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27/08/2020

मधुमेह में कारगर है ज्योतिष

रोगों के संबंध में कुछ लोगों की धारणा यह है कि रोग आहार-विहार की अनियमितता के कारण उत्पन्न होते हैं परन्तु व्यवहार में ऐसा नहीं है। इस धारणा से अनुवांशिक रोग, महामारी, दुर्घटना से उत्पन्न रोगों के कारणों की भली भांति व्याख्या नहीं की जा सकती। ज्योतिष शास्त्र में रोगों का कारण पूर्व कर्मों का प्रभाव दोषों का प्रकोप, वात-पित्त और कफ का असंतुलन माना जाता है। ज्योतिष आपको यह बता सकता है कि आपके शरीर की क्या प्रकृति है और उससे आपको कौन से रोग हो सकते हैं?

ज्योतिष के माध्यम से आप कुछ उपाय करके उन प्रवृत्तियों को समाप्त कर सकते हैं, जो आपको रोग दे रहे हैं। उदाहरण के तौर पर यदि किसी लड़की या स्त्री को पैर बाहर की ओर करके चलने की आदत है तो उसके पैरों में तकलीफ हो सकती है क्योंकि यह संकेत है कमजोर मंगल और शुक्र का। अब एक और उदाहरण, यदि किसी व्यक्ति को हर समय धन की चिंता रहती है, उसका शनि व बुध चंद्रमा को प्रभावित कर रहे हैं या कुंडली के सप्तम भाव को प्रभावित कर रहे हैं तो ऐसे लोगों को रीढ़ की हड्डी के बीच के भाग से थोड़ा नीचे या तो दर्द होगा या फिर सहजता नहीं रहेगी। इन सारी प्रवृत्तियों का आप अपने शरीर में उत्पन्न लक्षणों से पहचान सकते हैं। फिर उसके उपाय करके आने वाले रोगों से मुक्ति पा सकते हैं।

अब सवाल यह उठता है कि क्या ज्योतिष वहां भी कारगर साबित हो सकता है जहां आदमी पहले से बीमारी का शिकार है। इसका उत्तर है-हां। ज्योतिष वहां भी सफल है। आपने कई बार देखा होगा कि बीमारी हो गई और आप कुशल चिकित्सक व उत्कृष्ट दवाओं का उपयोग कर रहे हैं लेकिन कोई फायदा नहीं हो रहा है। दूसरी बात, कई बार ऐसा भी होता है कि मर्ज बढ़ता ही गया, ज्यों ज्यों दवा की। क्योंकि मर्ज कुछ और है और दवा कुछ और। यकीन कीजिए आप कुण्डली से अपनी उस मूल प्रवृति को जान सकते हैं जिसके कारण रोग हो रहा है। फिर दवा के साथ-साथ उस ग्रह का भी उपाय कर लें तो बहुत जल्द फायदा होगा। उदाहरण के तौर पर अगर किसी व्यक्ति को यह शिकायत है कि उसे नींद नहीं आती। उसने दवाई ली, जिसके असर से वह सो गया। कुछ दिन तो वह ठीक से सोया, फिर नींद उडऩे लगी। अब दवाई की मात्रा या फिर पावर बढ़ा दी तो फिर कुछ दिन नींद ठीक आई, पर उसके बाद फिर नींद उडऩे लगी। हमने उसका हाथ देखा तो पाया कि उसकी तर्जनी का निचला हिस्सा बहुत मोटा है, चंद्र पर्वत अंदर दबा हुआ है और ऊपरी मंगल उठा हुआ है। ईश्वर को याद करके उसे सलाह दी कि अनुलोम विलोम प्राणायाम करो। उन्होंने किया, उन्हें नींद ठीक आने लगी और धीरे-धीरे दवा भी छूट गई। नींद न आने का कारण यह था कि मंगल और बृहस्पति के खराब होने के कारण पेट के अंदर गैस बनती थी और सीधे मस्तिष्क यानी चंद्रमा पर असर करती थी जिससे नींद नहीं आती थी। अनुलोम-विलोम प्राणायाम एक ऐसा उपाय है जिससे चंद्र-सूर्य का उत्तम संतुलन शरीर में स्थापित हो जाता है। मन और शरीर को आराम मिलता है और नींद आने लगती है।

भारत के महान चिकित्सक चरक ने मधुमेह के बारे में लगभग 2500 साल पहले चरक संहिता में लिख दिया था जबकि पश्चिमी चिकित्साशास्त्र जिसे आज हम बहुत उन्नत मानते हैं, को यह रोग लगभग 17वीं शताब्दी में पता लगा था। इस बीमारी में पैंक्रियाज ग्रंथि यानि स्वाद पिण्ड की स्वाद ग्रंथि सही काम नहीं करती जिससे इंसुलिन का स्राव कम होता है और शरीर का शुगर बढ़ जाता है। शुगर सीधे आपको नुकसान नहीं पहुंचाएगी पर आपके शरीर में रोगों की प्रवृति बढ़ा देती है। या यूं भी कह सकते हैं कि हमारा इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है जिससे हम बीमारियों से नहीं लड़ पाते। जैसे किसी के दांत कमजोर हैं तो वह जल्दी गिर जाएंगे, किसी की आंखें कमजोर हैं तो अंधापन जल्दी बढ़ेगा, शरीर में कोई जख्म हो गया तो वह आसानी से नहीं भरेगा। मधुमेह दो तरह का होता है। पहले प्रकार का मधुमेह केवल इंसुलिन के इंजेक्शन से ही काबू में रहता है। मधुमेह का यह प्रकार दवाओं से भी अभी तक पूरी तरह ठीक नहीं हो पाया है। दूसरा मधुमेह का प्रकार वह होता है, जो अगर समय रहते पता लग लाए तो पूरी तरह ठीक हो जाता है।

अब हम कैसे पहचानें कि हमें शुगर की बीमारी हो सकती है या नहीं। मधुमेह खराब बृहस्पति, शुक्र, चंद्र और मंगल कमजोर होने की वजह से होता है। वृष, मिथुन, कन्या, तुला और वृश्चिक लग्न के जातक आसानी से इस रोग की पकड़ में आ जाते हैं। इसलिए इस लग्न के लोगों को अपना अधिक ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहले जानते हैं मधुमेह में बृहस्पति ग्रह की भूमिका।

बृहस्पति

यदि बृहस्पति कमजोर होगा या कोई खराब ग्रह उस ग्रह से या उसकी दृष्टि से प्रभावित होगा या वक्री होगा तो वह लीवर खराब करेगा और लीवर में जो बाइल जूस होता है, उसके स्राव में रुकावट करेगा जिसके कारण इंसुलिन का कार्य बाधित होगा।

लक्षण : जिनका बृहस्पति खराब होगा उन्हें एसिडिटी बहुत होगी। वह खाने के भी बहुत शौकीन होंगे, विशेषकर चटपटे खाने के या फास्ट फूड के या कोल्ड ड्रिंक्स के। उनका पेट शरीर के मुकाबले भारी होगा और उनके व्यवहार में निरंकुशता होगी लेकिन बहुत सजग होगी। ऐसे लोग पैर पटककर चलते हैं और जब चलते हैं तो पड़ोसी भी समझ जाते हैं कि भाई साहब टहल रहें हैं।

शुक्र

जिनका शुक्र खराब होगा या अधिक ताकतवर होगा उनका भी शुगर बढ़ेगा क्योंकि खराब शुक्र इंसुलिन का स्त्राव बाधित करता है।

लक्षण : जिन लोगों का शुक्र खराब होगा उनकी यूरिन संबंधी आदतें सही नहीं होगी। जैसे यूरिन कई बार आना या बहुत ही कम आना या यूरिन के दबाव को संभाल नहीं पाना। बहुत सारे बच्चों को काफी उम्र तक बिस्तर गीला करने की आदत होती है। इन बच्चों के मां-बाप को सावधान रहना चाहिए। जिनका शुक्र अच्छा नहीं होता उन्हें दूध या छेने की मिठाई पसंद होती है। ऐसे लोगों की आवाज मधुर और आंखे खास होती हैं। खराब शुक्र कफ बढ़ाता है और शरीर में मोटापा देता है। आवाज में नाक का भी इस्तेमाल ऐसे लोग अधिक करते हैं। शुक्र लोगों को आर्टिस्ट बनाता है, शुक्र प्रभावी जातक अच्छे कलाकार होते हैं लेकिन मधुमेह से वह बच नहीं पाते। ऐसे लोग अच्छे कलाकार तो होते हैं, पर कला को छोड़ देते हैं उसकी साधना नहीं करते। खास बात यह है कि शुक्र प्रेम का ग्रह है तो ऐसे लोग रोमांटिक बहुत होते हैं। यानि ज्यादा रोमंटिक लोगों को भी शुगर से सावधान रहना चाहिए।

मंगल

यदि किसी का भी मंगल कमजोर होगा तो उसे रक्तजनित बीमारियां तो घेरेगी हीं, उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर होगी। डायबिटीज हमारे इम्यून सिस्टम पर हमला करती है, इसलिए यदि आपका मंगल कमजोर है तो आप इस हमले को झेल नहीं पाएंगे। डायबिटीज ही क्यों एक छोटा सा वायरस भी आपको बार-बार बुखार दे सकता है, थोड़ा सा भी दूषित भोजन खाया कि बीमार। इसलिए मंगल का मजूबत होना जरुरी है।

लक्षण : जिन लोगों का मंगल बहुत कमजोर होगा, उन्हें डर लगेगा। बिना किसी के सहयोग के, जीवन की चुनौतियों का सामना नहीं कर पाएंगे। कल्पनाओं को साकार करने में झिझकेंगे और गुस्से को व्यक्त करने के बजाय भीतर ही जज्ब करते रहेंगे। ऐसे लोगों को अवसाद भी होगा। आंखों में तेज नहीं होगा, 24 वें साल से बाल झडऩे लगेंगे। कमजोर मंगल के कारण विवाह में देरी होगी, वैवाहिक जीवन में तनाव होगा, संतान होने में भी कष्ट होता है। साथ ही संतान भी कमजोर होती है। इसलिए मंगल के उपाय जरूर करने चाहिए।

चंद्र

चंद्रमा का विशेष उल्लेख करना इसलिए जरुरी है कि टाइप टू डाइबिटीज केवल जेनेटिक ही नहीं होती बल्कि आपके भोजन जीवनचर्या माहौल के साथ-साथ आपकी मानसिक स्थिति के कारण भी उत्पन्न होता है। आजकल हमारी जो दिनचर्या है और उसमें जो चिंताएं हमारे मन को प्रभावित करती हैं वह भी पैनक्रियाज के फंक्शन को बहुत प्रभावित करती है। चूंकि चंद्रमा मानसो जात:। अत: यदि चंद्रमा कमजोर होगा तो व्यक्ति मानसिक परेशानियों से हार जाएगा, उसे अवसाद घेर लेगा और उसका शुगर लेवल गढ़ जाएगा।

लक्षण : कमजोर चंद्रमा के लोग या जिसका चंद्रमा खराब युति से प्रभावित होता है, ऐसे लोग तनाव बहुत लेते हैं, कल्पनाएं बहुत करते हैं, इन्हें बहुत जल्दी अवसाद घेरता है, बहुत ही भावुक होते हैं, जरा-जरा सी बात पर रोते हैं, रिश्तों से बहुत अपेक्षाएं करते हैं, जरा-सी बात पर रूठ जाते हैं, खाना नहीं खाते, प्यास बहुत लगती है पर पानी कम पीते हैं।
उपाय
जो उपाय यहां बताये जा रहे हैं उसे वह लोग आजमा सकते हैं जिन्हें यह बीमारी हो गई है जिनमें डायबिटीज के लक्षण हैं या जिनके परिवार में डायबिटीज के मरीज हैं-
1. रुद्राक्ष की माला पहनें
2. करेला खाए
3. बेचैनी कम करें
4. मोटापे पर भी काबू करें
5. आंवले का प्रयोग करें
6. दो चुटकी हल्दी शहद के साथ चाटें या एक कप पानी के साथ निहार मुंह पिएं
7. मण्डूक आसन, योगमुद्रासन व अद्र्धमत्स्येन्द्रासन करें।
8. सादा भोजन करें, दिन में कई बार थोड़ा-थोड़ा भोजन करें।
9. अनुलोम विलोम कर सकते हैं
10. रात को मीठा न लें
11. सोने से पहले नींबू से फाड़कर दूध पिएं
12. तांबे का छल्ला या कड़ा जरुर पहनें।

06/08/2020

इन ज्योतिष उपायों को भूलकर भी न आजमाएं, हो सकता है नुकसान

जीवन से परेशानियों को दूर करने और सुख-समृद्धि पाने के लिए लोग कई ज्योतिष उपायों को आजमाते हैं. लेकिन ज्योतिष उपाय कई बार कारगर नहीं रहते हैं. यह तब होता है कि जब लोग बिना ज्योतिषियों की सलाह के ज्योतिष के उपायों को अजमाने लगते हैं.

हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसे ज्योतिष उपाय जिन्हें हर किसी को नहीं करना चाहिए, बल्कि ज्योतिषचार्यों की की सलाह पर ही यह उपाय करने चाहिए -

1-किसी व्यक्ति की कुंडली में अगर सूर्य सातवें या आठवें भाव में है तो व्यक्ति को कभी भी तांबे का दान नहीं करना चाहिए. ऐसा करने से धन और मान-सम्मान दोनों का नुकसान होता.

2-कुंडली में चंद्रमा को शुभ बनाने के लिए मोती पहनने की सलाह दी जाती है लेकिन बिना ज्योतिषाचार्य की सलाह के मोती धारण नहीं करना चाहिए. अगर कुंडली में चंद्रमा नीच का है तो मोती धारण करने के कुछ समय बाद ही वह व्यक्ति अवसाद और कुंठा ग्रसित हो जाता है.

3-कुंडली में बृहस्पति अगर दसवें या चौथे भाव में है तो कभी मंदिर के लिए दान नहीं देना चाहिए.

4-हर समय दान सही फल नहीं देता. ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक कभी भी उच्च ग्रहों से संबंधित दान नहीं करना चाहिए. अगर किसी की कुंडली में कोई ग्रह उच्च अवस्था में है तो उससे जुड़ा कोई भी दान नहीं करना चाहिए.

5-जिन जातकों की कुंडली में बुध ग्रह खराब स्थिति में होते हैं उन्हें कभी भी घर पर मनी प्लांट का पौधा नहीं लगाना चाहिए.

6-अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि कमजोर है तो उस व्यक्ति को घर पर कैक्टस जैसे कांटेदार पौधे नहीं लगाना चाहिए. कांटेदार पौधे से कुंडली में अशुभ शनि को बल मिलता

29/06/2020

जानें बुध का महाउपाय जिसे करते ही चमकने लगता है भाग्य

बुधवार को विशेष रूप से गणपति का और लक्ष्मी जी का वार भी माना गया है. ऐसे में इस दिन देवाधिदेव गणेश और मां लक्ष्मी की पूजा साधना भी विशेष लाभदायी मानी गई है.

सनातन परंपरा में सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी देवता या ग्रह से जुड़ हुआ है. ज्योतिषों के अनुसार बुधवार का दिन बुध ग्रह से संबंधित है. बुध बुद्धि के कारक माने जाते हैं. बुध सौरमंडल का सबसे छोटा ग्रह है. सूर्य से निकटता के कारण इनका प्रकाश प्रखर है. ग्रहों की परिषद में बुध को युवराज कहा गया है. बुधवार को विशेष रूप से गणपति का और लक्ष्मी जी का वार भी माना गया है. ऐसे में इस दिन देवाधिदेव गणेश और मां लक्ष्मी की पूजा साधना भी विशेष लाभदायी मानी गई है.

कैसे करें बुधवार का व्रत?
बुधवार का व्रत शुक्लपक्ष के बुधवार या फिर विशाखा नक्षत्र वाले बुधवार से प्रारंभ करना चाहिए. इसके बाद लगातार सात बुधवार तक पूरे विधि-विधान से व्रत रखना चाहिए. आप चाहें तो 21 या 45 व्रत का भी संकल्प ले सकते हैं. व्रत के दिन स्नान के पश्चात हरे रंग के कपड़े पहन कर श्री गणेश जी का ध्यान करें और उसके पश्चात ​बुध देव की पूजा करें. प्रसाद में मूंग का हलवा, मूंग की पंजीरी या मूंग के लड्डू चढ़ाएं. बुधवार के व्रत में दिन भर में केवल एक बार भोजन करना चाहिए. ऐसे में व्रत के दिन शाम के समय एक बार फिर से पूजन के पश्चात हरी वस्तु से बनी चीजों का सेवन करना चाहिए. भोजन में नमक और घी का प्रयोग न करें. व्रत के अंतिम दिन किसी दिव्यांग को मूंग की बनी मिठाई दें.

बुधवार के व्रत का फल?
बुधवार के व्रत से जीवन से जुड़ी तमाम बाधाएं दूर होती हैं. विशेष रूप से रुका हुआ प्रमोशन शीघ्र होता है. माता लक्ष्मी की कृपा से व्रती को धनधान्य की प्राप्ति होती है.

दान?
बुधदेव की कृपा पाने के लिए बुधवार के दिन हरे रंग के वस्त्र, फल-फूल, कांसा, घी, खांड आदि का दान करना चाहिए. किन्नरों को हरे रंग के वस्त्र और श्रृंगार का सामान दान में दें. साथ में अपने सामर्थ्य केअनुसार कुछ दान अवश्य दें. बुध का दान सूर्योदय के बाद दो घंटे के भीतर करना अत्यंत शुभ होता है.
व्यवहारिक दान – बुधवार के दिन बहनों, बुआ, बेटी, आदि का सम्मान करने से बुध देवता प्रसन्न रहते हैं तथा सुबुद्धि देते हैं.

बुध का तांत्रिक मंत्र?
बुधवार के दिन बुध ग्रह के तांत्रिक मंत्र ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: सः बुधाय नमः का 9000 ( नौ हजार ) बार जाप करें. यदि यह संभव न हो तो इस मंत्र की तीन या 17 माला जाप करें.

बुध का प्रार्थना मंत्र?
उत्पात रूपी जगतां चंद्रपुत्रो महाद्युतिः।
सूर्य प्रिय करो विद्वान पीडां दहतु में बुधः।।

क्या करें?
किसी कार्य विशेष में सफलता पाने के लिए बुधवार के दिन पैदा हुए लड़के से काम कराने पर सफलता की संभावना बढ़ जाती है.

क्या न करें?
बुधवार के दिन लड़की की मां को सिर नहीं धोना चाहिए.

बुध को प्रसन्न करने के महाउपाय?
यदि कुंडली में बुध ग्रह शुभ फल नहीं दे रहा हो और कार्यों में अड़चनें आ रही हों तो बुधवार के दिन निम्न उपाय को करने पर लाभ होता है.
• हरे रंग के वस्त्र धारण करें.
• चांदी या कांसे के गोल टुकड़े को अपने साथ रखें.
• गाय को हरा चारा खिलाएं.
• हरे कपड़े में हरी मूंग बांधकर श्री गंगाजी या बहते जल में प्रवाहित करें.
• किन्नर को हरे वस्त्र दान करें.
• बुधवार का व्रत करें.
• श्री गणेश जी को लड्डू का भोग लगाएं एवं दूर्वा चढ़ाएं.
• हरे रंग की बोतल में मनीप्लांट का पौधा लगाएं. ध्यान रहे मनीप्लांट का पौधा किसी के गमले से तोड़कर न लगाएं, बल्कि नर्सरी से उसकी कीमत अदा करके ही लगाएं.

26/06/2020

प्रियजन का सिर क्यों फोड़ते हैं चिता पर, क्या है इसका रहस्य

जन्म और मृत्यु जीवन का सत्य है। जो आया है वो जाएगा। जीवन का परम सत्य हैं मृत्यु जो हर व्यक्ति को आनी हैं। हिन्दू धर्म में मृत्यु के बाद शरीर को अग्नि देने का संस्कार है। जिसे अंतिम संस्कार कहा जाता हैं। हिन्दू धर्म में अंतिम संस्कार क्रिया के कुछ नियम होते हैं जिनका पालन करते हुए शरीर को पंचतत्वों को सौंपा जाता है औ

जन्म और मृत्यु जीवन का सत्य है। जो आया है वो जाएगा। जीवन का परम सत्य हैं मृत्यु जो हर व्यक्ति को आनी हैं। हिन्दू धर्म में मृत्यु के बाद शरीर को अग्नि देने का संस्कार है। जिसे अंतिम संस्कार कहा जाता हैं। हिन्दू धर्म में अंतिम संस्कार क्रिया के कुछ नियम होते हैं जिनका पालन करते हुए शरीर को पंचतत्वों को सौंपा जाता है और आत्मा को परमात्मा से मिलने के लिए विदा किया जाता है। तब इस कड़ी में अंतिम संस्कार की कुछ क्रिया की जाती है जानिए इसके बारे में कैसे और क्यों की जाती हैं।

क्यों मारते हैं शव के सिर पर

इसके लिए अंतिम संस्कार के नियमों में कुछ बातों का पालन किया जाता है। अंतिम संस्कार के दौरान जब शरीर को अग्नि दी जाती है तो शवदाह के मध्य में जिस शैय्या पर लिटाकर शव को श्मशान तक ले जाया गया होता है उसी शैय्या का एक बांस निकालकर उससे शव के सिर पर चोट किया जाता है जिसे कपाल क्रिया कहते हैं। कहते हैं इससे सांसारिक मोह में फंसा जीव शरीर के बंधन से मुक्त हो जाता है।

आत्मा से मोह भंग

अंतिम संस्कार के अंत में जब परिवार के लोग श्मशान से लौटने लगते हैं तो सभी लोग पांच लकड़ी के टुकड़े 3 दाएं हाथ में और 2 बाएं हाथ में रखते हैं और शव दाह से उलटी दिशा में खड़े होकर सिर से ऊपर से लकड़ियों को पीछे की ओर फेंकते हैं और वापस घर लौटते हैं। इस क्रिया को पीछे मुड़कर नहीं देखना होता है। ऐसी मान्यता है कि पांच लकड़ियों को फेंक कर मृत्यु को प्राप्त व्यक्ति की आत्मा से कहा जाता है कि अब तुम पंचतत्व में विलीन होकर इस संसार का मोह त्याग दो, अपने आगे के सफर के लिए बढ़ जाओ हम सब ने तुम्हारा मोह त्याग दिया है।

ना देखें पीछे मुड़कर

ऐसी मान्यता है कि शरीर छूट जाने पर भी जीवात्मा का अपने परिजनों से मोह समाप्त नहीं होता है और वह श्मशान में आए अपने परिजनों को देखकर दुखी और हर्षित होता रहता है। सांसारिक मोह से आत्मा की मुक्ति के लिए उसे यह अहसास दिलाया जाता है कि हम तुम्हें चुके हैं हमारा मोह छोड़ अपने सफर पर आगे जाइए। कहते हैं कि पीछे मुड़कर देखने से आत्मा का मोह बना रहता है और वह परिजनों के पीछे रहते है।

श्माशान से लौटकर मिर्च खाना

अंतिम संस्कार से लौटते समय लोगों को मार्ग बदलना होता है यानी जिस रास्ते शव ले जाते हैं उसी रास्ते से लौटना नहीं होता है। इसके अलावा जो लोग श्माशान गए होते हैं उन्हें वस्त्र सहित स्नान करना होता है। घर में प्रवेश से पहले अग्नि, जल, लोहा, पत्थर का स्पर्श करना होता है। इसके बाद मिर्च का टुकड़ा दांतों से दबाना होता है। कहीं-कहीं पवित्र होने के लिए घी भी लोग पीते हैं। मान्यता है कि इससे नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव दूर होता है।

25/06/2020

शुक्र की हुयी वक्री चाल, अब किसी को मिलेगा पैसा तो किसी को मिलेगा परिवार का साथ

राशि और ग्रहो में हर दिन कोई ना कोई परिवर्तन होता रहता है | हाल ही में की गयी ज्योतिषीय गणनाओ के अनुसार शुक्र ग्रह की दशा में परिवर्तन होने जा रहा है | शुक्र ग्रह 13 मई से वृषभ राशि में वक्री चाल चलेगा | वृषभ राशि में शुक्र 25 जून तक रहेगा | ऐसे में सभी राशियों पर इसका प्रभाव पड़ने जा रहा है | आइये जानते है आप पर परिवर्तन का कैसा प्रभाव पड़ेगा |

मेष:- आपके धन की बचत होगी, वाणी में मधुरता आएगी और परिवार में सुख शांति का माहौल बनेगा |
वृष:- वृष शुक्र की राशि है, ऐसे में आपको लाभ होने के पुरे आसार है | आपको परिवार का भी सहयोग मिलेगा |
मिथुन:- शुक्र की वक्री चाल से आपके भौतिक सुखो में वृद्धि होगी | पारिवारिक जीवन के लिए भी ये काफी शुभ है |
कर्क:- आपको व्यापार से जुडी अच्छी खबर मिलेगी, लेकिन आपको अपनी सेहत का ख़ास ख्याल रखना चाहिए |
सिंह:- आपके खर्चो में वृद्धि होने वाली है | आपको ध्यान देने की जरूरत है अन्यथा आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है |
कन्या:- आपके भाग्य में वृद्धि होगी साथ ही गुरुजनो का सम्मान आपको मिलेगा |
तुला:- आपको उतार चढाव का सामना करना पड़ सकता है | कार्यक्षेत्र में नयी मुसीबत खड़ी हो सकती है |
वृश्चिक:-आपको नई खुशियां मिलेगी, परिवार में रिश्ते मजबूत होंगे | हालांकि आप निवेश से दूर रहे |
धनु:- आपके शत्रु आप पर हावी रहेंगे, आपको सावधान रहने की जरूरत है | ऑफिस में नयी चुनौतियाँ मिलेगी |
मकर:- आपके प्रेम जीवन में ताजगी आएगी | सनातन की तरफ से आपको शुभ समाचार मिलेगा |
कुम्भ:- आपके परिवार में नयी खुशियां आएगी | भाईचारा बढ़ेगा | आपकी सेहत में सुधार देखने को मिलेगा |
मीन:- आपको इस दौरान आत्मविश्वास बनाये रखने की जरूरत है | मन में नकारात्मक विचार ना लाये |

21/06/2020

सूर्य ग्रहण में करें इन 3 महामंत्रों का जाप, टल जाएगा हर बड़ा संकट

रविवार को लगने वाले इस साल के पहले सूर्य ग्रहण को लेकर सभी कई तरह के लगा रहे हैं। ज्यादातर जानकारों का कहना है कि यह सूर्यग्रहण कुछ राशियों के लिए ठीक नहीं है। ऐसे में इसके लिए क्या उपाय हो सकते हैं ये भी लोग जानना चाहते हैं।

21 जून को यह सूर्य ग्रहण 9 बजकर 15 से लेकर दोपहर 3 बजकर 4 मिनट तक लगा रहेगा। यह ग्रहण मंगल के नक्षत्र में पड़ने वाला ग्रहण होगा। इस ग्रहण को लेकर बताया जा रहा है कि यह कई देशों पर नकारात्मक असर डालेगा।

विशेषज्ञों की माने तो यह सूर्य ग्रहण ऐसे समय में पड़ने वाला है जब राहु-केतु समेत कुल छह ग्रह वक्री हैं। इसलिए यह ग्रहण कष्टकारी हो सकता है। लेकिन ग्रहण को लेकर ज्योतिषियों का कहना है कि इस ग्रहण के प्रभाव को कम किया जा सकता है।

ग्रहण के प्रभाव को कम करने के लिए कुछ खास मंत्रों का जप करने से आने वाली दिक्कतें टाली जा सकती हैं। ऐसे माना जाता है कि ग्रहण काल के समय जो सूतक काल होता है उसी समय मंत्रों का जाप किया जाता है और ऐसा करने से ही ग्रहण की नेगेटिव पॉवर कम हो जाती है।

इस बार सूर्य ग्रहण का सूतक काल 12 घंटे पहले यानी 20 जून को रात करीब 9 बजकर 25 मिनट से लगने वाला है। इसी दौरान आप कुछ खास मंत्रों का उच्चारण कर सकते हैं। आईये आपको बताते हैं वो मंत्र क्या हैं।

तीन खास मंत्र
“तमोमय महाभीम सोमसूर्यविमर्दन। हेमताराप्रदानेन मम शान्तिप्रदो भव॥१॥”

विधुन्तुद नमस्तुभ्यं सिंहिकानन्दनाच्युत। दानेनानेन नागस्य रक्ष मां वेधजाद्भयात्॥२॥”

"ॐ आदित्याय विदमहे दिवाकराय धीमहि तन्न: सूर्य: प्रचोदयात"

इन मंत्रों का जाप कर ग्रहण काल में आने वाली दिक्कतों से काफी हद तक पार पाया जा सकता है। बस इस दौरान सूतक काल का ध्यान रखें।

21/06/2020

सूर्य ग्रहण पर करें अपनी राशि अनुसार लाल किताब के ये अचूक उपाय,

21 जून 2020 को ज्योतिष की दृष्टि में वर्ष का पहला खंडग्रास सूर्यग्रहण होने जा रहा है। इसके बाद 14 दिसंबर को सूर्य ग्रहण होगा। आओ जानते हैं कि लाल किताब के अनुसार इस दौरान कौनसे सामान्य उपाय कर सकते हैं जिससे हमें लाभ मिले। यह उपाय सूर्य ग्रहण वाले और दूसरे दिन भी कर सकते हैं।
मेष और वृश्चिक राशि के लिए

1. हनुमान चालीसा का पाठ करें।

2. सफेद या काला सूरमा आंखों में लगाएं।

3. शुद्ध गुड़ खाएं और खिलाएं।

4. मसूर की दाल मंदिर में दान करें।

5. नीम के वृक्ष में जल चढ़ाएं और उसकी पूजा करें।

6. भाई और मित्रों से संबंध अच्छे रखें। क्रोध न करें।

7. गुलाबी या लाल चादर पर सोएं। आंत और दांत साफ रखें।

वृषभ और तुला राशि के लिए

1. चांदी का एक सिक्का अपने पास रखें।

2. शाम को घी का दीपक जलाएं।

3. सात प्रकार के अनाज और चरी का दान करें।

4. किसी को अनावश्यक परेशान ना करें और वादा करके मुकरे नहीं।

5. चाहें तो सफेद वस्त्र का दान करें।

6. भोजन का कुछ हिस्सा गाय, कौवे, और कुत्ते को दें।

7. स्वयं को और घर को साफ-सुथरा रखें और साफ कपड़े पहनें।

8. सुगन्धित इत्र या सेंट का उपयोग करें।

मिथुन और कन्या राशि के लिए

1. साबूत हरे मूंग का दान करें या बहते जल में बहाएं।

2. दुर्गा माता की पूजा करें।

3. बेटी, बहन, साली और बुआ का सम्मान करें।

4. चमड़े की जैकेट न पहनें, हरे रंग का उपयोग न करें।

5. तुलसी माता की पूजा करें।

6. और वादों को निभाएं।

कर्क राशि के लिए

1. खीर बनाकर दूसरों को खिलाएं।

2. मां के हाथों से चावल या दही खाकर ही किसी यात्रा का प्रारंभ करें।

3. बड़ के वृक्ष में जल चढ़ाएं और मंदिर में राजमा के बीज रखें।

4. पानी या दूध को साफ पात्र में सिरहाने रखकर सोएं और सुबह कीकर के वृक्ष की जड़ में डाल दें।

सिंह राशि के लिए

1. शराब और मांस का सेवन न करें।

2. किसी से मुफ्त में कुछ न लें।

3. हनुमान चालीसा का पाठ करें।

4. रविवार का व्रत रखें और सूर्य को अर्घ्य दें।

5. मुंह में मीठा डालकर ऊपर से पानी पीकर ही घर से निकलें।

धनु और मीन राशि के लिए

1. झूठ न बोलें। ज्ञान का घमंड न करें।

2. पीपल में जल चढ़ाएं और केसर का तिलक लगाएं।

3. गीता का पाठ या कृष्ण नाम जपें।

5. घर में कर्पूर या गुगल की धूप दें।

6. पिता, दादा और गुरु का आदर करें और मंदिर में कद्दू का दान करें।

मकर और कुंभ राशि के लिए

1. हनुमानजी चालीसा का पाठ करें और उन्हें चौला चढ़ाएं।

2. अंधे-अपंगों, सेवकों और सफाईकर्मियों को दान दें।

3. भगवान भैरव को कच्चा दूध चढ़ाएं।

4. आंत और दांत साफ रखें और काली चीटिंयों को अन्न खिलाएं।

5. तिल, उड़द, लोहा, तेल, काला वस्त्र, या जूता दान करें।

6. कौवे को प्रतिदिन रोटी खिलावे।

30/04/2020

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*ॐ का रहस्य क्या है ?*

मन पर नियन्त्रण करके शब्दों का उच्चारण करने की क्रिया को मन्त्र कहते है। मन्त्र विज्ञान का सबसे ज्यादा प्रभाव हमारे मन व तन पर पड़ता है। मन्त्र का जाप एक मानसिक क्रिया है। कहा जाता है कि जैसा रहेगा मन वैसा रहेगा तन। यानि यदि हम मानसिक रूप से स्वस्थ्य है तो हमारा शरीर भी स्वस्थ्य रहेगा।

मन को स्वस्थ्य रखने के लिए मन्त्र का जाप करना आवश्यक है। ओम् तीन अक्षरों से बना है। अ, उ और म से निर्मित यह शब्द सर्व शक्तिमान है। जीवन जीने की शक्ति और संसार की चुनौतियों का सामना करने का अदम्य साहस देने वाले ओम् के उच्चारण करने मात्र से विभिन्न प्रकार की समस्याओं व व्याधियों का नाश होता है।

सृष्टि के आरंभ में एक ध्वनि गूंजी ओम और पूरे ब्रह्माण्ड में इसकी गूंज फैल गयी। पुराणों में ऐसी कथा मिलती है कि इसी शब्द से भगवान शिव, विष्णु और ब्रह्मा प्रकट हुए। इसलिए ओम को सभी मंत्रों का बीज मंत्र और ध्वनियों एवं शब्दों की जननी कहा जाता है।

इस मंत्र के विषय में कहा जाता है कि, ओम शब्द के नियमित उच्चारण मात्र से शरीर में मौजूद आत्मा जागृत हो जाती है और रोग एवं तनाव से मुक्ति मिलती है।

इसलिए धर्म गुरू ओम का जप करने की सलाह देते हैं। जबकि वास्तुविदों का मानना है कि ओम के प्रयोग से घर में मौजूद वास्तु दोषों को भी दूर किया जा सकता है।

ओम मंत्र को ब्रह्माण्ड का स्वरूप माना जाता है। धार्मिक दृष्टि से माना जाता है कि ओम में त्रिदेवों का वास होता है इसलिए सभी मंत्रों से पहले इस मंत्र का उच्चारण किया जाता है जैसे
*ओम नमो भगवते वासुदेव, ओम नमः शिवाय।*

आध्यात्मिक दृष्टि से यह माना जाता है कि नियमित ओम मंत्र का जप किया जाए तो व्यक्ति का तन मन शुद्घ रहता है और मानसिक शांति मिलती है। ओम मंत्र के जप से मनुष्य ईश्वर के करीब पहुंचता है और मुक्ति पाने का अधिकारी बन जाता है।

वैदिक साहित्य इस बात पर एकमत है कि ओ३म् ईश्वर का मुख्य नाम है. योग दर्शन में यह स्पष्ट है. यह ओ३म् शब्द तीन अक्षरों से मिलकर बना है- अ, उ, म. प्रत्येक अक्षर ईश्वर के अलग अलग नामों को अपने में समेटे हुए है. जैसे “अ” से व्यापक, सर्वदेशीय, और उपासना करने योग्य है. “उ” से बुद्धिमान, सूक्ष्म, सब अच्छाइयों का मूल, और नियम करने वाला है।

“म” से अनंत, अमर, ज्ञानवान, और पालन करने वाला है. ये तो बहुत थोड़े से उदाहरण हैं जो ओ३म् के प्रत्येक अक्षर से समझे जा सकते हैं. वास्तव में अनंत ईश्वर के अनगिनत नाम केवल इस ओ३म् शब्द में ही आ सकते हैं, और किसी में नहीं.

१. अनेक बार ओ३म् का उच्चारण करने से पूरा शरीर तनावरहित हो जाता है।

२. अगर आपको घबराहट या अधीरता होती है तो ओ३म् के उच्चारण से उत्तम कुछ भी नहीं!

३. यह शरीर के विषैले तत्त्वों को दूर करता है, अर्थात तनाव के कारण पैदा होने वाले द्रव्यों पर नियंत्रण करता है।

४. यह हृदय और खून के प्रवाह को संतुलित रखता है।

५. इससे पाचन शक्ति तेज होती है।

६. इससे शरीर में फिर से युवावस्था वाली स्फूर्ति का संचार होता है।

७. थकान से बचाने के लिए इससे उत्तम उपाय कुछ और नहीं।

८. नींद न आने की समस्या इससे कुछ ही समय में दूर हो जाती है. रात को सोते समय नींद आने तक मन में इसको करने से निश्चित नींद आएगी।

९ कुछ विशेष प्राणायाम के साथ इसे करने से फेफड़ों में मजबूती आती है.
इत्यादि!

ॐ के उच्चारण का रहस्य ?

ॐ है एक मात्र मंत्र, यही है आत्मा का संगीत
ओम का यह चिन्ह 'ॐ' अद्भुत है। यह संपूर्ण ब्रह्मांड का प्रतीक है। बहुत-सी आकाश गंगाएँ इसी तरह फैली हुई है। ब्रह्म का अर्थ होता है विस्तार, फैलाव और फैलना। ओंकार ध्वनि के 100 से भी अधिक अर्थ दिए गए हैं। यह अनादि और अनंत तथा निर्वाण की अवस्था का प्रतीक है।

*ॐ* को ओम कहा जाता है। उसमें भी बोलते वक्त 'ओ' पर ज्यादा जोर होता है। इसे प्रणव मंत्र भी कहते हैं। इस मंत्र का प्रारंभ है अंत नहीं। यह ब्रह्मांड की अनाहत ध्वनि है। अनाहत अर्थात किसी भी प्रकार की टकराहट या दो चीजों या हाथों के संयोग के उत्पन्न ध्वनि नहीं। इसे अनहद भी कहते हैं। संपूर्ण ब्रह्मांड में यह अनवरत जारी है।

तपस्वी और ध्यानियों ने जब ध्यान की गहरी अवस्था में सुना की कोई एक ऐसी ध्वनि है जो लगातार सुनाई देती रहती है शरीर के भीतर भी और बाहर भी। हर कहीं, वही ध्वनि निरंतर जारी है और उसे सुनते रहने से मन और आत्मा शांती महसूस करती है तो उन्होंने उस ध्वनि को नाम दिया ओम।

साधारण मनुष्य उस ध्वनि को सुन नहीं सकता, लेकिन जो भी ओम का उच्चारण करता रहता है उसके आसपास सकारात्मक ऊर्जा का विकास होने लगता है। फिर भी उस ध्वनि को सुनने के लिए तो पूर्णत: मौन और ध्यान में होना जरूरी है। जो भी उस ध्वनि को सुनने लगता है वह परमात्मा से सीधा जुड़ने लगता है। परमात्मा से जुड़ने का साधारण तरीका है ॐ का उच्चारण करते रहना।

त्रिदेव और त्रेलोक्य का प्रतीक :

ॐ शब्द तीन ध्वनियों से बना हुआ है- अ, उ, म इन तीनों ध्वनियों का अर्थ उपनिषद में भी आता है। यह ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक भी है और यह भू: लोक, भूव: लोक और स्वर्ग लोग का प्रतीक है।

बीमारी दूर भगाएँ :

तंत्र योग में एकाक्षर मंत्रों का भी विशेष महत्व है। देवनागरी लिपि के प्रत्येक शब्द में अनुस्वार लगाकर उन्हें मंत्र का स्वरूप दिया गया है। उदाहरण के तौर पर कं, खं, गं, घं आदि। इसी तरह श्रीं, क्लीं, ह्रीं, हूं, फट् आदि भी एकाक्षरी मंत्रों में गिने जाते हैं।

सभी मंत्रों का उच्चारण जीभ, होंठ, तालू, दाँत, कंठ और फेफड़ों से निकलने वाली वायु के सम्मिलित प्रभाव से संभव होता है। इससे निकलने वाली ध्वनि शरीर के सभी चक्रों और हारमोन स्राव करने वाली ग्रंथियों से टकराती है। इन ग्रंथिंयों के स्राव को नियंत्रित करके बीमारियों को दूर भगाया जा सकता है।

उच्चारण की विधि :

प्रातः उठकर पवित्र होकर ओंकार ध्वनि का उच्चारण करें। ॐ का उच्चारण पद्मासन, अर्धपद्मासन, सुखासन, वज्रासन में बैठकर कर सकते हैं। इसका उच्चारण 5, 7, 10, 21 बार अपने समयानुसार कर सकते हैं। ॐ जोर से बोल सकते हैं, धीरे-धीरे बोल सकते हैं। ॐ जप माला से भी कर सकते हैं।

इसके लाभ :

इससे शरीर और मन को एकाग्र करने में मदद मिलेगी। दिल की धड़कन और रक्तसंचार व्यवस्थित होगा। इससे मानसिक बीमारियाँ दूर होती हैं। काम करने की शक्ति बढ़ जाती है। इसका उच्चारण करने वाला और इसे सुनने वाला दोनों ही लाभांवित होते हैं। इसके उच्चारण में पवित्रता का ध्यान रखा जाता है।

*शरीर में आवेगों का उतार - चढ़ाव :

प्रिय या अप्रिय शब्दों की ध्वनि से श्रोता और वक्ता दोनों हर्ष, विषाद, क्रोध, घृणा, भय तथा कामेच्छा के आवेगों को महसूस करते हैं। अप्रिय शब्दों से निकलने वाली ध्वनि से मस्तिष्क में उत्पन्न काम, क्रोध, मोह, भय लोभ आदि की भावना से दिल की धड़कन तेज हो जाती है जिससे रक्त में 'टॉक्सिक'पदार्थ पैदा होने लगते हैं। इसी तरह प्रिय और मंगलमय शब्दों की ध्वनि मस्तिष्क, हृदय और रक्त पर अमृत की तरहआल्हादकारी रसायन की वर्षा करती है।

कम से कम 108 बार ओम् का उच्चारण करने से पूरा शरीर तनाव रहित हो जाता है। कुछ ही दिनों पश्चात शरीर में एक नई उर्जा का संचरण होने लगता है। । ओम् का उच्चारण करने से प्रकृति के साथ बेहतर तालमेल और नियन्त्रण स्थापित होता है। जिसके कारण हमें प्राकृतिक उर्जा मिलती रहती है। ओम् का उच्चारण करने से परिस्थितियों का पूर्वानुमान होने लगता है।

ओम् का उच्चारण करने से आपके व्यवहार में शालीनता आयेगी जिससे आपके शत्रु भी मित्र बन जाते है। ओम् का उच्चारण करने से आपके मन में निराशा के भाव उत्पन्न नहीं होते है।

आत्म हत्या जैसे विचार भी मन में नहीं आते है। जो बच्चे पढ़ाई में मन नहीं लगाते है या फिर उनकी स्मरण शक्ति कमजोर है। उन्हें यदि नियमित ओम् का उच्चारण कराया जाये तो उनकी स्मरण शक्ति भी अच्छी हो जायेगी और पढ़ाई में मन भी लगने लगेगा।

🙏🏻

13/04/2020

पूजा का नारियल खराब निकलने का क्या होता है मतलब, ये बात जाननी बेहद जरूरी

हिंदू धर्म सभी भगवान की मूर्ति और तस्वीरों की पूजा करते हैं. उस पूजा को सही ढंग से पूरा करने के लिए बहुत सारी सामग्री एकत्रित करने की जरूरत होती है. सामग्री में कलावा, धूपबत्ती, घी, फल, रोली और नारियल को शामिल किया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अऩुसार, नारियल बहुत शुभ माना जाता है जिसे हर शुभ काम के पहले फोड़कर उसके पानी का छिड़काव पूरे घर में करके पिया जाता है. अगर आपके घर की पूजा में खराब नारियल निकल जाए तो ये बहुत ही अशुभ होता है, ऐसा माना जाता है लेकिन क्या ये सच होता है ? नारियल खराब होने की वजह से लंब चलने वाली सही रूप से की जाने वाली पूजा बिल्कुल निष्फल हो जाती है क्या ? चलिए बताते हैं इस बारे में..

घर की पूजा में खराब नारियल

हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार किसी भी शुभ अवसर पर भगवान को नारियल जरूर चढ़ाया जाता है. हमारे शास्त्रों में भी नारियल को बहुत ही पवित्र और इसके बहुत से महत्व को बताया गया है. ऐसा माना जाता है कि हिंदू धर्म में किसी की बलि नहीं दी जाती, क्योंकि बल्कि नारियल को फोड़कर उसकी बली चढ़ाना शुभ हो जाता है. बहुत बार ऐसा होता है कि पूजा संपन्न होने के बाद नारियल फोड़ा जाता है और जब वो खराब निकल जाए तो लोगों में तरह-तरह की बातें शुरु हो जाती हैं. कोई कहता है कि ये आने वाली अशुभ खबर का संकेत है तो कोई कहता है कि ऐसा होना मतलब भगवान ने पूजा स्वीकार नहीं की लेकिन ऐसा होता असल में बिल्कुल भी नहीं है.

अगर पूजा में चढ़ा हुआ नारियल फोड़ते समय खराब निकल आए, तो इसका क्या मतलब होता है कि आपको भगवान की तरफ से शुभ संकेत मिल गए हैं. आने वाला समय आपके और आपके साथ जुडे लोगों को खुशियों से भरने वाला है. धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, अगर पूजा का नारियल खराब निकले तो इसका अर्थ होता है कि भगवान ने आपके प्रसाद को स्वीकार करके आपको आशिर्वाद दे दिया है कि अब भविष्य में आपको अच्छे फल प्राप्त होने वाले हैं. वैज्ञानिक इन बातों पर यकीन नहीं करते, लेकिन कई लोग इनको सच मानते है.

पूजा में क्या होता है नारियल का महत्व

1. नारियल को श्रीफल के नाम से भी जाना जाता है. ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु पृथ्वी पर अवतार लेते समय लक्ष्मी, नारियल का वृक्ष और कामधेनु को अपने साथ लाए थे.

2. ऐसी अवधारणा है कि नारियल को पूजा में चढ़ाने के बाद इसे केवल पुरुष ही फोड़ते हैं. इससे निकलने वाले जल से भगवान की प्रतिमाओं का अभिषेक किया जाता है.

3. मंगलवार के दिन बजरंगबली की प्रतिमा के सामने श्रीफल यानि नारियल को अपने सिर पर 7 बार, वार करके फोड़ने से आप बुरी नजरों के असर से बच जाएंगे और अगर इसका कोई असर पहले से होगा तो वो खत्म हो जाएगा.

4. भगवान भोलेनाथ को भी नारियल बहुत पसंद है. इसमें बनी तीन आंखों की तुलना शिवजी के त्रिनेत्र से ही की गई है, श्रीफल शुभ, समृद्धि, उन्नति,और सम्मान का सूचक माना जाता है

30/03/2020

अगर घर में कोरोना के कदम नहीं पड़ने देना चाहते हैं तो बनाएं ये 10 नियम

कोरोना वायरस के खतरे को कम करने के लिए भारत में 21 दिनों के लिए लॉकडाउन है. अगर इस महामारी से बचना है तो लोगों का घरों में ही कैद रहना ही एकमात्र विकल्प है. यदि आप घर में रहकर भी कुछ खास बातों को नजरअंदाज कर रहे हैं तो आप वहां भी सुरक्षित नहीं है. आइए हम आपको बताते हैं घर में रहकर किन खास बातों का ख्याल रखना जरूरी है.

1. अगर आप घर में रहकर बाहर से खाना ऑर्डर कर रहे हैं तो ये आपके लिए सबसे बड़ा खतरा है. ऐसे ऑर्डर की पेमेंट ऑनलाइन करें. कैश लेनदेन से बचें और ऑर्डर लेने से पहले ठीक से हाथों में ग्लव्स पहनें.
2. अगर आप किसी चीज को छूते हैं तो इसके बाद साबुन या सैनिटाइजर से अच्छे से हाथों को धोएं. कोविड-19 वायरस के लक्षण दिखने पर अलग कमरे में रहें. घर के अन्य सदस्यों को अपने कपड़ों या बर्तनों के संपर्क में न आने दें.
3. अगर आप घर में मास्क पहन रहे हैं तो ध्यान रखें कि वो डिसइंफेक्टेड होना चाहिए. मास्क खराब होने पर उसे इधर-उधर फेंकने की बजाए जला दें या फिर जमीन में गाड़ दें.
4. इसके साथ ही किसी भी तरह के मास्क को 6-8 घंटों से ज्यादा नहीं पहनना है. आपका मास्क सामान्य सर्दी-जुकाम होने पर भी कोई दूसरा शख्स न इस्तेमाल करें.
5. आगर घर का कोई सदस्य कोरोना की चपेट में आ गया है तो उससे बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं को ज्यादा खतरा है. इसलिए मरीज से निश्चित दूरी बनाकर रखना चाहिए.
6. कमरे में ही टॉयलेट की सुविधा भी होनी चाहिए और ध्यान रखें कि कोई भी बाहरी व्यक्ति उस कमरे में दाखिल न हों.
7. अगर आपके कमरे में घर का कोई सदस्य या बाहरी शख्स आ भी रहा है तो उससे कम-से-कम एक से तीन मीटर की दूरी बनाकर रखें.
8. घर में रहते हुए भी हर वक्त मास्क पहनना चाहिए. किसी भी चीज को छूने से पहले हाथों में ग्लव्स पहनें. ग्लव्स उतारने के बाद हाथों को अच्छी तरह साबुन से धोना चाहिए.
9. आप घर में साफ-सुथरी जगह पर ज्यादा सुरक्षित हैं, लेकिन अगर कोरोना वायरस के लक्षण दिख रहे हैं तो तुरंत आप सरकारी हेल्पलाइन नंबर या किसी नजदीकी अस्पताल से संपर्क करें.
10. दूसरे लोगों से संपर्क करने या कोई खास संदेश देने के लिए सोशल नेटवर्क का अधिक-से-अधिक इस्तेमाल करें.

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