Krishan Sain

Krishan Sain न पूछो हम-सफ़रो मुझ से माजरा-ए-वतन
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सोचने का सबको अधिकार है |पर,सोच के भी कई प्रकार हैं|
27/04/2026

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मत कर बेमौसम की बरसात,ए बदरा..!!
कुछ लोगों के चेहरे की खुशी,खेतो में गिरवी पड़ी है..

"सलाम कंचन बाई मेघवाल, वो महिला जो 20 बच्चों और मौत के बीच ढाल बन कर खड़ी हो गई"           20 मासूम बच्चे अपनी ध्यान में...
07/02/2026

"सलाम कंचन बाई मेघवाल, वो महिला जो 20 बच्चों और मौत के बीच ढाल बन कर खड़ी हो गई"

20 मासूम बच्चे अपनी ध्यान में मस्त होकर खेल रहे थे,
अचानक मधुमक्खियों का हमला हुआ डर, चीखें और अफरा-तफरी मच गयी । ऐसे में कंचनबाई मेघवाल ने वो किया, जो शायद हर कोई नहीं कर पाता।

उन्होंने बच्चों को तिरपाल और दरी से ढकना शुरू किया, उन्हें एक-एक कर सुरक्षित कमरे में पहुंचाया और खुद मधुमक्खियों के सामने खड़ी रहीं। डंक लगते रहे, दर्द बढ़ता गया, लेकिन उनका ध्यान सिर्फ बच्चों पर था।

हजारों डंक सहने के बाद कंचनबाई ने अपनी जान गंवा दी, लेकिन 20 मासूमों को ज़िंदगी दे गईं। उनका बलिदान ये याद दिलाता है कि असली बहादुरी पद या पहचान से नहीं, काम से पहचानी जाती है।

कंचन बाई मेघवाल अपने परिवार का एक मात्र सहारा थीं. उनके पति शिवलाल को पैरालिसिस है. लिहाजा वो चल-फिर नहीं सकते. कंचन बाई अपने पीछे एक बेटा और दो बेटियां छोड़ गई हैं. पोस्टमॉर्टम के बाद जब उनका शव रानपुर गांव पहुंचा, तो गांव वाले खामोश खड़े थे. सभी लोग उन्हें सलाम कर रहे हैं.
मेरा मध्यप्रदेश की सरकार से निवेदन है कि कंचन बाई मेघवाल को शहीद का दर्जा दिया जाना चाहिए और आंगनबाड़ी केंद्रों का नाम शहीद कंचनबाई मेघवाल पर किया जाना चाहिए।

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