22/03/2026
प्यारी 'मां' तुम्हारा ऋण हम भला कैसे उतारें 😌 ?
प्रिय साथियों, के लिए लड़ाई जारी रखिएगा। अब कमान हमारे भाई-बहनों के हाथों में है। हम सदैव आपके साथ हैं। आपका 'सदा प्रसन्न व्यास' मौन नहीं हुआ है। केवल शांति के मार्ग पर बढ़ गया है। कुछ ऋण हमारे ऊपर शेष हैं, जो मां तारा के आदेश से हम पूर्ण कर रहे हैं 🙏🚩
जानिए हमको और हमारी जीवट योद्धा को 🚩
'दुआरी की पवाईदारिन' - एक जीवट योद्धा, वीरांगना, भोलेनाथ की अनन्य भक्त 🚩
साहस तथा जीवटता का जीता-जागता उद्धरण यदि साक्षात् देखा तो वो मेरी अम्बा थी 🚩
31 जनवरी 2016 वह तारीख थी जब हमें दिल्ली में रीढ़ की हड्डी की चोट लग गई। इसके बाद तो जैसे हमारे परिवार में भूचाल ही आ गया। तत्समय बहन और जीजा जी भी ब्रिटेन में किसी महत्वपूर्ण कार्य से थे। धीरे-धीरे पिता जी भी घोर अवसाद में जाते रहे। परिणामतः वे 28 अगस्त 2017 को घर छोड़ कर चले गए। घर पर अकेली योद्धा बची मेरी अम्बा। वह स्त्री जिसका पति घर पर नहीं और पुत्र बिस्तर पर। जो स्वयं भी वजन, वात, पित्त इत्यादि कई समस्याओं के कारण बहुत स्वस्थ या चलने-फिरने में समर्थ नहीं थी। किंतु इतनी विषम परिस्थितियों के बावजूद भी जिस जीवटता, साहस, धैर्य, वीरता का परिचय तुमने दिया, निस्संदेह ही तुम विलक्षण थीं, अद्वितीय थीं। विरली होती हैं ऐसी मां। ताराम्बा जैसे सदेह अपने पुत्र और उसके हित के रक्षणार्थ खड़ी थीं। हम बिस्तर पर लेटे थे किन्तु हमारी अम्बा ने ना तो हमारे साथ कुछ अप्रिय होने दिया और ना ही हमारा अहित होने दिया। जमीनें संभालीं, घर संभाला, पुत्र को संभाला, पति को संभाला, नौकरी संभाली और बहन को भी निश्चिंत किया कि चिंता मत कर अभी तेरी मां जिंदा है 🫵 हमारी मां का ही बिम्ब बहन भी बहुत साहसी है और इस बीच उसने भी हमको खूब संभाला और अब वही हमारी छत्रछाया बनकर पूरी मजबूती के साथ खड़ी है। बहन का ससुराल सहारा बना है, बुआए हमारी ढाल हैं, कुटुम्ब और समाज पूर्ण मनोबल से साथ हैं, ननिहाल रक्षाकवच है और मित्र ऐसे हैं जो हमपे जान छिड़कते हैं 🚩
संघर्ष की जीती-जागती मिसाल मेरी प्यारी #अम्बा ने एक पल भी चैन की सांस नहीं ली। घुटने दर्द करते थे, चलते बनता नहीं था, लंगड़ा के चलती थीं किंतु फिर भी हारती नहीं थीं। हमसे भी यही कहती थीं "बेटे तू निर्भीक हो और समाज का सामना कर 🚩"
मां ने यूं तो सारा जीवन ही संघर्ष किया किंतु इन 10 सालों में तो एक वीरांगना की भांति कठोरतम जीवन संघर्ष करके और अपने पुत्र की रक्षा करके एक मिसाल ही रच दी।
11 फ़रवरी 2026 के दिन तुम भोले बाबा के पास चली गईं मां 🌹 दिल का दौरा पड़ने पर भी एकदम शान्ति से मृत्यु का वरण कर लिया। न आह न ओह। "अब मुझे सोने दो, मुझे अब नींद आ रही है" .... तुम भोलेनाथ की सम्पत्ति थीं, केवल कुछ काल हमारे साथ बिताने आई थीं........ धन्यवाद मां........ धन्यवाद भोलेनाथ..... बहुत धर्म कमा कर गईं तुम मां 🙏😌
आज पूरा शहर मेरी प्यारी मां की प्रशंसा कर रहा है। उनको जानने वाला हर व्यक्ति कह रहा है कि प्रत्येक नारी के लिए वे एक मिसाल हैं। अतः मोक्ष का अधिकारी तो ऐसा ही जातक होता है जो समाज के लिए श्रेष्ठ उद्धरण छोड़ के जाता है।
मां तुम भोलेनाथ की अनन्य भक्त थीं। जब भी घर से निकलती थीं तो कष्टहरनाथ जी के दर्शन को जाती ही थीं। पिछले ही साल बाबा बैजनाथ जी के दर्शन करने गईं और बाबा के ऊपर ही गिर पड़ीं। सिद्ध हुआ कि बाबा भी अपनी बेटी से अगाध स्नेह रखते हैं। इसीलिए बाबा विश्वनाथ जी की कृपाछाया में उनकी प्यारी बेटी को हम छोड़ आए। अब बाबा की सेवा में ही पूर्णतया लीन रहो और बाबा का निरन्तर स्नेह प्राप्त करती रहो।
प्यारी मां, पाप अब केवल हमारे ही शेष हैं। किसी साधारण पातकी को ऐसे कठोरतम दण्ड नहीं मिलते। अब हम शेष प्रारब्ध काट रहे हैं और ताराम्बा के आदेश पूर्ण कर रहे हैं। तुम निर्दोष, निष्पाप और धर्मात्मा थीं। जितनी सेवा तुमने हमारी की है और जिस तरह निष्काम कर्मयोगी की भांति जीई हो, हम अपने संचित साधना बल से कह रहे हैं कि तुम्हारे थोड़े बहुत संचित अपराध-पाप भी क्षमा हैं मां 🙏 तुम्हारे कोई ऋण शेष नहीं रहे। तुम मुक्त हुईं 🙏 तुम मोक्ष की सच्ची अधिकारिणी हो अम्बा 🙏🚩
धरा धाम में हम तुम्हारे लाल बने, यह हमारा परम् सौभाग्य है मां। तुमने हमारी खूब सेवा की, अब भोले बाबा की सेवा में रत रहो। हमें तुम पर गर्व है 🚩
मेरी मां साहस का प्रतिमान ।
मुझे मेरी मां पर अभिमान ।।
अंततोगत्वा जितने भी सामाजिक कार्य हम कर रहे थे, वे सभी पूर्णता को प्राप्त हों ऐसी हमारी शुभकामना है किन्तु ........
अहो मातु, अब ताराम्बा ही एक मात्र हमारी गति हैं 🙏
गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानी 🚩 😌🙏
तुम्हारा लल्ला ❤️🙏🚩