17/08/2026
खेतान एंड कंपनी: भारतीय न्याय व्यवस्था में एक सदी की गौरवशाली विरासत
भारतीय कॉर्पोरेट जगत और न्याय व्यवस्था के इतिहास में 'खेतान एंड कंपनी' (Khaitan & Co.) का नाम एक मील के पत्थर की तरह है। यह महज़ एक लॉ फर्म नहीं है, बल्कि एक ऐसी संस्था है जिसने ब्रिटिश भारत में स्वदेशी व्यापार को कानूनी संरक्षण देने से लेकर, स्वतंत्र भारत के संविधान निर्माण और आधुनिक कॉर्पोरेट विकास तक का सफर तय किया है। 1911 में शुरू हुई यह फर्म आज 1,200 से अधिक प्रोफेशनल्स और 225 से अधिक पार्टनर्स के साथ भारत की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी फुल-सर्विस लॉ फर्म बन चुकी है।
देवी प्रसाद खेतान: एक दूरदर्शी संस्थापक और राष्ट्र निर्माता
खेतान एंड कंपनी की नींव देवी प्रसाद (डी. पी.) खेतान ने रखी थी। उनका जन्म 14 अगस्त 1888 को राजस्थान के रामगढ़ शेखावाटी के एक मारवाड़ी अग्रवाल परिवार में हुआ था। शिक्षा के प्रति उनके असीम उत्साह ने उन्हें कलकत्ता के प्रतिष्ठित प्रेसीडेंसी कॉलेज पहुँचाया, जहाँ उन्होंने कानून (Law) में प्रथम श्रेणी से ग्रेजुएशन किया। उनके सहपाठियों में डॉ. राजेंद्र प्रसाद जैसी प्रतिभाशाली हस्तियाँ शामिल थीं।
उस दौर में, जब भारतीयों के खिलाफ भेदभाव चरम पर था, एक ब्रिटिश लॉ फर्म में करियर शुरू करना आसान नहीं था। इसलिए उन्होंने 'मैनुअल और अग्रवाल' के साथ शुरुआत की। अपनी असाधारण वाक्पटुता और बहस करने की कला के दम पर, उन्होंने महान वकील देशबंधु चित्तरंजन दास के जूनियर के रूप में काम करते हुए चीफ जस्टिस सहित पूरी कानूनी बिरादरी का ध्यान अपनी ओर खींचा।
लगातार बढ़ती ख्याति और क्लाइंट्स के भरोसे ने उन्हें 1911 में अपने भाइयों और जे.एन. मजूमदार के साथ मिलकर 'खेतान एंड कंपनी' की स्थापना करने के लिए प्रेरित किया। डी. पी. खेतान केवल एक वकील ही नहीं, बल्कि एक विज़नरी भी थे। उन्होंने भारतीय व्यापार को संगठित करने के लिए:
1925 में इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (ICC) की स्थापना की।
1926 में सर पुरुषोत्तमदास ठाकुरदास और जी.डी. बिड़ला के साथ मिलकर फिक्की (FICCI) की नींव रखी।
उनका सबसे बड़ा योगदान राष्ट्र निर्माण में रहा। वे संविधान सभा के सदस्य थे और उस ऐतिहासिक ड्राफ्टिंग कमेटी के 7 मूल सदस्यों में से एक थे, जिसने भारत का संविधान तैयार किया। 1948 में उनके निधन के बाद टी. टी. कृष्णमाचारी ने उनकी जगह ली।
कॉलोनियल दौर से आधुनिक कॉर्पोरेट लॉ तक का सफर
शुरुआती दौर में, फर्म ने ब्रिटिश शासन के तहत मारवाड़ी व्यापारियों और उद्योगपतियों (जैसे जी.डी. बिड़ला) को कॉलोनियल नीतियों के बीच कमर्शियल झगड़ों को सुलझाने में मदद की। फर्म ने बिड़ला और डालमिया-जैन जैसे बड़े ग्रुप्स के पारिवारिक व्यवसायों को कानूनी दिशा दी।
स्थापना (कोलकाता)
1911
देवी प्रसाद खेतान और जे.एन. मजूमदार द्वारा कोलकाता के 10 ओल्ड पोस्ट ऑफिस स्ट्रीट पर फर्म की शुरुआत।
संविधान निर्माण में योगदान
1947
संस्थापक डी. पी. खेतान को भारत के संविधान की मसौदा समिति (Drafting Committee) के सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया।
ऐतिहासिक अधिग्रहण
1948
बेनेट कोलमैन एंड कंपनी (द टाइम्स ऑफ़ इंडिया) के ऐतिहासिक अधिग्रहण में कानूनी सलाह प्रदान की।
भारत का पहला कॉर्पोरेट डीमर्जर
1959
बलरामपुर और तुलसीपुर शुगर कंपनियों के विभाजन को सफलतापूर्वक पूरा किया, जो उस समय के कानूनी परिदृश्य में अभूतपूर्व था।
राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार
1970 - 2001
1970 में दिल्ली, 1994 में बेंगलुरु (IT सेक्टर के लिए), और 2001 में 90वीं वर्षगांठ के मौके पर मुंबई में कार्यालय खोले गए।
ग्लोबल फुटप्रिंट और आगे का विस्तार
2021 - 2024
2021 में सिंगापुर में पहला विदेशी कार्यालय खुला। इसके अलावा चेन्नई (2021), पुणे (2023) और अहमदाबाद (2024) में विस्तार किया गया।
विरासत के सच्चे उत्तराधिकारी: नंद गोपाल खेतान (NG)
डी. पी. खेतान के पोते और कृष्ण प्रसाद खेतान के बेटे, नंद गोपाल खेतान (जिन्हें प्यार से 'NG' कहा जाता है) ने इस गौरवशाली विरासत को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया। वकीलों के परिवार में पले-बढ़े NG ने 1970 में ग्रेजुएशन के बाद फर्म में एक 'आर्टिकल क्लर्क' के रूप में शुरुआत की। अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने सभी लॉ एग्जाम्स में प्रथम स्थान प्राप्त कर 'बेल चैंबर गोल्ड मेडल' जीता और 1974 में फर्म के सबसे कम उम्र के पार्टनर बने।
हाल ही में कानूनी पेशे में उनके शानदार 50 साल पूरे होने पर कोलकाता के टॉली क्लब में एक भव्य समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस, शीर्ष कॉर्पोरेट दिग्गज और वरिष्ठ नौकरशाह शामिल हुए।
मशहूर वकील और राजनेता कपिल सिब्बल ने उनकी प्रशंसा में कहा: "NG जिस प्रतिबद्धता के साथ काम करते हैं और तथ्यों व कानून पर उनकी जो पकड़ है, उसका मुकाबला बहुत कम लोग कर सकते हैं।"
मशहूर उद्योगपति एस.के. बिड़ला ने भी उनकी बेबाकी और कानूनी समझ की सराहना की। अपनी दशकों की प्रैक्टिस में NG ने मर्जर, डीमर्जर, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, और फॉरेन इन्वेस्टमेंट जैसे जटिल क्षेत्रों में बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को अपनी सेवाएं दी हैं।
सफलता के दिलचस्प किस्से
NG खेतान का सफर कई दिलचस्प घटनाओं से भरा रहा है:
एक प्रेजेंटेशन ने बदली किस्मत: जब वे सिर्फ एक लॉ स्टूडेंट थे, तब शॉ वॉलेस एंड कंपनी का कंट्रोल लेने की कोशिश कर रहे यूके के नागरिक कल्याण बसु ने उन पर भरोसा जताया। 72 वर्षीय खेतान याद करते हैं कि कैसे उन्होंने एक छात्र होते हुए भी नई दिल्ली में भारत सरकार के फाइनेंस सेक्रेटरी के सामने पूरी रिसर्च के साथ प्रेजेंटेशन दिया, जिसने उनके आत्मविश्वास को एक बड़ी उड़ान दी।
कोर्ट रूम से शादी के मंडप तक: अपनी आर्टिकलशिप के दौरान उन्होंने अजंता टेक्सटाइल के एक क्लाइंट शंकर लाल सराफ के लिए दिल्ली हाई कोर्ट से एक अहम इंजंक्शन (Injunction) हासिल किया। सराफ इस युवा वकील की काबिलियत से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने NG के पिता से उनकी बेटी मधु से शादी का प्रस्ताव रख दिया। दोनों परिवार सहमत हुए और 1974 में उनकी शादी हो गई।
पिता का वह मंत्र जिसने फर्म को टूटने से बचाया: 1970 में जब NG फर्म में शामिल हुए, तो उनके पिता ने उन्हें एक अमूल्य सलाह दी थी— "हमेशा सीनियर्स के आदेश का पालन करना। अगर कभी किसी पार्टनर से अनबन हो भी जाए, तो कंपनी छोड़ देना लेकिन फर्म को तोड़ने के लिए कुछ मत करना।" इसी पारिवारिक मूल्य और समर्पण की बदौलत 'खेतान एंड कंपनी' एक सदी से भी अधिक समय से एकजुट और मजबूत बनी हुई है।
आज, खेतान एंड कंपनी सिर्फ एक लीगल फर्म नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि कैसे दूरदर्शिता, कड़ी मेहनत और पारिवारिक मूल्य मिलकर एक ऐसी संस्था का निर्माण कर सकते हैं, जो पीढ़ियों तक देश और समाज का मार्गदर्शन करती रहे।