ICAR-Central Potato Research Institute, Shimla

ICAR-Central Potato Research Institute, Shimla भाकृअनुप - केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला
ICAR-Central Potato Research Institute, Shimla

"खेत बचाओ अभियान” के तहत कृषक जागरूकता कार्यक्रम आयोजितआज दिनांक 23 जून 2026 को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के निर्देशानु...
23/06/2026

"खेत बचाओ अभियान” के तहत कृषक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

आज दिनांक 23 जून 2026 को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के निर्देशानुसार भाकृअनुप–केंद्रीय आलू अनुसंधान क्षेत्रीय केंद्र, मोदीपुरम, मेरठ द्वारा ग्राम अजौटा, ब्लॉक दौराला, जिला मेरठ में “खेत बचाओ अभियान” के तहत कृषक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में कुल 50 किसानों ने भाग लिया, जिनमें 42 पुरुष एवं 8 महिला किसान शामिल रहीं।
कार्यक्रम में डॉ. पूजा मानकर, वरिष्ठ वैज्ञानिक, ने किसानों को “खेत बचाओ अभियान” के उद्देश्य एवं महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने में संतुलित खाद एवं उर्वरकों के महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने अच्छी कृषि पद्धतियों, जैविक खेती तथा फसल उत्पादन में पोषक तत्वों के संतुलित प्रबंधन की आवश्यकता के बारे में किसानों को अवगत कराया।
डॉ. वी. के. गुप्ता, प्रधान वैज्ञानिक, ने किसानों को जैविक खाद, हरी खाद एवं प्राकृतिक खेती के उपयोग से होने वाले लाभों के बारे में बताया। उन्होंने किसानों को उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग तथा मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए समेकित पोषण प्रबंधन अपनाने का आह्वान किया और फसल की आवश्यकता के अनुसार उर्वरकों का संतुलित एवं विवेकपूर्ण उपयोग करने की अपील की।
डॉ. विश्वनाथ बिदरमाली, व.त.अ., ने किसानों को उन्नत खेती, पोषक तत्वों की आवश्यकता तथा उर्वरकों के संतुलित उपयोग के बारे में अवगत कराया।
इस अवसर पर किसानों को संस्थान द्वारा विकसित उन्नत तकनीकों एवं कृषि संबंधी उपयोगी जानकारियों से भी अवगत कराया गया।
#संतुलितउर्वरकउपयोग #खेत_बचाओ_अभियान
Shivraj Singh Chouhan Bhagirath Choudhary Ministry of Agriculture & Farmer’s Welfare, Government of India Indian Council of Agricultural Research Press Information Bureau - PIB, Government of India All India Radio News DD Kisan MyGovIndia Brajesh Singh

As part of Khet Bachao Abhiyan, an awareness programme was conducted at Kuruthukuli village,  Nanjanad Panchayat, Nilgir...
23/06/2026

As part of Khet Bachao Abhiyan, an awareness programme was conducted at Kuruthukuli village, Nanjanad Panchayat, Nilgiris District, on 22.06.2026. Thirty five farmers from the village attended the programme. The session emphasised soil test–based fertiliser application, sustainable farming practices, and crop rotation and diversification, with special focus on including legumes in crop rotations to enhance soil fertility and manage pests and diseases. Farmers were also educated on the use of biofertilizers and other eco-friendly alternatives to reduce chemical inputs. Biofertilizers were distributed to the farmers during the programme.

#संतुलितउर्वरकउपयोग #खेत_बचाओ_अभियान
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**खेत बचाओ अभियान: किसान जागरूकता कार्यक्रम**दिनांक 22 जून 2026 को आईसीएआर–केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, क्षेत्रीय केंद...
22/06/2026

**खेत बचाओ अभियान: किसान जागरूकता कार्यक्रम**

दिनांक 22 जून 2026 को आईसीएआर–केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र जालंधर द्वारा IFFCO कार्यालय, न्यू ग्रेन मार्केट, जालंधर वेस्ट (जिला जालंधर) के सहयोग से एक किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में कुल 40 किसानों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में किसानों को मृदा परीक्षण के महत्व, उर्वरकों के संतुलित एवं संतुलित उपयोग तथा पराली जलाने से होने वाले पर्यावरण एवं स्वास्थ्य दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही, अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता एवं मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों पर भी प्रकाश डाला गया।

वैज्ञानिक डॉ. प्रिंस, डॉ. कार्तिक आर. तथा तकनीशियन अमित कुमार ने किसानों को प्राकृतिक खेती, जैविक खेती, हरित खाद (ग्रीन मैन्योरिंग) एवं गोबर खाद के उपयोग के लिए प्रेरित किया। किसानों को टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियाँ अपनाने की सलाह दी गई।
कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने सतत कृषि अपनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की तथा अपनी समस्याओं पर चर्चा भी की।

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"खेत बचाओ अभियान” के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजितआज दिनांक 22 जून 2026 को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के निर्देशानुसार भ...
22/06/2026

"खेत बचाओ अभियान” के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

आज दिनांक 22 जून 2026 को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के निर्देशानुसार भाकृअनुप–केंद्रीय आलू अनुसंधान क्षेत्रीय केंद्र, मोदीपुरम, मेरठ द्वारा ग्राम चरौरा मुस्तफाबाद, ब्लॉक लखावटी, जिला बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश में “खेत बचाओ अभियान” के तहत जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में डॉ. संजय रावल, प्रधान वैज्ञानिक, ने किसानों को मृदा परीक्षण के महत्व तथा मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर खाद एवं उर्वरकों के संतुलित उपयोग के बारे में जानकारी दी। उन्होंने किसानों को मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने तथा उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए प्रेरित किया।
डॉ. बंदना, वरिष्ठ वैज्ञानिक, ने किसानों को आलू भंडारण तकनीकों, कटाई उपरांत प्रबंधन तथा मूल्य संवर्धित प्रसंस्कृत उत्पादों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने किसानों को उन्नत तकनीकों को अपनाकर कृषि आय बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।
श्री उदयवीर सिंह, स.मु.त.अ., ने किसानों को “खेत बचाओ अभियान” के उद्देश्य एवं महत्व के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने किसानों से मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने की अपील की।
इस अवसर पर किसानों को संस्थान द्वारा विकसित उन्नत तकनीकों एवं कृषि संबंधी उपयोगी जानकारियों से भी अवगत कराया गया।
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"खेत बचाओ अभियान" के तहत किसानों को मिला वैज्ञानिक खेती का मंत्र, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण एवं संतुलित उर्वरक उपयोग पर दिय...
22/06/2026

"खेत बचाओ अभियान" के तहत किसानों को मिला वैज्ञानिक खेती का मंत्र, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण एवं संतुलित उर्वरक उपयोग पर दिया गया विशेष बल

पटना, 22 जून 2026। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) के निर्देशानुसार आईसीएआर-केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, क्षेत्रीय केन्द्र, पटना द्वारा जिला पटना के फतुहा प्रखंड अंतर्गत ग्राम खरफर में "खेत बचाओ अभियान" का सफल आयोजन किया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित पोषण प्रबंधन तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक बनाकर खेती को अधिक लाभकारी एवं पर्यावरण अनुकूल बनाना है।

कार्यक्रम में केन्द्र के डॉ. शिव प्रताप सिंह, प्रधान वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष, डॉ. राज कुमार सिंह, प्रधान वैज्ञानिक तथा श्री सुनील कुमार सिंह, तकनीशियन उपस्थित रहे। कार्यक्रम में कुल 42 किसानों ने भाग लिया, जिनमें 10 महिला किसानों की सक्रिय भागीदारी उल्लेखनीय रही।

वैज्ञानिकों ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि "स्वस्थ मिट्टी ही समृद्ध खेती की आधारशिला है" और यही संदेश "खेत बचाओ अभियान" का मूल उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि यदि मिट्टी स्वस्थ रहेगी तो फसलें मजबूत होंगी, उत्पादन बढ़ेगा, गुणवत्ता में सुधार होगा तथा किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।

कार्यक्रम के दौरान मृदा परीक्षण के महत्व पर विशेष प्रकाश डालते हुए किसानों को सही तरीके से मिट्टी का नमूना लेने की विधि विस्तार से समझाई गई। किसानों को बताया गया कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर खाद एवं उर्वरकों का प्रबंधन करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व संतुलित मात्रा में उपलब्ध होते हैं, जिससे उत्पादन क्षमता एवं मिट्टी की उर्वरता दोनों को बनाए रखा जा सकता है।

विशेषज्ञों ने संतुलित एवं आवश्यकता आधारित उर्वरक उपयोग के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि केवल अधिक मात्रा में रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करने से उत्पादन नहीं बढ़ता, बल्कि इससे मिट्टी की उर्वरता में गिरावट, कीट एवं रोगों का प्रकोप तथा पर्यावरण प्रदूषण जैसी समस्याएं भी बढ़ती हैं। उन्होंने किसानों को एकतरफा उर्वरक प्रयोग से बचने तथा वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुसार पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने की सलाह दी।

कार्यक्रम में हरी खाद, जैव उर्वरकों तथा फसल चक्र के महत्व पर विशेष जोर दिया गया। वैज्ञानिकों ने किसानों को जैविक खेती की बढ़ती मांग एवं उसके दीर्घकालीन लाभों से भी अवगत कराया। उन्होंने कहा कि टिकाऊ कृषि पद्धतियां अपनाकर किसान अपनी भूमि की उत्पादकता को लंबे समय तक बनाए रख सकते हैं तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण कर सकते हैं।

इस अवसर पर किसानों को संस्थान द्वारा विकसित उन्नत कृषि तकनीकों एवं अन्य उपयोगी वैज्ञानिक जानकारियों से भी अवगत कराया गया। कार्यक्रम के दौरान किसानों ने अपने क्षेत्र में नीलगायों द्वारा फसलों को पहुंचाए जा रहे नुकसान को कृषि के समक्ष एक गंभीर चुनौती बताया और इसके समाधान की आवश्यकता पर बल दिया।

किसानों ने कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बताते हुए "खेत बचाओ अभियान" की सराहना की। कार्यक्रम के समापन पर किसानों ने मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के साथ-साथ अन्य किसानों को भी इसके प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया।

"खेत बचाओ अभियान" केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि मिट्टी, फसल और किसान के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक जन-जागरूकता आंदोलन है, जो समृद्ध किसान और सशक्त कृषि की आधारशिला साबित हो रहा है।

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ICAR–-CPRI, Shimla organized an awareness programme under the “Khet Bachaao Abhiyan” on 22 June 2026 at Kotli village,  ...
22/06/2026

ICAR–-CPRI, Shimla organized an awareness programme under the “Khet Bachaao Abhiyan” on 22 June 2026 at Kotli village, Shilon Bag Panchayat, Mashobra Block, Shimla district, Himachal Pradesh. The programme was conducted by a multidisciplinary team of scientists and officials from ICAR-CPRI and was attended by 61 farmers, including 28 male and 33 female.
The programme team was led by Dr. Sanjeev Sharma and comprised Dr. Pynbiang and Sh. Rakesh Kumar. During the interaction with farmers, the team emphasized the importance of balanced and judicious use of fertilizers and highlighted the environmental and health risks associated with the excessive and indiscriminate application of chemical fertilizers. The concept of the “One Health” approach was discussed, wherein farmers were sensitized to the importance of soil health as a critical link connecting environmental sustainability, plant health, animal well-being, and human health.
The scientists advised farmers to apply fertilizers based on soil test recommendations to improve nutrient use efficiency, enhance crop productivity, reduce input costs, and maintain long-term soil fertility. The team also encouraged farmers to consider the use and conservation of locally adapted seed varieties. The programme concluded with the distribution of biofertilizers among all participants.

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भाकृअनुप- केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान एवं क्षेत्रीय केंद्रों में 21 जून 2026 को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस  का आयोजन उत्स...
21/06/2026

भाकृअनुप- केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान एवं क्षेत्रीय केंद्रों में 21 जून 2026 को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन उत्साह एवं गरिमा के साथ किया गया। इस अवसर पर संस्थान के वैज्ञानिकों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं अन्य स्टाफ सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में सभी अधिकारियों/ कर्मचारियों को विभिन्न योगासन, प्राणायाम एवं ध्यान का योगाभ्यास कराया तथा नियमित रूप से योग अपनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के दौरान योग के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य लाभों पर प्रकाश डाला गया और सभी प्रतिभागियों ने स्वस्थ एवं संतुलित जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया।

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Press Media Coverage.Ministry of Agriculture & Farmer’s Welfare, Government of India Indian Council of Agricultural Rese...
20/06/2026

Press Media Coverage.
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An awareness campaign on 'Khet Bachao Abhiyan' was organised by ICAR-CPRI, Regional Station,Ooty at Iduhatty village, Ka...
20/06/2026

An awareness campaign on 'Khet Bachao Abhiyan' was organised by ICAR-CPRI, Regional Station,Ooty at Iduhatty village, Kaggucchi Panchayat, Nilgiri District, Tamil Nadu on 20.06.2026. The program was attended by thirty five farmers from the village. The awareness programme emphasized soil test-based fertilizer application, sustainable farming practices, crop rotation and diversification, with special focus on crop rotation including legumes to enhance soil fertility and to manage pest and diseases. Farmers were also educated on the use of biofertilizers and other eco-friendly alternatives to minimize chemical inputs. Biofertilizers were also distributed to the farmers during the programme.

#संतुलितउर्वरकउपयोग #खेत_बचाओ_अभियान
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खेत बचाओ अभियान: जालंधर में किसान जागरूकता कार्यक्रमकेंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (क्षेत्रीय केंद्र, जालंधर) द्वारा 19 ज...
20/06/2026

खेत बचाओ अभियान: जालंधर में किसान जागरूकता कार्यक्रम
केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (क्षेत्रीय केंद्र, जालंधर) द्वारा 19 जून 2026 को ग्राम शेरपुर, हुसैनपुर (नकोदर, जालंधर) में "खेत बचाओ अभियान" के तहत एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इसमें संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. अरविंद जायसवाल और डॉ. ब्रजेश नारे ने 55 महिला-पुरुष किसानों को कृषि उत्पादन बढ़ाने, भूमि उर्वरता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया।
मुख्य बिंदु:
• संतुलित उर्वरक उपयोग: मिट्टी के स्वास्थ्य को बचाने के लिए रासायनिक खादों के वैज्ञानिक व सीमित इस्तेमाल की सलाह दी गई।
• गुणवत्ता पर ध्यान: नकली व घटिया कीटनाशकों और फफूंदनाशकों के दुष्प्रभावों से बचने के उपाय बताए गए।
• प्राकृतिक खेती को बढ़ावा: मृदा परीक्षण, गोबर खाद, जैविक व हरी खाद के नियमित उपयोग पर विशेष बल दिया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित कृषकों ने भी सतत खेती अपनाने की प्रतिबद्धता जताई और अपनी समस्याओं पर चर्चा की।

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Shivraj Singh Chouhan Bhagirath Choudhary Ministry of Agriculture & Farmer’s Welfare, Government of India Indian Council of Agricultural Research Press Information Bureau - PIB, Government of India All India Radio News DD Kisan MyGovIndia Brajesh Singh

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