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किसान कमेरे वर्ग की बुलंद आवाज किसानों के मसीहा व भारत के पूर्व उप-प्रधानमंत्री  जननायक चौधरी देवी लाल जी (ताऊ) की जयंती...
25/09/2025

किसान कमेरे वर्ग की बुलंद आवाज
किसानों के मसीहा व भारत के पूर्व उप-प्रधानमंत्री जननायक चौधरी देवी लाल जी (ताऊ) की जयंती पर उन्हें सादर नमन |

16/04/2022

जाटों के छोरे

बलराम जाखड़ जी करीब 7 फूटा जाट आज जयंती पर नमन  💐आज तक लोकसभा अध्यक्ष का सबसे लंबा कार्यकाल चौधरी साहब के नाम है 💪वर्ष 19...
23/08/2020

बलराम जाखड़ जी करीब 7 फूटा जाट
आज जयंती पर नमन 💐

आज तक लोकसभा अध्यक्ष का सबसे लंबा कार्यकाल चौधरी साहब के नाम है 💪वर्ष 1984 से पहले बलराम जाखड़ राजनीतिक रूप से पंजाब में सक्रिय थे। वे 1984 में सीकर आए और यहां से एमपी का चुनाव लड़ा। करीब 1 लाख 89 हजार मतों से ऐतिहासिक जीत दर्ज की। उस वक्त ये राजस्थान में सबसे बड़ी जीत थी। इस चुनाव में उन्होंने भाजपा के घनश्याम तिवाड़ी को हराया था। चौधरी चरणसिंह की पार्टी के गोपाल सिंह खण्डेला तीसरे स्थान पर रहे थे। जाखड़ के सीकर में पहले चुनाव की खास बात यह थी कि जनता ने उन्हें छप्पर फाड़ वोट दिए। नतीजा यह रहा कि अन्य सभी प्रत्याशियों को मिले कुल वोट भी उनसे कम थे।

पूर्व लोकसभा अध्यक्ष बलराम जाखड़ का जन्म 23 अगस्त, 1923 को तत्कालीन पंजाब के फिरोजपुर जिले के पंचकोसी ग्राम में हुआ था। जाखड़ वंश के जाट परिवार में जन्में बलराम जाखड़ ने फोरमैन क्रिश्चियन कॉलेज, लाहौर से संस्कृत में डिग्री प्राप्त की।
इसके अलावा उन्हें अंग्रेजी, हिंदी, उर्दू और पंजाबी भाषा का भी अच्छा ज्ञान था। बलराम जाखड़ के बड़े बेटे सज्जन कुमार जाखड़ पंजाब के पूर्व मंत्री हैं। उनकी साफ और निष्पक्ष छवि के कारण विरोधी दल के लोग भी सज्जन कुमार जाखड़ का सम्मान करते थे। बलराम जाखड़ के पुत्र चौधरी सुनील जाखड़ अबोहर जिला, जो बलराम जाखड़ के गृहनगर पंचकोसी की उप तहसील है, में एक सक्रिय राजनेता हैं। उनके एक अन्य पुत्र सुरिंदर कुमार जाखड़ की गोली लगने से 17 जनवरी 2011 को फिरोजपुर में मृत्यु हो गयी थी।

वर्ष 1972 में विधानसभा में चयनित होने के साथ बलराम जाखड़ के राजनैतिक जीवन की शुरूआत हुई थी। 1977 में दोबारा जीत दर्ज करने के बाद उन्हें नेता विपक्ष का पद प्रदान किया गया। फिरोजपुर निर्वाचन क्षेत्र से वर्ष 1980 में सातवीं लोकसभा के लिए चुने जाने के बाद बलराम जाखड़ को लोकसभा अध्यक्ष बनाया गया। अगली बार आठवीं लोकसभा चुनावों में भी वह सीकर निर्वाचन क्षेत्र से विजयी हुए थे। वह 1980-1989 तक लोकसभा अध्यक्ष रहे।

स्पीकर पद पर रहते हुए बलराम जाखड़ ने संसदीय कार्यों को कंप्यूटरीकृत और स्वचालित बनाने में विशेष योगदान दिया। बलराम जाखड़ ने संसदीय लाइब्रेरी, अध्ययन, संदर्भ आदि को प्रचारित करने जैसा प्रभावकारी कदम उठाया ताकि सांसदों के संसद संबंधी ज्ञानकोष को बढ़ावा दिया जा सके। इसके अलावा संसद अजायबघर की स्थापना भी बलराम जाखड़ का ही मुख्य योगदान रहा।
बलराम जाखड़ एशियाई मूल के पहले ऐसे व्यक्ति हैं जिन्हें राष्ट्रमंडल सांसद कार्यकारी फोरम के सभापति के रूप में चयनित किया गया।

शहीद दिवस पर मां भारती के महान सपूत वीर भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को कोटि-कोटि नमन। देश के लिए उनका बलिदान कृतज्ञ राष्...
23/03/2020

शहीद दिवस पर मां भारती के महान सपूत वीर भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को कोटि-कोटि नमन। देश के लिए उनका बलिदान कृतज्ञ राष्ट्र सदा याद रखेगा। जय हिंद!

28/11/2019
25/03/2019

बनारस से जो लड़ रहा है वो तो लड़िये रहा है....
लेकिन जो गाँधीनगर से लड़ रहा है न...असली बाँस वही करेगा 😛

25/12/2018

बागरु (मोती-डूंगरी) की लड़ाई में मुग़ल-मराठा-राजपूत-होल्कर की 7 सेनाओं को इकट्ठा हरा प्रिंस सूरज कहलाये थे महाराजा सूरजमल:

महाराजा सूरजमल जी के 253 वें शहीदी दिवस (25 दिसम्बर, 1763) पर विशेष!

आमेर (जयपुर) राजघराने की राजगद्दी बाबत राजपूत राजा ईश्वरी सिंह और उनके भाई माधो सिंह की लड़ाई थी बागरू की लड़ाई|

इस पर राजा ईश्वरी सिंह ने ब्रजराज बदन सिंह को कुछ यूँ सन्देश भिजवाया:

देषि देस को चाल ईसरी सिंह भुवाल नैं।
पत्र लिख्यौ तिहिकाल बदनसिंह ब्रजपाल कौ।।
करी काज जैसी करी गुरुडध्वज महाराज।
पत्र पुष्प के लेते ही थे आज्यौ ब्रजराज।।
आयौ पत्र उताल सौं ताहि बांचि ब्रजयेस।
सुत सरज सौं तब कहौ थामि ढुढाहर देस।|

इस पर ब्रजराज ने अपने प्रिन्स सूरज के नेतृत्व में 20000 सेना भेजी| युद्धे-मैदान कुछ यूँ सजा:

20-21-22 अगस्त 1748 तीन दिन की इस ऐतिहासिक लड़ाई में एक तरफ तीन लाख तीस हजार (330000) सैनिकों से सजी मुगल-मराठा पेशवाओं और माधो सिंह के पक्ष वाले राजपूतों की 7-7 सेनायें, तो दूसरी तरह राजा ईश्वरी सिंह के पक्ष में सजी मात्र बीस हजार (20000) की कुशवाहा राजपूत और हरयाणा-ब्रज रियासत भरतपुर की सिर्फ 2 सेनाएं।

एक तरफ छोटे आकार के सैनिक तो दूसरी तरफ ये 7-7 फुटिये लम्बे-चौड़े 150-150 किलो वजनी भरतपुर जाट सेना के सैनिक।

एक तरफ अस्सी हजार (80000) की टुकड़ी तो दूसरी तरफ मात्र दो हजार (2000) की टुकड़ी उनको गुर्रिल्ला वार में छका-छका के पीटती हुई।

एक तरफ गाजर-मूली की तरह कटते सैनिक तो दूसरी तरफ पचास-पचास (50-50) को मारने वाला एक-एक जाट और कुशवाहा राजपूत सैनिक।

एक तरफ 7-7 राजा तो दूसरी तरफ 7 फुटी 200 किलो वजनी अकेले भरतपुर प्रिन्स सूरज।

और यह लड़ाई चली भी पूरे तीन दिन थी और वो भी बरसाती तूफानों में अरावली के रेतीले मैदानों और पथरीले पहाड़ों के बीच सरे-मैदान लड़ी गई थी। कुल मिला के क्या 'ट्रॉय', क्या 'ग्लैडिएटर', क्या 'स्पार्टा', क्या '300' और क्या 'बाहुबली'; इनसे भी कालजयी थिएट्रिकल दृश्य उस युद्धे-मैदान सजा था|

कुशवाहा राजपूत सेनापति दूसरे दिन वीरगति को प्राप्त हुआ तो अब सारा दारोमदार अकेले सूरज-सुजान के कन्धों पर आन पड़ा| और तब वो दुदुम्भी मची थी कि रणचंड़ी भी स्तब्ध देखती रह गई और अंत में माधो सिंह की जिद्द की हार हुई और इस प्रकार सूरज-सुजान ने राजा ईश्वरी सिंह आमेर की गद्दी पर विराजमान रखवाये|

उनकी वीरता को देख बूँदी कोर्ट के राजकवि सूर्यमल के मुख से कर्कश ही यह पंक्तियाँ निकली:

नहीं जाटनी ने सही व्यर्थ प्रसव की पीर,
जन्मा उसके गर्भ से सूरजमल सा वीर!

धन्य है यह धरा, धन्य है वो कायनात, जिसने उस अफलातून को साक्षात् धरती पर चलते हुए देखा, तांडव करते हुए देखा|

अजेय महाराजा के बलिदान दिवस 25 दिसम्बर पर उन्हें कोटि कोटि श्रद्धांजलि।
25/12/2018

अजेय महाराजा के बलिदान दिवस 25 दिसम्बर पर उन्हें कोटि कोटि श्रद्धांजलि।

20/11/2017

#ताजमहल पुराना हो गया,

अब हम #पर्यटकों को
#राम_रहीम की #गुफा दिखाएंगे!!😃😃
(प्यार की निशानी)😜😝
😜😜😜😜

17/11/2017

हार्दिक हम शर्मिंदा है..!
तेरा CD का प्रिंट गंदा है...!!
- कन्हैया कुमार (जेएनयू वाले) 😂

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