DYFI Himachal Pradesh

DYFI Himachal Pradesh Youth Organization

05/08/2025
04/08/2025

आज सोलन के लाइब्रेरी प्रांगण में DYFI, SFI व लाइब्रेरी के आम छात्रों के द्वारा साझा तौर पर प्रदेश सरकार द्वारा लाई गई "Job Trainee Policy, 2025" के विरोध में उग्र प्रदर्शन किया गया और प्रदेश सरकार को यह चेतावनी दी गई कि यदि प्रदेश के आम युवाओं के साथ किए गए भद्दे मज़ाक की इस पॉलिसी को वापस नहीं लिया गया तो प्रदेश के तमाम युवाओं को लामबंद करते हुए एक व्यापक आंदोलन सरकार के खिलाफ खड़ा किया जाएगा।


आज सोलन के लाइब्रेरी प्रांगण में DYFI, SFI व लाइब्रेरी के आम छात्रों के द्वारा साझा तौर पर प्रदेश सरकार द्वारा लाई गई "J...
04/08/2025

आज सोलन के लाइब्रेरी प्रांगण में DYFI, SFI व लाइब्रेरी के आम छात्रों के द्वारा साझा तौर पर प्रदेश सरकार द्वारा लाई गई "Job Trainee Policy, 2025" के विरोध में उग्र प्रदर्शन किया गया और प्रदेश सरकार को यह चेतावनी दी गई कि यदि प्रदेश के आम युवाओं के साथ किए गए भद्दे मज़ाक की इस पॉलिसी को वापस नहीं लिया गया तो प्रदेश के तमाम युवाओं को लामबंद करते हुए एक व्यापक आंदोलन सरकार के खिलाफ खड़ा किया जाएगा।


21/07/2025

| मुज़फ्फरनगर के बाबा बालकनाथ ढाबे में कांवड़ियों ने मचाया उत्पात.देखिए रिपोर्ट:https://youtube.com/watch?v=OWlueEXGbag&t=3sहमारे नए एन.....

Representing the voice of Himachal’s youth, a delegation from Himachal Pradesh actively participated in the All India Co...
21/07/2025

Representing the voice of Himachal’s youth, a delegation from Himachal Pradesh actively participated in the All India Convention on 'Undoing Unemployment' organised by DYFI.

19/07/2025

19 जुलाई को दिल्ली के HKS सुरजीत भवन में DYFI ने बेरोजगारी, ठेका प्रथा और निजीकरण के खिलाफ़ जोरदार कन्वेंशन किया। स्थायी ....

All India Convention with slogan of Undoing Unemployment is being organised in HKS Surjeet Bhawan, Delhi.
19/07/2025

All India Convention with slogan of Undoing Unemployment is being organised in HKS Surjeet Bhawan, Delhi.

शहीद सुखदेव थापर: विचारों की मशाल, इंकलाब का अमिट नाम(जन्म: 15 मई 1907, शहादत: 23 मार्च 1931)आज 15 मई है—एक ऐसे क्रांतिक...
15/05/2025

शहीद सुखदेव थापर: विचारों की मशाल, इंकलाब का अमिट नाम
(जन्म: 15 मई 1907, शहादत: 23 मार्च 1931)

आज 15 मई है—एक ऐसे क्रांतिकारी की जयंती, जिसने अपने जीवन को न सिर्फ़ देश की आज़ादी के लिए कुर्बान किया, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को यह सबक भी दिया कि बिना विचारधारा के संघर्ष अधूरा होता है।

सुखदेव थापर, लाहौर के रहने वाले, हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) के प्रमुख स्तंभों में से एक थे। वो केवल एक क्रांतिकारी नहीं, बल्कि एक संगठनकर्ता, विचारक और अनुशासित कार्यकर्ता थे, जो भगत सिंह और राजगुरु के साथ ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ सबसे मजबूत आवाज़ बनकर उभरे।

उनका संघर्ष सिर्फ़ अंग्रेजों के खिलाफ़ नहीं था...

सुखदेव का संघर्ष सामाजिक अन्याय, जातिवाद, शोषण और पूंजीवादी गुलामी के खिलाफ भी था। वह मानते थे कि सिर्फ राजनीतिक आज़ादी ही नहीं, सामाजिक और आर्थिक समानता भी ज़रूरी है।

सुखदेव और भगत सिंह—इंकलाब के दो कंधे

जहाँ भगत सिंह विचारधारात्मक गहराई के लिए जाने जाते हैं, वहीं सुखदेव उस विचार को कार्यान्वयन में बदलने वाले योद्धा थे। भगत सिंह की लेखनी के पीछे सुखदेव की रणनीति और संगठन क्षमता का भी बड़ा योगदान था।

लाहौर षड्यंत्र केस और शहादत

सुखदेव को भगत सिंह और राजगुरु के साथ 23 मार्च 1931 को लाहौर में फाँसी दी गई। तीनों ने मौत को गले लगाया, लेकिन झुके नहीं।
उनकी शहादत ने पूरे देश में क्रांति की लहर फैला दी।

आज की ज़रूरत—सुखदेव को समझना, याद रखना और जीना

आज जब समाज फिर से असमानता, धार्मिक उन्माद, बेरोजगारी और पूंजीवाद के चंगुल में फंसा है, तो सुखदेव को याद करना सिर्फ श्रद्धांजलि देना नहीं है—बल्कि उनके अधूरे सपनों को पूरा करने की ज़िम्मेदारी उठाना है।

सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम सवाल उठाएं, अन्याय के खिलाफ खड़े हों, और एक ऐसे समाज के लिए संघर्ष करें जो बराबरी, भाईचारा और न्याय पर टिका हो।

"इंकलाब ज़िंदाबाद" केवल नारा नहीं था, वह एक सोच थी—जिसे सुखदेव ने जिया।
आज उनके जन्मदिवस पर संकल्प लें—कि हम भी उस सोच को जिएंगे।"

November 3: DYFI Foundation Day!
03/11/2024

November 3: DYFI Foundation Day!

यतीन्द्रनाथ दास का शहादत दिवस (13 सितम्बर)प्रिय साथियों,आज हम उस अमर क्रांतिकारी, यतीन्द्रनाथ दास का शहादत दिवस मना रहे ...
13/09/2024

यतीन्द्रनाथ दास का शहादत दिवस (13 सितम्बर)

प्रिय साथियों,

आज हम उस अमर क्रांतिकारी, यतीन्द्रनाथ दास का शहादत दिवस मना रहे हैं, जिन्होंने अपने अद्वितीय साहस और बलिदान से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को प्रेरित किया। हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (एचएसआरए) के सदस्य के रूप में, यतीन्द्रनाथ दास ने 63 दिन की भूख हड़ताल के बाद लाहौर के बोर्स्टल जेल में प्राण त्यागे, लेकिन अन्याय के सामने झुकना स्वीकार नहीं किया। उनका यह बलिदान एक ऐसा अध्याय है जिसने आने वाली पीढ़ियों को न्याय और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी।

यतीन्द्रनाथ दास का क्रांतिकारी सफर असहयोग आन्दोलन से शुरू हुआ, जहां उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ निडरता से संघर्ष किया और कई बार जेल गए। क्रांतिकारी आन्दोलन में शचीन्द्रनाथ सान्याल के साथ जुड़कर उन्होंने हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (एचआरए) की नींव रखने में अहम भूमिका निभाई। संगठन के लिए धन जुटाना, अस्त्र-शस्त्रों की व्यवस्था करना और बम बनाने का प्रशिक्षण देना—हर मोर्चे पर यतीन्द्रनाथ दास ने अपना सर्वस्व समर्पित किया।

काकोरी काण्ड में गिरफ्तारी के बाद उन्हें बंगाल की जेलों में अमानवीय यातनाएं दी गईं, लेकिन वे अडिग रहे और जेल अधिकारियों के अत्याचार के विरोध में अनशन किया। उनकी दृढ़ता ने उन पर होने वाले अन्याय को उजागर किया और उनके अद्वितीय साहस की मिसाल कायम की।

लाहौर षड्यंत्र केस में गिरफ्तारी के बाद, भगतसिंह और बटुकेश्वर दत्त के साथ भूख हड़ताल में शामिल होकर, यतीन्द्रनाथ दास ने ब्रिटिश शासन के क्रूर कारावास प्रणाली का विरोध किया। उनकी शहादत ने पूरे देश को झकझोर दिया, और उनकी अंतिम यात्रा में लाखों लोग उमड़े। यतीन्द्रनाथ दास की शहादत ने यह सिद्ध किया कि जनता की एकता और संकल्प ही सबसे बड़ी ताकत होती है।

यतीन्द्रनाथ दास केवल स्वतंत्रता सेनानी नहीं थे, बल्कि सांप्रदायिकता के खिलाफ एक सशक्त आवाज़ भी थे। जब देश में धार्मिक आधार पर फूट डालने की कोशिशें हो रही थीं, तब यतीन्द्रनाथ और उनके साथी क्रांतिकारी 'हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' के माध्यम से जाति, धर्म, और क्षेत्र के भेदभाव को समाप्त करने के लिए संघर्षरत थे। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि स्वतंत्रता का संघर्ष तभी पूर्ण हो सकता है जब देश के हर नागरिक को समान अधिकार और अवसर प्राप्त हों, चाहे वह किसी भी धर्म या समुदाय से हो।

यतीन्द्रनाथ दास और उनके साथियों का यह मानना था कि ब्रिटिश हुकूमत की "बांटो और राज करो" की नीति का सबसे बड़ा हथियार सांप्रदायिकता है, जिसे वे हर हाल में असफल करना चाहते थे। उन्होंने सांप्रदायिकता को राष्ट्र के विकास के लिए सबसे बड़ा खतरा माना और इस विचारधारा के खिलाफ जनता को जागरूक करने का कार्य किया। उनके लिए भारत की स्वतंत्रता का मतलब केवल विदेशी हुकूमत से मुक्ति नहीं था, बल्कि एक ऐसे समाज की स्थापना थी जहाँ सभी धर्मों और समुदायों के लोग आपस में मिलकर एकता और समानता के साथ रह सकें।

आज, यतीन्द्रनाथ दास की शहादत हमें यह याद दिलाती है कि स्वतंत्रता, समानता और न्याय के लिए हमें निरंतर संघर्षरत रहना होगा। सांप्रदायिकता के खिलाफ लड़ाई को तेज करना होगा ताकि उनके सपनों का एक प्रगतिशील और समतामूलक समाज स्थापित हो सके। भारत की जनवादी नौजवान सभा यतीन्द्रनाथ दास को क्रांतिकारी सलाम पेश करती है और उनके आदर्शों पर चलते हुए, एक बेहतर समाज के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है।

इन्क़लाब ज़िन्दाबाद!

भारत की जनवादी नौजवान सभा

Democratic Youth Federation of India bids farewell to Comrade Sitaram Yechury, General Secretary of CPI (M). Rest in pow...
13/09/2024

Democratic Youth Federation of India bids farewell to Comrade Sitaram Yechury, General Secretary of CPI (M).

Rest in power, comrade!

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Shimla
171005

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