Navyoga Gram - नवयोग ग्राम Dr. Navdeep Joshi

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With a strong belief in “Vashudeva Kutumbakam” Dr Navdeep Joshi, who was born in the centre of spiritual power, Himalaya region Manglaharanm (Tanakpur) Uttarakhand, has been fully engaged in social work and spiritual programs.

श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के योग विज्ञान विभाग के डॉ. नवदीप जोशी द्वारा विश्वविद्यालय के ...
03/06/2026

श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के योग विज्ञान विभाग के डॉ. नवदीप जोशी द्वारा विश्वविद्यालय के शैक्षणिक योगदान एवं प्रवेश संबंधी जानकारी पर आधारित लेख प्रतिष्ठित राष्ट्रीय समाचार पत्र अमर उजाला में प्रकाशित हुआ है।
यह लेख विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता, संस्कृत एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के संवर्धन तथा विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध प्रवेश अवसरों को व्यापक जनसमुदाय तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण प्रयास है।


Ministry of Ayush, Government of India Nitin Nabin Dharmendra Pradhan
Pushkar Singh Dhami Lt Gen Gurmit Singh Acharya Devvrat Ajay Tamta Anil Baluni Prataprao Jadhav
University Grants Commission
Amar Ujala

श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के योग विज्ञान विभाग के डॉ. नवदीप जोशी द्वारा विश्वविद्यालय के शैक्षणिक योगदान एवं प्रवेश संबंधी जानकारी पर आधारित लेख प्रतिष्ठित राष्ट्रीय समाचार पत्र अमर उजाला में प्रकाशित हुआ है।
यह लेख विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता, संस्कृत एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के संवर्धन तथा विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध प्रवेश अवसरों को व्यापक जनसमुदाय तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण प्रयास है।


Ministry of Education
Dharmendra Pradhan
University Grants Commission
Amar Ujala

Governor Lieutenant General Gurmit Singh (Retd.) today unveiled the books The Leadership Funnel and Thought to Ink, edit...
31/05/2026

Governor Lieutenant General Gurmit Singh (Retd.) today unveiled the books The Leadership Funnel and Thought to Ink, edited by Prof. K. P. Singh, in New Delhi. These books are dedicated to Uttarakhand’s journey of development, public service, and the spirit of “Nation First.”
Speaking on the occasion, the Governor said that these books are not merely publications but living documents that capture Uttarakhand’s development journey, commitment to public service, and vision for national welfare. He stated that The Leadership Funnel is not a reflection of his individual tenure alone, but of the collective journey of Uttarakhand’s youth, women, soldiers, teachers, scientists, and dedicated contributors to society.
The Governor remarked that throughout his more than four decades of service in the Indian Army and his tenure as Governor, the principle of “Nation First” has remained the cornerstone of his life. He emphasized that the path to a Developed India passes through developed states, and continuous efforts are being made to position Uttarakhand as a leader in education, research, innovation, tourism, culture, and spirituality.
Referring to Thought to Ink, he said that the book is not merely a compilation of ideas but a meaningful endeavor to foster dialogue on nation-building, education, youth empowerment, social awareness, and public participation. He expressed confidence that the books would inspire young people, researchers, administrators, and various sections of society.
The Governor congratulated Prof. K. P. Singh, publisher Mr. Sandeep Jain, and the team of Atal Prakashan for this remarkable achievement and appreciated their research, dedication, and hard work.
Lt Gen Gurmit Singh Acharya Devvrat Pushkar Singh Dhami Mansukh Mandaviya Prataprao Jadhav Nitin Nabin Yogi Adityanath Office

जीवन संतुलित करने की कला है नादयोग ध्यान - नवदीप जोशी Speaking tree, संपादकीय नवभारत टाइम्स में Pushkar Singh Dhami Lt G...
29/05/2026

जीवन संतुलित करने की कला है नादयोग ध्यान - नवदीप जोशी
Speaking tree, संपादकीय नवभारत टाइम्स में
Pushkar Singh Dhami Lt Gen Gurmit Singh Acharya Devvrat Mansukh Mandaviya Ajay Tamta Morarji Desai National Institute of Yoga Prataprao Jadhav Nitin Nabin CMO Delhi

नादयोग चिकित्सा कार्यशाला बनारस हिंदू विश्वविद्यालय
26/05/2026

नादयोग चिकित्सा कार्यशाला बनारस हिंदू विश्वविद्यालय

रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय।टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ परि जाय॥जब रिश्तों को टूटना होता है, तब प्रायः परि...
21/05/2026

रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय।टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ परि जाय॥
जब रिश्तों को टूटना होता है, तब प्रायः परिवार के कुछ सदस्य एकजुट होकर अपनी भूलों को न देखकर दूसरों पर दोषारोपण करने लगते हैं। इसका मूल कारण धैर्य की कमी ,घर के खर्जे,व्यापार में कमी, मानसिक दुर्बलता तथा निःस्वार्थ प्रेम का क्षीण हो जाना है। परिणामस्वरूप जब संबंध टूटते हैं, तो पूरा परिवार बिखर जाता है। यद्यपि किसी एक व्यक्ति को दोषी ठहराया नही जा सकता है, तथापि कटु वाणी और अविवेकपूर्ण व्यवहार ही अधिकांश संबंध-विच्छेद का कारण बनते हैं। उनको यह भी मालूम नही होता इस बिखरे परिवार का प्रभाव बच्चों के भविष्य पर पड़ेगा । इसमें किसी बाहरी व्यक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। क्योंकि वह यह सब घटना करके अपने अहंकार को पुष्ट कर आनंद ले रहा होता है।
कुटुंब प्रबोधन में परिवार को जोड़ने और सुदृढ़ बनाने की प्रक्रिया निम्न प्रकार से वर्णित की जा सकती है—

1. नियमित पारिवारिक मिलन (सप्ताह में एक बार)
परिवार के सभी सदस्यों को सप्ताह में एक बार निश्चित समय पर एकत्र होना चाहिए। इससे परस्पर संवाद, स्नेह और संस्कारों की वृद्धि होती है। बच्चों को प्रारंभ से ही श्रवण-संस्कार प्राप्त होते हैं।
संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्।
(ऋग्वेद 10.191.2)
साथ चलो, साथ बोलो और अपने मनों को एक भाव में जोड़ो।
यह श्लोक पारिवारिक एकता और सामूहिक जीवन की मूल भावना को प्रकट करता है।
2. भजन एवं प्रार्थना (ईश्वर से जुड़ाव)
परिवार की बैठकों का प्रारंभ ईश्वर-भक्ति, प्रार्थना अथवा भजन से होना चाहिए। इससे घर में सात्त्विकता और आध्यात्मिक वातावरण निर्मित होता है।
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्॥
सभी सुखी हों, सभी निरोग रहें, सभी मंगल देखें और कोई भी दुःखी न हो।
यह प्रार्थना परिवार में सार्वभौमिक मंगलभाव उत्पन्न करती है।
3. सहभोजन (एक साथ भोजन)
परिवार के सभी सदस्यों को मिलकर भोजन करना चाहिए। सहभोजन केवल भोजन ग्रहण करना नहीं, बल्कि प्रेम और आत्मीयता का उत्सव है।
अन्नं ब्रह्मेति व्यजानात्।
(तैत्तिरीयोपनिषद्)
अन्न को ब्रह्मस्वरूप समझना चाहिए।
सामूहिक सात्त्विक भोजन परिवार में एकत्व और कृतज्ञता का संस्कार उत्पन्न करता है।
4. सार्थक संवाद एवं आत्मीय चर्चा
भोजन के पश्चात परिवार में आत्मीय संवाद होना चाहिए। इसमें पूर्वजों के आदर्श, प्रेरक प्रसंग और जीवन-मूल्यों की चर्चा हो।
प्रियवाक्यप्रदानेन सर्वे तुष्यन्ति जन्तवः।
तस्मात्तदेव वक्तव्यं वचने का दरिद्रता॥
मधुर वचन बोलने से सभी प्रसन्न होते हैं; इसलिए सदैव प्रिय वचन ही बोलने चाहिए।
कटु वाणी संबंधों को तोड़ती है, जबकि मधुर वाणी परिवार को जोड़ती है।
5. छह स्तंभों का पालन
(क) भजन – आध्यात्मिक वातावरण
भज गोविन्दं भज गोविन्दं गोविन्दं भज मूढमते।
(आदि शंकराचार्य)
ईश्वर-स्मरण जीवन को स्थिरता और शांति प्रदान करता है।
(ख) भोजन – सात्त्विक आहार
आहारशुद्धौ सत्त्वशुद्धिः।
(छान्दोग्य उपनिषद्)
आहार की शुद्धि से मन की शुद्धि होती है।
(ग) भाषा
सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् न ब्रूयात् सत्यमप्रियं।
(मनुस्मृति)
सत्य बोलो, प्रिय बोलो, किंतु अप्रिय सत्य भी कठोरता से न कहो।
(घ) भूषा – मर्यादित पहनावा
शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्।
यह शरीर धर्माचरण का प्रथम साधन है; अतः मर्यादा और शुचिता आवश्यक है।
(ङ) भ्रमण – तीर्थ एवं प्रेरक यात्राएँ
अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्।
उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥
संकुचित बुद्धि वाले लोग अपना-पराया सोचते हैं; उदार चरित्र वालों के लिए पूरी पृथ्वी परिवार है।
(च) गृहं तु गृहिणीहीनम् अरण्यसदृशं स्मृतम्।
संस्कार, प्रेम और सद्भाव के बिना घर वन के समान सूना होता है।
6. समाज एवं राष्ट्र के प्रति दायित्व
परिवार केवल अपने सुख तक सीमित न रहे; समाज और राष्ट्र के प्रति भी उत्तरदायित्व निभाए।
परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः
परोपकाराय वहन्ति नद्यः।
परोपकाराय दुहन्ति गावः
परोपकारार्थमिदं शरीरम्॥
भावार्थ
वृक्ष, नदियाँ, गौएँ और यह शरीर—सब परोपकार के लिए हैं।
7. अन्य परिवारों से आत्मीय संबंध
अपने परिवार के साथ-साथ अन्य परिवारों से भी आत्मीय संबंध स्थापित करने चाहिए, जिससे सामाजिक समरसता बढ़े।
> मित्रस्य चक्षुषा सर्वाणि भूतानि समीक्षन्ताम्।
(यजुर्वेद)
सभी प्राणियों को मित्रभाव से देखो।
परिवार केवल रक्त-संबंधों का समूह नहीं, बल्कि प्रेम, त्याग, संवाद, संस्कार और सहअस्तित्व की जीवंत परंपरा है। जब परिवार में मधुर वाणी, सामूहिक प्रार्थना, सहभोजन और आत्मीय संवाद जीवित रहते हैं, तब संबंध स्थायी बनते हैं।
Lt Gen Gurmit Singh Acharya Devvrat Pushkar Singh Dhami Mansukh Mandaviya Nitin Nabin Ajay Tamta Morarji Desai National Institute of Yoga Ministry of Ayush, Government of India Prataprao Jadhav

ॐ शांति
19/05/2026

ॐ शांति

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी (सेवानिवृत्त) जी के निधन का दुःखद समाचार प्राप्त हुआ।

श्री खंडूरी जी ने भारतीय सेना में रहते हुए राष्ट्र सेवा, अनुशासन और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। सैन्य जीवन से लेकर सार्वजनिक जीवन तक उनका व्यक्तित्व राष्ट्रहित और जनसेवा के प्रति समर्पित रहा।

राजनीतिक जीवन में उन्होंने उत्तराखंड के विकास, सुशासन, पारदर्शिता और ईमानदार कार्यशैली की मजबूत पहचान बनाई। एक जननेता के रूप में उन्होंने प्रदेश के विकास हेतु अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए और अपनी सादगी, स्पष्टवादिता एवं कार्यकुशलता से लोगों के हृदय में विशेष स्थान बनाया। उनका निधन उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है।

ईश्वर से प्रार्थना है कि पुण्यात्मा को श्रीचरणों में स्थान तथा शोकाकुल परिजनों को यह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

Summer healthy tips on GNT Aaj Tak चैनल  Lt Gen Gurmit Singh Acharya Devvrat Pushkar Singh Dhami Mansukh Mandaviya Prata...
19/05/2026

Summer healthy tips on GNT Aaj Tak चैनल Lt Gen Gurmit Singh Acharya Devvrat Pushkar Singh Dhami Mansukh Mandaviya Prataprao Jadhav Ministry of Ayush, Government of India Morarji Desai National Institute of Yoga

मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (Bandhavgarh Tiger Reserve) में पर्यटकों के बीच लोकप्रिय 'पुजारी' बाघ (8 वर्षीय) की...
12/05/2026

मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (Bandhavgarh Tiger Reserve) में पर्यटकों के बीच लोकप्रिय 'पुजारी' बाघ (8 वर्षीय) की मौत हो गई है।
“पुजारी” लंबे समय से खितौली क्षेत्र में अपना वर्चस्व बनाए हुए था। लेकिन उम्र बढ़ने के साथ उसे नए और अधिक शक्तिशाली युवा बाघों से चुनौती मिलने लगी। जंगल में क्षेत्रीय प्रभुत्व को लेकर बाघों के बीच संघर्ष सामान्य माना जाता है, किंतु पिछले कुछ समय से खितौली क्षेत्र में बाघों की बढ़ती गतिविधियों के कारण टकराव की स्थिति लगातार बन रही थी।

इस घटना से मनुष्यों को भी एक महत्वपूर्ण सीख लेने की आवश्यकता है। बाहर से जंगल भले ही शांत और सरल दिखाई दे, परंतु वन्य जीवन में भी हर स्तर पर संघर्ष और प्रतिस्पर्धा मौजूद है। इतना शक्तिशाली होने के बावजूद भी बाघ अंततः हार गया। जबकि मनुष्य के लिए भारतीय संस्कृति में सुखी, संतुलित और शांतिपूर्ण जीवन जीने के अनेक सिद्धांत बताए गए हैं। फिर भी मनुष्य अक्सर अहंकार, स्पर्धा और मोह में फँसकर स्वयं अपने जीवन को संघर्षमय बना लेता है। Lt Gen Gurmit Singh Acharya Devvrat Pushkar Singh Dhami Ajay Tamta Mansukh Mandaviya Prataprao Jadhav Anil Baluni Yogi Adityanath Office Nitin Nabin

* ACCREDITED WITH GRNAACश्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्लीकेन्द्रीय विश्वविद्यालय - 110...
10/05/2026

* ACCREDITED WITH GR

NAAC

श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली

केन्द्रीय विश्वविद्यालय - 110016

बी 4, कुतुब सांस्थानिक क्षेत्र, नई दिल्ली

योग विज्ञान विभाग

में एम. ए. योग एवं बी. ए. कक्षा
एवं पी. जी. डिप्लोमा (योग) एवं पी. जी. डिप्लोमा (प्राकृतिक चिकित्सा) में

नॉन सी यू टी (NON CUT)

के माध्यम से वर्ष 2026-27 सत्र में प्रवेश हेतु संपर्क करें

विभागाध्यक्ष योग विज्ञान विभाग

प्राचीन भारतीय ज्ञानपरम्परा के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से विश्वविद्यालय के योग विभाग में विभिन्न पाठ्यक्रमों हेतु प्रवेश प्रारम्भ हैं। योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा का अध्ययन अध्यापन के साथ साथ अनुसन्धान कराती हैं।

इन शास्त्रीय विषयों के गहन अध्ययन एवं अनुसन्धान के लिये विद्यार्थियों को-

भारतीय प्राचीन ज्ञानपरम्परा का सम्यकू ज्ञान,

शास्त्रीय अध्ययन एवं अनुसन्धान की सुविधा,

विविध शैक्षिक एवं प्रशासनिक सेवाओं में उपयोगी मार्गदर्शन,

तथा विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु उपयुकत शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराया जाता हैं।

योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा में रचि रखने वाले अभ्यर्थियों से प्रवेश हेतु आवेदन आमंत्रित हैं।

इच्छुक छात्र-छात्राएँ विश्वविद्यालल की प्रवेश प्रक्रिया,

पात्रता एवं अन्य विवरण विश्वविद्यालल की

आधिकारिक वेबसाइट से प्राप्त कर सकते हैं।

विश्वविद्यालय की सुविधाएँ

सम्पूर्ण परिसर WIFI से कनेक्ट हैं

अत्यन्त सुन्दर एवं अध्ययन के अनुकूल वातावरण

छात्रों के लिये छात्रावास की सुविधा

समृद्ध पुस्तकालय की सुविधा

प्रत्येक छात्र को आकर्षक छात्रवृत्ति

कैंटीन की सुविधा

क्रीड़ा की सुविधा

जिम की सुविधा

सम्पूर्ण परिसर सकारात्मक उर्जा से युक्त हैं।

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अधिक जानकारी हेतु संपर्क करें :
योग विज्ञान विभाग

श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली।

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा को आदरपूर्वक “नादयोग विज्ञान” पुस्तक भेंट करने...
08/05/2026

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा को आदरपूर्वक “नादयोग विज्ञान” पुस्तक भेंट करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
यह भेंट केवल एक पुस्तक का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा, योग और नाद विज्ञान के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति समर्पण का प्रतीक है। इस अवसर पर नादयोग के आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक आयामों पर सार्थक चर्चा भी हुई।
भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रचार-प्रसार हेतु माननीय कुलपति महोदय का मार्गदर्शन और प्रेरणा अत्यंत महत्वपूर्ण एवं उत्साहवर्धक है। Yogi Adityanath Office Lt Gen Gurmit Singh Acharya Devvrat Pushkar Singh Dhami Jadhav Mansukh Mandaviya Nitin Nabin Dr. Bihari Lal Sharma

Address

Tanakpur
262309

Telephone

+919899651799

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