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19/06/2024
मूर्ख महिलाओ की ओछी सोच…1)पुरुष हमारी तरक्की से जलते है इसीलिए वो हमें आगे बढ़ता नहीं देख सकतेउत्तर–अगर पुरुष औरतो की तरक...
29/05/2024

मूर्ख महिलाओ की ओछी सोच…

1)पुरुष हमारी तरक्की से जलते है इसीलिए वो हमें आगे बढ़ता नहीं देख सकते

उत्तर–अगर पुरुष औरतो की तरक्की से जलते तो आज भी औरत घर में चूल्हा सुलगा रही होती,न की ऑफिस में कंप्यूटर चला रही होती औरत को हवाई जहाज हो या साइकिल चलाना,कंप्यूटर हो या कैलकुलेटर चलाना,तलवार हो या बन्दूक चलाना… सब मर्दों ने ही सिखाया है क्रिकेट का बैट पकड़ना और टेबल टेनिस हो या फुटबॉल खेलना या फिर शतरंग खेलना… सब कुछ पुरुषो ने सिखाया है…अगर पुरुष महिलाओ की तरक्की से जलते तो क्या आज महिलाये ये सभी कार्य कर पाती???

2) दहेज़ लेना पुरुष प्रधान समाज का सूचक है

उत्तर– जब कोई नयी दुल्हन घर पर आती है तो उसको देखने आस पास का महिला मंडल आता है फिर सास कहती है–कुछ भी दहेज़ नहीं लायी…तब दूसरी महिला कहती है–अरे मेरी बहु तो 5 लाख दहेज़ लेकर आई थी और एक किलो सोना भी…. उसके बाद बाक़ी औरते लंबी लंबी फेंकना शुरू करती है..अरे मेरी तो 10 लाख ..मेरी तो इतना उतना ..इत्यादि..

ससुर को बहु से कोई समस्या नहीं,पति को पत्नी से कोई समस्या नहीं लेकिन ननद को भाभी से,सास को बहु से और देवरानी को जेठानी से या जेठानी को देवरानी से इसी बात की समस्या है की दहेज़ में जो उनको साडी मिली वो सस्ती थी..घटिया क्वालिटी की…

अरे वाह… अब भी क्या पुरुष दहेज़ मांगते है?? पूरी दुनिया गुनाह करे और अंत में दोष पुरुष के ऊपर मढ़ दिया जाता है ईमानदारी से बताये ये औरते की “जब इनके भाई या बेटे की शादी हुयी और इनको लाखो के गहने दहेज़ में मिले तब क्या इन औरतो ने विरोध किया था?? और आज कितनी औरते विरोध करती है???

3)शादी के बाद लड़के तो माँ बाप की सुनते नहीं।

उत्तर– अगर शादी हो जाए और लड़का अगर माँ की सुने तो वो”माँ के पल्लू वाला” कहलाता है और अगर बीबी की सुने तो ” जोरू का गुलाम”

सच तो ये है की स्त्री की मानसिकता ये रहती है की हुकूमत तो सिर्फ मेरी चलनी चाहिए और इसी मानसिकता के साथ एक घर “नारी वर्चस्व” का कुरुक्षेत्र बन जाता है.. जहां उद्देश्य और कोई नहीं बल्कि अभागा लड़का होता है… जिसको हासिल करने के लिए या अपना गुलाम बनाने के लिए माँ और पत्नी रणक्षेत्र में कूद पड़ती है ।।
कई बार माँ की गलती होती है और बेटा माँ को समझाता है लेकिन माँ समझना ही नहीं चाहती।।बेटा सोचता है की अगर कुछ और दिन माँ के साथ रहा तो कही मेरी प्राणप्यारी आत्महत्या न कर ले ..कही मेरी माँ जेल न चली जाए..इसीलिए बेटा सभी की भलाई के लिए राम बनकर सीता को अपनी कैकेयी जैसी माँ से दूर कर देता है…तब समाज कहता है ” कितना पापी बेटा है,माँ को ही भूल गया”

और अगर पत्नी दुष्टा हो तब बेटा ये सोचता है की इसका त्याग कर देता हु..जैसे ही बेटा ये सोचता है वैसे ही पत्नी देवी 498a ठोंक देती है और पूरा परिवार अंदर..और अगर वो सभी की भलाई के लिए पत्नी को लेकर अलग हो जाए तो भी ऊँगली उसी पर उठेगी…

निष्कर्ष—मुर्ख औरतो की बातो को एक कान से सुनकर दुसरे कान से निकाल दो…क्योंकि उन बातो में न सिर होता है और न पैर….

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13/01/2024

जय श्री राम

एक जमाने में इसको साइकिल पर लगवाना एक मिडिल क्लास बच्चो के लिए सपना होता था।आपका क्या कहना है??
01/10/2023

एक जमाने में इसको साइकिल पर लगवाना एक मिडिल क्लास बच्चो के लिए सपना होता था।
आपका क्या कहना है??

01/10/2023

सावधान..........
*23 ₹ किलो की लागत आती है देसी घी बनाने में.*
चमड़ा सिटी के नाम से मशहूर कानपुर में जाजमऊ से गंगा जी के किनारे किनारे 10 -12 किलोमीटर के दायरे में आप घूमने जाओ
तो आपको नाक बंद करनी पड़ेगी,
यहाँ सैंकड़ों की तादात में गंगा किनारे भट्टियां धधक रही होती हैं,
इन भट्टियों में जानवरों को काटने के बाद निकली चर्बी को गलाया जाता है,
इस चर्बी से मुख्यतः 3 चीजे बनती हैं।
1- एनामिल पेंट (जिसे हम अपने घरों की दीवारों पर लगाते हैं)
2- ग्लू (फेविकोल इत्यादि, जिन्हें हम कागज या लकड़ी जोड़ने के काम में लेते हैं)
3- और तीसरी जो सबसे महत्वपूर्ण चीज बनती है वो है "शुध्द देशी घी"
जी हाँ " शुध्द देशी घी"
यही देशी घी यहाँ थोक मंडियों में 120 से 150 रूपए किलो तक भरपूर बिकता है,
इसे बोलचाल की भाषा में "पूजा वाला घी" बोला जाता है,
इसका सबसे ज़्यादा प्रयोग भंडारे कराने वाले करते हैं। लोग 15 किलो वाला टीन खरीद कर मंदिरों में दान करके पूण्य कमा रहे हैं।
इस "शुध्द देशी घी" को आप बिलकुल नही पहचान सकते
बढ़िया रवे दार दिखने वाला ये ज़हर सुगंध में भी एसेंसकी मदद से बेजोड़ होता है,
औधोगिक क्षेत्र में कोने ने में फैली वनस्पति घी वाली फैक्टरियां भी हैं😱

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