26/03/2026
चिपको आन्दोलन की 52 वीं बर्षगांठ पर बिशेष ।
चिपको नेत्री गौरादेवी को शत् शत् नमन ।
उत्तराखण्ड की जनता को चाहिए सुनियोजित विकास :- अनन्त आकाश
आज 26 मार्च 2025 को चिपको आन्दोलन की 52वीं बर्षगांठ है ,आज ही के दिन 26 मार्च 1974 को गौरादेवी के नेतृत्व में रेणीगांव की महिलाओं ने पेड़ों पर चिपक कर सरकार को वनों को काटने से रोका था जो देश दुनिया में चिपको आन्दोलन के रूप में विख्यात हुआ । इस आन्दोलन के प्रेणता थे कामरेड गोबिंद सिंह रावत जिन्होंने अपने साथियों के साथ गांव गांव जाकर खासकर महिलाओं में जागरूकता जगाने का अभियान चलाया था। उन्हीं में थी गौरादेवी एव उनकी सहेलियां ,जिन्होंने इस लड़ाई को आगे बढ़ाया ।
कम्युनिस्टों का इस नीति घाटी में सतत् संघर्षों का इतिहास रहा है। 1974 में बद्रीनाथ मन्दिर की मरम्मत के नाम पर किये जा रहे परिवर्तन पर रोक हो तथा हकहकूकों की रक्षा के लिए चाहे रैणी गांव से शुरू चिपको आन्दोलन हो या फिर चांई गांव को बचाने की लड़ाई या फिर भीमकाय परियोजनाओं का विरोध हो , 2021 की आपदा के समय जनता के दुखदर्दों में हिरावल भूमिका भी कम्युनिस्टों ने निभाई है। आज जहाँ भी जनपक्षीय संघर्ष है ,पेड़ो व पर्यावरण की रक्षा का मुद्दा हो, वहाँ कम्युनिस्ट ही बडे़ ही सिद्दत के साथ लड़ रहे हैं । बावजूद इसके
आज कोरपोरेटपरस्त नीतियों के चलते उत्तराखण्ड में बेहद अनियोजित तथा अनियन्त्रित विकास के कारण पर्यावरण को आयेदिन नुकसान पहुंचाने की योजनायें बनायी जा रही हैं।
आज देहरादून में एलिबेटेड रोड़ ,सात मोड़ में सड़क चौड़ीकरण 4 हजार पेड़ तथा पौंधा में सड़क बनाने के नाम पर हजारों पेड़ों को काटने का प्रस्ताव, आल वेदर रोड़,साईबर ,ट्वीन सिटी ऐरो सिटी ,जोशीमठ , बद्रीनाथ मास्टर प्लान ,केदारनाथ मेंं चल रहे भारी भरकम निर्माण चर्चाओं के केन्द्र में है । बद्रीनाथ के मास्टर प्लान को ही धाम की मौलिकता के साथ नैसर्गिकता के खिलाफ माना गया है ,यहाँ हर तीसरे चौथे साल एक लान्च आते रहते हैं,1978 में आये लान्च ने बद्रीनाथ का पुराना बाजार ही तबाह कर दिया था ।
चिपको आन्दोलन का मुख्य उद्देश्य ही क्षेत्र में जल ,जगंल ,जमीन की रक्षा का संदेश था जो रैणीगांव की महिलाओं ने गौरादेवी के नेतृत्व में दशकों पहले कर दिखाया था ।