23/06/2026
सम्राट सरकार के पास आखिर बिहार की जनता को देने के लिए क्या बचा है?
न युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार, न भ्रष्टाचार पर लगाम, न भू-माफियाओं के खिलाफ ठोस कार्रवाई और न ही अपराध पर पूरी तरह नियंत्रण। हर विभाग संसाधनों (पैसे)की कमी से जूझ रहा है, लेकिन जब जनता सवाल पूछती है तो सत्ता के लोग सिर्फ बड़े-बड़े दावे करने लगते हैं।
सम्राट चौधरी जी हर मंच से कहते हैं कि "अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा", लेकिन बिहार की जनता पूछ रही है कि आखिर कार्रवाई किन पर हो रही है? क्या सत्ता में बैठे लोग कभी खुद से भी सवाल पूछेंगे?
आज बिहार के लोग उस दौर को भी याद कर रहे हैं जब नीतीश कुमार के नेतृत्व में कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाने के प्रयासों की चर्चा होती थी। मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन जनता यह महसूस कर रही है कि उस समय कम से कम शासन और प्रशासन पर लोगों का भरोसा अधिक था।
भरत तिवारी के मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि किसी निर्दोष के साथ अन्याय हुआ है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और सच सामने आना चाहिए। जनता जवाब चाहती है, क्योंकि न्याय केवल एक परिवार का नहीं, पूरे समाज का अधिकार है।
भरत तिवारी को जानने वाले उन्हें एक समाजसेवी और लोगों की आवाज उठाने वाले व्यक्ति के रूप में याद करते हैं। उनकी मर्ड रसे जुड़े सवालों को दबाने के बजाय पारदर्शिता के साथ जवाब दिया जाना चाहिए।
याद रखिए, सत्ता स्थायी नहीं होती। बिहार की जनता सब देख रही है और लोकतंत्र में जनता ही अंतिम फैसला सुनाती है।
भरत तिवारी को न्याय दो।
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