19/12/2016
खारी खुर्द गांव का वीर सपूत #डूंगरराम सियाचीन में शहीद-
जोधपुर के लवेरा बावड़ी कस्बे में खारी खुर्द गांव का सैनिक सियाचीन में शनिवार को शहीद हो गया।
सियाचीन में शहीद सपूत डूंगरराम मुण्डण ने पहला वेतन गांव के छात्रावास को किया था समर्पित-
सियाचीन में शहीद होने वाला जोधपुर जिले का वीर सपूत देश के भविष्य के लिए कितना सजग और गंभीर था, ये इसी से पता चलता है कि सेना में भर्ती होने के बाद उसने अपना पहला वेतन गांव के छात्रावास को समर्पित कर दिया था। सरपंच प्रमोद मेव, विनायकपुरा सरपंच जगदीशराम, उपखण्ड अधिकारी अनिल कुमार पूनिया, भोपालगढ, चंचल वर्मा, तहसीलदार नवयुवक मण्डल भवाद के तेजाराम ओड़, भंवरलाल चौधरी समेत कई अधिकारी ग्रामीण खारी गांव पहुंचे और परिजनों को सांत्वना दी। डूंगरराम का दो वर्ष पहले आर्मी में 3 ग्रेनेडियर में चयन हुआ था। डूंगरराम के पिता अणदाराम, भाई रामदीन, पत्नी हवा देवी के साथ ही परिवारजनरो रो कर बेहाल हैं। वहीं दो वर्ष का पुत्र दिलीप इन सब से अनजान है।
जनवरी में आने को कहा-
करीब दस दिन पूर्व आए फोन पर डूंगरराम ने बातचीत करते हुए परिवार जनों से कहा था कि जनवरी में छुट्टी लेकर गांव आऊंगा। सबके साथ छुटिट्यां बिताऊंगा।
2008 में टूटा पहाड़-
वर्ष 2008 में इस परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। नेतड़ा के पास सड़क दुर्घटना में डूंगरराम की माता जैती व एक भाई भंवराराम व भतीजी ममता का निधन हो गया।
छुट्टियों में गांव के बच्चों को देशसेवा के लिए करता था प्रेरित-
डूंगरराम गांव में सब का चहेता एवं मिलनसार था। स्कूली शिक्षा पांचवी तक अपने गांव में ही कर बावड़ी के आदर्श बाल निकेतन सीनियर सैकण्डरी स्कूल में दाखिला लेकर कक्षा 9 से 12 तक की पढ़ाई की। डूंगर के मित्र हुकमाराम, सुनिल ने बताया कि वह सबका चहेता व मिलनसार था। खेल के प्रति रूचि भी थी। कबड्डी व क्रिकेट की प्रतियोगिता में बढ़ चढ़कर भाग लेते हुए सहयोग भी करता था। इतना ही नहीं नौकरी लग जाने के बाद तो उसकी मंशा यही थी कि मेरे गांव का बच्चा सेना में जाए और देश सेवा करे। इसके लिए वह जब भी छुट्टी पर गांव आता तो युवाओं को प्रेरित भी करता। एबीएन के प्रधानाचार्य नरपतसिंह शेखावत ने बताया कि कक्षा नौ से बारह तक की पढ़ाई करते हुए उसकी इच्छा यही थी कि आर्मी में भर्ती होकर देश सेवा करूं। लवेरा बावड़ी. खारी खुर्द के डूंगरराम मुण्डण ने बावड़ी के किसान छात्रावास में रहते हुए पढ़ाई की। वार्डन भंवरलाल सेंगवा, मदरूपराम छापरियां ने बताया कि डूंगरराम ने यहां की पढाई के बाद सरकारी नौकरी लगते ही स्वेच्छा से पहली तनख्वाह के तौर पर 31 हजार रुपए तत्कालीन छात्रावास अध्यक्ष लादूराम ग्वाला को कमरा निर्माण में सहयोग राशि के रूप में भेंट किए। वह मॉनिटर के तौर पर भी रहा।