28/12/2025
मानसून 2026 पर अल-नीनो का खतरा! कम बारिश की प्राथमिक.....see more
मौसम वैज्ञानिक किरण वाघमोड़े के अनुसार, फिलहाल प्रशांत महासागर में ला-नीना सक्रिय है, जिसके कारण देश में सामान्य से अच्छी बारिश देखने को मिल रही है। लेकिन यह स्थिति ज्यादा समय तक टिकने वाली नहीं है। मौसम पूर्वानुमान मॉडलों के मुताबिक जनवरी–फरवरी 2026 के बाद ला-नीना का प्रभाव धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगा और हालात न्यूट्रल होने लगेंगे।
सबसे ज्यादा चिंता जुलाई, अगस्त और सितंबर 2026 को लेकर है। इन महीनों में प्रशांत महासागर के तापमान में बढ़ोतरी की संभावना है, जो अल-नीनो के आगमन का संकेत देती है। अल-नीनो की स्थिति में भारत की ओर आने वाली मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं, जिससे बारिश में भारी कमी देखी जाती है।
1871 से 2023 तक के आंकड़ों का अध्ययन बताता है कि अल-नीनो के वर्षों में देश में ज्यादातर समय कम बारिश और सूखे जैसी स्थिति बनी है। इतिहास में केवल चार बार ही ऐसा हुआ है जब अल-नीनो के बावजूद अच्छी वर्षा दर्ज की गई हो। इसी आधार पर मानसून 2026 में कम बारिश होने की प्राथमिक आशंका जताई जा रही है।
मानसून पर हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) का भी असर होता है। यदि IOD सकारात्मक हो तो बारिश अच्छी होती है, लेकिन फिलहाल यह नकारात्मक स्थिति में है और मानसून की शुरुआत तक इसके न्यूट्रल रहने की संभावना है। ऐसे में IOD से मानसून को कोई खास सहारा मिलने की उम्मीद नहीं है और मानसून 2026 अल-नीनो के प्रभाव में रह सकता है।
मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह एक शुरुआती अनुमान है, जिसमें आगे बदलाव संभव हैं। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे नियमित रूप से मौसम से जुड़े अपडेट और बुलेटिन पर नजर बनाए रखें।
— feeling sad at India : इंडिया.