24/08/2026
₹535 करोड़ की सीवर-पेयजल योजना पर यूकेडी ने उठाए गंभीर सवाल, स्वतंत्र जांच की मांग
विकासनगर की ₹535 करोड़ की सीवर एवं पेयजल योजना में कथित भारी लापरवाही और निर्माण कार्यों के कारण बदहाल हुई सड़कों को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल ने मोर्चा खोल दिया है। यूकेडी विकासनगर शहर के कार्यकारी अध्यक्ष एवं पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य अरविंद तोमर ने उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर योजना की कार्यप्रणाली, राष्ट्रीय राजमार्ग की बदहाली और ठेकेदार कंपनी की कथित लापरवाही पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मांग के समर्थन में क्षेत्र के स्थानीय निवासियों ने हस्ताक्षरयुक्त सूची के माध्यम से अपनी सहमति भी जताई है।
अरविंद तोमर ने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये की इतनी बड़ी योजना पर काम कर रही कार्यदायी संस्था ने स्थानीय परिस्थितियों और बरसात के मौसम को ध्यान में रखकर काम नहीं किया। उनके अनुसार, कंपनी की ओर से पहले कई महीनों तक काम बेहद धीमी गति से किया गया, लेकिन अब आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए क्षेत्रीय नेताओं के कथित राजनीतिक दबाव में अचानक पूरे नगरपालिका क्षेत्र में एक साथ सड़कों की खुदाई शुरू कर दी गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि जल्दबाजी और अदूरदर्शिता के चलते जहां-जहां राष्ट्रीय राजमार्ग समेत नगर की अन्य सड़कों को खोदा गया, वहां सड़कें धंसने लगी हैं। बरसात के मौसम में खोदी गई सड़कों पर जगह-जगह कीचड़ और पानी जमा हो गया है। इससे राहगीरों, दोपहिया वाहन चालकों और अन्य वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
यूकेडी का कहना है कि कई स्थानों पर सड़क के बीच गहरे गड्ढे छोड़ दिए गए हैं, जबकि सीवर लाइन से जुड़े चैंबर सड़क की सतह से काफी ऊंचे हैं। इनकी वजह से दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है। पार्टी ने दावा किया कि क्षेत्र में रोजाना लोग इन समस्याओं से जूझ रहे हैं और कई स्थानों पर स्थिति इतनी खराब है कि लोगों का पैदल निकलना भी मुश्किल हो गया है।
राजनीतिक दबाव का लगाया आरोप
अरविंद तोमर ने आरोप लगाया कि 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए योजना के काम में तेजी लाने का राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि काम को निर्धारित तकनीकी और व्यावहारिक तरीके से पूरा करने के बजाय जल्दबाजी में बड़े क्षेत्र में एक साथ खुदाई कर दी गई, जिसका खामियाजा अब स्थानीय जनता को भुगतना पड़ रहा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि बरसात के मौसम में एक साथ इतनी बड़ी मात्रा में सड़कें खोदने से पहले क्या वैकल्पिक व्यवस्था और सुरक्षा उपाय किए गए थे। यदि किए गए थे तो वर्तमान में नगर क्षेत्र की सड़कें कीचड़ और गड्ढों में तब्दील क्यों हो गई हैं।
स्थानीय जांच कमेटी की निष्पक्षता पर सवाल
ज्ञापन में स्थानीय प्रशासन द्वारा गठित जांच कमेटी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। यूकेडी ने कहा कि क्षेत्र की जनता और संगठन मौजूदा जांच कमेटी से संतुष्ट नहीं हैं, क्योंकि जांच की जिम्मेदारी उन्हीं स्थानीय अधिकारियों को सौंपी गई है जो योजना के कार्यों की निगरानी कर रहे थे।
यूकेडी का कहना है कि इतनी बड़ी महापरियोजना में करोड़ों रुपये की धनराशि खर्च हो रही है और मामला सीधे जनता की सुरक्षा तथा सरकारी धन से जुड़ा है। ऐसे में जांच में किसी भी प्रकार के प्रशासनिक या राजनीतिक प्रभाव की आशंका को पूरी तरह खत्म करना जरूरी है। संगठन ने कहा कि यदि निगरानी करने वाले अधिकारियों से ही जांच कराई जाएगी तो जांच की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
बाहरी तकनीकी संस्थान से जांच की मांग
अरविंद तोमर ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि वर्तमान जांच को स्थानीय कमेटी से तत्काल हटाकर किसी स्वतंत्र और बाहरी तकनीकी संस्थान को सौंपा जाए। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र तकनीकी जांच के माध्यम से यह स्पष्ट होना चाहिए कि योजना के निर्माण कार्य में तकनीकी मानकों का पालन हुआ है या नहीं, सड़कों की खुदाई और पुनर्निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन किया गया या नहीं तथा बरसात के दौरान कार्य करने को लेकर नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया या नहीं।
उन्होंने यह भी मांग की कि जांच में यदि किसी अधिकारी, ठेकेदार कंपनी या संबंधित एजेंसी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ जिम्मेदारी तय करते हुए कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही जिन सड़कों पर खुदाई की गई है, उन्हें तत्काल सुरक्षित और आवागमन योग्य बनाया जाए।
जनहित में तत्काल कदम उठाने की मांग
यूकेडी और हस्ताक्षर करने वाले क्षेत्रवासियों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि योजना के कार्यों की निष्पक्ष जांच के साथ-साथ नगर क्षेत्र में आम लोगों की सुरक्षा के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं। गहरे गड्ढों को सुरक्षित किया जाए, सड़क से ऊंचे चैंबरों को निर्धारित स्तर पर लाया जाए और कीचड़ से प्रभावित सड़कों पर आवागमन सुचारु करने के लिए आवश्यक व्यवस्था की जाए।
अरविंद तोमर ने कहा कि विकास योजनाएं जनता की सुविधा के लिए होती हैं, लेकिन यदि निर्माण कार्यों की वजह से जनता को ही परेशानी और दुर्घटना का सामना करना पड़े तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूरे मामले में पारदर्शी जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद जताई।
ज्ञापन देने वालों में ब्लॉक अध्यक्ष सौरभ उनियाल ,भूपेंद्र सिंह नेगी, अनिल पवार, अक्षय रवि पाल, यशपाल सिंह नेगी, हर्षित चौधरी, आयुष राणा, आदर्श चौहान, प्रियांशु, प्रेम सिंह, तुषार शर्मा, गौरव राणा, प्रज्वल महेश्वरी, जगदीश सिंह भंडारी, दीपक कुमार, सुरेंद्र बिष्ट, रेखा, सीमा कुकरेती, शोभा जोशी, पूनम रावत, विमला कंडवाल, सुनीता रावत, किरण पंवार, बीना पंवार, चित्रा पैन्यूली, सुमन रावत, शोभा रावत, दरवान सिंह रावत, अवतार सिंह गुसाईं, राधा देवी, रंजना बडोनी, सुरहित कुमार, अमर देव जोशी, भूपेंद्र सिंह बिष्ट, पूरण प्रसाद भट्ट, उषा बिष्ट, शशी बिष्ट, रेखा सजवाण और रितु ठाकुर आदि शामिल रहे।