07/10/2022
नहीं भाई 33 कोटि का अर्थ करोड़ ही है... यह नया ज्ञान पता नही किस गधे ने प्रचारित कर दिया की यहां कोटि का अर्थ प्रकार है। सनातन व्यवस्था में अदृश्य बैक्टीरिया से लेकर विशालकाय हाथी तक, परमाणु से लेकर महापर्वत हिमालय तक, दुर्वा से लेकर विशाल पीपल और वट वृक्ष तक, ग्रह, नक्षत्र आदि, अर्थात संपूर्ण प्रकृति में जो कुछ भी है, सबके नाम किसी न किसी देवी या देवता के ऊपर रखा गया है । आज विश्व में एक नई विचार धारा एनिसियंट एलियन की चल रही है, जिस पर शोध हेतु खरबों डॉलर खर्च किए जा रहे हैं। इस विचारधारा के लोग यह प्रमाणित करना चाह रहे हैं कि "मनुष्य पृथ्वी का प्राणी नहीं है बल्कि किसी सुदूर ग्रह से पृथ्वी पर आया है।"
इस बात का प्रमाण हमारे धर्मग्रंथों में सहस्र वर्षों पूर्व से ही वर्णित है, स्वर्ग , नरक, गोलोक, ब्रह्मलोक आदि देवताओं के ग्रहों के रुप में चर्चित हैं जिसे इन तथाकथित ज्ञानी महापुरुषों ने खण्डित करने की सदैव चेष्टा की।
पृथ्वी या मृत्युलोक श्रृष्टि की पुस्तक का एक अध्याय मात्र है, यह संपूर्ण नहीं है। धर्मग्रंथों में भी मात्र संकेत भर है। जिन्हे जानना कठिन है। व्हाट्सएप और फेसबुक अच्छी चीजें हैं, किंतु हमें अपने धर्मग्रंथों को भी पढ़ने तथा समझने की आवश्यकता है। हम यह विस्मृत हो चुके हैं की हमारा आधार क्या है, बस किसी ने कुछ नई अलग सी बात कह दी और वह हमारा विचार बन जाता है, यही अंधविश्वास है । इससे मुक्त होना आवश्यक है। ज्ञान अर्जित करने की जगह हम अज्ञान अर्जित कर रहे हैं। मैं नहीं जानता कि आप क्या प्रतिक्रिया देंगे, किन्तु यह अवश्य कहूंगा कि यह कलियुग है, इस युग में सत्य की खोज करनी पड़ती है, तब, जब वह हमारे सम्मुख ही है...।