थे और पूरा पहाड़ ही उखाड़ लाए थे.

अब जानिए उस गाँव के बारे में जहाँ से हनुमान ये पर्वत लाए थे.

इस गाँव का नाम है द्रोणागिरी. उत्तराखंड के चमोली जनपद में स्थित है. इस गांव में आज भी हनुमान की पूजा नहीं होती.

गांव के लोग सदियों से पर्वत देवता को पूजते हैं. पर्वत देवता यानी द्रोणागिरी पर्वत. माना जाता है कि द्रोणागिरी वही पर्वत है जहां से हनुमान संजीवनी बूटी ले गए थे.

गाँव वालों का मानना है कि संजीवनी के साथ हनुमान जो पहाड़ उखाड़ ले गए, वह असल में उनके पर्वत देवता की एक भुजा थी. इसलिए गाँव के लोग आज तक हनुमान से नाराज़ हैं.

मज़ेदार है कि यहां जो रामलीला भी होती है उसमें से हनुमान का पूरा प्रसंग ही ग़ायब कर दिया जाता है. न गाँव में हनुमान जी का कोई झंडा लगता है, न तस्वीर और न उनकी पूजा होती है.

दिलचस्प है न? लोग राम की आराधना करते हैं, लेकिन हनुमान से अब तक अप्सेट हैं. असल में यह विविधता और इसकी स्वीकार्यता ही इस देश की आत्मा है..

तस्वीरें उसी द्रोणागिरी गाँव की हैं.
साभार : राहुल कोटियाल

कालसी से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकरियाँ ….इसका प्राचीन नाम "खलतिका" था, अन्य नाम "कालकूट" व "युगशैल" भी मिलता है, जो कि "...
22/05/2022

कालसी से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकरियाँ ….

इसका प्राचीन नाम "खलतिका" था, अन्य नाम "कालकूट" व "युगशैल" भी मिलता है, जो कि "कुषाणोत्तर काल" में "राजा शीलवर्मन" की राजधानी रही। यहां से पक्की ईंटों से निर्मित "यज्ञ वैदिकायें" जिन्हें "इष्टिका लेख" भी कहते हैं, प्राप्त हुई हैं जिनमे इनके द्वारा (शील वर्मन) कराए गए चार "अश्वमेघ यज्ञों" का वर्णन मिलता है।

स्थानीय रूप से इस स्थान को "चित्रशिला" कहा जाता है।

यह सिरमौर (हिमांचल प्रदेश) से शासन करने वाले प्रकाश वंश के राजाओं की राजधानी रहा है।

कहा जाता है कि कालसी के स्तूपों का विनाश 1254ई. में संभवतः "नसीरुद्दीन महमूद" द्वारा किया गया।

यहां पर मौर्य राजा अशोक का शिलालेख मिला है , जो यमुना और उसकी सहायक "अमलावा" के संगम पर स्थित है।
(नोट: कालसी स्थल स्थित है "यमुना और टोंस" के संगम पर जबकि वह स्थान जहाँ पर शिलालेख है "यमुना व अमलाव" नदियों के संगम पर स्थित हैं।

"कालसी शिलालेख"

= कालसी शिलालेख की खोज ब्रिटिश शासनकाल में 1860 ई० में "फारेस्ट महोदय" ने की थी। यह अभिलेख एक विशाल चट्टान पर उत्कीर्ण है, जिसका ऐतिहासिक तिथिक्रम 253 ई. पू.( अन्य तिथि 257 ई. पू.) माना गया है।

= यह शिलालेख अशोक के 14 शिलालेखों में "13वां शिलालेख" माना जाता है।

= कालसी शिलालेख में उसने हाथी की आकृति उत्कीर्ण करवायी गयी जिसके नीचे ‘गजतमे’शब्द (यह एक मात्र शब्द है जो "संस्कृत भाषा" का शब्द है) उत्कीर्ण है। उक्त हाथी को आकाश से उतरता दिखाया गया है जिसे इस रूप में माता के गर्भ में भगवान बुद्ध के आने का आभास होता है।

[अशोक के धौली (कलिंग) शिलालेख में भी हाथी की आकृति उकेरी गयी है, जो उसके बौद्ध धर्मानुयायी होने का द्योतक है]

= भाषा और लिपि- इस शिलालेख पर लिखे लेखों की भाषा प्राकृत और लिपी ब्राह्मी है। यह लिपि बायीं ओर से दाहिनी ओर को उसी प्रकार लिखी जाती थी, जिस प्रकार अन्य विभिन्न भारतीय भाषाओं की लिपियाँ लिखी जाती है, किन्तु उस समय अक्षरों के ऊपर शिरारेखा(ऊपर से लाइन) का प्रयोग बिलकुल नहीं किया जाता था।

= यह लेख 14 विभिन्न लेखों का एक समूह है, इस शिलालेख में कालसी क्षेत्र को "अपरांत" व कालसी नई निवासियों को "पुलिंद" शब्द से संम्बोधित किया गया है।

= यहशिलालेख सम्राट अशोक के आंतरिक प्रशासन के विषय में बताती है।

= इसके अलावा शिला सम्राट के दृष्टिकोण, प्रजा के साथ नैतिक, आध्यात्मिक एंव पिता जैसे संबंधों, अंहिसा के लिए उनकी प्रतिबद्घता और युद्व में सम्राट के त्याग के बारे में बताती है। इन कार्यों के लिए अशोक ने निषेधात्मक और प्रयोगात्मक नीतियां बनाई थी, यह भी इसी लेख से पता चलता है।

= इस शिलालेख पर इन नीतियों को लागू करने के लिए सम्राट ने पशुओं को अनावश्यक मारने पर प्रतिबंध, जानवरों और इंसानों के लिए स्वास्थ्य सुविधा, युद्व घोष के स्थान पर धम्म घोष द्वारा विजय का उल्लेख किया गया है।

= अशोक के अभिलेकों के पढने का श्रेय "जेम्स प्रिंसेप महोदय" को दिया जाता है जिन्होंने 1837 ई० में प्रथम बार उक्त अभिलेखों को पूर्णतः पढने में सफलता पायी।

*लेख उत्तराखंड सामान्य ज्ञान*

महाशिवरात्रि की आप सभी को बहुत  बहुत बधाई ! ॐ नामा शिवाय 💐🌺🌹
01/03/2022

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क्या कभी आपने बर्फ का मसाला खाया है ? आज में आपने  गांव में हु और हमने बर्फ का मसाला बनाया है ! पहाड़ी नमक और बर्फ का लाज...
05/02/2022

क्या कभी आपने बर्फ का मसाला खाया है ? आज में आपने गांव में हु और हमने बर्फ का मसाला बनाया है ! पहाड़ी नमक और बर्फ का लाजबाब मसाला 😋😘🥰🍧

वह क्या मौसम है ! अपना विकासनगर 🥰
03/02/2022

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Apna Vikasnagar
29/01/2022

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29/01/2022

देखते है विकासनगर के लोग ज्यादा कोनसी जगह जाना
पसंद करते है ?

A) चकराता
B) मसूरी

कारण बता सको तो जरूर लिखना !

Aaj Ki Sham Apna Vikasnagar 💖💗💜
21/01/2022

Aaj Ki Sham Apna Vikasnagar 💖💗💜

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