Dr APJ Abdul Kalam Institute of Technology, Tanakpur

Dr APJ Abdul Kalam Institute of Technology, Tanakpur Dr. APJ Abdul Kalam Government Institute of Technology, Tanakpur is established by Government of Uttarakhand.

( Campus Institute of Veer Madho Singh Bhandari Uttarakhand Technical University, Dehradun)

Smart India Hackathon 2026 – Internal HackathonDr. A.P.J. Abdul Kalam Government Institute of Technology, Tanakpur is pr...
10/09/2026

Smart India Hackathon 2026 – Internal Hackathon

Dr. A.P.J. Abdul Kalam Government Institute of Technology, Tanakpur is proud to organize the SIH 2026 Internal Hackathon, providing our students with an opportunity to showcase their innovative ideas, creativity and problem-solving skills.

💡 Innovate. Build. Solve. Transform.

🇮🇳 Let’s Innovate for a Better India!

Institute Level Spot Counselling  2026-27
02/09/2026

Institute Level Spot Counselling 2026-27

Walk in Interview for Guest Faculty
26/08/2026

Walk in Interview for Guest Faculty

जिलाधिकारी चम्पावत ने AKGIT में विद्यार्थियों को दिया समाज के विकास में इंजीनियरों की भूमिका पर प्रेरणादायी व्याख्यानदिन...
24/08/2026

जिलाधिकारी चम्पावत ने AKGIT में विद्यार्थियों को दिया समाज के विकास में इंजीनियरों की भूमिका पर प्रेरणादायी व्याख्यान

दिनांक 22 अगस्त 2026 को वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड प्रौद्योगिकी संस्थान देहरादून के परिसर संस्थान डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम राजकीय प्रौद्योगिकी संस्थान (AKGIT), टनकपुर में चल रहे बी.टेक प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राओं के इंडक्शन प्रोग्राम के अंतर्गत शनिवार को विशेषज्ञ व्याख्यान सत्र का आयोजन किया गया। इस अवसर पर चम्पावत के जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार ने बतौर विशेषज्ञ सहभागिता करते हुए विद्यार्थियों को “Role of Engineers in the Development of Society” विषय पर प्रेरणादायी एवं ज्ञानवर्धक व्याख्यान दिया।

जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को बताया कि इंजीनियर केवल तकनीकी समस्याओं का समाधान करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला जिम्मेदार नागरिक भी होता है। उन्होंने विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक उत्तरदायित्व, नवाचार, अनुशासन एवं सकारात्मक सोच को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने छात्र-छात्राओं के साथ संवाद करते हुए उनके प्रश्नों का उत्तर दिया तथा करियर काउंसलिंग एवं भविष्य की तैयारी के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए प्रभावी स्टडी स्ट्रेटेजी बनाने, समय का सदुपयोग करने, नियमित अध्ययन करने तथा अपने लक्ष्य के अनुरूप निरंतर प्रयास करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपने रुचि के क्षेत्र की पहचान कर स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करें और उसके लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य करें।

इस अवसर पर जिलाधिकारी ने संस्थान में निर्माणाधीन महिला छात्रावास का भी दौरा किया। यह छात्रावास 01 सितम्बर 2026 को मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा उद्घाटित किया जाना प्रस्तावित है। जिलाधिकारी ने छात्रावास में चल रही तैयारियों का जायजा लिया तथा संबंधित अधिकारियों एवं संस्थान के अधिकारियों से व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने छात्रावास के सुचारु संचालन एवं विद्यार्थियों के लिए आवश्यक सुविधाओं की तैयारियों का भी निरीक्षण किया।

कार्यक्रम के अंत में संस्थान के निदेशक प्रो. हरद्वारी लाल मंडोरिया ने जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार का संस्थान में पधारने एवं विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करने के लिए आभार व्यक्त किया। निदेशक महोदय द्वारा जिलाधिकारी को शॉल एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम ने बी.टेक प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा के साथ समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने, बेहतर करियर की दिशा निर्धारित करने तथा लक्ष्य प्राप्ति के लिए अनुशासित एवं योजनाबद्ध प्रयास करने की प्रेरणा प्रदान की।

Institute level Spot Counselling 2026-27
20/08/2026

Institute level Spot Counselling 2026-27

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी संस्थान, टनकपुर में 80वाँ स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास एवं देशभक्ति के साथ मनाया गया...
18/08/2026

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी संस्थान, टनकपुर में 80वाँ स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास एवं देशभक्ति के साथ मनाया गया
दिनांक 15 अगस्त 2026 को वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, देहरादून के परिसर संस्थान डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी संस्थान, टनकपुर में देश का 80वाँ स्वतंत्रता दिवस बड़े उत्साह, उल्लास एवं देशभक्ति की भावना के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के निदेशक प्रो. हरद्वारी लाल मंडोरिया द्वारा ध्वजारोहण,राष्ट्रगीत एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ।
इस अवसर पर निदेशक प्रो. हरद्वारी लाल मंडोरिया ने अपने संबोधन में सभी मुख्य अतिथियों, प्रबंधन समिति के सदस्यगण, संकाय सदस्यों, गैर-शिक्षण कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों को 80वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव मनाने का दिन नहीं है, बल्कि यह देश की स्वतंत्रता के लिए किए गए महान संघर्ष, त्याग एवं बलिदान को स्मरण करने का अवसर है। उन्होंने महात्मा गांधी, भगत सिंह, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद सहित देश के कोने-कोने से आए अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करते हुए कहा कि उनके बलिदान के कारण ही आज हम एक स्वतंत्र, संप्रभु एवं लोकतांत्रिक राष्ट्र में स्वतंत्रता के साथ जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
निदेशक महोदय ने कहा कि वर्ष 1947 में भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश को एक सूत्र में पिरोने, राष्ट्र की एकता एवं अखंडता को मजबूत करने तथा बुनियादी संसाधनों का विकास करने की थी। आज 21वीं सदी में स्वतंत्रता के मायने और अधिक व्यापक हो गए हैं। वर्तमान समय में वास्तविक स्वतंत्रता केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता एवं तकनीकी आत्मनिर्भरता भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
एक इंजीनियरिंग संस्थान के निदेशक के रूप में उन्होंने स्वतंत्रता को तकनीकी दृष्टिकोण से जोड़ते हुए कहा कि आज के दौर में किसी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता में निहित है। उन्होंने कहा कि बीते दशकों में भारत ने सुई से लेकर सुपरकंप्यूटर, अंतरिक्ष अभियानों, डिजिटल तकनीक और आधुनिक वैज्ञानिक उपलब्धियों तक का लंबा सफर तय किया है। इस विकास यात्रा में भारतीय इंजीनियरों, वैज्ञानिकों एवं तकनीकी विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज देश की सुरक्षा और प्रगति में केवल सीमाओं पर तैनात जवानों की ही भूमिका नहीं है, बल्कि प्रयोगशालाओं, शोध संस्थानों एवं तकनीकी संस्थानों में कार्य कर रहे युवा इंजीनियर भी राष्ट्र निर्माण के महत्वपूर्ण प्रहरी हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, रिन्यूएबल एनर्जी, स्पेस टेक्नोलॉजी एवं डिजिटल तकनीक के इस युग में जो देश तकनीकी नेतृत्व करेगा, वही वैश्विक स्तर पर नेतृत्व करने की क्षमता रखेगा।
निदेशक महोदय ने ‘मेक इन इंडिया’ एवं ‘डिजिटल इंडिया’ की दिशा में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत अब केवल विदेशों में विकसित तकनीकों का उपभोक्ता नहीं रहना चाहता, बल्कि अपने देश में अत्याधुनिक तकनीकों एवं उत्पादों का विकास कर उन्हें वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। चिप मैन्युफैक्चरिंग से लेकर डिफेंस टेक्नोलॉजी तक भारत आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को वर्तमान समय की महत्वपूर्ण तकनीकी क्रांति बताते हुए कहा कि डेटा एवं एआई आने वाले समय में किसी भी देश की प्रगति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि एआई एवं आधुनिक तकनीक का उपयोग केवल तकनीकी उपलब्धि के लिए न करके स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, पर्यावरण एवं आम नागरिकों की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए किया जाए।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए निदेशक महोदय ने कहा कि वे केवल डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थी नहीं हैं, बल्कि ‘विकसित भारत’ के निर्माता हैं। उन्होंने कहा कि संस्थान का परिसर केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह विद्यार्थियों के विचारों, नवाचारों एवं तकनीकी प्रतिभा को विकसित करने और उन्हें वास्तविक समाधान एवं उद्यम में बदलने का मंच बनना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों को नवाचार (Innovation), स्थिरता (Sustainability) एवं उद्यमिता (Entrepreneurship) के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि ऐसी तकनीक विकसित की जानी चाहिए जो भारत के गांवों, आम नागरिकों एवं समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन को सरल और बेहतर बनाए। साथ ही पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए ग्रीन टेक्नोलॉजी पर कार्य करने की आवश्यकता है।
निदेशक महोदय ने विद्यार्थियों को नौकरी खोजने वालों के बजाय नौकरी देने वाले बनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि भारत की युवा शक्ति में जोखिम उठाने, नए विचारों पर कार्य करने और स्टार्टअप के माध्यम से रोजगार के नए अवसर पैदा करने की क्षमता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने तकनीकी ज्ञान को उद्यमिता एवं राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता अपने साथ जिम्मेदारी भी लेकर आती है। संस्थान से शिक्षा प्राप्त करने के बाद विद्यार्थियों का लक्ष्य केवल नौकरी प्राप्त करना नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें समस्या समाधानकर्ता (Problem Solver) बनकर देश की वास्तविक समस्याओं—जैसे जल संकट, प्रदूषण, यातायात एवं बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं—के समाधान के लिए तकनीक का उपयोग करना चाहिए।
निदेशक महोदय ने ‘एथिक्स इन टेक्नोलॉजी’ पर विशेष जोर देते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा के युग में तकनीकी ज्ञान के साथ नैतिक दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है। विद्यार्थियों को ऐसी तकनीक विकसित करनी चाहिए जो मानवता और समाज के हित में हो तथा किसी भी प्रकार से समाज के लिए हानिकारक न हो। उन्होंने विद्यार्थियों को असफलताओं से न घबराने की प्रेरणा देते हुए कहा कि पहला कोड सफल न हो या पहला प्रोटोटाइप असफल हो जाए, तो उसे सीखने का अवसर मानना चाहिए और निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए।
अपने संबोधन के अंत में निदेशक महोदय ने सभी से राष्ट्र निर्माण का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हमें केवल तकनीक के उपभोक्ता नहीं, बल्कि तकनीक के सर्जक बनना है। अपने ज्ञान, अनुसंधान एवं नवाचार का उपयोग समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन को बेहतर बनाने तथा भारत को ‘मेक इन इंडिया’ एवं ‘डिजाइन इन इंडिया’ का वैश्विक केंद्र बनाने में योगदान देने का संकल्प लेना चाहिए।
कार्यक्रम में संस्थान के डिप्टी रजिस्ट्रार डॉ. अभिषेक पाठक, एकेडमिक डीन डॉ. अंजली सिंह सहित समस्त शिक्षकगण एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे। सभी ने स्वतंत्रता दिवस समारोह में उत्साहपूर्वक सहभागिता की तथा राष्ट्र की एकता, अखंडता एवं प्रगति के प्रति अपने दायित्वों को निभाने का संकल्प लिया।
समारोह का समापन धन्यवाद ज्ञापन एवं सभी प्रतिभागियों को मिठाई वितरण के साथ हुआ। स्वतंत्रता दिवस का यह आयोजन स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग एवं बलिदान को स्मरण करने के साथ-साथ तकनीकी आत्मनिर्भरता, नवाचार, अनुसंधान, उद्यमिता एवं विकसित भारत के निर्माण के प्रति सामूहिक संकल्प का संदेश देता है।
जय हिन्द! जय भारत!

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम राजकीय प्रौद्योगिकी संस्थान में हर्षोल्लास से मनाया गया 11वां स्थापना दिवस।टनकपुर, 8 अगस्त 2026...
10/08/2026

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम राजकीय प्रौद्योगिकी संस्थान में हर्षोल्लास से मनाया गया 11वां स्थापना दिवस।

टनकपुर, 8 अगस्त 2026: डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम राजकीय प्रौद्योगिकी संस्थान, टनकपुर में संस्थान का 1०वां स्थापना दिवस हर्षोल्लास, उमंग एवं आत्मीयता के साथ मनाया गया। यह अवसर केवल संस्थान की गौरवपूर्ण यात्रा का उत्सव नहीं था, बल्कि महान वैज्ञानिक, भारत रत्न एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के आदर्शों, विचारों और युवा शक्ति के प्रति उनके विश्वास को स्मरण करने का भी अवसर बना।

कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) एच.एल. मंडोरिया द्वारा विधिवत दीप प्रज्वलित कर किया गया। ज्ञान और प्रकाश के प्रतीक दीप प्रज्वलन के साथ ही स्थापना दिवस समारोह का शुभारंभ हुआ।

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जीवन सदैव युवाओं को बड़े सपने देखने, उन सपनों को लक्ष्य में बदलने तथा निरंतर परिश्रम के माध्यम से उन्हें साकार करने की प्रेरणा देता रहा है। शिक्षा, विज्ञान, तकनीकी नवाचार और राष्ट्र निर्माण के प्रति उनकी सोच आज भी देश के युवाओं के लिए मार्गदर्शक है। इसी प्रेरणादायी भावना के साथ संस्थान के विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने स्थापना दिवस को विभिन्न सांस्कृतिक एवं रचनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से संस्थान को समर्पित किया।

कार्यक्रम का मंच संचालन सहायक प्राध्यापक अंजना मैम एवं छात्र प्रियांशु महर द्वारा प्रभावी एवं गरिमापूर्ण ढंग से किया गया। दोनों के कुशल मंच संचालन ने कार्यक्रम के विभिन्न चरणों को सहजता से जोड़े रखा तथा पूरे समारोह में उत्साह एवं ऊर्जा बनाए रखी।

समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रंगारंग प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। संस्थान के शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभाओं का प्रदर्शन करते हुए संस्थान के प्रति अपने प्रेम, सम्मान और कृतज्ञता को प्रस्तुतियों के माध्यम से अभिव्यक्त किया।

इस अवसर पर सहायक प्राध्यापक श्री शुभम थपलियाल एवं श्री योगेश चमोला ने सुंदर गढ़वाली गीत प्रस्तुत कर पूरे वातावरण को उत्तराखंड की लोक संस्कृति के रंग में रंग दिया। उनकी प्रस्तुति को उपस्थित दर्शकों ने खूब सराहा।

इसी क्रम में संस्थान के नॉन-टीचिंग स्टाफ सदस्य श्री मोहित गरकोटी ने मनमोहक कुमाऊंनी गीत प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति ने कुमाऊं की लोक संस्कृति और संगीत की मधुरता को कार्यक्रम में जीवंत कर दिया तथा उपस्थित लोगों को उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपरा से जोड़ा।

कार्यक्रम में साहित्य और कविता की भी सुंदर छटा देखने को मिली। संस्थान के स्टाफ सदस्य श्री अभिजीत यादव ने अपनी पुस्तक ‘रंगीन दुनिया के ब्लैक एंड व्हाइट रंग ’ से शायरी प्रस्तुत की। उनकी प्रस्तुति ने समारोह में साहित्यिक संवेदना, भावनात्मक गहराई और विचारों का सुंदर समावेश किया।

वहीं, छात्र प्रियांशु महर ने अपनी मधुर आवाज में भक्ति गीत प्रस्तुत कर वातावरण को आध्यात्मिक एवं भावपूर्ण बना दिया। उनकी प्रस्तुति ने समारोह में एक अलग ही भावनात्मक रंग भर दिया और उपस्थित सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इन सभी प्रस्तुतियों की विशेषता यह रही कि इन्हें संस्थान को समर्पित किया गया। विद्यार्थियों एवं संस्थान के सदस्यों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से यह अभिव्यक्त किया कि संस्थान ने उनके जीवन में केवल शिक्षा का माध्यम बनने से कहीं अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संस्थान ने उन्हें ज्ञान, आत्मविश्वास, अवसर, मार्गदर्शन, अनुभव और अपनी प्रतिभा को पहचानने एवं निखारने का मंच प्रदान किया है।

स्थापना दिवस के अवसर पर संस्थान की 1० वर्षों की यात्रा और उपलब्धियों को भी स्मरण किया गया। इन वर्षों में संस्थान ने शिक्षा एवं तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ नवाचार, रचनात्मकता, कौशल विकास, उद्यमिता एवं विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देने की दिशा में निरंतर प्रयास किए हैं। संस्थान के विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों की उपलब्धियां इस गौरवपूर्ण यात्रा को और समृद्ध बनाती हैं।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) एच.एल. मंडोरिया ने विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों को संबोधित किया। उनका संबोधन समारोह का सबसे प्रेरणादायी एवं यादगार क्षण रहा। उन्होंने संस्थान की 1० वर्षों की यात्रा, उपलब्धियों और भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए सभी को निरंतर उत्कृष्टता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

अपने संबोधन में निदेशक ने विद्यार्थियों को डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के जीवन, संघर्ष, सरलता और दूरदर्शी सोच से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने, निरंतर सीखते रहने, चुनौतियों एवं असफलताओं से घबराए बिना आगे बढ़ने तथा अपनी प्रतिभा एवं ज्ञान का उपयोग समाज और राष्ट्र के विकास में करने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान की वास्तविक पहचान केवल उसके भवनों और संसाधनों से नहीं होती, बल्कि उसकी पहचान उसके विद्यार्थियों की सफलता, शिक्षकों के समर्पण तथा संस्थान के प्रत्येक सदस्य के योगदान से बनती है। उन्होंने सभी से संस्थान की गरिमा एवं प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के अंत में उप कुलसचिव (Deputy Registrar) डॉ. अभिषेक पाठक द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। उन्होंने स्थापना दिवस समारोह को सफल बनाने में योगदान देने वाले निदेशक, समस्त शिक्षकों, नॉन-टीचिंग स्टाफ एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने सभी प्रतिभागियों की सराहना करते हुए संस्थान की प्रगति एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

धन्यवाद ज्ञापन के साथ स्थापना दिवस समारोह का सफलतापूर्वक समापन हुआ। पूरे कार्यक्रम ने संस्थान परिवार में गौरव, अपनत्व, उत्साह और नई ऊर्जा का संचार किया।

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम राजकीय प्रौद्योगिकी संस्थान का 11वां स्थापना दिवस केवल एक समारोह नहीं, बल्कि 1० वर्षों की उपलब्धियों, अनगिनत यादों, आपसी जुड़ाव और भविष्य के नए संकल्पों का उत्सव बनकर सामने आया ।

01/08/2026





डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की 11वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन27 जुलाई 2026। वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड प्र...
29/07/2026

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की 11वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन

27 जुलाई 2026। वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, देहरादून के परिसर संस्थान डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम राजकीय प्रौद्योगिकी संस्थान, टनकपुर में भारत के पूर्व राष्ट्रपति, महान वैज्ञानिक, भारत रत्न एवं "मिसाइल मैन" के नाम से विख्यात डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की 11वीं पुण्यतिथि के अवसर पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक, प्राध्यापकगण, अधिकारी, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राओं ने सहभागिता करते हुए डॉ. कलाम के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की ।

इस अवसर पर संस्थान के निदेशक प्रो. हरद्वारी लाल मंडोरिया ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम केवल एक महान वैज्ञानिक ही नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी विचारक, प्रेरणादायी शिक्षक, कुशल प्रशासक एवं सच्चे राष्ट्रभक्त थे। उन्होंने अपने ज्ञान, परिश्रम और विनम्र व्यक्तित्व से सम्पूर्ण विश्व में भारत का गौरव बढ़ाया। उनका जीवन युवाओं के लिए समर्पण, अनुशासन, ईमानदारी, नवाचार एवं राष्ट्र निर्माण का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि डॉ. कलाम सदैव युवाओं को बड़े सपने देखने तथा उन्हें साकार करने के लिए निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा देते रहे। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक नागरिक को जाति, धर्म, भाषा एवं क्षेत्रीय भेदभाव से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए देश की उन्नति एवं विकास में अपना योगदान देना चाहिए।

श्रद्धांजलि सभा के दौरान निदेशक प्रो. हरद्वारी लाल मंडोरिया ने डॉ. कलाम के वैज्ञानिक योगदान, शिक्षा के क्षेत्र में उनके अमूल्य कार्यों तथा विकसित भारत के उनके सपने पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारत के सामरिक एवं अंतरिक्ष कार्यक्रमों को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में डॉ. कलाम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। स्वदेशी मिसाइल तकनीक के विकास में उनके योगदान के कारण उन्हें "मिसाइल मैन ऑफ इंडिया" के रूप में विश्वभर में सम्मान प्राप्त हुआ। राष्ट्रपति के रूप में भी उन्होंने सदैव विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं एवं युवाओं को विज्ञान, नवाचार और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए प्रेरित किया। डॉ. कलाम का व्यक्तित्व सादगी, विनम्रता, कर्मनिष्ठा एवं सकारात्मक सोच का अद्भुत संगम था। वे मानते थे कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण का सबसे प्रभावी साधन है। उनके प्रेरक विचार—"सपने वे नहीं जो हम सोते समय देखते हैं, सपने वे हैं जो हमें सोने नहीं देते"—आज भी करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी कर्मचारियों ने डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के आदर्शों का अनुसरण करने, उत्कृष्ट शिक्षा एवं अनुसंधान को बढ़ावा देने, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के माध्यम से समाज और राष्ट्र की प्रगति में सक्रिय योगदान देने तथा एक विकसित, समृद्ध एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण हेतु निरंतर कार्य करने का सामूहिक संकल्प लिया।

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Tanakpur
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