Prakash Nayak

Prakash Nayak मातृभूमि की सेवा में निज, जीवन अर्पित करना है।
मन समर्पित, तन समर्पित
और यह जीवन समर्पित
चाहता हूँ..

Jeevan Pushp Chadha Charnon me magen matrubhumi se yah var
Tera vaibhav Amar Rahe Maa Ham Din Char Rahe Na Rahe.......

23/03/2026
31/01/2026

अब सर्व समाज भी चढ़ा सकता है प्रसाद

हिन्दू सम्मेलन से बढ़ी समरसता

अजमेर...
कल्याणीपुरा क्षेत्र में गुर्जर समाज का देवनारायण मंदिर है। यहां पिछले दिनों तक सिर्फ गुर्जर समाज के लोगों द्वारा ही प्रसाद या भोग चढ़ाया जा सकता था, अब सर्व समाज के लोग मंदिर में प्रसाद चढ़ाने आते हैं।
इस बारे में विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के महामंत्री सेवानिवृत्त न्यायाधीश किशन गुर्जर ने बताया कि पिछले दिनों कल्याणीपुरा में हिन्दू सम्मेलन हुआ। यहां देवनारायण मंदिर में सिर्फ गुर्जर ही प्रसाद चढ़ा सकते थे। प्रसाद बांटा सबको जाता था, लेकिन सिर्फ एक ही समाज के लोगों को ही प्रसाद चढ़ाने की अनुमति थी। सम्मेलन में यहां 10 जातियों के लोग एक जाजम पर बैठे, एक साथ करीब 2000 लोगों ने सामाजिक समरसता भोज किया। अब मंदिर में सर्वसमाज के लोग प्रसाद चढ़ाने लगे हैं।
हिन्दू सम्मेलनों से जिले में सामाजिक समरसता के कई उदाहरण सामने आ रहे हैं।

धुरंधर फिल्म में रणवीर सिंह जो इतने खतरनाक फौजी लग रहे हैं, जिन्हें देखकर कई लोग पूछ रहे हैं कि क्या सच में भारत में कभी...
31/01/2026

धुरंधर फिल्म में रणवीर सिंह जो इतने खतरनाक फौजी लग रहे हैं, जिन्हें देखकर कई लोग पूछ रहे हैं कि क्या सच में भारत में कभी ऐसा कोई शेर था भी?

जी हाँ, इस फिल्म में रणवीर सिंह के किरदार से भी हजारों गुना ज्यादा प्रचंड योद्धा, शातिर दिमाग वाला और हजारों गुना ज्यादा खतरनाक था मेजर मोहित शर्मा।

गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश का एक साधारण लड़का, जिसका जन्म एक साधारण ब्राह्मण परिवार में हुआ। साधारण सा नाम था मोहित शर्मा। 1995 में 12वीं पास की। घरवाले सोच रहे थे कि मोहित इंजीनियर बनेगा, कॉलेज में एडमिशन भी करवा दिया। लेकिन मोहित के रक्त में कुछ और था – वर्दी का जुनून, भगवान परशुराम का शौर्य, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, मंगल पांडे वाला जोश।

मोहित शर्मा ने चुपके से NDA का फॉर्म भरा, परीक्षा दी। परीक्षा का रिजल्ट आने से पहले ही घरवालों के कहने पर इंजीनियरिंग कॉलेज जॉइन कर लिया, ताकि घरवाले शक न करें कि मोहित फौज में जा रहा है। फिर जब रिजल्ट आया, तो वह माँ-बाप को मिला। माँ-बाप ने रिजल्ट छिपा दिया और कहा कि इंजीनियरिंग करो, मोहित, फौज में क्या रखा है?

लेकिन मोहित शर्मा को एक अजीब बेचैनी सता रही थी, जैसे ईश्वर उनसे कह रहे हों – मैंने तुझे फौज में जाने के लिए धरती पर भेजा है, तू इंजीनियरिंग में क्यों उलझ रहा है? फिर मोहित शर्मा ने सीधा UPSC के दफ्तर फोन लगाया और कहा – मेरा रिजल्ट बताओ। मोहित शर्मा को बताया गया कि आप पास हैं, रिजल्ट आपके घर पहुँच गया होगा क्या? अब सिर्फ इंटरव्यू बाकी है।

बस फिर क्या था! मोहित शर्मा बिना घर पर किसी को बताए इंजीनियरिंग कॉलेज से सीधा भोपाल पहुँच गए इंटरव्यू देने। इंटरव्यू दिया, उसमें भी पास हो गए। अब दिल्ली में मेडिकल था। घर आकर सब बता दिया कि मैं इंटरव्यू में पास हो गया हूँ।

पहले तो माँ-बाप नाराज हुए, फिर बेटे की आँखों में उस पागलपन को देखकर मान गए। हालांकि यहाँ एक बहुत बड़ी रुकावट थी – मोहित शर्मा का वजन 6 किलो कम था और समय मात्र 4 हफ्तों का। मोहित शर्मा को 4 हफ्तों में 6 किलो वजन बढ़ाना था।

मोहित शर्मा की माँ ने कमाल कर दिखाया। अपने गहने बेच दिए और रोज दूध, केले, काजू, बादाम, प्रोटीन से भरा खाना खिलाया। मोहित जिम में 4 हफ्तों तक पसीना बहाते रहे। और कुछ ही हफ्तों में मोहित का वजन बढ़ गया, जिससे मेडिकल पास हो गया।

भारतीय सेना को मोहित शर्मा जैसा किलर शेर मिला, जो आने वाले सालों में दुश्मनों की रातों की नींद हराम करने वाला था।

2004 में कश्मीर का बुलावा आ गया। उस वक्त कश्मीर में हिजबुल मुजाहिदीन का आतंक चरम पर था। सारे बड़े हमले दो नाम संभालते थे – अबू तोरारा और अबू सबजार।

सेना को उनके ठिकानों की खबर थी, लेकिन एक झटके में मारना बेवकूफी होती। ये दोनों पूरे नेटवर्क की धड़कन थे। फैसला हुआ कि कोई फौजी अंडरकवर बनकर जाए, दोस्त बनकर जाए, पहले सारी जानकारी निकाले, फिर वार करे।

ये खतरनाक से भी खतरनाक काम था – यों कहें तो मौत के मुँह में जाकर मौत देना था। इस मौत के मुँह में जाने वाले काम के लिए मेजर मोहित शर्मा ने कहा – इसे मैं संभालूँगा।

मोहित ने उर्दू सीखी, कश्मीरी भाषा सीखी, दाढ़ी-बाल बढ़ाए और अपनी चाल-ढाल, बोलने का तरीका इतना परफेक्ट कर लिया कि मोहित के चलने से भी लगता था जैसे कोई लोकल कश्मीरी मुसलमान हो। फिर अपना नाम मोहित शर्मा से बदलकर रखा – "इफ्तिकार भट्ट"।

मोहित शर्मा ने एक कहानी गढ़ी कि भारतीय फौज ने उसके भाइयों को मार दिया है और वह अब भारतीय फौज से बदला लेना चाहता है।

एक आर्मी चेकपोस्ट पर हमले का परफेक्ट प्लान बनाकर दिखाया – लोकेशन, सैनिकों की संख्या, हथियार, सब सटीक।

दोनों आतंकी दंग रह गए और उन्हें विश्वास हो गया। यहीं से असली खेल शुरू हुआ।

मोहित शर्मा, जो अब इफ्तिकार भट्ट थे, उन आतंकवादियों के साथ उनके घर में 2 हफ्ते तक रहे, उनके घर में सोए, उनकी रसोई में खाना खाया, हँसी-मजाक किया, उनके हथियारों के अड्डे, सारे गुप्त ठिकाने पता कर लिए।

और अब एक दिन आया जब पाकिस्तान से तीन और आतंकवादी आने वाले थे। श्रीनगर से 50 किलोमीटर दूर बर्फीली पहाड़ी पर लकड़ी का घर। मोहित किचन में चाय बना रहे थे, तभी अबू तोरारा और अबू सबजार ने आखिरी टेस्ट लिया। सबजार ने मोहित शर्मा पर AK-47 तान दी। तोरारा गरजा – आखिरी बार पूछ रहा हूँ इफ्तिकार, बता दे तू कौन है रे?

मोहित ने शालीनता से सिर नीचे किया – भाईजान, मैंने तो आपको सब बता दिया। अगर आपको फिर भी शक है तो आप गोली मार दो।

दोनों एक-दूसरे को देखने लगे। सबजार ने बंदूक नीचे रख दी और चाय पीने आगे बढ़ा। जैसे ही उनकी पीठ इफ्तिकार भट्ट यानी मोहित शर्मा की तरफ हुई, मोहित ने अपनी शॉल हटाई, पिस्तौल निकाली, लोड की। जैसे ही पिस्तौल की क्लिक की आवाज हुई और दोनों आतंकी मोहित की तरफ मुड़े, तब तक बिजली की गति से मोहित ने दो गोलियाँ दोनों आतंकियों के सीने में उतार दीं। गोलियाँ छाती को चीरती हुई निकल गईं।

आज जहां मोहित शर्मा सर जी जैसे लोगो का सम्मान और महिमण्डन होना चाहिए ... जयहिंद

🚩 क्या प्राचीन भारत में सच में छुआछूत और जातिगत शोषण था? या फिर यह झूठ हमें बार-बार पढ़ाया गया?चलिए, हज़ारों साल पुराने ...
31/01/2026

🚩 क्या प्राचीन भारत में सच में छुआछूत और जातिगत शोषण था? या फिर यह झूठ हमें बार-बार पढ़ाया गया?
चलिए, हज़ारों साल पुराने इतिहास से खुद जवाब ढूंढते हैं 👇
📜 वैदिक और प्राचीन भारत
🔹 सम्राट शांतनु ने मछुआरे की पुत्री सत्यवती से विवाह किया।
उनके पुत्र के लिए भीष्म ने आजीवन ब्रह्मचर्य की प्रतिज्ञा ली — क्या यह शोषण था या त्याग?
🔹 महाभारत के रचयिता वेदव्यास मछुआरे कुल से थे, फिर भी महर्षि बने, गुरुकुल चलाया।
🔹 विदुर, दासी पुत्र होकर भी हस्तिनापुर के महामंत्री बने — विदुर नीति आज भी राजनीति का महाग्रंथ है।
🔹 भीम ने वनवासी हिडिम्बा से विवाह किया।
🔹 श्रीकृष्ण ग्वाल परिवार में जन्मे,
🔹 बलराम हल धारण करने वाले कृषक थे।
फिर भी श्रीकृष्ण पूरे विश्व के पूजनीय बने और गीता दी।
🔹 राम के मित्र निषादराज उनके साथ गुरुकुल में पढ़े।
🔹 लव-कुश ने शिक्षा पाई वनवासी महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में।
👉 साफ़ है —
📌 शिक्षा, सम्मान और पद योग्यता से मिलते थे, जन्म से नहीं।
📌 वर्ण काम के आधार पर थे — आज की भाषा में Division of Labour।
🏹 जनपद और साम्राज्य काल
🔹 नन्द वंश (मगध) — नाई कुल से उठकर सम्राट बने।
🔹 मौर्य वंश — मोर पालने वाले चंद्रगुप्त को ब्राह्मण चाणक्य ने भारत का सम्राट बनाया।
🔹 गुप्त वंश — घोड़े का व्यापार करने वाले, 140 वर्षों तक स्वर्ण युग।
👉 प्राचीन काल का 92% शासन उन्हीं वर्गों का रहा जिन्हें आज “दलित-पिछड़ा” कहा जाता है।
तो फिर शोषण कहाँ था?
⚔️ मध्यकाल और मराठा युग
🔹 बाजीराव पेशवा ने
— ग्वाले गायकवाड़ को गुजरात का राजा बनाया
— चरवाहा होलकर को मालवा का शासक।
🔹 अहिल्याबाई होलकर — शिवभक्त, मंदिर और गुरुकुलों की निर्माता।
🔹 मीरा बाई (राजपूत) के गुरु — चर्मकार रविदास,
और रविदास के गुरु — ब्राह्मण रामानंद।
👉 यहाँ भी कोई जातिगत दीवार नहीं दिखती।
⛓️ असल गंदगी कब शुरू हुई?
🔻 मुगल काल में — पर्दा, गुलामी, बाल विवाह।
🔻 अंग्रेज़ी शासन (1800–1947) में —
“Divide & Rule” और जाति की सख़्त दीवारें।
📚 अंग्रेज अधिकारी Nicholas Dirks की किताब “Castes of Mind” बताती है
कैसे अंग्रेजों ने जातिवाद को मजबूत किया
और कैसे कुछ स्वार्थी नेताओं ने उसे राजनीति बना दिया।
🌍 मेगास्थनीज, फाहियान, ह्वेनसांग, अलबरूनी —
किसी भी विदेशी यात्री ने नहीं लिखा कि भारत में जातिगत शोषण था।
🚩 निष्कर्ष
👉 प्राचीन भारत = योग्यता, कर्म और समरसता
👉 जातिवाद = औपनिवेशिक साजिश + आधुनिक राजनीति
अगर इतिहास सच में जानना है,
तो किताबें पढ़िए — न कि प्रोपेगेंडा।
✊ सच कड़वा हो सकता है,
लेकिन इतिहास झूठ नहीं बोलता।

25/01/2026

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