सीकर शहर से २५ किलोमीटर आगे पश्चिम दिशा में सालासर मार्ग पर सेवद बड़ी से ३ किलोमीटर उत्तर दिशा में बसा हुआ एक छोटा सा गाँव है विजयपुरा !
गाँव में कुल ४०० परिवार रहते है, कुल जनसँख्या तक़रीबन २५०० है, गाँव में सरकारी स्कूल, सरकारी दवाखाना, आंगनबाड़ी कार्यालय, सार्वजनिक कुआँ राज्य सरकार द्वारा संचालित किये जाते है, गाँव में ग्रामीण पेयजल कुआँ और गौसाला ग्राम विकास समिति के सहयोग से संचालित होते है,
गाँव में ठाकुरजी, जानकी वल्लभजी, भैरूजी, गोगाजी, रामदेवजी, आदि देवताओ के मंदिर बने हुये है, गाँव के पश्चिम दिशा में बना बालाजी का मंदिर " नीम वाले बालाजी " काफी प्रसिद्ध है, गाँव को आस पास के गावों से जोड़ने वाले सारे रास्तो पर सड़क बनी हुई है, गाँव के गंदे जल के निकास की समुचित व्यवस्था है!
रोजमर्रा की जरुरत के सामान के लिए गाँव में दुकान हैं, गाँव में खाती, नाई, दर्जी, हलवाई, डॉक्टर, और परिवहन की सेवा उपलब्ध हैं, गाँव में एम्ब्युलेंस सुविधा उपलब्ध है, गाँव में इंग्लिश मीडियम स्कूल संचालित हो रहा है, गाँव के विकास के लिए ग्राम पंचायत समिति समय समय पर उचित कार्य करवाती है!
गाँव में लगभग २५० निजी कुँए और ट्यूबवेल हैं, खरीफ और रबी की फसल की बुवाई की जाती है, मुख्यतः बाजरा, मुंग, मोठ, ग्वार, तिल, मूंगफली, गेहूँ, जौ, चना, सरसों, राई, मेथी, जीरा आदि की फसल बहुतायत में होती है, सकरकंदी, प्याज़ तथा अन्य कई प्रकार की सब्जियां भी पैदा होती है!
हाल ही में गाँव में सरस डेयरी ने भी अपना सयंत्र लगाया है, गाँव में दूध देने वाले पशु भैंस, गाय, बकरी आदि काफी मात्र में पाले जाते है, ऊंट, बैल, घोड़ी, भेड़ आदि भी पाले जाते है!
गाँव में वैसे तो बहुत सारी जातियां है पर ज्यादातर जाट जाती के लोग है, जाटों में ज्यादातर चाहर गोत्र के लोग है, उनके अलावा गोदारा, बीजारनिया, शेषमा, पचार, बुल्डक, मंडीवाल आदि गोत्र के लोग है, इनके अलावा ब्रह्मण, जोगी, नाइक, रोहलन, सैनी, जांगीर आदि जाती के लोग भी रहते है, गाँव के ज्यादातर लोग व्यावसायिक गतिविधियों में सलंगन है, देश विदेश में बहुत जगह पर व्यवसाय संचालित कर रहे है, अधिकांश युवा सरकारी नोकरी में लगे हुए है, और निजी व्यवसाय में भी बहुत सारे युवा ऊँचाइयों का आसमान छू रहे है, गाँव में शराब बिक्री पर पाबन्दी है!
गाँव का इतिहास - गाँव के बड़े बुजुर्गो के कहे अनुसार गाँव का नाम पहले बचबड़ी था, सुटोट के राजा ने सीमावर्ती राजा को हराकर लोटते समय विजय की खुशी में गाँव का नाम विजयपुरा रखा!