जीवन एक संघर्ष है

जीवन एक संघर्ष है you have to loose few battles in order to win a war...

Get ready to win...

शुभ संध्या🌹
14/01/2022

शुभ संध्या🌹

29/12/2021

🌞सुप्रभात🌞
षड् दोषा: पुरुषेणेह हातव्या भूतिमिच्छता।
निद्रा तन्द्रा भयं क्रोध आलस्यं दीर्घसूत्रता।।

अर्थ : वैभव और उन्नति चाहने वाले पुरुष को ये छः दोषो का त्याग कर देना चाहिए : नींद, तन्द्रा (ऊंघना), डर, क्रोध, आलस्य तथा दीर्घ शत्रुता (कम समय लगने वाले कार्यो में अधिक समय नष्ट करना)।

17/09/2021
शुभ रात्रि
05/08/2021

शुभ रात्रि

05/02/2021

"सुलझा" हुआ "मनुष्य" वह है,
जो अपने "निर्णय" स्वयं करता है,
और
उन "निर्णयो" के "परिणाम" के लिए किसी "दूसरे" को "दोष" नही देता..!!!

अर्थात्
एक बार शिष्य ने गुरू से पुछा
अगर "किस्मत"
पहेले ही "लिखी" जा चुकी है तो,
"कोशिश" कर के क्या मिलेगा?

गुरु ने कहा
क्या पता "किस्मत" में लिखा हो की,
"कोशिश" करने से ही मिलेगा!
अर्थात् सदैव "कार्य" के प्रति लगन रखिये।

05/02/2021

एक चिड़िया ने मधुमक्खी से पूछा कि तुम इतनी मेहनत से शहद बनाती हो और इंसान आकर उसे चुरा ले जाता है, तुम्हें बुरा नहीं लगता ??
🌺🌾🍁🍂🍃💐
मधुमक्खी ने बहुत सुंदर जवाब दिया :
इंसान मेरा शहद ही चुरा सकता है पर मेरी शहद बनाने की कला नहीं !!
🌾🍁🍂🍃🌷🌸🌻
कोई भी आपका Creation चुरा सकता है पर आपका Talent (हुनर) नहीं ....✍
🌹 🌹

Mata Janaki birth place, Punauradham❤️ Sitamarhi " Maa Sita birth place"
12/01/2021

Mata Janaki birth place, Punauradham❤️ Sitamarhi " Maa Sita birth place"

२१ वर्ष की शालिनी झा(भागलपुर,बिहार) को गूगल ने दिया ६० लाख का पैकेज❤️
09/01/2021

२१ वर्ष की शालिनी झा(भागलपुर,बिहार) को गूगल ने दिया ६० लाख का पैकेज❤️

🙏महादेव🙏
08/01/2021

🙏महादेव🙏

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08/01/2021

🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻
🌻🙏सुप्रभातम🙏🌻
नमामीशमीशान निर्वाण रूपं, विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदः स्वरूपम्‌ ।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं, चिदाकाश माकाशवासं भजेऽहम्‌ ॥

निराकार मोंकार मूलं तुरीयं, गिराज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम्‌ ।
करालं महाकाल कालं कृपालुं, गुणागार संसार पारं नतोऽहम्‌ ॥

तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं, मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरम्‌ ।
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारू गंगा, लसद्भाल बालेन्दु कण्ठे भुजंगा॥

चलत्कुण्डलं शुभ्र नेत्रं विशालं, प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम्‌ ।
मृगाधीश चर्माम्बरं मुण्डमालं, प्रिय शंकरं सर्वनाथं भजामि ॥

प्रचण्डं प्रकष्टं प्रगल्भं परेशं, अखण्डं अजं भानु कोटि प्रकाशम्‌ ।
त्रयशूल निर्मूलनं शूल पाणिं, भजेऽहं भवानीपतिं भाव गम्यम्‌ ॥

कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी, सदा सच्चिनान्द दाता पुरारी।
चिदानन्द सन्दोह मोहापहारी, प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ॥

न यावद् उमानाथ पादारविन्दं, भजन्तीह लोके परे वा नराणाम्‌ ।

न तावद् सुखं शांति सन्ताप नाशं, प्रसीद प्रभो सर्वं भूताधि वासं ॥

न जानामि योगं जपं नैव पूजा, न तोऽहम्‌ सदा सर्वदा शम्भू तुभ्यम्‌ ।
जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानं, प्रभोपाहि आपन्नामामीश शम्भो ॥

रूद्राष्टकं इदं प्रोक्तं विप्रेण हर्षोतये
ये पठन्ति नरा भक्तयां तेषां शंभो प्रसीदति।।

॥ इति श्रीगोस्वामितुलसीदासकृतं श्रीरुद्राष्टकं सम्पूर्णम् ॥

प्रिय मित्रो,सुप्रभाभिनन्दनम् !आज का दिन ( मंगलवार, २९ दिसम्बर २०२० ) आप सभी लिए हितकारी, मंगलमय व शुभ हो, ये कामना करता...
29/12/2020

प्रिय मित्रो,

सुप्रभाभिनन्दनम् !

आज का दिन ( मंगलवार, २९ दिसम्बर २०२० ) आप सभी लिए हितकारी, मंगलमय व शुभ हो, ये कामना करता हूँ. बाबा विश्वनाथ की कृपा आप पर सदैव बनी रहे. माँ विध्यवासिनी की कृपा आप व आपके परिवार पर बराबर बनी रहे.

गोस्वामी तुलसीदासजी द्वारा रचित "दोहावली" में कहा गया है कि -

बरषत करषत आपु जल हर्षत अरघनि भानु.
तुलसी चाहत साधु सुर सब सनेह सनमानु.

सूर्य स्वयं पृथ्वी पर अपार जल बरसाता है और सोखता है; परन्तु लोगों के दिए हुए अर्ध्य से बड़ा प्रसन्न होता है. तुलसीदास जी कहते हैं की साधु और देवता सब स्नेह और सम्मान ही चाहते हैं.

*👇👇 आज का प्रेरक प्रसंग 👇👇*                       *:!!:  समाज  :!!:* ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ एक आदमी था, जो हमेशा ...
28/09/2020

*👇👇 आज का प्रेरक प्रसंग 👇👇*

*:!!: समाज :!!:*
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

एक आदमी था, जो हमेशा अपने समाज में सक्रिय रहता था। उसको सभी जानते थे, बड़ा मान सम्मान मिलता था, अचानक किसी कारणवश वह निश्क्रिय रहने लगा, मिलना - जुलना बंद कर दिया और समाज से दूर हो गया।

कुछ सप्ताह पश्चात् एक बहुत ही ठंडी रात में उस समाज के मुखिया ने उससे मिलने का फैसला किया। मुखिया उस आदमी के घर गया और पाया कि आदमी घर पर अकेला ही था। एक बोरसी में जलती हुई लकड़ियों की लौ के सामने बैठा आराम से आग ताप रहा था। उस आदमी ने आगंतुक मुखिया का बड़ी खामोशी से स्वागत किया।

दोनों चुपचाप बैठे रहे। केवल आग की लपटों को ऊपर तक उठते हुए ही देखते रहे। कुछ देर के बाद मुखिया ने बिना कुछ बोले, उन अंगारों में से एक लकड़ी जिसमें लौ उठ रही थी (जल रही थी) उसे उठाकर किनारे पर रख दिया और फिर से शांत बैठ गया।

मेजबान हर चीज़ पर ध्यान दे रहा था। लंबे समय से अकेला होने के कारण मन ही मन आनंदित भी हो रहा था कि वह आज अपने समाज के मुखिया के साथ है। लेकिन उसने देखा कि अलग की हुए लकड़ी की आग की लौ धीरे धीरे कम हो रही है। कुछ देर में आग बिल्कुल बुझ गई। उसमें कोई ताप नहीं बचा। उस लकड़ी से आग की चमक जल्द ही बाहर निकल गई।

कुछ समय पूर्व जो उस लकड़ी में उज्ज्वल प्रकाश था और आग की तपन थी वह अब एक काले और मृत टुकड़े से ज्यादा कुछ शेष न था।

इस बीच... दोनों मित्रों ने एक दूसरे का बहुत ही संक्षिप्त अभिवादन किया, कम से कम शब्द बोले। जानें से पहले मुखिया ने अलग की हुई बेकार लकड़ी को उठाया और फिर से आग के बीच में रख दिया। वह लकड़ी फिर से सुलग कर लौ बनकर जलने लगी, और चारों ओर रोशनी और ताप बिखेरने लगी।

जब आदमी, मुखिया को छोड़ने के लिए दरवाजे तक पहुंचा तो उसने मुखिया से कहा मेरे घर आकर मुलाकात करने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद। आज आपने बिना कुछ बात किए ही एक सुंदर पाठ पढ़ाया है कि अकेले व्यक्ति का कोई अस्तित्व नहीं होता, समाज का साथ मिलने पर ही वह चमकता है और रोशनी बिखेरता है। समाज से अलग होते ही वह लकड़ी की भाँति बुझ जाता है।

मित्रों, समाज से ही हमारी पहचान बनती है इसलिए समाज हमारे लिए सर्वोपरि होना चाहिए। समाज के प्रति हमारी निष्ठा और समर्पण किसी व्यक्ति के लिए नहीं, उससे जुड़े विचार के प्रति होनी चाहिए ।

*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*
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Sitamarhi
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