14/12/2020
#हल्लाबोल👊👊
सालों से सत्ता भोग रहे लोगों ने अपनी इच्छा से इतिहास में तोड़मरोड़ किये। देश के टुकड़े तो धर्म के आधार पर किये पर अपने "वोटबैंक" को यहीं रोक लिया, आजीवन तुष्टिकरण ओर शाषण के लिए। डर था कहीं हिन्दू एक ना हो जाए तो आजादी की आधारशिला पर "आरक्षण" नाम का जहर का बीज बोया जो सदियों तक हिंदुओं को बांट गया। इनके वटवृक्ष की छाया में वामपंथी फलते फूलते रहे और कथित बुद्धिजीवी बनकर सनातन धर्म को ढकोसला ओर इतिहासिक गद्दारों को "महान" बताते रहे। इस गुरुर में 70 साल निकाल दिए कि हिन्दू कभी एक नही होगा, मुस्लिम थोक में वोट डालते रहेंगे और इनकी सत्ता बरकरार रहेगी।
90 के दशक के राममंदिर आंदोलन और 2002 के गोधरा कांड के बाद हिन्दू जागने लगे। नरेंद्र मोदी और आदित्यनाथ योगी जैसे हिंदूवादी नेता उभरने लगे। 2014 में पूर्ण बहुमत के बाद जब सत्ता बदली तो वामपंथियों ओर मठाधीशों को बर्दाश्त नही हुआ। तो शुरू हो गया देश मे अराजकता फैलाने का कार्य। कभी विद्यार्थियों को सरकार के विरुद्ध सड़कों पर उतारा गया तो कभी आरक्षण के नाम पर दलित आदिवासियों ओर आरक्षण चाहने वाले समाजों को, कभी भीमा कोरेगांव जैसे कांड करवाए गए तो कभी मुसलमानों को सड़कों पर उतारा गया। अब किसानों को सड़कों पर उतारकर उनके बहाने सिखों को हिंदुओं और राष्ट्र के विरुद्ध खड़ाकर के "खालिस्तान" आंदोलन को जीवित किया जा रहा है। बस देश मे अराजकता हो जाए ओर इन्हें सत्ता सुख मिल जाए। आतंकवादियों को देश के बेटे बेटी बताने वाली यह जमात सत्ता तक पहुंचने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। दूध का जला छाछ को भी फूंककर पीता है। अब सभी राष्ट्रवादियों को एकजुट होकर ऐसी राष्ट्रविरोधी ताकतों से मुकाबला करने की जरूरत है नही तो जो दौर ओर लहर आज है भगवे की वो फिर कभी नही आएगी।
राष्ट्रीय सनातन एकता मंच
#पंडित_वैभव_चाष्टा_की_कलम_से✍️