30/05/2026
रूस और तालिबान ने एक सैन्य-तकनीकी सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसमें हथियारों का आदान-प्रदान, लाइसेंसिंग, सैन्य तकनीकें और संयुक्त विकास परियोजनाएं शामिल हैं। इस कदम से पाकिस्तान को नाराजगी हो सकती है। अफगानिस्तान की स्थिरता भारत-रूस बातचीत के एजेंडे में रही है। यह रक्षा समझौता नई दिल्ली के लिए भी दिलचस्पी का विषय होगा, जिसने पाकिस्तान के सैन्य हमलों के सामने काबुल की संप्रभुता का समर्थन किया है।
यह पहला रक्षा समझौता है, जो मौजूदा तालिबान शासन ने किसी देश के साथ किया है। इस डील पर इस सप्ताह मॉस्को में अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा फोरम के दौरान हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता दिखाता है कि काबुल की कोशिश पाकिस्तान की सेना की आक्रामकता के खिलाफ सैन्य समर्थन पाने की है।
जय शिवाजी - जय पटेल