06/05/2026
* बंगाल विजय का गुमनाम हीरो 💫*
*********************(****
*आपको यह जानकर हैरानी होगी कि पूर्व राष्ट्रपति स्व. प्रणब दा को 2018 में RSS के नागपुर कार्यक्रम में ले जाने के पीछे* संघ के एक गुमनाम मगर धुरंधर प्रचारक हैं *नाम है- रामचंद्र पांडेय जी*
*बंगाल से आने वाले कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरे प्रणव दा के नागपुर जाने की घटना ने* बंगाली भद्रलोक में संघ और भाजपा के प्रति भरोसे का दीपक जलाया था *जहाँ कभी वामपंथी विचारधारा का* बोलबाला हुआ करता था!
*बंगाल में बीजेपी की जीत के यूँ तो बहुत से सूत्रधार हैं* फ़्रंट पर कार्य करने वालों को दुनिया जानती है *किंतु पांडेय जी का नाम पहले भी गुमनाम था* आज भी गुमनाम है।
*लेकिन इनके बारे में इतना समझ लीजिए कि* मौजूदा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को मिर्जापुर में RSS का जिला कार्यवाह बनाकर *पहली बार संगठन सिस्टम में सक्रिय करने वाले यही रामचंद्र जी हैं*
*🔸अब बात करते है बंगाल में उनके योगदान की*
*2016 विधानसभा चुनाव के बाद आरएसएस ने* अपने इस धुरंधर प्रचारक का केंद्र कोलकाता बनाकर उन्हें पूरे राज्य में संगठन को चुस्त-दुरुस्त रखने की कमान सौंपी *यह रामचंद्र पांडेय थे*
*जिन्होंने* सिलिगुड़ी से लेकर बर्दवान, आसनसोल तक, कोलकाता के गली-कूचों से लेकर मुर्शिदाबाद, मालदा तक आम लोगों में छिपे बीजेपी और संघ कार्यकर्ताओं की कड़ियों को जोड़ना शुरु किया *कांग्रेस, टीएमसी और लेफ्ट के उन लोगों से संपर्क साधा जो बंगाल की दुर्दशा से अपने संगठनों में अंसतुष्ट थे*
*टीएमसी में सबसे मुखर सुवेंदु अधिकारी से लेकर प्रणब दा के संपर्क-सूत्र मनोज कुमार तक* रामचंद्र पांडेय ने अपनी तीक्ष्ण बुद्धि का इस्तेमाल किया *और यहां तक कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब दा को आरएसएस के नागपुर कार्यक्रम तक पहुंचा कर* बंगाली भद्रलोक और कांग्रेस व लेफ्ट के काडर में आरएसएस और बीजेपी के प्रति हर तरह के भरोसे और आश्वस्ति से भर दिया।
*उसी समय भविष्य के बंगाल की इबारत* वस्तुतः रामचंद्र पांडेय के संपर्कों ने रच दी थी।
*यह सारा कार्य रामचंद्र पांडेय के संपर्क सूत्रों से* आरएसएस के नागपुर केंद्र ने साकार कर दिखाया।
*रामचंद्र पांडेय कोई साधारण नाम नहीं है* 1967 में जब मोदीजी ने प्रचारक जीवन शुरु किया *उसी समय* रामचंद्र पांडेय ने उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के अपने गांव को अलविदा कह दिया.....
*वह प्रो. राजेंद्र सिंह के संपर्क में आए और फिर आरएसएस के होकर रह गए*
*1967 से 2000 तक रामचंद्र पांडेय जी ने 33 साल अपनी जवानी* पूर्वी यूपी से लेकर अवध, बुंदेलखंड आदि इलाकों में आरएसएस को मजबूत करने में खपा दी *बीजेपी के अनेक संगठन महामंत्री* रामचंद्र पांडेय के द्वारा प्रशिक्षित हैं।
*रामचंद्र जी आज भी गुमनाम तरीके से रहते हैं* दो जोड़ी कपड़ों में वह अपना साल गुजार देते हैं *उनकी साधारण चप्पल और निरंतर चलते रहने की उनकी इच्छाशक्ति ने* उन्हें आरएसएस के सभी प्रचारकों में सबसे जमीनी स्तर पर खड़ा किया है।
*कोलकाता का कोई गली-कूचा नहीं* किसी आरएसएस और पुराने बीजेपी कार्यकर्ता का घर नहीं *जहां रामचंद्र पांडेय ने प्रवास न किया और बैठक नहीं की हो* उनके साथ इस कार्य में आरएसएस के युवा प्रचारकों की पूरी टोली दिन-रात संपर्क में जुटी रही.......
*आरएसएस की घोषवादकों की टीम के* वह पूरे देश के मार्गदर्शक संचारक हैं *और तो और* उत्तर प्रदेश के अवध, गोरखपुर, काशी, बुंदेलखंड के इलाकों में अधिकांश आरएसएस कार्यकर्ताओं के निर्माण में यदि सबसे ज्यादा सक्रिय भूमिका किसी ने निभाई तो *1967 से 2000 के मध्य रामचंद्र जी पांडेय ने निभाई*
*सूत्र बताते हैं कि* बीजेपी में नेताओं के चयन से लेकर टिकट बंटवारे तक में युवाओं को चुन चुनकर रामचंद्र पांडेय ने आगे किया *और केंद्रीय नेतृत्व को सही सूचनाएं दीं*
*बीते 10 साल में रामचंद्र पांडेय जी ने* पश्चिम बंगाल की जमीन के चप्पे चप्पे को छान मारा *बदलाव की बयार* ऐसे ही आरएसएस कार्यकर्ताओं के बूते भी बीजेपी ने बंगाल में खडी की है।
*ये चार दिन की सफलता नही है* बल्कि 10 साल के अज्ञात तप का परिणाम है *जो रामचंद्र जी पांडेय के नेतृत्व में* हजारो युवा संघ और भाजपा कार्यकर्ता *बंगाल की उस विपरीत परिस्थिति में घर घर जाकर कर रहे थे*