कछवाहा पराक्रम

कछवाहा पराक्रम Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from कछवाहा पराक्रम, Social service, Borda, Sawaimadhopur.

 #पूर्व_जयपुर_महाराजा_ब्रिगेडियर_स्वर्गीय_सवाई  #भवानी_सिंह_जी_की_पुण्यतिथि_पर_उन्हें_शत_शत नमन।🙏🙏🙏(22  #अगस्त 1931 -17 ...
17/04/2024

#पूर्व_जयपुर_महाराजा_ब्रिगेडियर_स्वर्गीय_सवाई #भवानी_सिंह_जी_की_पुण्यतिथि_पर_उन्हें_शत_शत नमन।🙏🙏🙏
(22 #अगस्त 1931 -17 #अप्रेल 2011)
जय #आमेर🚩🚩🙏
जय #ढुढाड़देश🚩🚩

15/04/2024

देशहित राष्ट्रहित राजपूतों से हैं। तख्तापलट बेहद जरूरी...?
हम नहीं तो कुछ नहीं..!

*ढूंढाड़ के लोग आज भी जय* *रघुनाथजी सा...के साथ करते हैं* *अभिवादन*  *पृथ्वीराज रासो में राजपूतों के* *छत्तीस* *राजकुलों...
20/01/2024

*ढूंढाड़ के लोग आज भी जय* *रघुनाथजी सा...के साथ करते हैं* *अभिवादन*

*पृथ्वीराज रासो में राजपूतों के* *छत्तीस* *राजकुलों में कछवाहों को ** *एक* *प्रमुख** *राजवंश माना है*


*जयपुर के कछवाहा खुद को राम गद्दी का सेवक मानते हैं*

जितेन्द्र सिंह शेखावत
राजस्थान पत्रिका

मर्यादा पुरुषोत्तम राम की गद्दी का खुद को सेवक मानने वाले ढूंढाड़ के कछवाहा और अन्य लोग जय रघुनाथजी के संबोधन से अभिवादन करते है।
राम के जयेष्ठ पुत्र कुश की वंश परंपरा के कारण ढूंढाड़ के राजा कछवाहा कहलाए। पृथ्वीराज रासो में राजपूतों के छत्तीस कुलों में कछवाहों की गणना छत्तीस राजकुलों में एक प्रमुख राजवंश के रूप में की है ।
अयोध्या पर शासन करने के बाद राम के पुत्र कुश के वंशजों का ग्वालियर और बाद में राजा नल के बसाए नरवर पर राज रहा। नरवर के दूल्हे राय ने ढूंढाड़ में शासन की नींव डाली।
दूल्हेराय ने माच पर कब्जा करने के बाद कुलदेवी जमवाय माता और पूर्वज अयोध्यापति राम के नाम पर जमवारामगढ़ बसाया ।रियासत के आदेश में सीतारामों जयति लिखा जाता रहा।
अष्ट सिद्धि और नव निधि के आधार पर बसाए जयपुर में बड़ी चौपड़ के नीचे के राम के नाम पर एक हिस्से का नाम चौकड़ी चौकड़ी रामचंद्र जी रखा।
जयपुर की स्थापना के बाद छोटी चौपड़ पर सीतारामजी मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हुई जिसमें सवाई जयसिंह खुद बैठे ।
सिटी पैलेस में सीतारामजी का मंदिर बनाया जिसे सीताराम द्वारा कहते हैं। सूर्यवंशी होने के कारण सूर्य भगवान के साथ घोड़े की तर्ज पर सूरजपोल और रामपोल सहित सात दरवाजे और सूर्य मंदिर बनवाया। शास्त्रों के हिसाब से होली दिवाली दशहरा आदि के त्यौहार भी अयोध्या के धार्मिक रिवाज के मुताबिक मनाने की परंपरा रही। दिवाली पर घास की रोटी का पूजन और दशहरे पर हाथी, घोड़ों व शस्त्रों व शास्त्रों का पूजन होने लगा। अयोध्या की तर्ज पर नीलकंठ पक्षी को आजाद किया जाता है। सवाई जयसिंह के निर्देश पर राजकवि श्री कृष्ण भट्ट से कृष्ण की तरह भगवान राम की रासलीला के ऐतिहासिक काव्य की रचना करवाई । युद्ध में सबसे आगे सीताराम जी का झण्डा चलता था।

 #तुलसीदासजी_राजा_मानसिंह_जी_के_परम_मित्र_व_अयोध्या_काण्ड_की_रचना_आमेर_में_हुई_थी #जय  #आमेर🚩🙏
19/01/2024

#तुलसीदासजी_राजा_मानसिंह_जी_के_परम_मित्र_व_अयोध्या_काण्ड_की_रचना_आमेर_में_हुई_थी #
जय #आमेर🚩🙏

 #आमेर_की_सेना🚩🚩  🔥(मानगार्डस)के  #स्थापना_दिवस_की हार्दिक बधाई. एवं  #शुभकामनाएं!!10  #जनवरी 1775🚩🚩
10/01/2024

#आमेर_की_सेना🚩🚩
🔥(मानगार्डस)
के #स्थापना_दिवस_की हार्दिक बधाई. एवं #शुभकामनाएं!!
10 #जनवरी 1775🚩🚩

20/12/2023

21/12/2023 जन्म जयंती विशेष सनातन धर्म🚩
रक्षक राजराजेश्वर महेन्द्र भूपति
महाराजा #मानसिंह जी आमेर की जय हों।।
जय #आमेर 🚩

17/12/2023

पचरंगो फहरे जिको,
सहज सनातन शान,मड़द मान सी मुल्क में हिये बसे हिन्दवाण।। ेर🚩
जय #ढुढाड़देश🚩
21-12-2023

 #मात_सुनावें_बालकां_ख़ौफ़नाक_रणगाथा_काबुल_पाड़ी_नी_अजे_यो_खांडो_यो_हाथ #409  #पुण्यतिथि विशेष  #6जुलाई_2023*🚩🏳️‍🌈         ...
05/07/2023

#मात_सुनावें_बालकां_ख़ौफ़नाक_रणगाथा_काबुल_पाड़ी_नी_अजे_यो_खांडो_यो_हाथ #
409 #पुण्यतिथि विशेष #6जुलाई_2023*🚩🏳️‍🌈
ेर🚩
ुढाड़देश🚩🚩

राजा मान सिंह आमेर और जगन्नाथ पुरी धाम #दैनिक_युगपक्ष,बीकानेर
20/06/2023

राजा मान सिंह आमेर और जगन्नाथ पुरी धाम
#दैनिक_युगपक्ष,बीकानेर

"भगवान राम की दूसरी अयोध्या  के जैसा है हमारा जयपुर"जितेन्द्र सिंह शेखावतढूंढाड़ के जयपुर राज्य का कछवाहा राजवंश खुद को ...
30/03/2023

"भगवान राम की दूसरी अयोध्या के जैसा है हमारा जयपुर"

जितेन्द्र सिंह शेखावत

ढूंढाड़ के जयपुर राज्य का कछवाहा राजवंश खुद को भगवान राम की गद्दी का सेवक मानता रहा है।
दुश्मन से लड़ने के लिए रवाना होने वाली सेना और शाही सवारी में सबसे आगे सीताराम जी का रथ चलता था। इसी तरह सरकारी आदेशों में भी सीतारामो जयति लिखा जाता रहा।
भगवान राम की रासलीला के प्रथम गीत काव्य की रचना महाराजा सवाई जयसिंह के राजकवि श्री कृष्ण भट्ट ने की। जयसिंह ने कृष्ण की रासलीला का हवाला देते हुए राम की रासलीला के काव्य खोजने का कवियों को निर्देश दिया था ।
इस पर राज कवि श्री कृष्ण भट्ट ने राम की रासलीला पर गीतिका ग्रंथ की रचना की। महाराजा ने भट्ट की को राम रासाचार्य की उपाधि से सम्मानित कर जागीर प्रदान की।
जयपुर का निर्माण भी अयोध्या की परंपराओं के अनुसार किया गया। यहां सप्त ऋषि मंडल के आधार पर सात दरवाजे बनाए गए उनमें एक दरवाजा अयोध्या पोल बना। जोहरी बाजार में रामलला का रास्ता बना और वहां भगवान राम लला का मंदिर भी बना। नौ ग्रह के आधार पर बसे जयपुर में एक खंड का नाम चौकड़ी का नाम रामचंद्रजी रखा गया। जयपुर के राजाओं का राम भक्ति से विशेष जुड़ाव रहा। राम भक्ति में गलता व रेवासा पीठ में राम की पूजा करने वाले संप्रदाय का प्रारंभ हुआ। आमेर महाराजा पृथ्वीराज ने राम भक्त कृष्णदास पयहारी को गुरु बनाया ।
गलता पीठ के पयहारी जी महाराज ने आमेर नरेश पृथ्वीराज को सीताराम जी की मूर्ति भेंट करने के साथ निर्देश दिया था कि युद्ध के अलावा शाही सवारी के मौके पर इन मूर्तियों को सबसे आगे रखने पर कछवाहा वंश की कभी हार नहीं होगी। जयपुर बसने पर सवाई जयसिंह ने इन मूर्तियों को जयपुर के सिटी पैलेस में विराजमान कर दिया। जिसे आज सीताराम द्वारा कहा जाता है। अयोध्या में राम राज्य के झंडे की परंपरा के तहत ही आमेर रियासत का कचनार के झाड़ का सफेद झंडा था। बाद में मान सिंह प्रथम ने पचरंगा झण्डा फहराया।
चांदी के सिक्कों पर कचनार के झाड़ के चिन्ह से रियासत की मुद्रा भी झाड़शाही रुपए के नाम से मशहूर हुई ।
रियासत के त्योहार और परंपराओं को अयोध्या से जोड़ा गया। सवाई जयसिंह के समय कोतवाली के पास सीताराम जी का मंदिर बनाया गया। इसके बाद जयपुर में चांदपोल आदि स्थानों पर सीताराम जी के अनेक मंदिर बने।
जयपुर राज्य के इतिहास में चंद्रमणि सिंह ने लिखा है कि वर्षों तक अयोध्या पर राज करने के बाद कुश के वंशज मध्यप्रदेश के नरवर से आए और कुश का वंशज होने से आमेर के शासक कुशवंशी कछवाहा कहलाए।
पिछले दिनों अयोध्या की राम जन्म भूमि का मानचित्र भी सिटी पैलेस के कपटद्वारे से निकाला गया। इस प्रकार सवाई जयसिंह के समय बालानंद जी के संत अखाड़े भी अयोध्या के रामलला मंदिर पर पहरा देते थे। जिसका सारा खर्चा जयपुर रियासत ही उठाती रही।
(... राम नवमी पर राजस्थान पत्रिका में आज प्रकाशित जितेन्द्र सिंह शेखावत का आलेख)

हैरिटेज विंडोमहारानी मरुधर कंवर ने शिलामाता मंदिर में चढ़ाया था चांदी का पैरजितेन्द्र सिंह शेखावतजयपुर के तत्कालीन महारा...
27/03/2023

हैरिटेज विंडो
महारानी मरुधर कंवर ने शिलामाता मंदिर में चढ़ाया था चांदी का पैर
जितेन्द्र सिंह शेखावत
जयपुर के तत्कालीन महाराजा मानसिंह द्वितीय को हवाई जहाज उड़ाने का बड़ा चाव था। सन् 1935 के उस दौर में उन्होंने खुद के लिए एक हवाई जहाज भी खरीद लिया था। जहाज उड़ाने के दौरान उनको कई दुर्घटनाओं का सामना भी करना पड़ा। 25 फरवरी, 1938 को मान सिंह ने पायलट एल.एस हिल के साथ जयपुर से सवाई माधोपुर के लिए उड़ान भरी थी। रास्ते में जहाज का इंजन खराब होने पर उनका प्लेन सूखी नदी में गिर गया। इस गंभीर विमान दुर्घटना में मान सिंह घायल हो गए और विमान नष्ट हो गया था। हादसे में मान सिंह के शरीर की कई हड्डियां टूट गई थीं। इलाज के लिए उन्हें कार से जयपुर लाया गया।
दुर्घटना में नष्ट हुए विमान की जगह पर्सीवल बेगा गुल नामक नया एयरक्राफ्ट खरीदा गया। इसके बाद जयपुर में तीन जहाज हो गए थे। एयर स्पीड एनवाय और पर्सीवल बेगा गुल जहाज को मान सिंह खुद उड़ाते थे। वहीं, टाइगर मोथ विमान को जयपुर फ्लाइंग क्लब को दिया था।
वे जयपुर की जनता में बहुत लोकप्रिय थे। उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना से लोग भगवान से प्रार्थना करने लगे। सिटी पैलेस के अधिकारी रहे यदुवेन्द्र सहाय ने लिखा कि उनके पिता डॉ. दुर्गा सहाय मान सिंह के निजी चिकित्सक थे।
मान सिंह की आमेर की शिला माता के प्रति गहरी आस्था रही। वे जयपुर से बाहर जाते और आते तब शिला माता का आशीर्वाद लेने आमेर जाते थे। लंबे समय तक ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, मुंबई और जयपुर में उनका इलाज हुआ। हालांकि, उनका एक पैर सही नहीं हुआ और चिकित्सक भी हार मान चुके थे।
मान सिंह की महारानी मरुधर कंवर बहुत चिंतित रही। उन्होंने पति के स्वस्थ होने की कामना से मान सिंह के पैर के आकार का एक चांदी का पैर भी आमेर में शिलादेवी को चढ़ाया और अनुष्ठान करवाए थे। उपचार के बाद हल्की लचक के साथ मान सिंह चलने लगे और रामबाग में पोलो भी खेलने लगे। वर्ष 1957 में मान सिंह की पोलो टीम ने विश्व कप जीत कर दुनिया में तहलका भी मचा दिया। पोलो के शौकीन मान सिंह का वर्ष 1970 में पोलो खेलते हुए इंग्लैंड में निधन हुआ। उस दौर के लोगों के अनुसार उनकी शव यात्रा में लाखों लोग शामिल हुए।

 #आमेर_के_आठवें_महाराजा_श्री_पृथ्वीराजजी_कछवाहा_के_साले_साहब_व_कल्याणोत_कछवाहा_शाखा के वंश प्रवर्तक  #कालवाड़ महाराज  #क...
30/01/2023

#आमेर_के_आठवें_महाराजा_श्री_पृथ्वीराजजी_कछवाहा_के_साले_साहब_व_कल्याणोत_कछवाहा_शाखा के वंश प्रवर्तक #कालवाड़ महाराज #कल्याणदास जी कालवाड़ के मामोसा #मेवाड़ के
वीर #शिरोमणि महान #क्षत्रिय योद्धा #राणा_सांगा जी की 495 वीं #पुण्यतिथि पर उन्हें शत शत नमन 🙏🙏

Address

Borda
Sawaimadhopur
322023

Telephone

+918440088323

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when कछवाहा पराक्रम posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Organization

Send a message to कछवाहा पराक्रम:

Share

Category