26/04/2026
लोककथाओं, धार्मिक ग्रंथों, और मनोवैज्ञानिक प्रतीकों में “शैतान” का अर्थ अक्सर किसी वास्तविक जीव से ज़्यादा अत्यधिक बुरे स्वभाव या विनाशकारी मानसिकता वाले व्यक्ति से भी लगाया जाता है। ऐसे व्यक्तित्व के कुछ सामान्य व्यवहार इस प्रकार बताए जाते हैं:
1. छल-कपट और झूठ
) बार-बार झूठ बोलना, और उस झूठ को अपने झुंड के सारे के जरिए भी छुपाना, और किसी के सामने भी झूठ पे झूठ ही बोलना, लेकिन कुछ भोले-भाले या अनपढ़ किस्म के उनके सामने ही बोले जाने झूठ को भी न पहचान पाते हैं, जैसे सारे चुनाव लड़ें व लड़ने वाले व के सारे छोटे से बड़े चाटुकार घर-2 बैठे, बने सेठ या बनने को किसी भी चुनावी चोर से सांठ गांठ किए हुए, कभी भी या अभी भी, व जारी भी !
) लोगों को धोखा देना, और बार-2 बोलना, और असंख्य गिनती तक ले जाना, वो भी अति चालाक लोमड़ी समझ कर अपने आपको, जैसे सारे चुनाव लड़ें व लड़ने वाले व के सारे छोटे से बड़े चाटुकार घर-2 बैठे, बने सेठ या बनने को किसी भी चुनावी चोर से सांठ गांठ किए हुए, कभी भी या अभी भी, व जारी भी !
) मीठी बातें करके अपना फायदा निकालना, जैसे सारे चुनाव लड़ें व लड़ने वाले व के सारे छोटे से बड़े चाटुकार घर-2 बैठे, बने सेठ या बनने को किसी भी चुनावी चोर से सांठ गांठ किए हुए, कभी भी या अभी भी, व जारी भी !
2. दूसरों को नुकसान पहुँचाने की प्रवृत्ति किसी के भी थोड़ा सा गलत होने या न होने पर भी, भले ही हानि पहुंचाने वाले आप सारी ही ओर फूल गलत क्यों न हों, जैसे सारे चुनाव लड़ें व लड़ने वाले व के सारे छोटे से बड़े चाटुकार घर-2 बैठे, बने सेठ या बनने को किसी भी चुनावी चोर से सांठ गांठ किए हुए, कभी भी या अभी भी, व जारी भी !
) जानबूझकर किसी को दुख देना , जैसे सारे चुनाव लड़ें व लड़ने वाले व के सारे छोटे से बड़े चाटुकार घर-2 बैठे, बने सेठ या बनने को किसी भी चुनावी चोर से सांठ गांठ किए हुए, कभी भी या अभी भी, व जारी भी ! पुराने से नए तक के सारे तक भी!
) दूसरों की कमजोरी का फायदा उठाना, न हो तो भी कोय या बहुत सी उठाने वालों की ओर से बना देना, फिर लाभ ही लाभ उठाते जाना जैसे सारे चुनाव लड़ें व लड़ने वाले व के सारे छोटे से बड़े चाटुकार घर-2 बैठे, बने सेठ या बनने को किसी भी चुनावी चोर से सांठ गांठ किए हुए, कभी भी या अभी भी, व जारी भी !
) हिंसा, अत्याचार या शोषण करना, जैसे सारे चुनाव लड़ें व लड़ने वाले व के सारे छोटे से बड़े चाटुकार घर-2 बैठे, बने सेठ या बनने को किसी भी चुनावी चोर से सांठ गांठ किए हुए, कभी भी या अभी भी, व जारी भी !
3. अत्यधिक स्वार्थ/मतलबी
) केवल अपना फायदा देखना,जैसे सारे चुनाव लड़ें व लड़ने वाले व के सारे छोटे से बड़े चाटुकार घर-2 बैठे, बने सेठ या बनने को किसी भी चुनावी चोर से सांठ गांठ किए हुए, कभी भी या अभी भी, व जारी भी !
) दूसरों की भावनाओं या अधिकारों की परवाह न करना
लालच और शक्ति की भूख, जैसे सारे चुनाव लड़ें व लड़ने वाले व के सारे छोटे से बड़े चाटुकार घर-2 बैठे, बने सेठ या बनने को किसी भी चुनावी चोर से सांठ गांठ किए हुए, कभी भी या अभी भी, व जारी भी !
4. पाप या गलत कामों की ओर उकसाना
) लोगों को गलत रास्ते पर ले जाना,जैसे सारे चुनाव लड़ें व लड़ने वाले व के सारे छोटे से बड़े चाटुकार घर-2 बैठे, बने सेठ या बनने को किसी भी चुनावी चोर से सांठ गांठ किए हुए, कभी भी या अभी भी, व जारी भी !
) नशा, अपराध, धोखा जैसे कामों के लिए प्रेरित करना,जैसे सारे चुनाव लड़ें व लड़ने वाले व के सारे छोटे से बड़े चाटुकार घर-2 बैठे, बने सेठ या बनने को किसी भी चुनावी चोर से सांठ गांठ किए हुए, कभी भी या अभी भी, व जारी भी !
5. घमंड और अहंकार
) खुद को सबसे बड़ा या शक्तिशाली समझना, जैसे सारे चुनाव लड़ें व लड़ने वाले व के सारे छोटे से बड़े चाटुकार घर-2 बैठे, बने सेठ या बनने को किसी भी चुनावी चोर से सांठ गांठ किए हुए, कभी भी या अभी भी, व जारी से भी !
) किसी की सलाह या नियम नहीं मानना,जैसे सारे चुनाव लड़ें व लड़ने वाले व के सारे छोटे से बड़े चाटुकार घर-2 बैठे, बने सेठ या बनने को किसी भी चुनावी चोर से सांठ गांठ किए हुए, कभी भी या अभी भी, व जारी भी, यह नियम सारे से अधिक केवल चुनाव लड़े या लड़ने वालों पर ही सारे से अधिक लागू है, और रहता भी है, और वही चाटने वाले किसी के भी चंगे से चंगे विचारों को अपने तलवे चाटने वाले चुनावी चोरों से सांझा करते हैं, (जैसे लिखने वालों के भी सारी अपनी समझ के बहुत से विचारों चुनावी चोरों के चाटने वाले चाटुकार चुनाव लड़े हुए लड़ने वालों के साथ सांझा करके अपने में शामिल होने का लालच/लोभ दिखा रहे हैं, लेकिन लिखने वालों के वो चुनावी चोरों की भीड़ में किसी भी तरह शामिल न होकर चुनावी चोर लिखने वालों के साथ आप शामिल नहीं हो रहे हैं, तो प्रत्येक बार (हर बार) लिखने वालों पहले किसी भी चुनावी चोर के झुंड में पहले ही क्यों शामिल हो, अपने सभी तरह मान स्वाभिमान को प्रत्येक बार अपने आप ही किसी को भी ठेस (हानि) पहुंचने का मौका किसी भी चुनावी चोर या चाटने वाले को ही क्यों देते रहे, जैसे लिखने वालों के साथ लिखने वालों के बचपन से लेकर अभी तक सारी ही ओर जारी है, सारे छोटे से बड़े चुनावी चोरों ओर से भी व के सारे चाटने आलो की ओर से भी सारे रिश्ते आलो से लेकर कैसी भी पहचान या न होने वालों तक भी जारी है!
6. दया और करुणा की कमी
) किसी की पीड़ा देखकर भी असर न होना,जैसे सारे चुनाव लड़ें व लड़ने वाले व के सारे छोटे से बड़े चाटुकार घर-2 बैठे, बने सेठ या बनने को किसी भी चुनावी चोर से सांठ गांठ किए हुए, कभी भी या अभी भी, व जारी भी !
) पश्चाताप या पछतावा न होना,जैसे सारे चुनाव लड़ें व लड़ने वाले व के सारे छोटे से बड़े चाटुकार घर-2 बैठे, बने सेठ या बनने को किसी भी चुनावी चोर से सांठ गांठ किए हुए, कभी भी या अभी भी, व जारी भी !
7. डर और भ्रम फैलाना
) लोगों को डराकर या भ्रमित करके नियंत्रण करना,जैसे सारे चुनाव लड़ें व लड़ने वाले व के सारे छोटे से बड़े चाटुकार घर-2 बैठे, बने सेठ या बनने को किसी भी चुनावी चोर से सांठ गांठ किए हुए, कभी भी या अभी भी, व जारी भी !
)समाज में नफरत या झगड़ा फैलाना,जैसे सारे चुनाव लड़ें व लड़ने वाले व के सारे छोटे से बड़े चाटुकार घर-2 बैठे, बने सेठ या बनने को किसी भी चुनावी चोर से सांठ गांठ किए हुए, कभी भी या अभी भी, व जारी भी !
अगर सही अक्षरों में कहे, तो आज के दौर के सारे छोटे से बड़े सारे चुनाव लड़ने आले व कोय भी चुनाव लड़े हुए, या लड़ने को बैठे हुए व के सारे ही चाटने आले चाटुकार बचे से बूढ़े तक के सारे किसी असल #शैतान से कैसे भी किसी भी तरह कम नहीं है, यानि फुल शैतान ही हैं ।