04/11/2024
#ये_थाइलैंड_और_बाली_के_नजारे_नहीं_हैं ये अपने #भारत के नजारे हैं,जो कि अभी भी एक छिपी हुई डेस्टिनेशन है ये अपने भारत का एक सुरंगनुमा झरना है जो कि #उड़ीसा राज्य के #बरगढ़ जिले का सबसे बेहतरीन ऐतिहासिक झरना है जो की रानी चुआन झरना कहलाता है इसकी अदभूत खूबसूरती अभी भी लोगों से छिपी हुई है, इसकी अगली यात्रा आपके लिए हॉटस्पॉट हो सकती है, यहां जाने के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन #उड़ीसा का #बरगढ़_रोड रेलवे स्टेशन है जो की 52 km है और नजदीकी एयरपोर्ट #झारसुगुड़ा है जो कि देश के कई शहरों से हवाई कनेक्टिविटी से जुड़ा हुआ है, और ये अदभुत जगह debrigadh wildlife sanctuary area में आता है और यहां और भी काफी सारे वॉटरफॉल हैं,यहां जाने के लिए बरगढ़ से कोई डायरेक्ट साधन नहीं है,या तो आप कोई टैक्सी करके जा सकते हैं या तो फिर बाइक द्वारा जा सकते हैं ,यहां जाने का रास्ता किसी एडवेंचर से कम नहीं हैं, थोड़ा बहुत ट्रैकिंग भी करनी पड़ती है,यहां की वाइल्डलाइफ सेंचुरी भी आप जा सकते हैं
यह झरना बरगढ़ से ठीक 28 किलोमीटर दूर है और नलिकुआ गाँव भटली से 6 किलोमीटर दूर है ये जो झरने का पानी बहता है बड़े बड़े पत्थरों के बीच से बहता है जो की सुरंग नुमा लगता है ,तो फिर निकल जाए नई डेस्टिनेशन के लिए,ये जगह सिर्फ उनको पसंद आयेगी जिनको नई जगह घूमने का शौक है और ज्यादा भीड़भाड़ नहीं पसंद है और जो घुमक्कड़ी करने वाले दोस्त अचानक निकल पड़ते हैं,उनके लिए अच्छी लोकेशन है,
रानी चुआन के बारे में कई लोक-कथाएँ हैं। ऐसा कहा जाता है कि पानी का स्रोत पालकोट तालाब से आंतरिक रूप से जुड़ा हुआ था। लोगों का कहना है कि प्राचीन समय में पालकोट राजा के परिवार द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले फूल और उबटन रानी चुआन के जंगल से आते थे।,किसी मित्र को और जानकारी हो तो साझा कर सकता है
यह मानना आसान है कि यह जगह किसी समय रानी के लिए उपयुक्त थी रानी लोग वहां स्नान करने आती होंगी तो इस वॉटर फॉल में रानी नाम जुड़ गया, क्योंकि इस जगह में अभी भी कुछ रहस्यमय आकर्षण हैं। यहाँ का पानी सर्दियों में गर्म और गर्मियों में ठंडा रहता है। यहाँ हज़ारों लोग रोज़ाना नहाते हैं। नियमित रूप से इस्तेमाल किए जाने के बावजूद यह हमेशा ताज़ा रहता है। कुछ प्राचीन वृक्ष आज भी खड़े हैं।और आसपास का हरियाली वाला नजारा बहुत सुकून देता है, जानकारी अच्छी लगी हो तो ज्यादा से ज्यादा शेयर भी करिए ताकि लोगों को पता चल सके कि अपने भारत में भी इस तरह की जगहें हैं ।