10/09/2022
Singrauli news कलेक्टर महोदय, कब होगी इन कॉलेजों पर कार्यवाही?
अवनीश तिवारी
नई ताक़त न्यूज,6260614152
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सिंगरौली। सिंगरौली जिले के मुख्यालय में दर्जनों कॉलेज कुकुरमुत्ते की तरह संचालित हो रहे हैं। वैढ़न का डिग्री कॉलेज रोड इन दिनों कॉलेज के बड़े-बड़े बैनरों से पटा पड़ा है। यदि बात करें डिग्री कॉलेज रोड की तो एक ही जगह पर दर्जन भर से अधिक कॉलेज संचालित हैं। इन कालेजों के पास न तो बिल्डिंग है और ना ही पार्किंग की व्यवस्था और ना ही खेल मैदान इसके बावजूद यहां हजारों की संख्या में छात्र पढ़ाई करते हैं।
राजीव गांधी कॉलेज शासकीय डिग्री कॉलेज रोड में ही संचालित है जबकि उसके पास न तो वाहन पार्किंग की व्यवस्था है और ना ही नियमानुसार बिल्डिंग है और ना ही खेल मैदान उपलब्ध है। अधिकारियों से साठगांठ कर बिना गाईडलाईन के उक्त महाविद्यालय का संचालन हो रहा है। वहीं अटल बिहारी कॉलेज की मान्यता देवसर विधानसभा के पड़ैनिया गांव संचालित करने की मिली है परन्तु उसका संचालन राजीव गांधी महाविद्यालय में ही किया जा रहा है। यही पर उसका एडमिशन होता है और यहीं पर छात्रों को पढ़ाया जाता है। जिस बिल्डिंग को दिखाकर अटल बिहारी कॉलेज को मान्यता मिला है उस बिल्डिंग में राजीव गांधी इंटरनेशनल स्कूल का संचालन हो रहा है।
नियमों को धता बताकर संचालित है दर्जनों कॉलेज
बताया जाता है कि जिले में ऐसे कई दर्जन कॉलेज हैं जिनका नियमों को तॉक पर रखकर संचालन हो रहा है। मुख्यालय में रघुवीर इंस्टीट्यूट, हाईट कॉलेज, महात्मा गांधी कॉलेज, एपीएन कम्प्यूटर कॉलेज, आईजी कॉलेज आदि ऐसे नाम हैं जो नियमों को दरकिनार कर के मुख्यालय में संचालित हो रहे हैं। बगल में ही कलेक्ट्रेट है, जिलाशिक्षा अधिकारी रहते हैं इसके बावजूद इन कॉलेजों की इतनी हिम्मत कैसे बढ़ जाती है यह सवाल तो सबके मन में उठता है परन्तु जहां सुविधा शुल्क चलता हो वहां इन सवालों के जवाब खुद मिल जाते हैं।
छात्रों के भविष्य के साथ हो रहा खिलवाड़
सिंगरौली जिला औद्योगिक केन्द्र होने के कारण यहां बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं पढ़ाई करने आते हैं। जिले में संचालित उक्त कॉलेजों में अपना भविष्य तलाशने पहुंचते है परन्तु इन महाविद्यालयों द्वारा छात्रों को झूठा सब्जबाग दिखाकर उनके साथ छल कर उनके अविभावकों के पैसे ऐंठ लिये जात हैं। जब छात्रों को डिग्री मिलती है तब पता चलता है इस डिग्री का देश में कोई महत्व नहीं है।
बिना शिक्षकों के संचालित हैं कॉलेज
नियमानुसार तो कॉलेज में लाईब्रेरी, प्लेग्राउंड, अच्छी बिल्डिंग और जानकार टीचिंग स्टाफ होना आवश्यक है परन्तु जहां मात्र छात्रों से पैसे ऐंठने के लिए कॉलेज खुले हों वहां यह सब बाते बेमानी हो जाती हंै। इन कालेजों में सुविधा के ना पर तो कुछ है नहीं यहां तक की इन कॉलेजों में टीचिंग स्टाफ भी मौजूद नहीं रहते हंै, हाँ छात्र पास जरूर हो जाते हैं इसलिए छात्र भी खुश रहते हैं कि उन्हें डिग्री तो मिल गयी परन्तु उस डिग्री का देश मे कितना महत्व है इसका अंदाजा तो वहीं लगा सकता है जिसके पास इन कॉलेजों की डिग्री है।