11/10/2025
आदरणीय मंत्री रत्नेश सादा जी
सादर नमस्कार
सोनबरसा की जनता ने आपको अपना प्रतिनिधि बनाया, ताकि आप समाज के हर वर्ग की आवाज़ बनें। लेकिन आज वही जनता सवालों से भरी बैठी है।
सोनबरसा का कब्रिस्तान आधे से ज़्यादा कट चुका है, मिट्टी नदी में बह रही है, क़ब्रें खतरे में हैं और आप अब तक चुप हैं। नेताओं के चुप्पी के कारण सोनबरसा का शमशान घाट भी इतिहास बन गया।
कब्रिस्तान केवल ज़मीन का टुकड़ा नहीं है, वहाँ हमारे बुज़ुर्गों की रूहें सोई हैं, हमारी पहचान दबी है। समाज ने बार-बार कहा कि क़ब्रिस्तान का कटाव रोकवाइए आप विधायक हैं मंत्री हैं आपके अधिकार क्षेत्र में आता है। मगर आपने ध्यान नहीं दिया।
अब बात करते हैं चण्डी महोत्सव की
चण्डी महोत्सव हुआ नहीं है दशहरा समाप्त हो गया लेकिन जब आचार संहिता लागू हो गया और हार का डर सामने दिखने लगा तभी इसकी फाइल पास करवाई गई।
यह फैसला जनता की आस्था के लिए नहीं, बल्कि चुनावी दिखावे के लिए था। अब यह महोत्सव होगा या नहीं, इसका जवाब अगले दशहरा में पता चलेगा। चण्डी महोत्सव इस बार ही होना चाहिए था जैसे क़ब्रिस्तान हमलोगों के जज़्बात से जुड़ा है वैसे उन लोगों के आस्था से जुड़ा था मगर आपने आस्था का क़द्र नहीं किया।
मंत्री जी, अब जनता जाग चुकी है। लोग जानते हैं कौन आस्था का क़द्र कर रहा है। कौन आस्था के नाम पर राजनीति कर रहा है।
अब मेरा सवाल सीधा मंत्री जी के साथ रहने वाले मुस्लिम युवा एच. रहमान, मास्टर शाहनवाज़ जी और पप्पू अंसारी जी से भी है आप लोग मंत्री जी के साथ रहते हैं हर जगह “मंत्री जी, मंत्री जी” करते हैं।
पर ज़रा बताइए — क्या आप केवल मंत्री जी के जयकारा करेंगे या अपने समाज के लिए आवाज़ भी उठाएंगे।
कब्रिस्तान आपकी आँखों के सामने कटकर नदी में समाहित रहा है, और आप सब चुप हैं!
क्या आपकी ज़ुबान सिर्फ़ मंत्री जी की तारीफ़ के लिए बनी है?
क्या समाज का दर्द आपको दिखता नहीं?
जब बात वोट की आती है, तब आप लोग मंत्री जी के लिए वोट मांगने आते हैं लेकिन जब बात कब्रिस्तान बचाने की आती है, तब आप गायब हो जाते हैं। इस बार किस मुंह से वोट मांगने आइएगा?
मुसलमान समाज आपको देख रहा है।
लोग कह रहे हैं इन लोगों के रहते हुए भी कब्रिस्तान का काम नहीं हुआ तो और कौन आवाज़ उठाएगा?”
आप मंत्री जी के साथ रहते हुए अपने समाज आख़िरी आरामगाह नहीं बचा सके तो आने वाली पीढ़ी आपको माफ़ नहीं करेगी।
कब्रिस्तान की मिट्टी में बुज़ुर्गों की रूहें हैं और आपलोगों चुप्पी उनकी बेइज़्ज़ती है।
मंत्री जी, आचार संहिता लग चुका है अब कोई काम नहीं हो सकता, लेकिन जनता का हिसाब अभी बाकी है।
जब आप वोट मांगने आएंगे, तो लोग यही पूछेंगे —
“कब्रिस्तान का क्या हुआ, मंत्री जी?”
और आप क्या जवाब देंगे? कि “हमारे साथ के लोग भी चुप थे”?
याद रखिए — चुनाव भाषणों से नहीं, भरोसे और कर्म से जीते जाते हैं।
कब्रिस्तान का संरक्षण सिर्फ़ धार्मिक मुद्दा नहीं, बल्कि इंसानियत का इम्तिहान है।
और आज, इस इम्तिहान में मंत्री जी के साथ-साथ उनके आसपास घूमने वाले मुस्लिम युवा भी नाकाम नज़र आ रहे हैं।
कब्रिस्तान बचाइए नहीं तो जनता इस बार चुप नहीं रहेगी जवाब वोट से देगी।
सोनबरसा का एक जागरूक नागरिक