25/07/2026
🙏 जय श्रीकृष्ण 🙏
“आत्मा ही परमात्मा का सच्चा मित्र है…” ❤️
जब जीवन में सब कुछ छिनने लगे, अपने भी पराए लगने लगें, मेहनत का फल न मिले, आँखों में आँसू हों और दिल में सिर्फ़ दर्द… तब एक बात कभी मत भूलना—भगवान तुम्हें छोड़कर कहीं नहीं गए हैं। वे बस तुम्हारे धैर्य, तुम्हारे विश्वास और तुम्हारे कर्म की परीक्षा ले रहे हैं।
श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता हमें यही सिखाती है।
सुदामा जी के पास देने के लिए धन नहीं था, महँगे उपहार नहीं थे। उनके पास सिर्फ़ मुट्ठी भर तंदुल (चिवड़े) थे और अपने मित्र के लिए सच्चा प्रेम था। वे द्वारका किसी स्वार्थ से नहीं गए थे, बल्कि अपने कृष्ण के दर्शन करने गए थे।
जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण ने अपने सखा को देखा, वे राजसिंहासन छोड़कर नंगे पाँव दौड़ पड़े। उन्होंने सुदामा जी को गले लगाया। वर्षों की दूरी आँसुओं में बह गई। भगवान ने अपने आँसुओं से उनके चरण धोए और प्रेम से उनके लाए हुए तंदुल को ग्रहण किया।
उस दिन दुनिया ने देखा कि भगवान को सोने-चाँदी की नहीं, सच्चे प्रेम और निर्मल हृदय की भूख होती है।
सुदामा जी ने कुछ भी नहीं माँगा… लेकिन भगवान ने बिना माँगे ही सब कुछ दे दिया।
यही तो भगवान हैं…
वे हमारी कही हुई बातें ही नहीं, अनकहे दर्द भी सुन लेते हैं।
वे हमारी झोली नहीं देखते, हमारा विश्वास देखते हैं।
अगर आज तुम्हारी जेब खाली है, लेकिन नीयत साफ़ है…
अगर आज तुम्हारे पास धन कम है, लेकिन ईमानदारी बाकी है…
अगर आज पूरी दुनिया तुम्हें ठुकरा रही है, लेकिन तुम भगवान का नाम नहीं छोड़ रहे…
तो विश्वास रखना, तुम्हारा समय भी ज़रूर बदलेगा।
भगवान के घर देर हो सकती है, लेकिन अंधेर कभी नहीं होता।
जो व्यक्ति सच्चे मन से भगवान को याद करता है, किसी का बुरा नहीं चाहता और ईमानदारी से अपना कर्म करता है, भगवान एक दिन उसका हाथ इस तरह पकड़ते हैं कि फिर उसे पीछे मुड़कर देखने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
इसलिए परिस्थिति चाहे जैसी भी हो… विश्वास मत खोना।
क्योंकि जब इंसान का कोई नहीं होता, तब उसके साथ केवल भगवान होते हैं।
राधे-राधे। जय श्रीकृष्ण। 🙏🌺