Razz Prajapati

Razz Prajapati Motivational speaker Mr.Razz

26/01/2020

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर मेरा ये लेख जरूर पढ़ें, लेख लम्बा हो सकता है किंतु आपके लिए महत्वपूर्ण व ज्ञानवर्धक है, लेख के अंत मे चंद 5 ज्वलन्त सवालात जरूर पढ़ें...
संविधान निर्माण व गणतंत्र का महत्व और गणतंत्र के महानायक के बारे में जानें..

71 वें गणतंत्र दिवस की समस्त देशवासियों को ढेर सारी बधाई व शुभकामनाएं
"नव वर्ष में आ गया पुनः नया गणतंत्र, राष्ट्र पर्व दे फिर तुम्हे खुशहाली का मंत्र"
Happy Republic Day
71 का हुआ हमारा संविधान, इसका मुझे है अभिमान
पर देशवासियों...
कम न हो इसका सम्मान, रखना बस इतना ध्यान

*'मत पूछो जमीन से की हमारी कहानी क्या है,*
*हमारी पहचान तो सिर्फ ये है कि हम सब भारतवासी हैं !'*

हम नही भूलें की 26 नवम्बर के बिना 26 जनवरी अधूरी है, 26 जनवरी की ताकत 26 नवम्बर में है...

जब 1948 की शुरुआत में बाबा साहेब ने संविधान की रूपरेखा तैयार करके संविधान सभा मे रखा..
भारत रत्न डॉo भीमराव आंबेडकर जी ने 114 दिनों तक चली बैठकों में 7635 सूचनाओं पर चर्चा करने के बाद कुल 63 लाख 96 हजार 729 रुपये के खर्चे के साथ ही 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन की कड़ी मशक्कत के बाद भारतीय संविधान की रचना करके तत्कालीन प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति को 26 नवम्बर 1949 को ये संविधान सौंपा और जिसे भारत सरकार ने 26 जनवरी 1950 को इसे लागू किया और इस दिन भारत देश ने अपने को संप्रभु, लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष गणराज्य घोषित किया

भारतीय संविधान का महत्त्व इसी से समझा जा सकता है कि इस भारतीय संविधान की दो प्रतियां जो हिंदी और अंग्रेजी में बाबा साहेब के हाथ से लिखी गई हैं, इनकी मूल प्रतियां संसद भवन के पुस्तकालय में आज भी सुरक्षित रखी हुई हैं।

आज 26 जनवरी को बाबा साहेब को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए यह भी स्मरण कर लें...

देश के सबसे ज्यादा शिक्षित भीमराव अंबेडकर में उनकी बहुमुखी प्रतिभा को देख कर 'उन्हें संविधान ड्राफ्टिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाते हुए राष्ट्रपति डॉo राजेन्द्र प्रसाद जी ने कहा कि 'संविधान बहुत आसान व अच्छा बने, तब बाबा साहेब भीम राव अंबेडकर ने कहा "आपकी आज्ञा का पालन होगा, राष्ट्रपति महोदय!"

संविधान निर्मात्री समिति में 7 सदस्य थे, उनमें से एक कि अचानक मृत्यु हो गई। एक सदस्य अमेरिका में जाकर रहने लगा और एक सदस्य ऐसा जिन्हें सरकारी काम - काज से ही अवकाश नही मिल पाता था। इनके अतिरिक्त दो अन्य सदस्य ऐसे थे जो अपना सवास्थ्य ठीक न रहने के कारण वे सदा दिल्ली से बाहर रहते थे और एक सदस्य ने अपने आप को इस कार्य से अलग कर लिया था...इस तरहं डॉo भीमराव अंबेडकर ही एकमात्र ऐसे सदस्य थे जिन्होंने अपने कंधों पर ही संविधान निर्माण का कार्यभार संभाला था।
जब संविधान बन गया तब एक - एक प्रति डॉo राजेन्द्र प्रसाद जी एवं पंडित जवाहर लाल नेहरू को दी..उन्हें संविधान सरल व अच्छा लगा। सभी लोग बाबा साहेब की तारीफ करने लगे व उन्हें बधाइयां देने लगे। एक सभा का आयोजन किया गया, जिसमे राष्ट्रपति डॉo राजेन्द्र प्रसाद ने कहा - "भीमराव अंबेडकर अस्वस्थ थे, फिर भी बड़ी लगन, मन व मेहनत से काम किया। वे सचमुच बधाई के पात्र हैं। ऐसा संविधान शायद दूसरा कोई अन्य नही बना पाता, हम इनके सदा आभारी रहेंगें।"

पंडित नेहरू ने अपने भाषण में कहा था "डॉo भीमराव आंबेडकर संविधान के शिल्पकार है, नया संविधान इनकी देन है। इतिहास में इनका नाम स्वर्ण - अक्षरों में लिखा जाएगा। वे महापुरुष हैं, जब तक भारत का नाम रहेगा, तब तक अम्बेडकर का नाम भी भारतीय संविधान में जुड़ा रहेगा।"

*तेरी जय हो भीम महान, बना दिया भारत का संविधान*

*चंद सवाल :*

1. जिस तरहं 15 अगस्त से पहले लाल किले पर झंडोतोलन के लिए जाते वक्त प्रधानमंत्री राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देते हैं, उसी तरहं गणतंत्र दिवस 26 जनवरी के दिन राष्ट्रपति इंडिया गेट पर जाने से पहले संसद भवन स्थित संविधान निर्माता डॉo भीमराव अंबेडकर को याद क्यों नही किया जाता ?

2. प्रधानमंत्री द्वारा गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने के पहले जब इंडिया गेट पर स्थित अमर जवान ज्योति पर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी जा सकती है तो अपने कर्मवीरों और राष्ट्रनेताओं को जिन्होंने देश को संविधान दिया उनको क्यों भूला दिया जाता है ?

3. गृहमंत्रालय के पास महात्मा गांधी के राष्ट्रपिता होने का कोई रिजोल्यूशन न होने के बावजूद सरकार उन्हें विशेष अलंकरण और स्वतंत्रता दिवस के पहले सम्मान देती है जबकी देश को संविधान देने वाले डॉo बीआर अम्बेडकर का नाम संविधान की संक्षिप्त रूपरेखा तक मे नही, ऐसा क्यों ?

4. महात्मा गांधी का वास्ता न तो संविधान निर्माण से था और न संविधान सभा से..फिर भी उनका नाम और उनके फ़ोटो संविधान के अंदर हैं और बीआर अम्बेडकर का नही, क्या ये जातीय भेदभाव नही ?

5. जिसने राजपथ पर ये गौरव के पल मनाने का अवसर संविधान का निर्माण करके देश को दिया, उसके नाम का इस गणतंत्र के आयोजन में जिक्र भी न करना, उसके फ़ोटो - कटआउट भी न लगाना क्या भारतीय संकीर्ण सोच व कुत्सित जातिवादी दूषित मानसिकता का परिचायक नही ?

एक अजीब विडम्बना देखिए - "संविधान लिखने‌ वाले‌ के पास 32 डिग्री
और 9 भाषाओं का ज्ञान था, और आज अनपढ़ व्यक्ति उसमें कमियां निकाल रहे हैं।"

धन्यवाद

आलेख :
शुभाकांक्षी,
सुनीता वर्मा
उप जिला प्रमुख
जिला परिषद (हरिo)
एवं वरिष्ठ कॉंग्रेस नेत्री, विधानसभा पटौदी
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