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ASHOK MOOND Raj Police

*महत्वपूर्ण जानकारी.....*  *एक नए तरीके का फ्रॉड है जिसमें CyberFraud किसी अज्ञात नंबर से आपको वेडिंग इनविटेशन भेजता है।...
31/08/2025

*महत्वपूर्ण जानकारी.....*

*एक नए तरीके का फ्रॉड है जिसमें CyberFraud किसी अज्ञात नंबर से आपको वेडिंग इनविटेशन भेजता है।* नागरिकों को जानकारी न होने के अभाव में वो उस पर क्लिक कर देते हैं, जिससे वे साइबर फ्रॉड का शिकार हो जाते हैं।

दरअसल ये एक Apk फ़ाइल होती है जिसके आपके फ़ोन में इंस्टॉल होते ही आपके मोबाइल/फोन नंबर का एक्सेस फ्रॉड के पास चला जाता है, आपके सोशल अकाउंट्स हैक हो सकते हैं। आपके UPI अकाउंट्स का एक्सेस भी फ़्रॉड्स के पास जा सकता है। इसका एक मात्र बचाव सिर्फ और सिर्फ जागरूकता है।

30/08/2025

उत्तराखंड- इसे कहते हैं बाल बाल बचना

तस्वीरें टिहरी के थत्युड की है

एक चौपहिया मालवाहक वाहन वहाँ पहाड़ के नीचे पहुँचा तभी बड़े बड़े पत्थर पहाड़ से आ गिरे लेकिन ड्राइवर ने टाइम से ब्रेक लगा दिया था तो वाहन सवार सभी बाल बाल बच गये

10/10/2024
06/03/2024

क्या आप जानते हैं कि वकील किसे पीट रहे हैं, जिन्होंने युवाओं का भविष्य बर्बाद किया और जिन्होंने मेहनत करने वाले बच्चों को रुलाया। भारत में सिर्फ बलात्कारियों को ही ऐसे पीटा जाता था. आज उन्हें पीटा जा रहा है, कृपया इस वीडियो को शेयर करें और status डालें ताकि लोग भविष्य में ऐसा कुछ भी करने से पहले सोचें -

02/03/2024

पूरा सुने plz 🙏🤝
आज हमारे समाज में कुछ भाई बन्धु, महानुभव कहते रहते हैं कि बच्चों के रिश्ते नहीं होते बड़ी परेशानी होती जा रहीं हैं! लेकिन कमी लड़के और लड़कियों की वजह नही है बल्कि कमी क्या है इस महापुरुष से सुनिए मेरे ख्याल से शायद यह सत्य ही कह रहा है! धन्यवाद है इस महापुरुष को 👏👏

हल्दी रस्म या  फिजूल खर्चीअमीरों के चक्कर में बेचारा गरीब पिस रहा है 🤔आज कल ग्रामीण परिवेश में होने वाली शादियों में एक ...
01/03/2024

हल्दी रस्म या फिजूल खर्ची

अमीरों के चक्कर में बेचारा गरीब पिस रहा है 🤔

आज कल ग्रामीण परिवेश में होने वाली शादियों में एक नई रस्म का जन्म हुआ है हल्दी रस्म।

हल्दी रस्म के दौरान हजारों रूपये खर्च कर के विशेष डेकोरेशन किया जाता है, उस दिन दूल्हा या दुल्हन विशेष पीत (पीले) वस्त्र धारण करते हैं। साल 2020 से पूर्व इस हल्दी रस्म का प्रचलन ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं पर भी देखने को नहीं मिलता था, लेकिन पिछले साल दो-तीन साल से इसका प्रचलन बहुत तेजी से ग्रामीण क्षेत्र में बढ़ा है।

पहले हल्दी की रस्म के पीछे कोई दिखावा नहीं होता था, बल्कि तार्किकता होती थी। पहले ग्रामीण क्षेत्रों में आज की तरह साबुन व शैम्पू नहीं थे और ना ही ब्यूटी पार्लर था। इसलिए हल्दी के उबटन से घिसघिस कर दूल्हे-दुल्हन के चेहरे व शरीर से मृत चमड़ी और मेल को हटाने, चेहरे को मुलायम और चमकदार बनाने के लिए हल्दी, चंदन, आटा, दूध से तैयार उबटन का प्रयोग करते थे। ताकि दूल्हा-दुल्हन सुंदर लगे। इस काम की जिम्मेदारी घर-परिवार की महिलाओं की थी। लेकिन आजकल की हल्दी रस्म मोडिफाइड, दिखावटी और मंहगी हो गई है। जिसमें हजारों रूपये खर्च कर डेकोरेशन किया जाता है। महंगे पीले वस्त्र पहने जाते है। दूल्हा दुल्हन के घर जाता है और पूरे वातावरण, कार्यक्रम को पीताम्बरी बनाने के भरसक प्रयास किये जाते हैं। यह पीला ड्रामा घर के मुखिया के माथे पर तनाव की लकीरें खींचता है जिससे चिंतामय पसीना टपकता है।

पुराने समय में जहां कच्ची छतों के नीचे पक्के इरादों के साथ दूल्हा-दुल्हन बिना किसी दिखावे के फेरे लेकर अपना जीवन आनंद के साथ शुरू करते थे, लेकिन आज पक्के इरादे कम और दिखावा और बनावटीपन ज्यादा होने लगा है।

आजकल देखने में आ रहा है कि ग्रामीण क्षेत्र में आर्थिक रूप से असक्षम परिवार के लड़के भी इस शहरी बनावटीपन में शामिल होकर परिवार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ा रहे है। क्योंकि उन्हें अपने छुट भईए नेताओं, वन साइड हेयर कटिंग वाले या लम्बे बालों वाले सिगरेट का धुंआ उड़ाते दोस्तों को अपना ठरका दिखाना होता है। इंस्टाग्राम, फेसबुक आदि के लिए रील बनानी है। बेटे के रील बनाने के चक्कर में बाप की कर्ज़ उतरने में ही रेल बन जाती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे घरों में फिजूल खर्ची में पैसा पानी की तरह बहाया जाता है जिनके मां-बाप ने हाड़-तोड़ मेहनत और पसीने की कमाई से पाई-पाई जोड़ कर मकान का ढांचा खड़ा किया लेकिन ये नवयौवन लड़के-लड़कियां बिना समझे अपने मां-बाप की हैसियत से विपरीत जाकर अनावश्यक खर्चा करते हैं।

जिन परिवारों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं हो उन परिवारों के बच्चों को मां-बाप से जिद्द करके इस तरह की फिजूल खर्ची नहीं करवानी चाहिए। आजकल काफी जगह यह भी देखने को मिलता है कि बच्चे (जिनकी शादी है) मां-बाप से कहते है आप कुछ नहीं जानते, आपको समझ नहीं है, आपकी सोच वही पुरानी अनपढ़ों वाली रहेगी, यह कहते हुए अपने माता-पिता को गंवारू, पिछड़ा, थे तो बौझ्अ बरगा हो कहते हैं। मैं जब भी यह सुनता हूं सोचने को विवश हो जाता हूं, पांव अस्थिर हो जाते हैं। बड़ी चिंता होती हैं कि मेरा युवा व छोटा भाई-बहिन किस दिशा में जा रहे हैं।

इस तरह की फिजूलखर्ची वाली रस्म को रोकने के समाचार पढ़ कर खुशी होती है लेकिन अपने घर, परिवार, समाज, गांव में ऐसे कार्यक्रम में शरीक होकर लुत्फ उठा रहे हैं, फोटो खिंचवाकर स्टेटस लगा रहे हैं।

लगभग 100 साल पहले यह दरोगा जी (थानेदार जी )की सवारी हुआ करती थी।आज उनके रौब दाब की कल्पना करना मुश्किल है।
29/02/2024

लगभग 100 साल पहले यह दरोगा जी
(थानेदार जी )की सवारी हुआ करती थी।
आज उनके रौब दाब की कल्पना करना मुश्किल है।

तस्वीर उस समय की है जब भारत और अफ़ग़ानिस्तान के बीच सीधे व्यापार हुआ करता था, बीच में अंग्रेज़ों का बनाया हुआ फ़र्ज़ी दे...
21/02/2024

तस्वीर उस समय की है जब भारत और अफ़ग़ानिस्तान के बीच सीधे व्यापार हुआ करता था, बीच में अंग्रेज़ों का बनाया हुआ फ़र्ज़ी देश पाकिस्तान नहीं था। उस समय अफ़ग़ानिस्तान के ताजिर ऊँट के क़ाफ़िले के साथ अपने सामान को लेकर भारत के पेशावर आया करते थे। और फिर यहाँ से इनका समान अलग अलग रूट से भारत के अलग अलग हिस्से में जाता था। ऐसे ही एक अफ़ग़ानी पर रवींद्र नाथ ठाकुर ने बहुत ही मशहूर कहानी लिखी थी “काबुलीवाला” जिस पर फ़िल्म तक बन चुकी है।

मसाला किंग MDH की शुरुआत साल 1919 में पंजाब के सियालकोट हुई थी ....  तब MDH अपने फ़ुल फॉर्म Mahashian Di Hatti के नाम से...
21/02/2024

मसाला किंग MDH की शुरुआत साल 1919 में पंजाब के सियालकोट हुई थी .... तब MDH अपने फ़ुल फॉर्म Mahashian Di Hatti के नाम से जाना जाता था।

तस्वीर 1923 की है, जिसमें सियालकोट में Mahashian Di Hatti के नाम से मसाले की दुकान चल रही है।

1947 में बँटवारे का भेंट चढ़ ये दुकान दिल्ली शिफ़्ट हुई, और आज हम इसे MDH के रूप में जानते हैं।

Happy Birthday My Princess
07/02/2024

Happy Birthday My Princess

04/02/2024
28/01/2024

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