SPNF

SPNF State Project Implementing Unit (SPIU)
Directorate of Agriculture
Krishi Bhawan,Boileauganj,Shimla-1

आत्मा परियोजना, विकास खंड पूह के सौजन्य से दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजनआत्मा (ATMA) परियोजना, विकास खंड पूह (जिला ...
21/04/2026

आत्मा परियोजना, विकास खंड पूह के सौजन्य से दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन

आत्मा (ATMA) परियोजना, विकास खंड पूह (जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश) के अंतर्गत दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर “Learning and Preparing Cattle Feed” का सफल आयोजन किया गया।

इस प्रशिक्षण शिविर का मुख्य उद्देश्य किसानों को संतुलित पशु आहार के महत्व और पशुपालन की उत्पादकता बढ़ाने के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी देना था।

कार्यक्रम में पशु चिकित्सालय रिब्बा के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अरविंद ने किसानों को पशुओं के पोषण प्रबंधन, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उपाय, हरे चारे के संरक्षण, साइलेंज (Silage) बनाने की विधि तथा मिनरल मिक्सचर के उपयोग के बारे में विस्तार से बताया। इसके अलावा उन्होंने पशुओं के स्वास्थ्य, टीकाकरण और रोग प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी भी साझा की।

दो दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान किसानों को संतुलित पशु आहार तैयार करने की विधि का व्यावहारिक प्रदर्शन भी कराया गया, जिससे वे इसे अपने स्तर पर आसानी से लागू कर सकें।

इस अवसर पर आत्मा परियोजना के खंड तकनीकी प्रबंधक जय नेगी ने किसानों को प्राकृतिक खेती (Natural Farming) और कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को घर पर ही संतुलित दाना-चारा तैयार करने के लिए प्रेरित किया।

इस पहल की सभी प्रतिभागियों ने सराहना की और भविष्य में भी ऐसे तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की मांग रखी।

इस प्रशिक्षण शिविर में लगभग 30 किसानों ने भाग लिया। इसके अलावा भूतपूर्व प्रधान एवं उपप्रधान, पंचायत सदस्य (ग्राम पंचायत रिब्बा), आत्मा के एटीएम (ATMs) तथा क्लस्टर रिब्बा (NMNF) के सीआरपी (CRPs) भी उपस्थित रहे।🌾🌾🌾🌾

https://www.facebook.com/share/187C2tpDmy/
19/04/2026

https://www.facebook.com/share/187C2tpDmy/

प्राकृतिक खेती में अपनी एक अलग पहचान बना चुके हमीरपुर के निकटवर्ती गांव हरनेड़ के एक और किसान परिवार ने प्राकृतिक ...

https://youtu.be/05pOrBP2-Yoयह चर्चा सेब की खेती में तुड़ाई के बाद (Post-Harvest) प्रबंधन, भंडारण, मार्केटिंग और आमदनी ब...
03/04/2026

https://youtu.be/05pOrBP2-Yo
यह चर्चा सेब की खेती में तुड़ाई के बाद (Post-Harvest) प्रबंधन, भंडारण, मार्केटिंग और आमदनी बढ़ाने के व्यावहारिक तरीकों पर केंद्रित है। इसमें विशेषज्ञों और किसानों के अनुभवों के आधार पर बताया गया है कि सही समय, सही तकनीक और सही निर्णय से कैसे बेहतर दाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

सेब की खेती में लाभ बढ़ाने के लिए तुड़ाई के बाद सही प्रबंधन सबसे महत्वपूर्ण है। तुड़ाई के 10–15 दिनों के भीतर स्प्रे करना संक्रमण से बचाता है, जबकि तुड़ाई, ट्रांसपोर्ट और प्री-कूलिंग में देरी से गुणवत्ता घटती है और नुकसान होता है। सही ग्रेडिंग और पैकिंग से बाजार में बेहतर दाम मिलते हैं, वहीं कोल्ड स्टोरेज का उपयोग करके मार्केट ग्लट से बचा जा सकता है। किसानों को रंग देखकर जल्दी तुड़ाई नहीं करनी चाहिए, बल्कि सही मैच्योरिटी पर ध्यान देना चाहिए। A और B ग्रेड फल बाजार में बेचकर और C ग्रेड को प्रोसेसिंग में उपयोग करके अतिरिक्त आय प्राप्त की जा सकती है। साथ ही, अगली फसल के लिए मई–जून में पोषण प्रबंधन और थिनिंग करना आवश्यक है। सही समय पर निर्णय और स्मार्ट मार्केटिंग ही अधिक लाभ की कुंजी है।

सेब खेती – जरूरी बातें (अधिक लाभ के लिए)

पोस्ट हार्वेस्ट
तुड़ाई के 10–15 दिन में स्प्रे जरूरी
देरी = गुणवत्ता खराब

सबसे बड़ी समस्या
तुड़ाई → ट्रांसपोर्ट → प्री-कूलिंग में देरी (8–12 घंटे नुकसान)

भंडारण
कोल्ड स्टोरेज का उपयोग करें
छोटे किसानों के लिए माइक्रो स्टोरेज जरूरी

दाम कैसे बढ़ाएं
सही ग्रेडिंग + पैकिंग = बेहतर रेट
छोटे पैक / सीधे बिक्री = ज्यादा लाभ
मार्केट ग्लट से बचें

किसानों की सामान्य गलतियां
रंग देखकर जल्दी तुड़ाई (मैच्योर नहीं)
बीमारी आने के बाद स्प्रे (बहुत देर)
ग्रेडिंग पर ध्यान नहीं

स्मार्ट रणनीति
A/B ग्रेड → बाजार में बेचें
C ग्रेड → प्रोसेसिंग (जैम, जूस आदि)

फसल प्रबंधन
अगली फसल की तैयारी मई–जून से शुरू
थिनिंग करें → उत्पादन स्थिर रहेगा

कीट नियंत्रण
जरूरत होने पर ही स्प्रे करें

निष्कर्ष:
सही समय + सही प्रबंधन + सही बिक्री = अधिक मुनाफा

प्रोग्राम का नाम चौपाल चर्चाफल - सब्जियों का तुड़ाई के बाद प्रबंधनस्थान - रोहडू , हिमाचल प्रदेशप्रोड्यूसर - अतनु टि....

23/03/2026
21/03/2026

21/03/2026

जिला किन्नौर के 11 किसान 7 दिवसीय अंतर-राज्यीय अध्ययन भ्रमण किया इस भ्रमण का उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, जै...
12/03/2026

जिला किन्नौर के 11 किसान 7 दिवसीय अंतर-राज्यीय अध्ययन भ्रमण किया इस भ्रमण का उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, जैविक एवं प्राकृतिक खेती के नवीन तरीकों तथा उन्नत कृषि प्रबंधन से अवगत कराना है।
इस अध्ययन भ्रमण के दौरान किसान दल हरियाणा राज्य के प्रमुख कृषि संस्थानों और प्रगतिशील क्षेत्रों का दौरा किया । किसानों को कुरुक्षेत्र में प्राकीर्तिक खेती तथा करनाल में स्थित राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान , क़ृषि विज्ञान केंद्र,भारतीय गेहूँ व जौ अनुसंधान संस्थान सहित प्रगतिशील किसानों के खेतों तथा आधुनिक कृषि इकाइयों का अवलोकन करवाया, जहां वे उन्नत फसल उत्पादन तकनीक, जल प्रबंधन, मशीनरी उपयोग और एकीकृत कृषि प्रणाली के बारे में जानकारी प्राप्त की ।
इसके अतिरिक्त किसान दल उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित राष्ट्रीय जैविक एवं प्राकृतिक खेती केंद्र का भी भ्रमण किया । यहां किसानों को जैविक खेती, प्राकृतिक खेती, जैविक खाद निर्माण, जैव-कीटनाशक तैयार करने की विधि तथा टिकाऊ कृषि प्रणाली के बारे में प्रशिक्षण और व्यावहारिक जानकारी दी।
इस अध्ययन भ्रमण से किन्नौर के किसानों को नई तकनीकों को अपनाने और अपने क्षेत्र में कृषि एवं बागवानी उत्पादन को और अधिक उन्नत बनाने में सहायता मिलेगी। किसानों ने भी इस पहल के लिए परियोजना निदेशक आत्मा कृषि विभाग व प्रभारी जय नेगी का आभार व्यक्त किया और कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण और भ्रमण कार्यक्रम किसानों के ज्ञान और अनुभव को बढ़ाने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होते हैं।

11/03/2026

प्राकृतिक खेती मॉडल का अध्ययन करने हिमाचल पहुंचे फ्रांस के शोधार्थीशिमला।हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने...
10/03/2026

प्राकृतिक खेती मॉडल का अध्ययन करने हिमाचल पहुंचे फ्रांस के शोधार्थी
शिमला।
हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयास अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। राज्य में रसायन मुक्त और टिकाऊ खेती को प्रोत्साहित करने के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों और नीतियों का अध्ययन करने के लिए विदेशों से शोधकर्ता भी यहां पहुंच रहे हैं। इसी कड़ी में कृषि, खाद्य और पर्यावरण के लिए फ्रांसीसी राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान (INRAE–LISIS) के शोधार्थी हेमल ठक्कर इन दिनों हिमाचल प्रदेश के दौरे पर हैं। ठक्कर हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती मॉडल, उसकी नीति व्यवस्था और किसानों पर पड़ रहे उसके प्रभावों का अध्ययन कर रहे हैं। हिमाचल में बड़े स्तर पर प्राकृतिक खेती को अपनाने की पहल ने देश-विदेश के शोधकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया है।
Université Gustave Eiffel से जुड़े ठक्कर अपनी डॉक्टोरल शोध के तहत कृषि में एग्रोइकोलॉजिकल परिवर्तन और उसे बढ़ावा देने में सार्वजनिक नीतियों की भूमिका पर काम कर रहे हैं। उनका शोध यह समझने पर केंद्रित है कि किस प्रकार सरकारी नीतियां, संस्थागत ढांचे और ज्ञान प्रणालियां किसानों को टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल खेती की ओर बढ़ने में सहायता करती हैं।
अपने अंतरराष्ट्रीय तुलनात्मक अध्ययन के तहत वे फ्रांस, भारत और केन्या में एग्रोइकोलॉजी और प्राकृतिक खेती से जुड़ी पहलों का अध्ययन कर रहे हैं। इसी कड़ी में उन्होंने 6 मार्च को शिमला में कृषि निदेशालय के अधिकारियों से मुलाकात कर राज्य में लागू प्राकतिक खेती की प्रगति और क्रियान्वयन के बारे में जानकारी हासिल की।
कृषि निदेशालय में बैठक के दौरान अधिकारियों ने शोधार्थी हेमल ठक्कर से प्राकृतिक खेती से जुड़े नीति ढांचे, किसानों द्वारा इसके बढ़ते अपनाव और मिट्टी की सेहत, किसानों की आजीविका तथा पर्यावरणीय स्थिरता पर इसके प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की।
इस अवसर पर कृषि विभाग के निदेशक डॉ. रविंद्र सिंह जसरोटिया ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से न केवल खेती की लागत कम हो रही है, बल्कि मिट्टी की सेहत में सुधार, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय में स्थिरता भी देखने को मिल रही है। अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की रुचि राज्य में चल रही इस पहल की सफलता और महत्व को दर्शाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के शैक्षणिक और शोध आदान-प्रदान से हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में हो रहे कार्यों को वैश्विक स्तर पर पहचान मिल रही है। साथ ही ऐसे सहयोग से किसानों, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं के बीच ज्ञान और अनुभवों का आदान-प्रदान भी संभव हो रहा है, जो टिकाऊ कृषि को आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो सकता है।

आईये,प्राकृतिक खेती के लिए वोट करें नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके वोट करें
03/03/2026

आईये,प्राकृतिक खेती के लिए वोट करें
नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके वोट करें

Home/Furthering Entrepreneurship Capacity of Natural Farming based FPCs through Institutional Technological Interventions – Dr YS Parmar University of Horticulture and Forestry Nauni Solan HP Furthering Entrepreneurship Capacity of Natural Farming based FPCs through Institutional Technological Int...

Address

Directorate Of Agriculture
Shimla
171005

Opening Hours

Monday 9am - 5pm
Tuesday 9am - 5pm
Wednesday 9am - 5pm
Thursday 9am - 5pm
Friday 9am - 5pm
Saturday 9am - 5pm

Telephone

+911772830767

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when SPNF posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Organization

Send a message to SPNF:

Share