19/05/2026
जमुई जिले में 26 हाथियों के झुंड का सफल प्रबंधन: बिना किसी क्षति के सुरक्षित झारखंड भेजा गया ।
जमुई वन प्रमंडल के अथक प्रयासों से जिले में भटक कर आए हाथियों के झुंड को सफलतापूर्वक उनके प्राकृतिक आवास झारखंड के वन क्षेत्रों में वापस भेज दिया गया है। जमुई जिले के वन विभाग के कर्मियों ने अपनी कार्य-कुशलता, निडरता और सटीक समन्वय और संवेदनशीलता से एक बार फिर मानव-हाथी संघर्ष के प्रबंधन का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया है। झारखंड के वन क्षेत्रों से भटक कर आए 26 हाथियों के इस झुंड ने जिले में करीब एक माह तक आवागमन किया, लेकिन विभाग की सतर्कता के कारण इस पूरी अवधि में किसी भी मानव अथवा हाथी को किसी भी प्रकार की क्षति नहीं हुई।
हाथियों के इस झुंड का आगमन 24 फरवरी, 2026 को नवादा जिले के कौआकोल जंगल से जमुई के हरखाड़, जन्मस्थान और गरही के वन क्षेत्रों में हुआ था। इस झुंड की संवेदनशीलता इस तथ्य से और बढ़ गई थी कि इसमें 5 छोटे बच्चे शामिल थे, जिनमें से एक बिल्कुल नवजात था। पूरे प्रवास के दौरान यह झुंड मुख्य रूप से गिद्धेश्वर पहाड़ी और पाठकचक डैम के आसपास के जंगलों में विचरण (movement) करता रहा। वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार, एशियाई हाथी भोजन और जल की खोज में लंबी दूरियां तय करते हैं और उनका यह आवागमन प्रशासनिक सीमाओं के बजाय पारिस्थितिक आवश्यकताओं पर आधारित होता है। अक्सर वन क्षेत्रों में प्राकृतिक चारा कम होने पर ये झुंड अधिक पोषण वाली फसलों जैसे गेहूं, गन्ना और मक्का की ओर आकर्षित होते हैं, जो उनके लिए जोखिम भरा होने के बावजूद खेतों पर धावा बोलने का कारण बनता है।
इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जमुई वन प्रमंडल द्वारा अत्यंत पेशेवर तरीके से कार्रवाई की गई। वनकर्मियों के विभिन्न दलों द्वारा हाथियों की 24x7 निगरानी और ट्रैकिंग की गई, जिसमें रात के समय उनकी सटीक स्थिति जानने के लिए अत्याधुनिक थर्मल ड्रोन का उपयोग किया गया। झुंड को सुरक्षित दिशा में मोड़ने के लिए ध्वनि, मशाल और पटाखों का अत्यंत सीमित व नियंत्रित प्रयोग किया गया ताकि उन्हें बिना उत्तेजित किए उनके मार्ग पर आगे बढ़ाया जा सके। इसके साथ ही, विद्युत विभाग के समन्वय से बिजली कनेक्शन काटने का अनुरोध किया गया ताकि किसी भी अनहोनी को टाला जा सके.