13/10/2023
बिहार के काला पानी इलाके में डॉ अहमद अशफ़ाक करीम का अद्वितीय योगदान पर मेरा लेख।भारत में बिहार का सीमांचल का कटिहार पूर्णिया अररिया किशनगंज का इलाका जहां की पानी को कभी काला पानी का इलाका महामारी गंभीर बीमारी अशिक्षा गरीबी पिछड़ेपन के कारण लोग असहाय एवं बेहद कमज़ोर माने जाते थें,इस पिछड़ेपन को सच्चर कमेटी जस्टिस रंगनाथ मिश्र कमीशन मुखर्जी आयोग में उल्लेख किया गया है।गरीबी के कारण मजदूरी पर निर्भर लोगों का जीवन स्तर बहुत नीचे है।बिहार में यह इलाका आर्थिक राजनीतिक सामाजिक शिक्षा स्वस्थ्य के दृष्टिकोण से हमेशा उपेक्षित रहा है।बाढ़ प्राकृतिक आपदाओं से घिरे इस इलाक़े में बाहरी कोई जीवन बसर करने नहीं आना चाहता था।भारतीय रेल इसका गवाह है,कि देश के अन्य रेलवे जोन की तुलना में अधिक प्रमोशन स्वास्थ्य आवास आदि कई तरह की सुविधा मुहैया कराने के शर्त पर रेलवे से जुड़े कर्मचारियों को यहां पदस्थापित किया जाता था।कुछ कल कारखाने लगे तो इसका कारण जूट की खेती एवं सस्ते मजदूरी पर मजदूर मिलना कारण रहा जो आज धीरे धीरे उद्योगविहीन भी हो गया।जबकि इस इलाके की जमीन काफी उर्वरक माना जाता है।बावजूद यह इलाका पिछड़ा रहा इसका मूल कारण अंतर्राजीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर स्थित होने का कारण भी रहा है।पश्चिम बंगाल से बिहार अलग होने के दौरान इस इलाके को बंगाल राज्य में शामिल होना था,लेकिन इस इलाके का विकास के लिए केन्द्रीय सुविधा संसाधन देने का भरोसा देकर झारखंड से सटे पुरलिया के इलाके को बंगाल में शामिल कर सीमांचल को बिहार में ही रखा गया।जब पूर्णियां जिला जो आज चार जिला में विभक्त हो गया है।जब पूर्णियां जिला बना था तब पहला जिलाधिकारी दूका रेल हुए,कहा जाता है,कि जब डूका रेल पहली बार पूर्णियां आए तो भयंकर दुर्भिक्ष आया था,जिसमें दस हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी,तब डूका रेल को लाशों पर पैर रख कर उतरना पड़ा था। बावजूद इस पिछड़े इलाके में पटना से सटे वैशाली से चालीस साल पहले आकर इस पिछड़े इलाके में डॉ अहमद अशफ़ाक करीम महज तीस साल की ही उम्र में स्वास्थ शिक्षा के क्षेत्र लोगों के लिए काम शुरू किया। यही नहीं आज से दस वर्ष पहले इस इलाके की उन्हें इतनी चिंता रही कि पूरे सीमांचल के आलावे कोशी के पिछड़ेपन को लेकर स्पेशल स्टेट्स के सवाल पर सभी संबंधित जिलों में जा कर एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया और सरकार का ध्यान भी आकर्षित किया।आगे कटिहार पूर्णियां मुख्य मार्ग से पश्चिम दिशा स्थित सिरसा मिलिट्री कैंप के पास जमीनें खरीदी और एक एक ईंट को जोड़ना शुरू किया और बिहार का पहला प्राइवेट मेडिकल कॉलेज को स्थापित कर सबसे पहले दक्षिण भारत के मेडिकल कॉलेजों के श्रेणी में खड़ा कर बिहार बिहार को प्राइवेट मेडिकल कॉलेज के रूप में नाम रौशन किया। और धीरे धीरे वक्त गुजरता गया और डॉ अहमद अशफ़ाक करीम अपने मेहनत लगन ईमानदारी के बल पर अपने मेडिकल कॉलेज के साथ कटिहार के नाम को पूरी दुनियां में पहुंचाने का काम किया।उन्होने अपने परिवार धर्म के नाम पर नहीं बल्कि कटिहार के नाम पर कटिहार मेडिकल कॉलेज का नाम दिया।आज केएमसीएच के हजारों छात्र पूरी दुनियां में फैल गए हैं,जहां जिनके मेडिकल डिग्री पर कटिहार मेडिकल कॉलेज लिखा हुआ है।वहीं दूसरी ओर मेडिकल कॉलेज में गरीब असहाय कमज़ोर लोगों का न सिर्फ़ फ्री इलाज बल्कि मुफ्त में भोजन भी दिया जाता है।कीमती से कीमती जांच को बाजार मूल्य से आधे से भी आधे फीस पर किया जाता है।तमाम गंभीर से गंभीर बीमारियों का इलाज आज कटिहार में ही अगर संभव है तो इसके लिए डॉ अहमद अशफ़ाक करीम धन्यवाद के पात्र हैं यही नहीं युग पुरुष कहने में हमें कोई हिचक नहीं होना चाहिए,इस इलाके के लिए।मेडिकल कॉलेज कभी रूका नहीं आगे बढता गया।हृदय रोग ब्रेन हेमरेज न्यूरो मानसिक बिमारी आदि के लिए जो लोग दूसरे राज्य बड़े शहरों पर निर्भर थें,उनकी इस निर्भरता को किसी ने खत्म किया तो डॉ अहमद अशफ़ाक करीम ने ही किया।केएमसी यूजीसी का मान्यता प्राप्त कर बिहार का पहला कॉलेज बना और आज विश्व विद्यालय का रूप ले कर विशाल रूप में कटिहार आने वाले दूसरे देश प्रदेश शहर के लोगों को आकर्षित करता है।अल–करीम विश्व विद्यालय में रोजगार से जुड़े तमाम मेडिकल की पढ़ाई होने लगी है, स्थानीय स्तर पर शिक्षा का उत्तम व्यवस्था कर विशेषकर लड़कियों की शिक्षा सुरक्षित कर दिया।आज हजारों छात्र छात्राएं शिक्षा ले रहे हैं।यह सुविधा सरकार से बिना सहयोग लिए डॉ करीम एवं विश्विद्यालय से जुड़ी टीम कटिहार सीमांचल को दे रही है।जबकि इस दिशा में सरकार ने कभी कुछ नहीं किया।यही नहीं रोजगार विहीन हो चूके कटिहार के हजारों लोगों को रोज़गार मिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल के आस पास व्यवसायिक फायदा के लिए सैकड़ों लोगों ने घर हॉस्टल तरह तरह की दुकानें अन्यान्य व्यवसायिक संस्थानों को खोला है।मेडिकल कॉलेज से जुड़े उपभोक्ताओं के कारण शहर में तमाम तरह की व्यवसायियों को फायदा हो रहा है।इस तरह कटिहार को ऊंचाई देने वाले डॉ अहमद अशफ़ाक करीम साहब को जहां सरकार को सम्मानित करना चाहिए वहां प्रताड़ित किया जा रहा है।हर वर्ष सीबीआई ईडी इनकम टैक्स के द्वारा डॉ अहमद अशफ़ाक करीम को परेशान किया जा रहा है।जबकि आजतक सरकार अपने मंसूबा में कभी कामयाब नहीं हुई हमेशा जांच करवाने के बावजूद मुंह के खाने गिरी है।पीछले दो तीन दिनों से मेडिकल कॉलेज को फिर एक बार इनकम टैक्स के लोग पूरे कॉलेज अस्पताल को सैकड़ों सिपाहियों के साथ छावनी में बदल दिया है। मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।पीछले ही साल सीबीआई ने जांच किया था कुछ नहीं मिला।बार बार जांच के बावजूद मेडिकल कॉलेज अस्पताल विश्विद्यालय कोई गलती कैसे कर सकता है।सरकार की इस कार्रवाई से कटिहार को ही नुकसान हो रहा है।मान लीजिए आज कटिहार में मेडिकल कॉलेज अस्पताल नहीं होता तो कटिहार में बीमारी के कारण क्या हाल होता। #जागोजनताजागो
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