DPS

DPS दलित, पिछड़ा, शोषित एकता (DPS.Organisation)

06/11/2024

एक नज़्म :
जिस देश में ...!
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जिस देश में जनपथ पर कीलों के तार लगाए जाते हों
जिस देश में बैरीकेड लगा शहरी धकिआए जाते हों
जिस देश में मज़लूमों को आँसू-गैस सुंघाया जाता हो
हक़ की उठती आवाजों को गोली से दबाया जाता हो
प्ले-कार्ड दिखाने पर भी जहाँ पैलेट के छर्रे चलते हों
जिस देश में जन अधिकारों पर लाठी और हुर्रे चलते हों
जिस देश में पानी की बौछारें ठंड में छोड़ी जाती हों
जिस देश में सच कहनेवालों की हड्डी तोड़ी जाती हों
जिस देश में हर सू नफ़रत की दीवार उठाई जाती हो
जिस देश में धर्म , भाषा , जाति की आग लगाई जाती हो
जिस देश का थाना खुलेआम गुंडागर्दी का अड्डा हो
जिस देश की संसद की बहसें खालिस मजाक एक भद्दा हो
जिस देश के मज़दूरों से खुलकर हकमारी की जाती हो
जिस देश के दहकनों की हड्डी-हड्डी दिखती छाती हो
जिस देश में पैसे के बल पर कानून खरीदा जाता हो
जिस देश के ' जनप्रतिनिधियों' का सारे चोरों से नाता हो
जिस देश के बच्चों का बचपन कचरा चुनते सड़ जाता हो
जिस देश का यौवन हो हताश रस्सी से लटक मर जाता हो
जिस देश में बेटी नंगी कर सड़कों पे घुमाई जाती हो
जिस देश का शासक जालिम हो,और खुद शासन उत्पाती हो
उस देश के जालिम शासक को गद्दी से हटाना वाजिब है
उस देश के सड़ते सिस्टम में अब आग लगाना वाजिब है ।

--- आदित्य कमल

बाबा नागार्जुनस्मृति दिवस 05 नवंबर 1998 #बाबा_नागार्जुन_जी_को_श्रद्धांजलि
05/11/2024

बाबा नागार्जुन
स्मृति दिवस

05 नवंबर 1998
#बाबा_नागार्जुन_जी_को_श्रद्धांजलि

मेरे सारे दुःख दर्दों की केवल यही कहानी है। लाभ हानि की कभी न सोची, बात हृदय की मानी है।  यह नादान हृदय कांटों के आगे तो...
04/11/2024

मेरे सारे दुःख दर्दों की केवल यही कहानी है।
लाभ हानि की कभी न सोची, बात हृदय की मानी है।
यह नादान हृदय कांटों के आगे तो चट्टानी है
और भूल से फूल अगर छू गया तो पानी पानी है।

01/11/2024

क्या क्या ना बांटा उन्होंने
धर्म - जाति बंट गए
पड़ोसी पड़ोसी बंट गए
यार - दोस्त बंट गए
खान - पान बंट गए
रंग बंट गए
कपडे बंट गए
रोजगार बंट गए
इंसान इंसान बंट गए
भाषा भी अब तो हिन्दू मुसलमान हो गई

और तुर्रा ये कि कहते हैं कि बंटोगे तो कटोगे
और हर पल रहतें हैं बांटते

31/10/2024

दीए जलाओ, मिठाई खिलाओ
भाईचारे मोहब्बत की अलख जगाओ
साम्प्रदायिक नफरत को मिटाओ
प्रेम से दीवाली मनाओ।

हर हंसते हुए चेहरे के भीतर का दर्द जब अचानक लबों से कानों तक सफ़र करता है तो मन में सिरहन दौड़ने लगती है और ज़हन में सवा...
29/10/2024

हर हंसते हुए चेहरे के भीतर का दर्द
जब अचानक लबों से कानों तक सफ़र करता है
तो मन में सिरहन दौड़ने लगती है
और ज़हन में सवाल कुलबुलाने लगते हैं
हम मेहनतकश लोग
दिल के इतने अमीर कैसे हो जाते हैं
अपने हिस्से का निवाला भी
जरूरतमंद को दे देते हैं
जबकि खुद के पास
हौसलों की दौलत के सिवा कुछ भी नहीं

जबकि इस दौर में
किसी की मदद कर
कुछ लोग
एहसान जता देते हैं
ऐसे में कुछ लोगों का
अपना जीवन दांव पर लगाना
इन्हे धरा पर कौन भेज देता है
मेरे सवाल का जवाब अब तुम देना
जीत की क़लम से

27/10/2024

" कलम का जादू "

किसी ने खूब कहा है कि
" कलम हाथ में है खंजर की क्या जरूरत है ।
पढ़ा लिखा हूं , सलीके से कत्ल करता हूं ।। ”
आज का दौरा सोशल मीडिया का दौर है ,जहां कलम का जादू सर चढ़कर अपना जादू दिख रहा है। लोग शोहरत ,यश और कीर्ति बटोर रहे हैं ,अगर उनमें लिखने का जरा भी सालीका है।
अंग्रेजी में ठीक ही कहा गया है कि
The pen is mightier than the sword."
कलम एक तरह से पारस पत्थर है ।इसको प्रसिद्ध लेखक मैथ्यू अर्नाल्ड के शब्दों में टच स्टोन भी कह सकते हैं और अंग्रेजी साहित्य की ही अगर बात करें तो लेखनीकर को अल्केमिस्ट अथवा कीमिया गीर भी कह सकते हैं
अगर इस्लाम की रवायत का बात की बात करें तो कहा गया है की विद्वान के कलम की स्याही शहीद के खून से भी ज्यादा अफजल होती है ।
आजकल सोशल मीडिया पर कुछ लोग जादुई कलम के हुनर का बखूबी इस्तेमाल करते हैं ।
कलम नायक को खलनायक बनाने का हुनर रखती है तो दूसरी तरफ सामाजिक खलनायक को नायक की श्रेणी में ला देती है ।आमिर को गरीब बना सकती है और गरीब को अमीर बन सकती है ।शाह को फकीर और फकीर को शाह बन सकती है। काले को सफेद बना देती है और सफेद को काला बना देती है। राष्ट्रवादी को राष्ट्र विरोधी बना देती है और राष्ट्र विरोधी को राष्ट्रवादी और देशभक्त बना देती है ।चरित्रवान को चरित्रहीन बना देती है और चरित्रहीन को चरित्रवान बना देती है।सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ भी देती है और बनाने का हुनर भी रखती है। यह कलम की ही ताकत है जो संभव को असंभव और असंभव को संभव बना देती है। तिल का ताड़ भी बनाने का हुनर रखती है।

लेकिन कलम का जादू बिखरने के लिए वक्त का होना बहुत ही जरूरी है जो सबके पास होता नहीं है।

मगर कलम के जादूगर के पास बात कहने का सलीका जरूर होना चाहिए । प्रो वसीम बरेलवी ने ठीक ही कहा है कि
" कौन सी बात कब ,कहां और कैसे कही जाती है।
यह सलीका हो , तो हर बात सुनी जाती है।। "

कोई  ठहरा  हुआ  संमदर  हैजो ज़माने से दिल के अंदर हैयूँ बजाते है डुगडुगी नेता आम जनता तो जैसे  बंदर है जिसने जीता नहीं क...
21/10/2024

कोई ठहरा हुआ संमदर है
जो ज़माने से दिल के अंदर है

यूँ बजाते है डुगडुगी नेता
आम जनता तो जैसे बंदर है

जिसने जीता नहीं किसी का दिल
कौन कहता है वो सिकदंर है

क्या तुझे उसका डर नहीं कोई
जिसकी धरती है जिसका अम्बर है

दूसरों पर जो तंज़ करता है
वो कहाँ का कोई धुरदंर है

उसको खोया तो ये हुआ मालूम
ये ज़माना बड़ा सितमगर है

वो अमीरे शहर है महलों मे
झोपड़ी मे कोई कलंदर. है.. अनवर क़ुरैशी

😭😭😭अत्यंत दुःखद😭😭😭-बहुजन समाज के बारे में कार्य करने वाले महान पुरोधा विधानसभा सिधौली से 7 बार विधायक रहे पूर्व मंत्री श...
21/10/2024

😭😭😭अत्यंत दुःखद😭😭😭-

बहुजन समाज के बारे में कार्य करने वाले महान पुरोधा
विधानसभा सिधौली से 7 बार विधायक
रहे पूर्व मंत्री श्यामलाल रावत जी का निधन हो गया है। परिवारीजनो को इस असीम दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करे ।
अंतिम संस्कार पैतृक ग्राम सातनापुर, सिधौली-सीतापुर में लगभग 12 बजे होगा।

जाकर वापस आया जग मेंकौन भला सुधि भोली रेबिसराना तो पड़ता ही हैजो हो ली सो हो ली रे।जीवन रुकता नहीं कभीपुटपाक बने दु:ख पल...
17/10/2024

जाकर वापस आया जग में
कौन भला सुधि भोली रे
बिसराना तो पड़ता ही है
जो हो ली सो हो ली रे।

जीवन रुकता नहीं कभी
पुटपाक बने दु:ख पलते हैं
अनजाने पथ के राही हम
गिरते और संभलते हैं
जनम-जनम से चली आ रही
ये ही आँख-मिचौली रे
बिसराना तो पड़ता ही है
जो हो ली सो हो ली रे।

एक रंग बेरंग लगेगा
दूजा रंग ज़रूरी है
केवल सुख में बीत गया जो
वो जीना बेनूरी है
ख़ुशियों के संग चलने दीजे
ग़म की हँसी-ठिठोली रे
बिसराना तो पड़ता ही है
जो हो ली सो हो ली रे।

ढ़लने का दु:ख कैसा दु:ख है
ढ़लकर पुन: उभरना है
जो परिपक्व करे अंतस को
नाम उसी का मरना है
जाते जाते मुस्काती ये
रात सुबह से बोली रे
बिसराना तो पड़ता ही है
जो हो ली सो हो ली रे।
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महान समाज सुधारक, दलितों के राजनीतिक एकीकरण तथा उत्थान के लिए कार्य करने वाले, मान्यवर कांशीराम जी की पुण्यतिथि पर शत-शत...
09/10/2024

महान समाज सुधारक, दलितों के राजनीतिक एकीकरण तथा उत्थान के लिए कार्य करने वाले, मान्यवर कांशीराम जी की पुण्यतिथि पर शत-शत नमन ॥

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