आपन माटी आपन लोग

आपन माटी आपन लोग जय बिहार। जय जय बिहार। ।

"​अब जाति नहीं, विकास और व्यवस्था परिवर्तन की बारी!"​बिहार का दुर्भाग्य है कि मुख्यमंत्री रोजगार, शिक्षा और विकास की बात...
31/05/2026

"​अब जाति नहीं, विकास और व्यवस्था परिवर्तन की बारी!"
​बिहार का दुर्भाग्य है कि मुख्यमंत्री रोजगार, शिक्षा और विकास की बात करने के बजाय समाज को जाति और रंग के आधार पर बांटने की राजनीति कर रहे हैं।
​लेकिन सच कहें तो...
इसमें उनकी कोई गलती नहीं है।
जब तक हमने इसी आधार पर वोट दिया, उन्हें लगा कि जनता को यही चाहिए। वो जानते थे कि बिहार की जनता असली मुद्दों पर नहीं, बल्कि जाति के नाम पर एकजुट होती है। इसलिए किसानों की बेहतर आय, युवाओं की नौकरी और व्यापारियों के अवसर जैसे असली मुद्दे हमेशा पीछे छूटते चले गए।
​लेकिन अब बहुत हुआ!
यह गलतफहमी बहुत जल्द दूर होने वाली है।
​बिहार का युवा अब जाग चुका है। अब बिहार की राजनीति जाति के संकीर्ण दायरों से निकलकर विकास और रोजगार के ठोस धरातल पर होगी।
​और इस ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत कहीं और से नहीं, बल्कि बांकीपुर (Bankipur) विधानसभा से होने जा रही है!
​बांकीपुर के जागरूक नागरिक और युवा यह अच्छी तरह जानते हैं कि यह आने वाला चुनाव सिर्फ किसी नेता को चुनने का माध्यम नहीं है, बल्कि बिहार में एक संपूर्ण व्यवस्था परिवर्तन हेतु एक सुनहरा और ऐतिहासिक मौका है।
​आइए, बांकीपुर से बदलाव का ऐसा शंखनाद करें जिसकी गूंज पूरे बिहार में सुनाई दे!
​ #बांकीपुर_विधानसभा #व्यवस्था_परिवर्तन #बिहार_विकास

रंगों का त्योहार, खुशियों की बौछार! 🌈✨​"निकलें हैं गलियों में गुलाल लेकर,आया है होली का त्योहार खुशियों की सौगात लेकर!ईश...
04/03/2026

रंगों का त्योहार, खुशियों की बौछार! 🌈✨
​"निकलें हैं गलियों में गुलाल लेकर,
आया है होली का त्योहार खुशियों की सौगात लेकर!
ईश्वर करे आपके जीवन का हर पन्ना प्यार, सुख और समृद्धि के रंगों से भर जाए।"
​आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ! 🎨🙏

22/01/2026

'दे देते सिर्फ 5 ग्राम रख लेते धरती तमाम' हम इसी पाँच ग्राम से दिखा देते बिहार मे क्या सब सम्भव है ..

21/01/2026

🚩 आत्म-मंथन की आवश्यकता: धर्म या राजनीति? 🚩

​क्या हमने अपनी सोचने-समझने की शक्ति राजनीतिक दलों के 'IT Cells' को गिरवी रख दी है?

आज समाज एक ऐसे दोराहे पर खड़ा है जहाँ वो साक्षात हरिहर द्वारा स्थापित सनातन परंपराओं से ऊपर अपने राजनीतिक आकाओं को रखने लगा है।

​⚠️ विचारणीय प्रश्न:
​शंकराचार्य का अपमान क्यों?

जब पूज्य शंकराचार्य जी शास्त्र सम्मत मर्यादाओं की बात करते हैं, तो क्या हमारा विवेक इतना मर चुका है कि हम उन्हीं के अस्तित्व और प्रमाण पर प्रश्न उठाने लगते हैं?

क्या राजनेताओं के चरणों में बैठकर हम अपने धर्मगुरुओं की अवहेलना करना सीख गए हैं?

​गौ-वंश की रक्षा कब?
पूरा देश देख रहा है कि किस तरह गौ-वंश की दुर्दशा हो रही है।
क्या हमारी भक्ति केवल नारों तक सीमित है?
अपने नेताओं से यह पूछने का साहस कब जुटाएंगे कि इस पवित्र धरा पर गौ-माता की चित्कार कब रुकेगी और बूचड़खानों पर ताला कब लगेगा?
​मानसिक गुलामी से मुक्ति:
नेताओं के पीछे आंख बंद करके चलने वालों, याद रखो—सरकारें आती-जाती रहेंगी, लेकिन अगर एक बार सनातन की मर्यादाएं और परंपराएं खंडित हो गईं, तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी क्षमा नहीं करेंगी।
​धर्मो रक्षति रक्षितः।
(जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है।)
​जागिए! इससे पहले कि बहुत देर हो जाए। अपनी निष्ठा नेताओं के प्रति नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति और धर्म के प्रति अटूट रखें।

"मैथिली" जी, 'मिथिला' क आवाज केँ नहि दबाउ!****************************************​आइ हमरा लोकनिक प्रिय न्यूज चैनल 'मिथि...
28/12/2025

"मैथिली" जी, 'मिथिला' क आवाज केँ नहि दबाउ!
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​आइ हमरा लोकनिक प्रिय न्यूज चैनल 'मिथिला मिरर' क प्रसारण ठप भ' गेल अछि।

कारण- मैथिली ठाकुर जी क टीम द्वारा एकटा पुरान वीडियो पर देल गेल 'कॉपीराइट स्ट्राइक'।
​हम मैथिली ठाकुर जी सँ पूछय चाहैत छी- की एकटा पुरान वीडियो क गलतीक सजा एतेक पैघ होयबाक चाही जे मिथिलाक सबसँ सशक्त आवाज हेरा जाय? ललित झा आ मिथिला मिरर ओहि समय सँ बाढ़ि, सुखाड़ि और एयरपोर्टक लेल लरि रहल अछि, जखन हमरा लोकनिक बात सुनय वाला कोनो चैनल नहि छल।

​निवेदन:
हे मिथिलाक बेटी! अहाँक कंठ मे सरस्वती छथि, अहाँ सँ उदारताक उम्मीद अछि।
अहाँ 'मान' छी त' मिथिला मिरर हमरा लोकनिक 'जुबान' थिक।
कृपा क' क' अपन 'स्ट्राइक' वापस ली आ मिथिला मिरर केँ पुनः बहाल होयबाक रस्ता दिअ। मिथिला केँ 'गायिका' आ 'पत्रकार' दुनूक बड्ड जरूरत अछि।

कुलदीप सेंगर को मिली जमानत, फिर भी जेल से बाहर नहीं आएंगे 'माननीय'—क्या है पूरा सच?---‐---------------------------------...
28/12/2025

कुलदीप सेंगर को मिली जमानत, फिर भी जेल से बाहर नहीं आएंगे 'माननीय'—क्या है पूरा सच?
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उन्नाव रेप केस में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने रेप केस में उनकी सजा को सस्पेंड करते हुए जमानत दे दी है।

​लेकिन यहाँ एक बड़ा पेंच है:
जमानत मिलने के बावजूद सेंगर जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे। वजह है—'पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत' का दूसरा मामला। इस केस में उन्हें 10 साल की सजा मिली हुई है, जिसमें उन्हें कोई राहत नहीं मिली है। इसलिए, तकनीकी रूप से 'बेल' मिलने के बाद भी ठिकाना 'तिहाड़ जेल' ही रहेगा।

​राजनीतिक जश्न और बयानबाजी:
हैरानी की बात यह है कि कोर्ट के इस फैसले पर सियासी गलियारों में खुशी मनाई जा रही है। पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने सेंगर का खुलकर बचाव किया और कहा कि "सेंगर के साथ गलत हुआ था।" वहीं, स्थानीय समर्थक इसे 'जीत' मानकर खुशियाँ मना रहे हैं।

​CBI का रुख:
CBI ने इस जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। एजेंसी का कहना है कि सेंगर का बाहर आना या राहत मिलना पीड़िता के लिए खतरा हो सकता है।

​सवाल:
एक तरफ संगीन आरोपों में सजा काट रहा दोषी, दूसरी तरफ नेताओं का समर्थन। क्या यह 'न्याय' की जीत है या 'सिस्टम' का रसूख?

18/12/2025

गरीब बिहार, महंगा पेट्रोल —
यह सुशासन नहीं, शोषण है।
बिहार आज देश के सबसे गरीब राज्यों में गिना जाता है।
लेकिन इसी गरीब बिहार में पेट्रोल की कीमत ₹105.23 प्रति लीटर है —
यानि देश के सबसे महंगे राज्यों में से एक।
अब ज़रा तुलना करिए 👇
▪️ दिल्ली – ₹94.77
▪️ उत्तर प्रदेश – ₹94.69
▪️ गुजरात – ₹94.70
▪️ हिमाचल प्रदेश – ₹95.34
▪️ हरियाणा – ₹95.94
▪️ झारखंड – ₹97.86
ये सभी राज्य बिहार से आर्थिक रूप से बेहतर हैं।
यहाँ औसत आमदनी ज़्यादा है, रोज़गार ज़्यादा है, सुविधाएँ ज़्यादा हैं।
फिर भी पेट्रोल सस्ता।
और बिहार?
जहाँ युवा रोज़गार के लिए पलायन करता है,
जहाँ मज़दूर 300 रुपये रोज़ कमाता है,
जहाँ किसान डीज़ल-पेट्रोल के भरोसे खेती करता है,
जहाँ न अस्पताल ढंग के हैं, न स्कूल —
वहीं पेट्रोल देश में सबसे महंगा।
❓ यह क्या है?
यह शासन है या शोषण?
जब सरकारों के पास जवाब नहीं होते,
तो वे “सुशासन” का नारा उछाल देती हैं।
लेकिन अगर सच में सुशासन है, तो बिहार में—
▪️ सबसे कम प्रति व्यक्ति आय क्यों?
▪️ सबसे ज़्यादा पलायन क्यों?
▪️ स्वास्थ्य और शिक्षा सबसे कमजोर क्यों?
▪️ और अब यह नया तमगा —
गरीब राज्य, महंगा पेट्रोल क्यों?
सच यह है कि बिहार सरकार ने पेट्रोल पर जानबूझकर ऊँचा VAT लगाकर
गरीब जनता से वसूली को ही नीति बना लिया है।
इसका बोझ किस पर पड़ता है?
👉 ऑटो चालक
👉 डिलीवरी बॉय
👉 छोटे दुकानदार
👉 किसान
सरकार कहती है — “पैसे से विकास करेंगे।”
लेकिन सवाल सीधा है:
15–20 साल से टैक्स वसूली चल रही है, विकास कहाँ है?
अगर पेट्रोल टैक्स से बिहार समृद्ध होता,
तो आज बिहार हर सूचकांक में सबसे आगे होता —
सबसे पीछे नहीं।
यह आर्थिक मजबूरी नहीं,
यह राजनीतिक बेरुख़ी और प्रशासनिक निकम्मापन है।
बिहार की जनता से हर बार कहा जाता है —
“थोड़ा सह लीजिए।”
लेकिन सत्ता कभी नहीं बताती — कब तक?
अब समय आ गया है कि बिहार पूछे 👇
जब दिल्ली, यूपी और गुजरात में पेट्रोल सस्ता हो सकता है,
तो बिहार में क्यों नहीं?
जब तक यह सवाल नहीं पूछा जाएगा,
तब तक गरीब को महंगाई
और सत्ता को बहाने मिलते रहेंगे।
गरीबी भाग्य नहीं है,
गरीबी थोप दी जाती है।

एक सवाल… और एक आईना...अमेरिका में एक भूखा बच्चारोटी और चीज़ चुराने पर अदालत पहुँचा।जज ने सज़ा नहीं दी—समाज को कटघरे में ...
17/12/2025

एक सवाल… और एक आईना...

अमेरिका में एक भूखा बच्चा
रोटी और चीज़ चुराने पर अदालत पहुँचा।
जज ने सज़ा नहीं दी—
समाज को कटघरे में खड़ा कर दिया।
कहा—
अगर एक बच्चा भूख के कारण चोरी करे,
तो अपराधी वह नहीं…
हम सब हैं।

अब यही सवाल बिहार से है—
यहाँ जब
कोई बच्चा कूड़े से खाना उठाता है,
कोई माँ भूख में दम तोड़ देती है,
कोई पिता कर्ज़ और बेबसी में टूट जाता है—
तो क्या वो अपराधी हैं?
या हमारी व्यवस्था?
इंसाफ़ वही है
जहाँ कानून से पहले
करुणा ज़िंदा हो।
अगर गरीब मजबूर है,
तो दोष उसका नहीं—
हमारे समाज और सिस्टम का है।



कभी स्विट्ज़रलैंड, कभी सिंगापुर —और आज सिंगरौली सिर्फ़ “अडानी बनाम आदिवासी” बनकर रह गया है।कहानी शुरू होती है 1962 में,ज...
15/12/2025

कभी स्विट्ज़रलैंड, कभी सिंगापुर —
और आज सिंगरौली सिर्फ़ “अडानी बनाम आदिवासी” बनकर रह गया है।
कहानी शुरू होती है 1962 में,
जब सिंगरौली की रिहांद नदी पर बड़ा बाँध बना।
तब देश के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू ने
यहाँ के आदिवासियों से वादा किया था —
“हम सिंगरौली को स्विट्ज़रलैंड बनाएँगे।”
साल 2008 में,
तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने
उसी सिंगरौली को सिंगापुर बनाने का सपना दिखाया।
लेकिन हकीकत यह है कि
सिंगरौली न स्विट्ज़रलैंड बना,
न सिंगापुर।
जो इलाका कभी घने जंगलों से ढका था,
आज वह कोयला खदानों के मलबे का
डंप यार्ड बन चुका है।
प्रदूषण के मामले में
आज सिंगरौली दिल्ली को टक्कर दे रहा है।
कोयला बनाम जंगल
आज सिंगरौली में
करीब 1400 हेक्टेयर वन भूमि
और लगभग 6 लाख पेड़ों पर संकट है।
8 से 10 आदिवासी गाँव
उजड़ने के डर में जी रहे हैं।
2019 में केंद्र सरकार ने
सिंगरौली के घरौली क्षेत्र का
कोल ब्लॉक अडानी पावर लिमिटेड को सौंप दिया।
तभी से यह इलाका
विकास बनाम विनाश नहीं,
बल्कि साफ़ तौर पर
अडानी बनाम आदिवासी बन गया है।
जंगल काटो, वादा भूलो
इस क्षेत्र में
करीब 160 प्रजातियों के पेड़ हैं,
जिनकी संख्या लगभग 6 लाख है।
इनमें से 3 लाख पेड़ पहले ही काटे जा चुके हैं।
सवाल सीधा है —
क्या विकास का मतलब जंगल उजाड़ना है?
क्या आदिवासी हमेशा कुर्बानी देने के लिए ही पैदा हुए हैं?
छत्तीसगढ़ हो या मध्यप्रदेश,
और अब झारखंड —
हर जगह जंगल
और आदिवासी
उद्योगपतियों के आगे
कुचले जा रहे हैं।
केंद्र सरकार के दबाव में
अब झारखंड सरकार भी
अडानी समूह के आगे
नतमस्तक होती दिख रही है,
जहाँ बड़े भूभाग पर
कोल ब्लॉक देने की तैयारी है।
अंत में
सिंगरौली को
न स्विट्ज़रलैंड चाहिए,
न सिंगापुर।
उसे चाहिए —
जंगल, जल, ज़मीन और इंसान की हिफ़ाज़त।
क्योंकि
विकास अगर जंगल और आदिवासी मिटाकर हो,
तो वह विकास नहीं — विनाश है।

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