Agarsena अग्रसेना

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Celebrating the Divine Grace of Lord Krishna | Happy Krishna Janmashtami from AgrasenaMay the divine music of Lord Krish...
04/09/2026

Celebrating the Divine Grace of Lord Krishna | Happy Krishna Janmashtami from Agrasena

May the divine music of Lord Krishna's flute fill your home with eternal peace, love, and prosperity. Wishing everyone a blessed and joyous Krishna Janmashtami from all of us at Agrasena! 🦚✨

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अग्रवाल बंधुओं से विनम्र निवेदनराजस्थान में यदि कोई अग्रवाल बंधु सामाजिक या सार्वजनिक जीवन में पार्षद पद सहित किसी भी जि...
01/09/2026

अग्रवाल बंधुओं से विनम्र निवेदन

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21/08/2026

नगर निगम उदयपुर में हर वार्ड से हमें चुनाव लड़ना चाहिए, ताकि हम अपनी एकजुटता और शक्ति का प्रदर्शन कर सकें। यह सच है कि सिर्फ एक बार में या किसी एक व्यक्ति से बड़ी जीत हासिल नहीं की जा सकती, लेकिन हमारी सामूहिक शक्ति और हमारे दृढ़ विचारों से इन राजनीतिक पार्टियों और नेताओं को निश्चित रूप से चेताया जा सकता है।

Vote for Agrawal 1st! (पहले वोट अग्रवाल को)

योगेश गुप्ता
टीम अग्रसेना

खेतान एंड कंपनी: भारतीय न्याय व्यवस्था में एक सदी की गौरवशाली विरासतभारतीय कॉर्पोरेट जगत और न्याय व्यवस्था के इतिहास में...
17/08/2026

खेतान एंड कंपनी: भारतीय न्याय व्यवस्था में एक सदी की गौरवशाली विरासत
भारतीय कॉर्पोरेट जगत और न्याय व्यवस्था के इतिहास में 'खेतान एंड कंपनी' (Khaitan & Co.) का नाम एक मील के पत्थर की तरह है। यह महज़ एक लॉ फर्म नहीं है, बल्कि एक ऐसी संस्था है जिसने ब्रिटिश भारत में स्वदेशी व्यापार को कानूनी संरक्षण देने से लेकर, स्वतंत्र भारत के संविधान निर्माण और आधुनिक कॉर्पोरेट विकास तक का सफर तय किया है। 1911 में शुरू हुई यह फर्म आज 1,200 से अधिक प्रोफेशनल्स और 225 से अधिक पार्टनर्स के साथ भारत की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी फुल-सर्विस लॉ फर्म बन चुकी है।

देवी प्रसाद खेतान: एक दूरदर्शी संस्थापक और राष्ट्र निर्माता
खेतान एंड कंपनी की नींव देवी प्रसाद (डी. पी.) खेतान ने रखी थी। उनका जन्म 14 अगस्त 1888 को राजस्थान के रामगढ़ शेखावाटी के एक मारवाड़ी अग्रवाल परिवार में हुआ था। शिक्षा के प्रति उनके असीम उत्साह ने उन्हें कलकत्ता के प्रतिष्ठित प्रेसीडेंसी कॉलेज पहुँचाया, जहाँ उन्होंने कानून (Law) में प्रथम श्रेणी से ग्रेजुएशन किया। उनके सहपाठियों में डॉ. राजेंद्र प्रसाद जैसी प्रतिभाशाली हस्तियाँ शामिल थीं।

उस दौर में, जब भारतीयों के खिलाफ भेदभाव चरम पर था, एक ब्रिटिश लॉ फर्म में करियर शुरू करना आसान नहीं था। इसलिए उन्होंने 'मैनुअल और अग्रवाल' के साथ शुरुआत की। अपनी असाधारण वाक्पटुता और बहस करने की कला के दम पर, उन्होंने महान वकील देशबंधु चित्तरंजन दास के जूनियर के रूप में काम करते हुए चीफ जस्टिस सहित पूरी कानूनी बिरादरी का ध्यान अपनी ओर खींचा।

लगातार बढ़ती ख्याति और क्लाइंट्स के भरोसे ने उन्हें 1911 में अपने भाइयों और जे.एन. मजूमदार के साथ मिलकर 'खेतान एंड कंपनी' की स्थापना करने के लिए प्रेरित किया। डी. पी. खेतान केवल एक वकील ही नहीं, बल्कि एक विज़नरी भी थे। उन्होंने भारतीय व्यापार को संगठित करने के लिए:

1925 में इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (ICC) की स्थापना की।

1926 में सर पुरुषोत्तमदास ठाकुरदास और जी.डी. बिड़ला के साथ मिलकर फिक्की (FICCI) की नींव रखी।

उनका सबसे बड़ा योगदान राष्ट्र निर्माण में रहा। वे संविधान सभा के सदस्य थे और उस ऐतिहासिक ड्राफ्टिंग कमेटी के 7 मूल सदस्यों में से एक थे, जिसने भारत का संविधान तैयार किया। 1948 में उनके निधन के बाद टी. टी. कृष्णमाचारी ने उनकी जगह ली।

कॉलोनियल दौर से आधुनिक कॉर्पोरेट लॉ तक का सफर
शुरुआती दौर में, फर्म ने ब्रिटिश शासन के तहत मारवाड़ी व्यापारियों और उद्योगपतियों (जैसे जी.डी. बिड़ला) को कॉलोनियल नीतियों के बीच कमर्शियल झगड़ों को सुलझाने में मदद की। फर्म ने बिड़ला और डालमिया-जैन जैसे बड़े ग्रुप्स के पारिवारिक व्यवसायों को कानूनी दिशा दी।

स्थापना (कोलकाता)
1911
देवी प्रसाद खेतान और जे.एन. मजूमदार द्वारा कोलकाता के 10 ओल्ड पोस्ट ऑफिस स्ट्रीट पर फर्म की शुरुआत।

संविधान निर्माण में योगदान
1947
संस्थापक डी. पी. खेतान को भारत के संविधान की मसौदा समिति (Drafting Committee) के सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया।

ऐतिहासिक अधिग्रहण
1948
बेनेट कोलमैन एंड कंपनी (द टाइम्स ऑफ़ इंडिया) के ऐतिहासिक अधिग्रहण में कानूनी सलाह प्रदान की।

भारत का पहला कॉर्पोरेट डीमर्जर
1959
बलरामपुर और तुलसीपुर शुगर कंपनियों के विभाजन को सफलतापूर्वक पूरा किया, जो उस समय के कानूनी परिदृश्य में अभूतपूर्व था।

राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार
1970 - 2001
1970 में दिल्ली, 1994 में बेंगलुरु (IT सेक्टर के लिए), और 2001 में 90वीं वर्षगांठ के मौके पर मुंबई में कार्यालय खोले गए।

ग्लोबल फुटप्रिंट और आगे का विस्तार
2021 - 2024
2021 में सिंगापुर में पहला विदेशी कार्यालय खुला। इसके अलावा चेन्नई (2021), पुणे (2023) और अहमदाबाद (2024) में विस्तार किया गया।

विरासत के सच्चे उत्तराधिकारी: नंद गोपाल खेतान (NG)
डी. पी. खेतान के पोते और कृष्ण प्रसाद खेतान के बेटे, नंद गोपाल खेतान (जिन्हें प्यार से 'NG' कहा जाता है) ने इस गौरवशाली विरासत को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया। वकीलों के परिवार में पले-बढ़े NG ने 1970 में ग्रेजुएशन के बाद फर्म में एक 'आर्टिकल क्लर्क' के रूप में शुरुआत की। अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने सभी लॉ एग्जाम्स में प्रथम स्थान प्राप्त कर 'बेल चैंबर गोल्ड मेडल' जीता और 1974 में फर्म के सबसे कम उम्र के पार्टनर बने।

हाल ही में कानूनी पेशे में उनके शानदार 50 साल पूरे होने पर कोलकाता के टॉली क्लब में एक भव्य समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस, शीर्ष कॉर्पोरेट दिग्गज और वरिष्ठ नौकरशाह शामिल हुए।

मशहूर वकील और राजनेता कपिल सिब्बल ने उनकी प्रशंसा में कहा: "NG जिस प्रतिबद्धता के साथ काम करते हैं और तथ्यों व कानून पर उनकी जो पकड़ है, उसका मुकाबला बहुत कम लोग कर सकते हैं।"

मशहूर उद्योगपति एस.के. बिड़ला ने भी उनकी बेबाकी और कानूनी समझ की सराहना की। अपनी दशकों की प्रैक्टिस में NG ने मर्जर, डीमर्जर, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, और फॉरेन इन्वेस्टमेंट जैसे जटिल क्षेत्रों में बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को अपनी सेवाएं दी हैं।

सफलता के दिलचस्प किस्से
NG खेतान का सफर कई दिलचस्प घटनाओं से भरा रहा है:

एक प्रेजेंटेशन ने बदली किस्मत: जब वे सिर्फ एक लॉ स्टूडेंट थे, तब शॉ वॉलेस एंड कंपनी का कंट्रोल लेने की कोशिश कर रहे यूके के नागरिक कल्याण बसु ने उन पर भरोसा जताया। 72 वर्षीय खेतान याद करते हैं कि कैसे उन्होंने एक छात्र होते हुए भी नई दिल्ली में भारत सरकार के फाइनेंस सेक्रेटरी के सामने पूरी रिसर्च के साथ प्रेजेंटेशन दिया, जिसने उनके आत्मविश्वास को एक बड़ी उड़ान दी।

कोर्ट रूम से शादी के मंडप तक: अपनी आर्टिकलशिप के दौरान उन्होंने अजंता टेक्सटाइल के एक क्लाइंट शंकर लाल सराफ के लिए दिल्ली हाई कोर्ट से एक अहम इंजंक्शन (Injunction) हासिल किया। सराफ इस युवा वकील की काबिलियत से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने NG के पिता से उनकी बेटी मधु से शादी का प्रस्ताव रख दिया। दोनों परिवार सहमत हुए और 1974 में उनकी शादी हो गई।

पिता का वह मंत्र जिसने फर्म को टूटने से बचाया: 1970 में जब NG फर्म में शामिल हुए, तो उनके पिता ने उन्हें एक अमूल्य सलाह दी थी— "हमेशा सीनियर्स के आदेश का पालन करना। अगर कभी किसी पार्टनर से अनबन हो भी जाए, तो कंपनी छोड़ देना लेकिन फर्म को तोड़ने के लिए कुछ मत करना।" इसी पारिवारिक मूल्य और समर्पण की बदौलत 'खेतान एंड कंपनी' एक सदी से भी अधिक समय से एकजुट और मजबूत बनी हुई है।

आज, खेतान एंड कंपनी सिर्फ एक लीगल फर्म नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि कैसे दूरदर्शिता, कड़ी मेहनत और पारिवारिक मूल्य मिलकर एक ऐसी संस्था का निर्माण कर सकते हैं, जो पीढ़ियों तक देश और समाज का मार्गदर्शन करती रहे।

राहुल बजाज: 'हमारा बजाज' से लेकर एक निडर उद्योगपति तक का सफरभारतीय कॉरपोरेट जगत में जब भी स्वदेशी उद्योगों और बेबाक नेतृ...
15/08/2026

राहुल बजाज: 'हमारा बजाज' से लेकर एक निडर उद्योगपति तक का सफर

भारतीय कॉरपोरेट जगत में जब भी स्वदेशी उद्योगों और बेबाक नेतृत्व की बात होगी, तो राहुल बजाज का नाम सबसे सम्मान के साथ लिया जाएगा। उनका विजन और उनकी मेहनत ही थी जिसने दशकों तक 'चेतक' स्कूटर के जरिए लाखों भारतीयों के सफर को आसान बनाया और 'हमारा बजाज' को घर-घर का नारा बना दिया। 12 फरवरी 2022 को 83 वर्ष की आयु में इस दुनिया को अलविदा कह गए राहुल बजाज का जीवन सादगी, संघर्ष और शानदार वापसी की एक बेहतरीन कहानी है।

गांधीवादी संस्कार और सादगी भरा प्रारंभिक जीवन
राहुल बजाज का जन्म 30 जून 1938 को कोलकाता के एक प्रतिष्ठित अग्रवाल परिवार में हुआ था। उनके परिवार की जड़ें राजस्थान के सीकर जिले (काशी का बास) से जुड़ी थीं। उनका परिवार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों और सिद्धांतों का कड़ाई से पालन करता था। इसी वजह से राहुल बाबू का पालन-पोषण भी बेहद सादगी भरे माहौल में हुआ। उनके परिवार का एक स्पष्ट नियम था— फिजूलखर्ची से बचना और शादियों या पार्टियों में दिखावे के लिए धन को पानी की तरह न बहाना।

यह कारोबारी विरासत उनके दादा जमनालाल बजाज से शुरू हुई थी, जिन्होंने 1926 में बजाज ग्रुप की स्थापना की थी। उनके बाद 1942 में राहुल के पिता कमलनयन बजाज ने कमान संभाली और 'बजाज ऑटो' की नींव रखकर इलेक्ट्रिकल अप्लायंसेज तथा स्कूटर जैसे उद्योगों की शुरुआत की।
बेहतरीन शिक्षा और जमीन से जुड़ाव
राहुल बजाज ने केवल विरासत पर निर्भर रहने के बजाय खुद को शिक्षा के जरिए निखारा:
• 1958 में दिल्ली के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफंस कॉलेज से ग्रेजुएशन पूरा किया।
• बॉम्बे यूनिवर्सिटी से कानून (Law) की डिग्री हासिल की।
• अमेरिका के हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से मैनेजमेंट की बारीकियां सीखने के लिए MBA की डिग्री ली।

इतनी उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद वे हमेशा जमीन से जुड़े रहे। जब वे अपने पिता की कंपनी में डिप्टी जनरल मैनेजर के तौर पर शामिल हुए, तो किसी आलीशान बंगले में रहने के बजाय उन्होंने अपनी पत्नी और बच्चों के साथ बजाज ऑटो की फैक्ट्री की कॉलोनी में ही रहना पसंद किया।

बजाज ऑटो का स्वर्णिम दौर और आत्मनिर्भरता
बजाज ऑटो के तत्कालीन CEO नवल के. फिरोदिया के मार्गदर्शन में बिजनेस की बारीकियां सीखने के बाद, 1968 में राहुल बजाज कंपनी के चेयरमैन बने और 1972 में पिता के निधन के बाद उन्हें मैनेजिंग डायरेक्टर का पद सौंपा गया। उनके नेतृत्व में कंपनी ने बिलियन-डॉलर क्लब में अपनी जगह बनाई।

'निडर' फैसला: 1970 के दशक में जब इटली की कंपनी पियाजियो (Piaggio) ने बजाज का लाइसेंस रिन्यू करने से मना कर दिया, तो राहुल बजाज घबराए नहीं। उन्होंने अपने दम पर 'चेतक' और 'सुपर' जैसे ब्रांड बाजार में उतारे। इटैलियन वेस्पा स्प्रिंट पर आधारित 'चेतक' दशकों तक भारतीयों के लिए एक सस्ता और भरोसेमंद साधन बना रहा।

चुनौतियां और शानदार वापसी
बाजार के उदारीकरण के बाद होंडा, यामाहा और सुज़ुकी जैसी जापानी कंपनियों ने जब नई मोटरसाइकिलों के साथ भारतीय बाजार में प्रवेश किया, तो 2001 के आसपास बजाज की बिक्री में भारी गिरावट आई। लेकिन अपनी रणनीतिक समझ से उन्होंने कंपनी को हारने नहीं दिया। असरदार मार्केटिंग और युवा पीढ़ी की पसंद को भांपते हुए उन्होंने 'बजाज पल्सर' लॉन्च की, जिसने बाजार का नक्शा ही बदल दिया। आगे चलकर 2008 में, कंपनी के बेहतर संचालन के लिए उन्होंने इसे तीन अलग-अलग यूनिट्स (बजाज ऑटो, बजाज फिनसर्व और होल्डिंग कंपनी) में बांट दिया।

समाज सेवा, सम्मान और बेबाक व्यक्तित्व
राहुल बजाज केवल एक उद्योगपति नहीं, बल्कि एक समाज सेवक और मुखर वक्ता भी थे।
• सम्मान और पद: कॉरपोरेट जगत में उनके शानदार काम को देखते हुए 2001 में उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। वे 1986 में इंडियन एयरलाइंस के चेयरमैन रहे, उद्योग संगठन CII और SIAM के प्रेसिडेंट रहे, और 2006 में महाराष्ट्र से राज्यसभा के सदस्य भी चुने गए।
• सामाजिक योगदान: जानकीदेवी बजाज ग्राम विकास संस्था के जरिए बजाज परिवार शिक्षा (बालवाड़ी, ITI), वोकेशनल ट्रेनिंग, अस्पताल और महिलाओं के लिए सिलाई-कढ़ाई जैसे रूरल डेवलपमेंट प्रोग्राम चलाता है। इसी निस्वार्थ सेवा के लिए 2013 में उन्हें 'डिस्टिंग्विश्ड फैमिली ऑफ द ईयर' अवार्ड से नवाजा गया।
• बेबाक राय: कॉरपोरेट सर्कल में उन्हें उनके 'निडर' रवैये के लिए जाना जाता था। वे देश या कॉरपोरेट इंडिया के मुद्दों पर बिना लाग-लपेट के बात करते थे। 30 नवंबर 2019 को एक इवेंट में उन्होंने सार्वजनिक तौर पर खुद को "जन्म से ही एंटी-एस्टैब्लिशमेंट" करार दिया था।

निष्कर्ष
राहुल बजाज का जीवन एक स्पष्ट संदेश देता है कि मजबूत इरादे, अपने मूल्यों से जुड़ाव और समय के साथ खुद को बदलने की क्षमता किसी भी इंसान को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकती है। आज भले ही वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन भारतीय कॉरपोरेट इतिहास में उनका बेखौफ अंदाज़ और उनका गढ़ा हुआ 'हमारा बजाज' का नारा हमेशा अमर रहेगा।

🌿 उदयपुर का ऐतिहासिक 'हरियाली अमावस्या मेला' (2026) 🌿इतिहास, मेले का शेड्यूल, ट्रैफिक रूट, प्रसिद्ध व्यंजन और सुरक्षा गा...
11/08/2026

🌿 उदयपुर का ऐतिहासिक 'हरियाली अमावस्या मेला' (2026) 🌿

इतिहास, मेले का शेड्यूल, ट्रैफिक रूट, प्रसिद्ध व्यंजन और सुरक्षा गाइडलाइंस

📜 हरियाली अमावस्या मेले की शुरुआत की कहानी (इतिहास)

1. फतेह सागर झील का निर्माण और अकाल
समय: सन् 1888-1889 के आसपास।
पृष्ठभूमि: उदयपुर में भारी अकाल पड़ा था। जनता को रोजगार देने और जल संकट दूर करने के लिए महाराणा फतेह सिंह ने 'देवाली तालाब' का पुनर्निर्माण करवाया, जिसे आज हम फतेह सागर झील के नाम से जानते हैं।
प्राकृतिक दृश्य: झील बनने के बाद मानसून में जब यह लबालब भर गई, तो अरावली की पहाड़ियाँ चारों तरफ से हरी-भरी हो गईं।

2. राजा-रानी का भ्रमण और मेले का विचार
हरियाली अमावस्या के दिन महाराणा फतेह सिंह अपनी रानी के साथ झील की पाल पर भ्रमण करने आए।
चारों ओर बिखरी हरियाली, ठंडी हवाओं और लबालब झील को देखकर रानी अत्यंत प्रसन्न हुईं। उन्होंने देखा कि आम जनता भी इस खूबसूरत मौसम का आनंद लेने दूर-दूर से आई हुई है।

3. पहले मेले की घोषणा
रानी का सुझाव: "प्रकृति के इस सुंदर रूप का जश्न मनाने के लिए यहाँ एक बड़ा उत्सव होना चाहिए, जहाँ शहर और गाँव के सभी लोग एक साथ खुशियाँ मना सकें।"

महाराणा को यह विचार बहुत पसंद आया और उन्होंने तुरंत घोषणा करवाई कि हर साल हरियाली अमावस्या पर यहाँ दो दिवसीय भव्य मेला आयोजित किया जाएगा।

4. ऐतिहासिक निर्णय: 'जनाना मेला' (महिलाओं का विशेष दिन)
शुरुआती सालों में भारी भीड़ के कारण ग्रामीण व शहरी महिलाएं मेले का पूरा आनंद नहीं ले पाती थीं। जब रानी को यह बात पता चली, तो उनके आग्रह पर महाराणा ने एक ऐतिहासिक आदेश जारी किया:

पहला दिन: सभी आम नागरिकों (पुरुष, महिला एवं पर्यटक) के लिए।
दूसरा दिन (जनाना मेला): केवल महिलाओं और बच्चों के लिए आरक्षित। इस दिन मेले में पुरुषों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित (बैन) कर दिया गया।

यह परंपरा आज भी कायम है। दूसरे दिन महिलाएं पारंपरिक परिधानों में बेझिझक झूला झूलती हैं, खरीदारी करती हैं और लोक संस्कृति का आनंद लेती हैं।

📅 वर्ष 2026: मेले की तिथियां एवं शेड्यूल
12 अगस्त 2026, बुधवार (पहला दिन), सभी के लिए खुला: पुरुष, महिलाएं, बच्चे एवं पर्यटक। |
13 अगस्त 2026, गुरुवार (दूसरा दिन), जनाना मेला: केवल महिलाओं और बच्चों के लिए आरक्षित। पुरुषों का प्रवेश प्रतिबंधित। |

🚗 ट्रैफिक डायवर्जन एवं पार्किंग रूट: मेले के दौरान फतेह सागर पाल, यूआईटी ब्रिज और सहेलियों की बाड़ी मार्ग पर वाहनों की एंट्री बंद रहेगी। प्रशासनिक पार्किंग व्यवस्था निम्न प्रकार है:

चेतक सर्कल की ओर से: मोहता पार्क के पास या नगर निगम की मल्टीलेवल पार्किंग (आगे केवल पैदल जाएं)।
मल्लातलाई व रानी रोड की ओर से: सुभाष चौराहा एवं रानी रोड के पास अस्थायी पार्किंग।
सुकहाड़िया सर्कल व फतहपुरा की ओर से: सहेलियों की बाड़ी पार्किंग स्थल या सेवाश्रम रोड के मैदान।

💡 विशेष सुझाव: अत्यधिक भीड़ से बचने के लिए दोपहिया वाहन (Two-Wheeler) या ऑटो-रिक्शा का ही प्रयोग करें।

😋 मेले के पारंपरिक व्यंजन एवं प्रसिद्ध स्टॉल्स

उदयपुर में हरियाली अमावस्या पर मालपुआ और रबड़ी खाने की मुख्य परंपरा है:
सहेलियों की बाड़ी रोड & यूआईटी सर्कल: गरमा-गरम बड़े मालपुए और कुल्हड़ वाली गाढ़ी रबड़ी के मुख्य स्टॉल्स।
फतेह सागर 'बंबई बाजार' (चौपाटी): यहाँ की प्रसिद्ध कोल्ड कॉफी, सैंडविच और स्ट्रीट चाट।
अन्य आकर्षण: सुखड़िया सर्कल के पास प्रिंस फालूदा और फतेह सागर के पास की प्रसिद्ध लेमन टी।

🛡️ प्रशासनिक सुरक्षा एवं आपातकालीन हेल्पलाइन
मिसिंग / खोया-पाया सेल: भीड़ में बच्चों की सुरक्षा के लिए उनकी जेब में नाम व मोबाइल नंबर लिखी पर्ची अवश्य रखें।
सुरक्षा व्यवस्था: सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी एवं महिला होमगार्ड तैनात रहेंगी।

📞 आपातकालीन संपर्क नंबर (Helpline)
पुलिस कंट्रोल रूम: 100 / 0294-2413949
यातायात (ट्रैफिक) पुलिस: 1095
महिला सुरक्षा हेल्पलाइन: 1090
नगर निगम उदयपुर: 0294-2426262

📍 आसपास के दर्शनीय स्थल (Timing & Tips)

1. सहेलियों की बाड़ी
समय: सुबह 9:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक।
नोट: 13 अगस्त को पुरुषों का प्रवेश सीमित हो सकता है।

2. मोती मगरी (महाराणा प्रताप स्मारक)
समय: सुबह 9:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक।
खासियत: पहाड़ी से भरी हुई फतेह सागर झील और पूरे मेले का विहंगम दृश्य (Top View)।

3. करणी माता रोपवे (मछला मगरा)
समय: सुबह 9:00 बजे से रात 9:00 बजे तक।
खासियत: शाम के समय पूरे उदयपुर शहर और झीलों का अद्भुत नजारा।

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सेठ चतुर्भुज पोद्दार – रामगढ़ शेखावाटी रामगढ़ सेठान को सन् 1791 में सेठ चतुर्भुज पोद्दार ने बसाया था। सेठ जी बंसल गोत्र के...
08/08/2026

सेठ चतुर्भुज पोद्दार – रामगढ़ शेखावाटी
रामगढ़ सेठान को सन् 1791 में सेठ चतुर्भुज पोद्दार ने बसाया था। सेठ जी बंसल गोत्र के अग्रवाल थे। ये राजस्थान के सीकर जिले में पड़ता है । वैसे तो शहर अपने राजा के नाम से जाने जाते हैं लेकिन राजस्थान का रामगढ़ सेठान या रामगढ़ सेठो का जाना जाता है अपने सेठों की वजह है । इसके इतिहास से एक बहुत ही दिलचस्प कहानी जुड़ी हुई है । पोद्दारों के 21 परिवार राजस्थान में व्यापार करते थे । वो बहुत ही सम्पन्न व्यापारी थे । उनके आलीशान हवेलियां उसमे की गई नक्काशी उनके रुतबे को दर्शाती थीं । अब वहाँ के जागीरदारों को इनकी अमीरी देख के जलन हुई उन्होंने इनपे टैक्स बड़ा दिए और वो टैक्स इतने ज्यादा थे कि पोद्दारों ने कहा ये गलत है और इसका विरोध किया । और विरोध इतना ज्यादा बढ़ गया कि पोद्दारों ने कहा “हम चुरू छोड़ के जा रहे हैं और जहाँ भी जाएंगे वहाँ इससे भव्य और आलीशान नगर बसायेंगे ।” उसके बाद पोद्दारों ने सीकर में रामगढ़ शेखावाटी या रामगढ़ सेठान बसाया । बाद में फतेहगढ़ के अग्रवाल कुल के रुइया सेठ भी यहाँ आकर बस गए।
सीकर ठिकाने के सीनियर अफसर कैप्टन वेब जो 1934 से 38 तक सीकर ठिकाने का सीनियर अफसर रहा ,ने ‘सीकर की कहानी ‘नामक अंग्रेजी में पुस्तक में अपने प्रवास के दौरान सीकर ठिकाने के संस्मरण लिखें हैं ।उसमें कैप्टन वेब ने रामगढ़ के सेठों को सोने का अंडा देने वाली मुर्गी बताया है है ।इसी कारण राज दरबार में भी उन्हें पूरा सम्मान मिलता था तथा विशेष कुर्सी रामगढ़ के क्षेत्रों को उपलब्ध करवाई जाती थी ।
रामगढ़ सेठान उन्नीसवीं शताब्दी का भारत के सबसे अमीर नगरों था। इसकी भव्य हवेलियां , छतरियां और मंदिर भारत की प्राचीन कला और वास्तुशास्त्र का अद्भुत उदाहरण हैं । रामगढ़ सेठान की छतरियाँ भारत की सबसे बड़ी ओपन आर्ट गैलरी है । उसमें रामायण और राधा कृष्ण की कला कृतियाँ बनी हैं
रामगढ़ सेठान के बारे में कुछ दिलचस्प चीजें –
रामगढ़ सेठान भारत के सबसे अमीर नगरों में था । इसके सेठ पोद्दार और रुइया बहुत ही उदार और दयालु थे और उन्होंने बहुत सी दिलचस्प चीजें की थी .
रामगढ़ सेठान का सारा टैक्स केवल सेठ भरते थे ।
इन्होंने काफी स्कूल , कॉलेज , हॉस्पिटल और धर्मशालाएं खोली थीं ।
रामगढ़ सेठान को उस समय #छोटा_काशी कहा जाता था क्योंकि उसमें 25 संस्कृत के विद्यालय थे , उसमे आयुर्वेद और ज्योतिष के लिए विद्यालय थे और उस समय जयपुर के अलावा केवल रामगढ़ में कॉलेज था ।
सभी विद्यार्थियों को मुफ्त शिक्षा , मुफ्त खाना और सभी चीजें मिलती थीं ।
सेठों के लड़कों के विवाह में नगर के सभी लोग आमंत्रित होते थे और जो भी आता था उसे हेड़ा दिया जाता था जो कि बहुत प्रसिद्ध था । जो भी आता था उसे एक रुपये दिए जाते थे जाते समय कुछ लोग तो तो अपने साथ अपने मवेशी लाते थे उनके लिए भी ले जाते थे । एकबार एक आदमी लोटा भर के चीटे लाया और हर चीटे के लिए हेड़ा मांगा और उसे दिया भी गया ।
गौशाला में गायों के लिए 60-70 मन (2400 किलो)ग्वार रहता था जो कि जिसका प्रबन्द सेठों द्वारा किया जाता था ।
उनके लड़के की शादी के वक़्त खुली लूट रहती थी पूरे नगर में कोई भी जिसके घर मे शादी है उसकी दुकान से कुछ भी ले सकता था जिसका नुकसान जिस सेठ के लड़के की शादी है वो ही उठाता था ।
एकबार किसी गांव के एक गांववाले ने सीकर के महाराज से शिकायत की आप रामगढ़ वालों पे इतना ज्यादा ध्यान क्यों देते हैं । राजा ने उनकी परीक्षा ली कहा कि तुमलोग 1 करोड़ रुपये का प्रबन्द करो अभी । और पूरे सीकर में । लोगों ने मना कर दिया कहा ऐसा नहीं हो सकता है । फिर राजा ने अपने मंत्रियों से कहा कि रामगढ़ जाओ और सेठों को बोलो की महाराज को इस समय एक करोड़ रुपये चाहियें (इस समय के करीब अरबों में ) । मंत्री गए और सेठों को बताया । सेठों ने कहा कि राजा से पूछो की रुपये ,अन्ना ,पैसे किसमे चाहिए ? मंत्री आये और राजा को बताया । राजा ने कहा अब समझे मैं रामगढ़ सेठान का इतना ध्यान क्यों रखता हूँ ।
पोद्दारों ने वहाँ कुएं , तालाब , बावड़ी , मंदिर , छतरियाँ और आलीशान हवेलियां बनवाईं थीं वहीं रुइया ने कॉलेज , स्कूल और हॉस्पिटल इत्यादि ।
सेठ श्री अनंत राम पोद्दार जी जाड़ों में सियारों को लाडू और कंबल देते थे ताकि वो मर न जाएं ।
भक्तवारी देवी , सेठ श्री लक्ष्मी चंद पोद्दार जी की धर्म पत्नी गुप्त दान करतीं थीं । उन्होंने अपने मुनीम को बोल दिया था कि नगर में कोई भूखा नहीं रहना चाहिए न ही किसी को किसी बात की चिंता हो ।
बहुत से भारत के अमीर कॉरपोरेट्स यहीं से निकले हैं जैसे एस्सार ग्रुप के शशि रुइया और रवि रुइया .
भारत की पहली रजिस्टर्ड फर्म मेस्सर्स ताराचंद घनश्याम दास पोद्दार इन्ही सेठ चतुर्भुज पोद्दार की थी

एक बहुत सुंदर पहल: रूढ़िवादिता छोड़ें, परोपकार अपनाएं! 🕊️✨आओ एक नई पहल करें - बदलाव की ओर! 🕊️अग्रसेना द्वारा समाज में एक...
24/06/2026

एक बहुत सुंदर पहल: रूढ़िवादिता छोड़ें, परोपकार अपनाएं! 🕊️✨

आओ एक नई पहल करें - बदलाव की ओर! 🕊️

अग्रसेना द्वारा समाज में एक बेहद सराहनीय और सुंदर पहल की शुरुआत की गई है। अक्सर देखा जाता है कि मृत्यु के बाद पार्थिव शरीर पर रिश्तेदारों की तरफ से कई चद्दरें उड़ाई जाती हैं, जिनकी संख्या बहुत ज्यादा हो जाती है और वे बाद में व्यर्थ जाती हैं।

नया बदलाव: अब पार्थिव शरीर पर केवल एक ही चद्दर चढ़ाएं। बाकी रिश्तेदारों से चद्दर के नाम पर ₹100-100 का सहयोग लेकर उससे बेजुबान पक्षियों के लिए दाने की व्यवस्था करें। इससे पक्षियों को भोजन मिलेगा और पूरे परिवार व समाज को साक्षात पुण्य!

"एक सबके लिए, सब एक के लिए" के संकल्प के साथ अग्रसेना के इस अभियान को सफल बनाएं। अगर आप इस नेक सोच से सहमत हैं, तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें और कमेंट में अपने विचार ज़रूर लिखें।

- योगेश गुप्ता, अग्र सेना

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अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन चुनाव परिणाम घोषणाअखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन के राष्ट्रीय पदाधिकारियों के चुनाव (सत्र 2026–...
27/04/2026

अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन चुनाव परिणाम घोषणा

अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन के राष्ट्रीय पदाधिकारियों के चुनाव (सत्र 2026–31) की मतगणना 26 अप्रैल 2026 को आर्य समाज मंदिर, दोरीवाला, मंदिर मार्ग, करोल बाग, नई दिल्ली–110005 में सम्पन्न हुई। मतगणना का परिणाम निम्नानुसार है:

अध्यक्ष (President)
बसंत कुमार मित्तल – 1584 वोट
गोपाल शरण गर्ग – 1200 वोट

महासचिव (General Secretary)
गोपाल गोयल – 1797 वोट
नरेश कुमार बंसल – 1001 वोट
रमेश चंद बंसल – 58 वोट
ऋषिकेश मित्तल – 30 वोट
विनोद कुमार अग्रवाल – 1187 वोट

कोषाध्यक्ष (Treasurer)
गजेंद्र कुमार गुप्ता – 1094 वोट
मोहन कुमार गुप्ता – 85 वोट
नाथू राम जैन – 1635 वोट

उप महासचिव (Deputy General Secretary)
अमित कुमार अग्रवाल – 1475 वोट
मनोज जिंदल – 1785 वोट
प्रमोद जैन – 1872 वोट
प्रकाश चंद गोयल – 1190 वोट
प्रेम चंद मंगल – 1693 वोट
संजय कुमार अग्रवाल – 1128 वोट

भूपिंदर कंसल – मुख्य चुनाव अधिकारी
निरुपमा गुप्ता – सह मुख्य चुनाव अधिकारी

अनिल गोयल – चुनाव पर्यवेक्षक

प्रेरणा अग्रवाल
भुवनेश सिंघल – सह चुनाव अधिकारी
सुरेश गुप्ता

॥ भावपूर्ण श्रद्धांजलि ॥अत्यंत भारी मन और असीम दुख के साथ हम श्री कृष्णा राम जी अग्रवाल (सुपुत्र स्वर्गीय श्री राम जी रा...
25/04/2026

॥ भावपूर्ण श्रद्धांजलि ॥

अत्यंत भारी मन और असीम दुख के साथ हम श्री कृष्णा राम जी अग्रवाल (सुपुत्र स्वर्गीय श्री राम जी राम अग्रवाल) के आकस्मिक निधन पर अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

उनका सरल स्वभाव और मार्गदर्शक व्यक्तित्व सदैव हमारी स्मृतियों में जीवित रहेगा। ईश्वर पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार को यह अपार कष्ट सहने की शक्ति प्रदान करें।

अंतिम विदाई विवरण:
शव यात्रा: आज दिनांक 25.04.2026, शनिवार

समय: दोपहर 3:00 बजे

प्रस्थान स्थल: निवास स्थान - 21, अभय दीप, विनायक नगर, बोहरा गणेश रोड, उदयपुर।

गंतव्य: महासतिया मोक्षधाम (पुराने दैनिक भास्कर ऑफिस के पास)।

शोकाकुल:
श्रीमती तरुण लता अग्रवाल "तारा" (धर्मपत्नी)
संदीप - चेतना (भ्राता - भ्रातावधु)
संजय - श्वेता, अभय - रिंशु (पुत्र - पुत्रवधु)
दर्शिता - माहिम (भतीजी - दामाद)
गर्वित, धीर, देशना (पौत्र - पौत्री)
एवं समस्त अग्रवाल परिवार, उदयपुर

श्रद्धावनत:
अग्रसेना परिवार
ॐ शांति! ॐ शांति! ॐ शांति!

Address

#3, Shriji Vihar, New Vidhya Nagar, BSNL Road, Hiran Magri Sec No 4
Udaipur
313002

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