शहीद भगत सिंह विचार मंच, शिमला

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02/01/2026

हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला से एक बहुत ही दुखद घटना सामने आई है ,जहां कॉलेज में पढ़ने वाली एक छात्रा की अस्पताल में मृत्यु हो गई है।अपनी मृत्यु से पहले छात्रा ने अपने साथ पढ़ने वाले छात्रों और वहां पढ़ाने वाले एक प्रोफेसर पर रैगिंग और शारीरिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है। छात्रा के परिवार का कहना है कि वो इस मामले को लेकर लगातार कॉलेज प्रशासन और पुलिस दोनों के पास जाते रहे।परंतु, दोनों ने इस घटनापर कोई संज्ञान नहीं लिया जिसके चलते छात्रा डिप्रेशन का शिकार हो गई और अंततः वह जिंदगी की लड़ाई हार गई। हम शहीद भगत सिंह विचार मंच, शिमला की तरफ से इस घटना में शामिल तमाम लोगों को सख्त से सख्त सजा देने की मांग करते है। लेकिन, इसके साथ ही हम यह भी कहना चाहते है कि अपनी तरह की यह कोई इकलौती घटना नहीं है अभी कुछ ही समय पहले देहरादून में भी त्रिपुरा के एक छात्र को नस्लीय टिप्पणियों का विरोध करने पर उसकी हत्या कर दी जाती है। इन घटनाओं को अंजाम देने वाले ज्यादातर अपराधी रसूखदार परिवारों से आते है जो यह मानते है कि कानून उनकी जेब में है। उनका यह मानना गलत भी नहीं है, क्योंकि अक्सर हम देखते है कि जब बात किसी अमीर और राजनीतिक रूप से सशक्त व्यक्ति की हो तो पहले तो पुलिस उनपर कोई केस दर्ज नहीं करती है, और जनदबाव के चलते अगर उन्हें उनके खिलाफ कुछ करवाई करनी भी पड़े तो तब भी उनकी कोशिश रहती है कि उनपर काफी हल्की धाराओं पर मुकदमा दर्ज हो। इसलिए, अगर हम चाहते है कि भविष्य में हमारे बच्चे इन दौलत और सत्ता के नशे में चूर इन गुंडों के हाथों ना मारे जाए तो हमें मजदूर और मेहनतकश जनता की एक मजबूत एकता बनाकर इनका मुकाबला करने के लिए तैयार होना होगा

शहीद भगत सिंह विचार मंच, शिमला

31/12/2025

29 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के 2017 उन्नाव बलात्कार के मुख्य आरोपी कुलदीप सेंगर को जमानत देने के फैसले पर रोक लगा दी। मीडिया के एक हिस्से द्वारा इसे "एक जीत "के रूप में दिखाने की कोशिश करी गई लेकिन पीड़िता के वकील महमूद प्राचा ने इस पर विरोध करते हुए कहा कि इसे एक जीत की तरह देखना बिल्कुल गलत होगा। उन्होंने आगे कहा कि इस फैसले को सिर्फ एक हल्की राहत के तौर पर ही देखना चाहिए। उनकी यह बात एकदम सही है, इस मामले में कुलदीप सेंगर और इस जघन्य अपराध में उसका साथ देने वाले तमाम लोगों के लिए सिर्फ एक ही सज़ा बनती है और वह है फांसी। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि जब इस घटना को अंजाम दिया गया था तब भी योगी आदित्यनाथ की भाजपा सरकार ने इस मामले को दबाने की पूरी कोशिश की थी, परंतु भारी जनदबाव के चलते उन्हें और प्रशासन को कुलदीप सेंगर पर मुकदमा दर्ज करने पर मजबूर होना पड़ा था। आज भी अगर सुप्रीम कोर्ट को कुलदीप सेंगर की जमानत रद्द करने को मजबूर होना पड़ा है तो उसके पीछे भी जनता का दबाव ही है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि इस देश की तमाम अदालतें राम रहीम, आसाराम जैसे बलात्कारियों को बार बार पैरोल पर रिहा करती आई है। वहीं दूसरी तरफ, जनता की लड़ाई लड़ रहे लोगों को झूठे मुकदमों में फंसा जेल में सड़ने को छोड़ दिया जा रहा है। इससे बिलकुल साफ हो जाता है कि हमारे देश की न्यायव्यवस्था किसके पक्ष में खड़ी है। उन्नाव रेप की पीड़िता ने बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि कुलदीप सेंगर और उसका परिवार मुझे फूलन देवी बनने पर मजबूर कर रहा है। उनका यह कथन भारत के उन तमाम मजदूर और मेहनतकश लोगों की व्यथा को दर्शाता है जहां सालों साल अदालतों के धक्के खाने के बाद भी उन्हें इंसाफ नहीं मिल पाता है।
शहीद भगत सिंह विचार मंच, शिमला

05/11/2025

केंद्र की मोदी सरकार द्वारा पंजाब यूनिवर्सिटी की सीनेट को भंग करने के फैसले का हम शहीद भगत सिंह विचार मंच, शिमला की ओर से कड़ी निंदा करते है। मोदी सरकार का यह फैसला राज्यों ने जो थोड़े बहुत अधिकार जनता के संघर्षों के द्वारा हासिल किए थे उन्हें खत्म करने के लिए एक बड़ा कदम हैं। इसलिए हम पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे हिमाचल के छात्रों और पंजाब के अलग अलग हिस्सों में काम करने वाली हिमाचल की मजदूर और मेहनतकश जनता से अपील करते है कि पंजाब यूनिवर्सिटी को बचाने के इस संघर्ष में पंजाब की जनता का साथ दे। इसके अलावा, हम हिमाचल प्रदेश के तमाम न्यायप्रिय और जनवादी संगठनों से भी इस फैसले के खिलाफ आवाज उठाने की अपील करते है।
इंकलाब जिंदाबाद

हिमाचल प्रदेश, पंजाब, और जम्मू कश्मीर में आई भयानक प्राकृतिक आपदा मुनाफ़ाखोर पूँजीवादी नीतियों का परिणाम है इस समय हिमाच...
08/09/2025

हिमाचल प्रदेश, पंजाब, और जम्मू कश्मीर में आई भयानक प्राकृतिक आपदा मुनाफ़ाखोर पूँजीवादी नीतियों का परिणाम है



इस समय हिमाचल प्रदेश, पंजाब, जम्मू कश्मीर समेत उत्तर भारत के कई राज्य भारी वर्षा के कारण भीषण बाढ़ का सामना कर रहे हैं। हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार इस मानसून में अब तक तकरीबन 325 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इसके अलावा, भारी भूस्खलन और बाढ़ के कारण लगभग 3056 करोड़ रुपये की सरकारी संपत्ति का नुकसान हिमाचल प्रदेश में हुआ है। यही हालात पंजाब और जम्मू कश्मीर के भी हैं, जहाँ बारिश ने पिछले कई सालों के सभी रिकार्ड तोड़ दिए हैं।



खासकर पंजाब इस समय दोहरी मुसीबत झेल रहा है, जहाँ पहाड़ों में स्थित बाँधों से छोड़े गए अतिरिक्त पानी के कारण कई जिले पूरी तरह डूब गए हैं। अब सवाल उठता है कि जिस संकट से आज मज़दूर और मेहनतकश आबादी जूझ रही है, उसका असली जिम्मेदार कौन है? अगर हम गोदी मीडिया की बात करें, तो वह इसके पीछे दैवीय प्रकोप और धरती पर बढ़ते पापों को जिम्मेदार बताती है। यह सब बातें इसलिए की जा रही हैं ताकि इस तबाही के पीछे जो असली कारण हैं, उन पर पर्दा डाला जा सके।



आज जो भयानक मंजर हम अपनी आँखों के सामने देख रहे हैं, उसके लिए मुनाफ़ा-केंद्रित पूँजीवादी नीतियाँ पूर्ण रूप से जिम्मेदार हैं। जनता को विकास का झूठा सपना दिखाकर इन वोटखोर चुनावी पार्टियों के नेताओं ने मज़दूर और मेहनतकश आवाम से उनका सबकुछ छीन लिया है। हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में अंधाधुंध निर्माण, जंगलों की कटाई, सुरंगों की खुदाई और जल स्रोतों की अनदेखी ने प्रकृति के संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। फोरलेन सड़कों, जलविद्युत परियोजनाओं और खनन ने न केवल पर्यावरण को तबाह किया है, बल्कि स्थानीय लोगों के जीवन और आजीविका को भी संकट में डाल दिया है।

आज जब बादल फटते हैं, पहाड़ दरकते हैं और गाँव के गाँव बाढ़ में बह जाते हैं—तो यह केवल प्राकृतिक घटनाएँ नहीं, बल्कि एक ‘नीतिगत आपदा’ हैं। जिन कॉर्पोरेट परियोजनाओं को 'विकास' का नाम दिया गया था, वे अब विनाश का कारण बन रही हैं।



संकट के समय जहाँ सरकार और प्रशासन पूरी तरह असहाय नजर आया, वहीं आम जनता ने अदम्य साहस और इंसानियत का परिचय दिया। प्रदेश ही नहीं, देशभर से लोगों ने बड़ी संख्या में राहत सामग्री और आर्थिक सहायता भेजकर पीड़ितों के दुख को बाँटने की कोशिश की है। दूसरी ओर, कांग्रेस, भाजपा, और आम आदमी पार्टी जैसी राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने इस भीषण आपदा में भी अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेंकने का कोई मौका नहीं छोड़ा। ऐसे में यह जनता का अधिकार और कर्तव्य बनता है कि वह इन नेताओं से कड़े सवाल पूछे—आपदा प्रबंधन में इतनी लापरवाही क्यों हुई? समय पर मदद क्यों नहीं पहुँची? और भविष्य में ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं?यह त्रासदी एक बार फिर साबित करती है कि सच्ची ताकत नेताओं या सत्ता में नहीं, बल्कि जागरूक और संगठित जनता में होती है। अगर जनता एकजुट होकर जवाबदेही तय करे, तो किसी भी सरकार या नेता को अपनी जिम्मेदारी से भागने का मौका नहीं मिलेगा।

"I am talking about the British government. I have nothing against the English people at all. I have more English friend...
31/07/2025

"I am talking about the British government. I have nothing against the English people at all. I have more English friends living in England than I have in India. I have great sympathy with the workers of England. I am against the Imperialist Government." Down With British Imperialism. "

Shaheed Udham Singh

30/07/2025

जम्मू में एक बहुत ही भयानक हादसा सामने आया है, जिसमें एक थार चालक द्वारा एक बुजुर्ग व्यक्ति को बेरहमी के साथ टक्कर मारकर फरार हो जाता है। इस तरह का अपने आप में यह कोई पहला मामला नहीं है बल्कि दौलत के नशे मे चूर इन अमीरजादों द्वारा कई बार इस तरह की वारदातों को अंजाम दिया जा चुका हैं। अभी कुछ ही समय पहले गुजरात के अहमदाबाद में एक तेज रफ्तार गाड़ी ने कई लोगों की कुचलकर हत्या कर दि थी। अक्सर इस तरह के मामलों मे शामिल मुजरिमों को बचाने के लिए पुलिस द्वारा बहुत ही मामूली धाराओ में केस दर्ज किया जाता है, जिस कारण यह दरिंदे खुलेआम घूमते नज़र आते है। इन तमाम वारदातों से एक बात शीशे की तरह साफ है कि पूंजीवादी व्यवस्था में तमाम कानून सिर्फ गरीबो पर लागू होते अमीरों पर नहीं।

शहीद भगत सिंह विचार मंच शिमला

राजस्थान के झालावाड़ जिले के पिपलोदी गाँव में 25 जुलाई, 2025 की सुबह लगभग 8:30 बजे एक सरकारी प्राथमिक स्कूल की छत गिरने स...
26/07/2025

राजस्थान के झालावाड़ जिले के पिपलोदी गाँव में 25 जुलाई, 2025 की सुबह लगभग 8:30 बजे एक सरकारी प्राथमिक स्कूल की छत गिरने से 7 मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यह कोई पहली घटना नहीं है जब स्कूल की जर्जर इमारत बच्चों के लिए मौत का सबब बनी हो। देशभर में तमाम सरकारी स्कूल आज भी बुनियादी संरचनात्मक सुविधाओं से वंचित हैं, जिनमें सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी की जाती है। विभिन्न रिपोर्टों से यह सामने आया है कि हजारों स्कूल भवन जर्जर अवस्था में हैं, जहां न तो नियमित मरम्मत होती है और न ही समय-समय पर कोई सुरक्षा ऑडिट। इस त्रासदी ने एक बार फिर सरकारी तंत्र की लापरवाही और शिक्षा ढांचे की बदहाली को उजागर कर दिया है। यह घटना न केवल प्रशासनिक उदासीनता का प्रतीक है, बल्कि यह भी बताती है कि शिक्षा के अधिकार की बात करने वाले देश में बच्चों की सुरक्षा तक सुनिश्चित नहीं की जा रही।

हिमाचल प्रदेश में आई भीषण प्राकृतिक आपदा में अब तक 91 लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इ...
17/07/2025

हिमाचल प्रदेश में आई भीषण प्राकृतिक आपदा में अब तक 91 लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इस संकट के समय जहां सरकार और प्रशासन पूरी तरह असहाय नजर आया, वहीं आम जनता ने अदम्य साहस और इंसानियत का परिचय दिया। प्रदेश ही नहीं, देशभर से लोगों ने बड़ी संख्या में राहत सामग्री और आर्थिक सहायता भेजकर पीड़ितों के दुख को बांटने की कोशिश की है।

दूसरी ओर, कांग्रेस और भाजपा जैसी राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने इस भीषण आपदा में भी अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने का कोई मौका नहीं छोड़ा। ऐसे में यह जनता का अधिकार और कर्तव्य बनता है कि वह इन नेताओं से कड़े सवाल पूछे—आपदा प्रबंधन में इतनी लापरवाही क्यों हुई? समय पर मदद क्यों नहीं पहुंची? और भविष्य में ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं?

यह त्रासदी एक बार फिर यह साबित करती है कि सच्ची ताकत नेताओं या सत्ता में नहीं, बल्कि जागरूक और संगठित जनता में होती है। अगर जनता एकजुट होकर जवाबदेही तय करे तो किसी भी सरकार या नेता को अपनी जिम्मेदारी से भागने का मौका नहीं मिलेगा।

16/07/2025
05/07/2025

हिमाचल प्रदेश एक बार फिर प्रकृति के कहर का निशाना बना है। बादल फटना, भूस्खलन और बाढ़ जैसी आपदाओं ने आम लोगों की ज़िंदगी को तहस-नहस कर दिया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक करीब 70 लोग जान गंवा चुके हैं और 700 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का नुकसान हो चुका है।

हर दिन कहीं पुल बह रहे हैं, कहीं घरों के मलबे में ज़िंदगियाँ दबी हैं, कहीं रास्ते टूटे पड़े हैं। लोग मदद की आस में बैठे हैं, लेकिन उनकी आवाज़ कहीं सुनाई नहीं दे रही।

ऐसे भीषण समय में जब लोगों को सही जानकारी, संवेदना और समर्थन की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है, तब मीडिया का नैतिक दायित्व होता है कि वह जमीनी सच्चाई को सामने लाए, सरकार से जवाबदेही मांगे, और पीड़ितों की आवाज़ को देश तक पहुंचाए।

लेकिन दुख की बात है कि आज का "गोदी मीडिया" इस ज़िम्मेदारी से पूरी तरह पीठ मोड़े हुए है। त्रासदी में डूबी जनता का दर्द इन चैनलों के लिए कोई मायने नहीं रखता, क्योंकि उनकी प्राथमिकता सत्ता के हितों की रक्षा करना है, न कि आम आदमी की आवाज़ को उठाना।

04/07/2025

इस समय हिमाचल प्रदेश में बादल फटने, भूस्खलन और बाढ़ के कारण मज़दूरों और मेहनतकश लोगों का जीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो चुका है। भारत में एक आम मेहनत करने वाला इंसान अपनी पूरी ज़िंदगी की कमाई एक घर बनाने में लगा देता है, और अगर उसका घर कुछ ही मिनटों में जमींदोज हो जाए, तो उसके दर्द का हम केवल अंदाजा ही लगा सकते हैं।

अब सवाल उठता है कि आज जो प्राकृतिक आपदाएं हम देख रहे हैं, उनकी जिम्मेदारी किसकी है? इन तमाम आपदाओं के पीछे पूंजीपति वर्ग और सरकार की आँख मूंदकर अपनाई गई तथाकथित "विकास" नीतियां जिम्मेदार हैं।

हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में अंधाधुंध निर्माण, जंगलों की कटाई, सुरंगों की खुदाई और जल स्रोतों की अनदेखी ने प्रकृति के संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। फोरलेन सड़कों, जलविद्युत परियोजनाओं और खनन ने न केवल पर्यावरण को तबाह किया है, बल्कि स्थानीय लोगों के जीवन और आजीविका को भी संकट में डाल दिया है।

आज जब बादल फटते हैं, पहाड़ दरकते हैं और गाँव के गाँव बाढ़ में बह जाते हैं—तो यह केवल प्राकृतिक घटनाएं नहीं हैं, बल्कि एक ‘नीतिगत आपदा’ हैं। जिन कॉर्पोरेट परियोजनाओं को 'विकास' का नाम दिया गया था, वे अब विनाश का कारण बन रही हैं।

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