20/04/2026
🌳🌳🌳 नोव देखींन नोवलो साल भाया 🌳🌳🌳
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अखाति हमारा नव वर्ष है !
साथियो अखाति का चाँद दीखता है, उस दिन से हमारे लोग मान लेते है, नया साल !
हाथ में चांदी के सिक्के ( पुराना सिक्का अदुलु ) लेकर चाँद को नमन करते है,ये शुभ माना गया है , नये साल में नये संकल्प लिये जाते है, कुछ कर गुजरने का पण करते है ! उस दिन से घर के लोग दिन में नहीं सोते है, खरीब की फसल बोने के लिए किसान खेतो को सुधारने में लग जाता है!
प्रकृति भी अपना रूप-रंग बदलने लगती है, उस समय मौसम चक्र में भी बदलाव आने लगता है, गर्म हवा( लू ) ठंडी होने लगती है, वृक्षो पर नये पत्ते आने लग जाते है, बड़े बड़े पाहडो कि आवाज भी प्राकृतिक रूप आना शुरू हो जाती है, पक्षीयो कि चहल-पहल शुरू हो जाती है, जैसे कोयल, तितर, चोउऊ,तेतेवडू आदि !
आसपास कि बड़ी नदियो( नर्मदा नदी ) में लोग मन्नत के साथ स्नान के लिये जाते है, और व्रत रखते है ! नये साल में इंदल, खवो कि मन्नत के लिये संकल्प लिया जाता है, हल कि पूजा कि जाती है, नये दिन पकवान में चावल को पकाकर खाया जाता है, खाना खाने से पहले पके चावल को पलाश के पत्तो पर रखकर कुल देव एवम् पूर्वोजो को चढ़ाया जाता है !
चावल को सच्चाई, ईमान और बेदाग का प्रतिक माना गया है ! इसलिए गॉवो कि एक कहवात है, "चुखान तोसु चुखु वात करनो", क्षेत्र के अधिकतर लोग अपने खेतो के कामो में बिजी हो जाते है ! इस बदलाव को नया साल कहते है, प्राकृतिक बदलाव को हमारे पूर्वोजो ने भी नया साल माने है !
आदिवासी गीत:-- "ओवरे इना सालो मा.... नोव देखींन ने नोवली लाड़ी लाविस"
। आदिवासी मूल मालिक जिन्दाबाद ।
आप विजय कुमार सोलंकी विज्जू
9752644241