18/09/2026
रात के ग्यारह बजे थे। मैंने देखा—छत पर एक लड़का बैठा था, पैर लटकाए, नीचे सड़क पर लोगों को देख रहा था। उसके हाथ में एक टॉर्च थी, जिसे वह बार-बार ऑन-ऑफ कर रहा था। रोशनी का एक छोटा दायरा बनता, फिर गायब। बनता, फिर गायब।
मैं ऊपर गया। पूछा, "क्या कर रहे हो?"
उसने कहा, "देख रहा हूँ कि कितने लोग रुकते हैं।"
"क्यों?"
"पता नहीं। बस।"
वह फिर टॉर्च जलाता। नीचे कोई रिक्शेवाला रुकता, ऊपर देखता, फिर चला जाता। एक कुत्ता रुका, सूँघा, चला गया। एक औरत रुकी, दो सेकंड देखा, फिर अपने बच्चे का हाथ खींचकर आगे बढ़ गई।
लड़के ने कहा, देखा? कोई नहीं रुकता।
मैंने कहा, तू क्यों रुका है यहाँ?
वह हँसा—क्योंकि मैं भी किसी की टॉर्च का इंतज़ार कर रहा हूँ।