26/12/2023
बात थोड़ी पुरानी है…
BHU गेट से वाराणसी सिटी रेलवे स्टेशन जाना था। कोई डायरेक्ट जाने को राज़ी नहीं होता। पहिले कैंट, तब सिटी। एक ऑटोवाले से पूछा―कैंट?????
ऑटो में अकेले एक सज्जन बैठे थे। चालक ने कहा―अकेले हैं तो आगे आ जाइये।
मतलब साफ़ था कि ऑटो रिज़र्व था। मगर सज्जन ने सज्जनता दिखाते हुए कहा, “कोई बात नहीं, आप मेरे साथ पीछे ही बैठ जाइये।”
मेरे हाथों में उन्होंने हिंदी साहित्य की कोई किताब देखी तो बातचीत शुरू हुई, पता चला वह BHU में भूगोल के प्रोफेसर हैं। बात अब साहित्य की तरफ़ घूम गयी। मूलतः उत्तराखंड से थे। फिर अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए उन्होंने बताया कि यूपी बोर्ड की अंग्रेज़ी की किताब में एक कहानी है, उसकी वजह है कि आज मैं बनारस में हूँ।
कौन-सी कहानी?
वाशिंगटन की “ My Struggle for Education ”
फिर उन्होंने इसी किताब की एक और अपनी पसंदीदा कहानी का उल्लेख किया - “A Girl With A Basket.” उन्होंने कहा, “बहुत अच्छी कहानी है, इसे आप जरूर पढ़ियेगा।”
फिर उसका कथ्य संक्षेप में बताने लगे।
शीर्षक से मुझे Ruskin Bond की एक कहानी “A Night Train to Deoli” याद आ गयी ।
मैंने पूछा - इसे Bond ने लिखा है क्या? उन्होंने इनकार करते हुए सोचने की मुद्रा में कहा , “क्या तो नाम था उनका....”
तभी ऑटोवाला पान थूक कर बोला -
ई त डगलसवा लिखले हौ.......
मैंने गूगल सर्च किया तो सचमुच लिखा मिला―
William C. Douglas
फिर शेष रास्ते, किसी ने किसी से कोई बातचीत नहीं की...!
🤐🤐🤐🤐
ई बनारस हौ रजा...!!
इहाँ चौराहा-चौराहा 'पद्मश्री' लोग चाय पियत मिल जालन..!
ई काशी हो बुद्ध से लेकर शंकराचार्य तक ईहां आवे के परल ग्यान लेने के लिये, शंकराचार्य को एक भंगी ने पढ़ा दिया...
🙏🙏🙏 Copied… 😂