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मात नर्मदा के पावन सरिता के सानिध्य में एक बात ध्यान में आई बाडा से बड़ा व्यक्ति भी केवल दोष देखरहा है। आजकल किसी के भी ...
31/12/2025

मात नर्मदा के पावन सरिता के सानिध्य में एक बात ध्यान में आई बाडा से बड़ा व्यक्ति भी केवल दोष देखरहा है। आजकल किसी के भी गुणो को नहीं देख रहा है।
कोशिश करना है कि अब अधिकांश अवगुण में भी गुन कैसे देखा जा सके,उसकी चर्चा की जा सके, उसको सामाजिक पटल पर लाकर रखा जा सके और पता है यह भाव तब आया जब राह चलते हुए मैंने देखा कुछ भिक्षुक भजन गा रहे थे और मन ने कहा कि इनको दान देना चाहिए! इनको पोषित करना चाहिए! क्योंकि? यही है जो सामान्य जनमानस के बीच बैठ करके कीर्तन रूपी भक्ति की व्यवस्था जीवित रखे है।

दुनिया जिसको भिखारी समझती है वह समाज से अपने एकांत के समय को व्यतीत करने का एक बड़ा माध्यम दे रहा है!
भजन वह प्रक्रिया दे रहा है जिसको अगर एकांकी रहने वाला व्यक्ति भी करता है तो कम से कम अवसाद से बचता है!
तो दुनिया जिसमें सोचती है कि यह भिखारी है? वह सोचिए कितना बड़ा दानी है कि आपको अवसाद रूपी व्यवस्था से बचा रहा है!
इसी भाव ने मन में यह विचार दिया की लोगों में अवगुण के स्थान पर गुण खोजना है

नर्मदे हर

अनंत श्री विभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अनन्तानन्द सरस्वती ,राजगुरु मठ पीठाधीश्वर -काशी

05/12/2025
21/11/2025

गुजरात मे गौ धन की सेवा का स्वरूप वहाँ के जनमानस द्वारा...

21/11/2025

“गौ आंदोलन के लिए सबसे पहले सच्ची गौ सेवा करनी होगी, समर्पित गौ सेवक तैयार करने होंगे। यह आंदोलन चाँदी के सिंहासन पर बैठकर या महंगी गाड़ियों में घूमकर सफल नहीं होगा— यह जमीन पर उतरकर, सेवा और त्याग के साथ ही आगे बढ़ेगा।”

23/10/2025

ईश्वर ने यह सृष्टि बनाई और सृष्टि बनाकर के मनुष्य के कर्मों के आधार पर उसको जीने के लिए छोड़ दिया!

उसके पुण्य और पाप के आधार पर बहुत सी लौकिक विषमताएं-अनुकूलताएं व्यक्ति को प्राप्त होती है!

इन सभी परिस्थितियों में हम देखते हैं की अमीर और गरीब दो तरह की व्यवस्था अनादि काल से दिखती है!

गरीबी एक अभिशाप के रूप में लोग आज मानते हैं? लेकिन हम ऋषियों को देखे, हम मुनियों को देखें, तपस्वियों को देखें,भगवान राम को देखें तो भगवान राम बहुत बड़े उदाहरण हैं दुनिया के सामने की वनवासी वेश, तपस्वी वेश और 14 वर्ष का वनवास इसके बाद भी उन्होंने उस कालखंड के सबसे मजबूत,सबसे ताकतवर,सबसे धनी राजा को पराजय दिया सब जानते हैं, क्यों और कैसे ?

तो उसका उत्तर है भगवान राम ने गरीब,कमजोर उपेक्षित लोगों का संगठन सज्जनता के साथ गठित किया और उस सज्जनता को एक साथ लेकर के उस दुर्जन,बाहुबली,अजेय योद्धा को परास्त किया!

तो इस कली काल में भी गरीबी का रोना छोड़ करके, उसको अभिशाप मानकर के, उसको अपने लिए दुख का कारण समझ करके, बैठना नही,हारना नही, इससे ऊबरीए और सज्जन लोगों का संगठन खड़ा करिए और उसके माध्यम से आप समाज में सज्जन कार्य करें।

संगठन अमीर से ज्यादा गरीब लोगों के लिए आवश्यक है। मैं ऐसा नहीं कह रहा हूं कि मैं अमीरों का विरोधी हूं या गरीबों का पक्षधर! लेकिन जो समाज में आज व्यवस्थाएं सामने दिख रही हैं, ऐसी स्थिति में कहीं ना कहीं विषमता खत्म करने के लिए, परिवार और समाज रूपी संगठन था? जिसकी गरीबों ने ही उपेक्षा की!
जो कहते हैं कि हम गरीब हैं? अगर आप अपने दुख से बाहर निकलना चाहते हैं तो परिवार,समाज रूपी संगठन को पुनः पोषित करना प्रारंभ करें फिर देखिए, ना आपका तिरस्कार होगा, ना आपका उपेक्षा होगा ना, आपको कोई शोषण कर सकता है और ना आपको कोई वंचित कर पाएगा...

अनंत श्री विभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अनन्तानन्द सरस्वती ,राजगुरु मठ पीठाधीश्वर -काशी

दीपावली केवल एक दीपो का ही त्यौहार नहीं है अपितु मानवीय भूलों से विखंडित हुए संबंधों को भी जोड़ने का एक बड़ा माध्यम है! ...
21/10/2025

दीपावली केवल एक दीपो का ही त्यौहार नहीं है अपितु मानवीय भूलों से विखंडित हुए संबंधों को भी जोड़ने का एक बड़ा माध्यम है! आज देश के कई जगहों पर नया वर्ष मनाया जा रहा है।

तो वही संपूर्ण देश में अपने बिखरे हुए,मनमुटाव के कारण दूर हुए सम्बन्धो को राम-राम कहकर, देकर के समेटने का, एक करने का प्रयास भी हो रहा है।

यह परंपरा आगे भी चलती रहे इसी अपेक्षा के साथ आप सबको दीपावली की राम-राम!

अनंत श्री विभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अनन्तानन्द सरस्वती ,राजगुरु मठ पीठाधीश्वर -काशी

13/10/2025

राजगुरु मठ श्रेष्ठतम विद्या के माध्यम से वेद पारायण आने वाले वर्षों में कराए, इसी आशा के साथ पिछले 10 वर्षों से ऐसे वैदिक विद्यार्थी रखना उनको शिक्षित करना उनके मन में यह भाव भरने के लिए की जीवन के लिए यह श्रेष्ठतम मार्ग है।

यह आना चाहिए! इसी प्रक्रिया में एक उदाहरण के रूप में ऊपर एक मैंने लिंक भेजा है जिसमें दर्शाया गया है की कैसे एक वेदपाठ बैठा है और एक श्रोता है।
क्या राजगुरु मठ से जुड़े हुए किसी व्यक्ति के मन में आया कि हमारे मठ में भी वेद पारायण होना चाहिए? हम लोगों के बटुकों के द्वारा और हम थोड़ी देर ही सुने वेद पाठ उनसे! निश्चित हम सब लोगों को मिलकर सकारात्मक कार्य में आगे बढ़ना चाहिए ।
मिलकर के कोशिश करते हैं कुछ अच्छे वैदिक समाज को देने की आप में से जो भी इस भाव की इच्छा रखते हैं जरूर सोचिएगा की इसका संरक्षण,इसका संवर्धन, इनके व्यवस्था को हम कैसे बनाए रख सकते हैं...

28/09/2025

मन्दिरदर्शनं मनुष्यदेहिनः देवत्वमार्गस्य प्रशस्ततमं साधनं भवति। यदि जीवनं सार्थकं धारयितुमिच्छामः, तर्हि निश्चयेन मन्दिराधारितव्यवस्थायाः मान्यं कर्तव्यम्। मानवजातेस्समत्वस्य च संरक्षणाय एषः महान् केन्द्रभूतः अस्ति।

(मंदिर दर्शन मनुष्य से देवत्व के मार्ग का प्रसस्त माध्यम है। जीवन को अगर सार्थक रखना है तो निश्चित हमें मंदिर आधारित व्यवस्था का सम्मान करना चाहिए मानवता एवं समरसता संरक्षण का यह बहुत बड़ा केंद्र है)

अनंत श्री विभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अनन्तानन्द सरस्वती ,राजगुरु मठ पीठाधीश्वर -काशी

27/09/2025

सनातनधर्मः मनुष्यस्य देवत्वपर्यन्तं यात्रां दर्शयति, तां च जीवनमध्ये अवतारयितुं मार्गानपि प्रशस्यति।
अधुना तु आधुनिकजीवनं विपणिना अत्यधिकं प्रभावितं जातम्, स्वयमेव जीवनं विपणिरूपं कर्तुम् उत्सुकं चास्ति।
अतः निर्णयं कर्तव्यम् अस्माभिः—जीवनं विपणिरूपं कर्तव्यम्, उत जीवनाय देवत्वं दातव्यमिति।

(सनातन धर्म मनुष्य से देवत्व तक के यात्रा को बताता है और जीवन मे उसे उतारने के मार्ग भी प्रशस्त करता है जबकि आधुनिक जीवन को बाजार बहोत हद तक प्रभावित कर रहा है और जीवन को ही बाजार बनाने के लिए आतुर है ।

अब तय हमे करना है कि बाजार बनाना है जीवन को या देवत्व प्रदान करना है जीवन को)

अनंत श्री विभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अनन्तानन्द सरस्वती ,राजगुरु मठ पीठाधीश्वर -काशी

26/09/2025

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