27/07/2026
रात के 11 बजे हैं,
लेकिन बांकीपुर की ज़मीन आज भी जाग रही है!
हजारों माताएँ, बहनें, भाई, युवा—सब एक ही उम्मीद, एक ही विश्वास, एक ही आवाज़ के साथ यहाँ बैठे हैं।
क्यों?
क्योंकि अब जनता डरना नहीं चाहती।
अब जनता बदलना चाहती है।
अब जनता अपने भविष्य की चाबी खुद अपने हाथ में लेना चाहती है।
बांकीपुर की यह धरती गवाह है—
जहाँ कभी जनता अपने विधायक को ढूँढ़ती रह गई,
जहाँ लोग सालों तक अपनी बात कहने को तरसते रहे,
आज वहीं जनता बदलाव की लहर बनकर उठ खड़ी हुई है!
यह सिर्फ़ भीड़ नहीं है,
यह वो जनसैलाब है जो कह रहा है—
अब बहुत हुआ!
अब झूठे वादे नहीं!
अब दिखावे की राजनीति नहीं!
अब नेताओं की दूरी नहीं!
अब बिहार को चाहिए ईमानदार, ज़मीन से जुड़ी, जनता के बीच खड़ी राजनीति!
और इसी कारण आज प्रशांत किशोर की आवाज़,
जन सुराज की बात,
और बदलाव की पुकार
बांकीपुर की गलियों से लेकर हर दिल तक गूंज रही है।
भाइयों और बहनों,
जब जनता जागती है, तो सत्ता की कुर्सी हिल जाती है।
जब जनता सवाल पूछती है, तो झूठे साम्राज्य कांप जाते हैं।
और जब जनता फैसला कर ले,
तो फिर कोई ताकत उसे रोक नहीं सकती!
आज बांकीपुर में जो लहर है,
वो सिर्फ़ एक चुनावी लहर नहीं है—
वो बिहार की आत्मा की पुकार है।
वो उन लोगों का जवाब है,
जो सालों से सत्ता में बैठकर जनता को भूल गए।
वो उस व्यवस्था के खिलाफ़ विद्रोह है
जिसने बिहार को पीछे धकेला,
युवाओं से रोजगार छीना,
और आम आदमी को सिर्फ़ उम्मीदों के भरोसे छोड़ दिया।
आज लोग खुलकर कह रहे हैं—
हमें ऐसी राजनीति नहीं चाहिए जो चुनाव में याद आए,
हमें ऐसी राजनीति चाहिए जो हर दिन साथ खड़ी रहे!
बांकीपुर की यह भीड़ बताती है
कि जनता अब जाग चुकी है।
अब हर वोट सवाल है,
हर वोट जवाब है,
हर वोट बदलाव की दस्तक है!
और याद रखिए—
जब जनता एकजुट हो जाती है,
तो बड़े-बड़े राजनीतिक क़िले भी हिल जाते हैं।
आज बांकीपुर से जो आवाज़ उठ रही है,
वो सिर्फ़ एक नेता की आवाज़ नहीं—
वो बिहार के नए भविष्य की आवाज़ है!
इसलिए अब समय आ गया है—
डर की राजनीति को जवाब देने का,
दूरी की राजनीति को खत्म करने का,
और ऐसी राजनीति को चुनने का
जो सच में जनता की हो, जनता के लिए हो, जनता के साथ हो!
बांकीपुर बोलेगा—बदलाव चाहिए!
बांकीपुर बोलेगा—जन सुराज चाहिए!
बांकीपुर बोलेगा—अब नई राजनीति चाहिए!
जय बिहार!
जय जनता!
जय बदलाव!