21/10/2025
धवल धाम ऊपर नभ चुंबत।
कलस मनहुँ रबि ससि दुति निंदत॥
बहु मनि रचित झरोखा भ्राजहिं।
गृह गृह प्रति मनि दीप बिराजहिं॥
उज्ज्वल महल ऊपर आकाश को चूम रहे हैं। महलों पर के कलश अपने दिव्य प्रकाश से मानो सूर्य, चंद्रमा के प्रकाश का भी तिरस्कार करते हैं। महलों में बहुत सी मणियों से रचे हुए झरोखे सुशोभित हैं और घर-घर में मणियों के दीपक शोभा पा रहे हैं।