30/03/2026
"मुझे इस बात का दुःख अवश्य होता है कि दुनिया में कितना कुछ सही नहीं हो रहा, लेकिन मेरा वह सुख उस दुःख से कई गुना अधिक है, जो मुझे तब मिलता है जब मैं गलत को सही करने के लिए अपने हिस्से का कार्य करता हूँ।
गलत को सही करने की प्रक्रिया से उपजा सुख स्थायी होता है, क्योंकि वह आत्म-संतुष्टि से जन्मा होता है। समाज की गिरावट पर आँसू बहाना बेशक हमारी संवेदना को दर्शाता है, लेकिन उस गिरावट को दूर करने के लिए कदम बढ़ाना एक साधना है। समाज के उत्थान के लिए संवेदनशील होना आवश्यक है, लेकिन कर्मनिष्ठ होना परम आवश्यक है।" सत्यन