23/07/2018
आदरणीय कोसी वासियों किसान, मजदूर, शिक्षक, अभिभावक, माता, बहनों एवं साथियों...
हमारी कइ पीढ़ी गुजर चुके हैं कोसी के त्रासदी को झेलते हुए, हम हजारों के संख्या में अपनों को इसी नदी में बहते डूबते हुए अपने नजरों से देखा है, हम अपने आशियाना को उजड़ते और बहते हुए देखा है, हम अपने बच्चे को भुख और बिमारी से तड़पते हुए देखा है, हम जिस खेत में एड़ी चोटी एक कर फसल लगाते हैं उसको बाढ़ में डूबते हुए देखा है......
मगर.......
मगर आजतक हमें हमारा अधिकार नहीं मिला, कोसी बांध के भीतर 386 गांव को उजाड़ा गया और लाखों कै आबादी को बेघर कर उनके सीने पर बांध बना दिया गया लेकिन आज मुआवजा तक देने को सरकार उचित नहीं समझी, हम आज भी दुसरे प्रदेशों में मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करने को मजबूर हैं, हम अपने परिवार को बच्चे को बेमौत मरने देने को छोड़कर साल के 8 से 10 महीने बाहर रहकर मजदूरी कर पेट पालने को मजबूर हैं...
बहुत रहनुमा आए और गए मगर हमारे दुख दर्द को समझने वाला कोई नहीं नहीं है सब के सब हमारे मजबूरी का फैदा उठाते रहे हैं, हमारे हीं मत प्राप्त कर दिल्ली पटना पहुंचते हैं और हमें हीं अंगुठा दिखाने लगते हैं.... अब नहीं चलेगा ऐसों को सबक सिखाना होगा, हमें अपना हक लड़कर, छीन कर लेना होगा, हमें जगना होगा, संगठित होकर संघर्ष करना होगा... इसी संघर्ष का आगाज कुशहा त्रासदी के 10वें बर्खी से शुरू होने जा रहा है 18 अगस्त 2018 को भपटीयाही कोसी महासेतु के पास एक विशाल जनसभा का आयोजन किया गया है जिसमें आप सभी कोसी पीड़ित जनता सादर आमंत्रित हैं....